Her Silent Secret - 4 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 4

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Her Silent Secret - 4

चौहान हवेली – रात

पूरा घर सो चुका था। हर तरफ सन्नाटा फैला हुआ था। संपूर्णा अपने कमरे में बेड से पीठ टिकाकर बैठी थी। उसकी गोद में विवान गहरी नींद में सोया हुआ था। विवान की छोटी-छोटी उंगलियाँ अभी भी अपनी माँ की साड़ी को पकड़े हुई थीं… जैसे नींद में भी उसे छोड़ना नहीं चाहता हो। संपूर्णा उसके बालों में उंगलियाँ फेर रही थी… लेकिन आज उसकी आँखों में वो सुकून नहीं था।

उसका दिल जाने क्यों बहुत बेचैन था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई अनहोनी धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही हो। वो बार-बार कमरे के दरवाज़े की तरफ देख रही थी।

संपूर्णा (धीरे खुद से) बोली - 
पता नहीं क्यों… आज मन इतना घबरा क्यों रहा है…

वो विवान को और कसकर अपने सीने से लगा लेती है। तभी कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुलता है। विराट अंदर आता है। उसके हाथ में लैपटॉप था, शायद अभी-अभी काम खत्म करके आया था। जैसे ही उसकी नज़र संपूर्णा पर पड़ती है… वो रुक जाता है। संपूर्णा की आँखों में साफ बेचैनी दिख रही थी।नविराट धीरे से उसके पास आकर बैठ जाता है।

विराट (नरम आवाज़ में) बोला - 
क्या हुआ?

संपूर्णा हल्की मुस्कान लाने की कोशिश करती है।

संपूर्णा बोली - 
कुछ नहीं… बस ऐसे ही।

विराट उसकी बात तुरंत समझ जाता है। विराट धीरे से विवान को उसकी गोद से लेकर साइड में आराम से लिटा देता है। फिर वापस आकर संपूर्णा का हाथ पकड़ लेता है।

विराट बोला - 
तुम मुझसे कुछ छुपा नहीं सकती।

संपूर्णा की आँखें हल्की नम हो जाती हैं।

संपूर्णा बोली - 
पता नहीं क्यों विराट जी… ऐसा लग रहा है जैसे सब ठीक होते हुए भी कुछ ठीक नहीं है।

विराट उसके माथे को धीरे से चूमता है।

विराट बोला - 
जब तक मैं हूँ… तुम्हें कुछ नहीं होगा।

संपूर्णा उसकी तरफ देखती है।

संपूर्णा बोली - 
और अगर कभी आपको कुछ हो गया तो?

विराट हल्का सा मुस्कुराता है।

विराट बोला - 
तो तुम मुझे बचा लेना… जैसे हमेशा बचाती आई हो।

संपूर्णा धीरे से विराट के कंधे पर सिर रख देती है। कमरे में कुछ पल खामोशी रहती है। बस बाहर चलती हवा की आवाज़… और विवान की धीमी साँसें। लेकिन उस खामोशी में भी संपूर्णा का दिल शांत नहीं हो पा रहा था।
उसे लग रहा था जैसे कोई अंधेरा… बहुत धीरे-धीरे उनकी खुशहाल दुनिया की तरफ बढ़ रहा हो।

खिड़की के बाहर घना अंधेरा फैला हुआ है। और उसी अंधेरे में… कहीं दूर किसी की परछाईं खड़ी दिखाई देती है। चेहरा अब भी नहीं दिखता।

सिर्फ एक ठंडी आवाज़ सुनाई देती है—
उसका का हिसाब… शुरू होने वाला है।

चौहान हवेली – सुबह

संपूर्णा आईने के सामने खड़ी तैयार हो रही थी। उसने आज हल्के आसमानी रंग की साड़ी पहनी थी। खुले बाल… हल्की बिंदी…माथे पर सिंदूर....और चेहरे पर वही शांत खूबसूरती। वो सच में बहुत प्यारी लग रही थी। तभी छोटे कदम दौड़ते हुए उसकी तरफ आए।
विवान सीधे आकर उससे लिपट गया।

विवान (मासूमियत से) बोला - 
मम्मा… प्लीज़ आज मत जाओ ना।

संपूर्णा हल्के से झुककर उसे गोद में उठा लेती है।

संपूर्णा बोली - 
बेटा… जाना तो पड़ेगा ना। आपको भी तो स्कूल जाना है। पापा छोड़ देंगे आपको।

विराट थोड़ी दूरी पर खड़ा दोनों को देख रहा था। लेकिन आज उसके चेहरे पर वो सामान्य सुकून नहीं था। दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। आज उसे एक जरूरी काम की वजह से ऑफिस देर से जाना था…और शायद यही बात उसे अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी। विवान फिर काजल के पास स्कूल के लिए तैयार होने चला गया। कमरे में अब सिर्फ विराट और संपूर्णा रह गए। विराट धीरे-धीरे उसके पास आया। कुछ पल बस उसे देखता रहा।

विराट (धीरे, भारी आवाज़ में) बोला - 
पता नहीं क्यों… आज तुम्हें छोड़ने का मन नहीं कर रहा।

संपूर्णा हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन उसकी आँखों में भी वही अनजाना डर था।

संपूर्णा बोली - 
Meeting है… don’t worry. 9 बजे तक आ जाऊंगी।

फिर उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।

संपूर्णा बोली - 
और आप अपना ख्याल रखना।

विराट अचानक थोड़ा और करीब आ गया। उसने बिना कुछ कहे संपूर्णा के चेहरे को अपने हाथों में थाम लिया। अगले ही पल…
उसने उसके होंठों को गहराई से चूम लिया।जैसे वो उस पल को रोक लेना चाहता हो। जैसे उसके अंदर कोई डर लगातार बढ़ रहा हो। संपूर्णा भी उस एहसास में खो गई। कुछ पल के लिए…दुनिया जैसे थम गई। सिर्फ उनकी साँसें…उनकी धड़कनें…और एक-दूसरे का साथ।

कुछ देर बाद दोनों धीरे-धीरे अलग हुए। संपूर्णा की सांसें अभी भी थोड़ी तेज थीं। विराट उसकी आँखों में देख रहा था।

विराट (धीरे से) बोला - 
जल्दी आना…

संपूर्णा हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाती है।

संपूर्णा बोली - 
हम्म…

वो मुड़कर जाने लगती है। लेकिन जाते-जाते एक बार फिर पलटकर विराट को देखती है। और ना जाने क्यों…आज दोनों की आँखों में एक अजीब सा डर था। संपूर्णा की कार हवेली से बाहर निकल जाती है। विराट वहीं खड़ा उसे जाता हुआ देखता रहता है…जब तक कार उसकी आँखों से ओझल नहीं हो जाती।

उसी समय—
दूर सड़क के दूसरी तरफ…एक काली हुडी पहने कोई शख्स खड़ा था। उसकी नजरें सिर्फ संपूर्णा की जाती हुई कार पर थीं। चेहरा अब भी नहीं दिखता।

सिर्फ हवा में एक धीमी आवाज़ गूंजती है—
हर कहानी का अंत… अचानक होता है।