Impossible Ishq - Episode 18 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 18

Featured Books
Categories
Share

नामुमकिन इश्क - एपिसोड 18

एपिसोड 18– पहली परीक्षा

अगली सुबह...

सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का माहौल हमेशा की तरह व्यस्त था। सुबह के आठ बजते ही डॉक्टर, नर्स और सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स अपनी-अपनी यूनिट में पहुँच चुके थे।

अर्जुन सबसे पहले वार्ड में पहुँचा। उसने अपनी टीम के सभी सदस्यों की तरफ़ देखा।

"गुड मॉर्निंग, एवरीवन।"

सभी ने एक साथ जवाब दिया,

"गुड मॉर्निंग।"

अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,

"आज से हम सबकी असली परीक्षा शुरू होने वाली है। जो भी काम मिलेगा, उसे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से करेंगे। अगर किसी को कोई परेशानी हो तो छिपाना मत, तुरंत बताना।"

सबने सिर हिलाकर हामी भर दी।

तभी डॉ. मीरा सक्सेना वहाँ पहुँचीं।

"आज मैं देखना चाहती हूँ कि आप लोगों ने पहले दिन क्या सीखा है।"

उन्होंने सामने खड़े छात्रों को देखा।

"आज हर टीम को एक-एक मरीज की पूरी केस हिस्ट्री तैयार करनी होगी। मरीज की बीमारी, रिपोर्ट, दवाइयाँ और आगे का ट्रीटमेंट प्लान... सब कुछ। शाम तक जिसकी रिपोर्ट सबसे अच्छी होगी, उसकी टीम को अतिरिक्त अंक मिलेंगे।"

यह सुनते ही सभी गंभीर हो गए।

रोहन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

"आज मौका अच्छा है..."

डॉ. मीरा ने मरीजों की फाइलें बाँटनी शुरू कीं।

अर्जुन की टीम को एक बुज़ुर्ग मरीज मिला, जिन्हें कई दिनों से साँस लेने में तकलीफ़ थी।

अर्जुन ने फाइल खोली और बोला,

"रीवा, तुम पुराने मेडिकल रिकॉर्ड देखो।"

"जी।"

"गौरव, ब्लड रिपोर्ट चेक करो।"

"ओके।"

फिर उसने आयत की तरफ़ देखा।

"आयत, आप मेरे साथ आइए। मरीज से हिस्ट्री लेनी है।"

"जी।"

दोनों मरीज के पास पहुँचे।

अर्जुन ने प्यार से पूछा,

"नमस्ते दादाजी, आज कैसा महसूस हो रहा है?"

बुज़ुर्ग मुस्कुराए।

"अब पहले से ठीक हूँ बेटा।"

आयत ध्यान से उनकी बातें लिखने लगी।

अर्जुन बीच-बीच में उसे समझाता जा रहा था,

"मरीज जो भी बताए, उसे ध्यान से सुनो। कई बार बीमारी रिपोर्ट से नहीं, मरीज की बातों से समझ आती है।"

आयत ने मुस्कुराकर कहा,

"अब समझ आ रहा है कि डॉक्टर बनने के लिए सिर्फ़ किताबें काफी नहीं होतीं।"

अर्जुन हल्का-सा मुस्कुरा दिया।

"बिल्कुल।"

उधर दूसरी तरफ़ रोहन यह सब देख रहा था।

उसकी आँखों में फिर वही जलन थी।

समर धीरे से बोला,

"यार, ये दोनों तो हर दिन और अच्छे दोस्त बनते जा रहे हैं।"

रोहन ने धीमी आवाज़ में कहा,

"दोस्ती जितनी मज़बूत होगी... टूटेगी भी उतनी ही ज़ोर से।"

समर ने पूछा,

"अब क्या करेगा?"

रोहन ने सामने रखी दवाइयों की ट्रॉली की तरफ़ देखा।

"घबराना मत... इस बार किसी मरीज को नुकसान नहीं होगा। लेकिन अर्जुन की टीम ज़रूर फँसेगी।"

उसने मौका देखकर अर्जुन की टीम की रिपोर्ट फाइल उठा ली और उसमें एक खाली पन्ना बीच में रख दिया, जबकि असली टेस्ट रिपोर्ट दूसरी फाइल के नीचे सरका दी।

कुछ देर बाद...

डॉ. मीरा सभी टीमों की रिपोर्ट देखने लगीं।

जब अर्जुन की टीम की बारी आई तो एक ज़रूरी रिपोर्ट गायब थी।

डॉ. मीरा ने भौंहें सिकोड़ लीं।

"मिस्टर अर्जुन... आपकी रिपोर्ट अधूरी क्यों है?"

पूरी टीम एक-दूसरे का चेहरा देखने लगी।

आयत घबरा गई।

"मैम... अभी तो रिपोर्ट यहीं थी।"

डॉ. मीरा ने सख़्त आवाज़ में कहा,

"हॉस्पिटल में 'अभी थी' से काम नहीं चलता।"

अर्जुन ने शांत स्वर में कहा,

"मैम, अगर अनुमति दें तो मैं दो मिनट में पूरी फाइल फिर से देखना चाहता हूँ।"

"ठीक है।"

अर्जुन ने बिना घबराए फाइल के हर पन्ने को ध्यान से पलटना शुरू किया।

उसे अचानक महसूस हुआ कि पन्नों का क्रम बदला हुआ है।

उसने दूसरी फाइल उठाई।

वहीं बीच में वह टेस्ट रिपोर्ट रखी हुई थी।

उसने रिपोर्ट निकालकर डॉ. मीरा को दी।

"मैम, रिपोर्ट यहाँ रख दी गई थी।"

डॉ. मीरा ने रिपोर्ट देखी और बोलीं,

"गुड ऑब्ज़र्वेशन। लगता है किसी से फाइलें बदल गई थीं।"

मामला वहीं शांत हो गया।

लेकिन अर्जुन की नज़र एक पल के लिए रोहन पर गई।

रोहन तुरंत दूसरी तरफ़ देखने लगा।

अर्जुन के मन में अब शक लगभग यक़ीन में बदल चुका था।

"ये दूसरी बार है..."

"कोई लगातार हमारी टीम को फँसाने की कोशिश कर रहा है।"

शाम को हॉस्पिटल से निकलते समय आयत अर्जुन के साथ चल रही थी।

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर आयत ने धीरे से पूछा,

"आपको भी लगता है... ये सब जानबूझकर हो रहा है?"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"हाँ।"

"तो आपने किसी का नाम क्यों नहीं लिया?"

अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।

"बिना सबूत किसी पर आरोप लगाना सही नहीं होता।"

आयत उसकी बात सुनकर प्रभावित हो गई।

"इसीलिए... सब आपकी इज़्ज़त करते हैं।"

अर्जुन मुस्कुराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।

उसी समय दूर खड़ा रोहन दोनों को साथ जाते हुए देख रहा था।

उसने मन ही मन कहा,

"अब अगली चाल ऐसी होगी... जिसमें सबूत भी तुम्हारे खिलाफ़ होंगे, अर्जुन वशिष्ठ।"

उसकी आँखों में एक खतरनाक मुस्कान थी।

उसे विश्वास था कि अगली बार उसकी साज़िश ज़रूर काम करेगी...

लेकिन उसे यह नहीं पता था कि अर्जुन भी अब हर कदम सोच-समझकर रखने लगा है।