dreams are very important in Hindi Fiction Stories by miss k books and stories PDF | कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 7

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 7

आगे के भाग में आपने पढ़ा कि दृष्टि के पति ने अपने माता-पिता को मनाने का दृष्टि को कह तो दिया पर कहीं न कहीं दिपक को भी पता ही था कि उसके माता-पिता कभी भी नहीं मानेंगे दृष्टि को परीक्षा दिलाने के लिए । 

बहुत सोचने के बाद भी कोई रास्ता ही नहीं मिल रहा था। पर साथ ही दोनों ही परीक्षा के तैयारी तो कर ही रहे थे।
अब जल्द ही परीक्षा का दिन भी आने वाला था तो दिपक ने सोचा कि क्यों न दृष्टि को उसके साथ ही ले जाए पर उसके लिए भी घर में सबको मनाना था । इसलिए उसने दृष्टि को अपना काम करवाने के लिए अपने माता-पिता से बात की जो की उनका मन तो बिल्कुल भी नहीं था पर १० - १५ दिन तक ध्यान रखने के लिए कोई तो चाहिए ही था। इसलिए सब मान गए ।
दुसरे ही दिन उनको दिल्ली के लिए निकल ना था तो वे दोनों सबेरे जल्दी ही जाने के तैयार हो गए।
दो - तीन दिन की मुसाफरी के बाद वे परीक्षा वाली जगह पर पहुंच गए और पास ही एक होटल में चेक-इन कर लिया था। अब भी परीक्षा में १० दिन बाकी थे पर इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी अभी भी पूरे दिन पढ रहे थे जेसे की उन्हें किसी बात की कोई फ़िक्र ही नहीं है बस परीक्षा में पास होना है ।
जेसे जेसे परीक्षा के दिन नजदीक आ रहे थे वेसे वेसे वो और शिदद्त से पढ़ाई कर रहे थे। 
आखिर वो दिन आ ही गया , वे दोनों खुश तो थे पर थोडी चिंता भी थी । वे दोनों सबेरे को जल्दी उठ गए । भगवान की पूजा करके परीक्षा के जगह पर पहुंच गए ।
पुरे तीन घंटे के बाद उन दोनों की परीक्षा पुरी हो गई।
दोनों बाहर आए तो उनके चहरे खिले हुए थे जेसे की उन्हें पता हो कि वो पास होने ही वाले थे।
होटल वापिस आ गए और अब घर जाने का समय आ गया था। 
बहुत लंबी मुसाफिरी के बाद घर पे आ चुके थे। अभी तक उन दोनों ने घर में नहीं बताया है कि दृष्टि ने भी परीक्षा दी है।
दुसरी तरफ कजरी भी इसी इन्तज़ार में थी कि कब उसकी बेटी आए और उसे इस नर्क से आजाद करवाए । उसके जीवन में अब कोई आस बची ही नहीं थी । जिंदा भी इसलिए थी कि उसे इस मतलबी लोगों के बीच अपनी बेटी को खुश देखना था । बस इसी की राह में जिंदगी काट रही हैं।
अब तक परीक्षा के बाद काफी दिन बित चुके थे ‌। अब तो दृष्टि और दिपक भी एक दूसरे को अच्छे से समझ ने लगे हैं। उन दोनों का रिश्ता अब दोस्ती से बहुत आगे निकल गया था। अब वो अपने माता-पिता के सामने दृष्टि की तरफदारी करता । किसी को उसे परेशान नहीं करने देता।पर अभी भी उन्हें एक बात की चिंता तो थी ही की परिणाम कैसा आएगा।
क्या होगा परीक्षा का परिणाम ? क्या दोनों परिक्षा में उत्तीर्ण हो पाएंगे ? क्या कजरी की जिंदगी में कोई सुधार आएगा ?