You are my last prayer in Hindi Classic Stories by Toufeek Ahmad books and stories PDF | तुम मेरी आख़िरी दुआ

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तुम मेरी आख़िरी दुआ

✍️ लेखिका: Zeenat Taufeeq
सुबह के आठ बजे थे। सूरज की हल्की सुनहरी किरणें शहर की ऊँची इमारतों के बीच से निकलकर सड़कों पर बिखर रही थीं। हवा में हल्की-सी ठंडक थी, जैसे रात ने जाते-जाते अपनी आख़िरी साँसें इस सुबह को सौंप दी हों। सड़क पर लोगों की भीड़ थी। हर कोई अपनी मंज़िल तक जल्दी पहुँचने की कोशिश में था।
उसी भीड़ के बीच एक लड़की खड़ी थी, जिसके चेहरे की मुस्कान सुबह की रोशनी से भी ज़्यादा चमक रही थी।
उसका नाम था महक।
महक की आदत थी कि वह हर छोटी-सी बात में खुशी ढूँढ़ लेती थी। किसी बच्चे को हँसते देख ले तो खुद भी मुस्कुरा देती, किसी बूढ़े को सड़क पार कराना हो तो बिना सोचे मदद कर देती। उसकी दोस्त अक्सर कहती थीं कि महक के दिल में शायद नफ़रत नाम की कोई चीज़ ही नहीं है।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी मुस्कान की एक नई वजह थी।
बस स्टॉप के एक कोने में खड़ा एक लड़का।
वह रोज़ ठीक आठ बजे आता, एक ही जगह खड़ा होता, हाथ में किताब लिए चुपचाप पढ़ता रहता और किसी से नज़र तक नहीं मिलाता।
उसका नाम था अयान।
अयान की दुनिया बहुत छोटी थी। किताबें, पढ़ाई और उसका परिवार। भीड़ में रहकर भी वह हमेशा अकेला दिखाई देता था। वह कम बोलता था, लेकिन उसकी आँखों में एक गहराई थी, जैसे उसने अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा ज़िंदगी देख ली हो।
महक ने उसे पहली बार देखा तो बस एक अनजान लड़का लगा। दूसरी बार देखा तो लगा कि यह हमेशा इतना चुप क्यों रहता है। तीसरी बार देखा तो उसकी उत्सुकता बढ़ गई। और अब हाल यह था कि वह रोज़ बस स्टॉप पहुँचकर सबसे पहले अयान को ढूँढ़ती थी।
"आज भी वही किताब..." महक ने धीरे से खुद से कहा और मुस्कुरा दी।
अयान ने शायद उसकी आवाज़ नहीं सुनी। वह पूरी तरह अपनी किताब में खोया हुआ था।
महक ने अपनी दोस्त सान्या से कहा, "देखना, एक दिन मैं इसे खुलकर हँसाऊँगी।"
सान्या हँस पड़ी।
"पहले इसे तुमसे बात तो करने दो।"
महक ने आत्मविश्वास से कहा, "वो भी होगा।"
इतने में बस आ गई। लोग जल्दी-जल्दी चढ़ने लगे। धक्का-मुक्की के बीच महक का बैग उसके कंधे से फिसलकर नीचे गिर गया। बैग खुल गया और उसकी किताबें, नोट्स और एक छोटी-सी डायरी सड़क पर बिखर गई।
कुछ लोग बिना रुके आगे निकल गए।
महक झुककर सामान समेटने लगी, तभी किसी ने उसके सामने गिरी डायरी उठाकर उसकी ओर बढ़ा दी।
उसने ऊपर देखा।
सामने अयान था।
उसने बिना कुछ कहे सारी किताबें उठाईं, उन्हें साफ़ किया और बैग में रख दिया।
महक कुछ पल तक उसे देखती रह गई। उसकी आँखों में न कोई दिखावा था, न कोई एहसान जताने का भाव।
"थैंक यू..." महक ने मुस्कुराते हुए कहा।
अयान ने बस हल्का-सा सिर हिलाया।
महक ने हिम्मत करके पूछा, "आपका नाम?"
कुछ पल की ख़ामोशी के बाद उसके होंठ हिले।
"अयान।"
बस इतना कहकर वह बस में चढ़ गया।
महक के चेहरे पर अनायास मुस्कान फैल गई।
"आख़िर बोल तो लिया..."
वह भी बस में चढ़ गई। उसे नहीं पता था कि यह छोटी-सी मुलाक़ात उसकी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी की शुरुआत बनने वाली है।बस चल पड़ी। खिड़की के बाहर पेड़, दुकानें और सड़कें पीछे छूटती जा रही थीं, लेकिन महक का ध्यान कहीं और था। वह बार-बार चोरी-चोरी अयान को देख रही थी।
अयान हमेशा की तरह खिड़की वाली सीट पर बैठा था। उसके हाथ में वही किताब थी, लेकिन इस बार वह पढ़ नहीं रहा था। उसकी नज़र बाहर थी, जैसे किसी गहरी सोच में खोया हुआ हो।
महक ने मन ही मन मुस्कुराते हुए सोचा, "इतना शांत इंसान मैंने पहले कभी नहीं देखा। आखिर इसके मन में चलता क्या होगा?"
बस एक झटके से रुकी। एक बुज़ुर्ग महिला चढ़ीं, लेकिन सारी सीटें भरी हुई थीं। किसी ने अपनी सीट नहीं छोड़ी।
अयान तुरंत खड़ा हो गया।
"आप यहाँ बैठ जाइए," उसने धीमी आवाज़ में कहा।
महिला ने मुस्कुराकर उसे दुआ दी, "बेटा, अल्लाह तुम्हें हमेशा खुश रखे।"
अयान ने बस हल्की-सी मुस्कान दी और पकड़ने वाली रॉड के सहारे खड़ा हो गया।
महक यह सब देख रही थी। उसके दिल में अयान के लिए सम्मान और बढ़ गया।
"जो लड़का बिना दिखावे के लोगों की मदद करता है... वह बुरा इंसान हो ही नहीं सकता," उसने सोचा।
कॉलेज का स्टॉप आया तो दोनों बस से उतर गए। महक जानबूझकर थोड़ा धीरे चलने लगी ताकि अयान उसके साथ हो जाए।
"सुनिए..." उसने धीरे से कहा।
अयान रुक गया।
"आज आपने मेरी मदद की... उसके लिए एक बार फिर धन्यवाद।"
"कोई बात नहीं," अयान ने संक्षिप्त जवाब दिया।
महक हँस पड़ी।
"आप हर सवाल का इतना छोटा जवाब क्यों देते हैं?"
अयान कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, "मुझे... ज़्यादा बातें करना नहीं आता।"
यह सुनकर महक की मुस्कान और गहरी हो गई।
"तो फिर आज से सीख लीजिए।"
अयान ने पहली बार उसकी आँखों में देखा। उसकी आँखों में शरारत थी, लेकिन कोई बनावट नहीं थी।
"मैं महक हूँ।"
"मुझे पता है," अयान के मुँह से अनजाने में निकल गया।
महक एकदम रुक गई।
"आपको मेरा नाम कैसे पता?"
अयान थोड़ा घबरा गया।
"उस दिन... आपकी दोस्त ने आपको नाम से बुलाया था।"
महक खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"मतलब आप मेरी बातें सुनते भी हैं!"
अयान को समझ नहीं आया कि क्या कहे। उसके कान हल्के लाल हो गए। उसने नज़रें झुका लीं।
महक ने पहली बार किसी शर्मीले लड़के को इस तरह घबराते देखा था।
उसे वह पल बहुत प्यारा लगा।
"ठीक है, मिस्टर शर्मीले... आज के लिए इतना काफी है। कल मिलते हैं।"
इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए अपनी क्लास की ओर चली गई।
अयान कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा। उसके चेहरे पर अनजाने में हल्की-सी मुस्कान आ गई।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि महक से दो मिनट की बात ने उसके दिल को इतना हल्का क्यों कर दिया।
दूर जाती हुई महक ने एक बार पीछे मुड़कर देखा।
अयान अभी भी वहीं खड़ा था।
दोनों की नज़रें मिलीं।
महक ने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए कहा, "बाय!"
अयान ने झिझकते हुए पहली बार किसी लड़की को हाथ हिलाकर जवाब दिया।
महक के चेहरे पर खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।
उसे ऐसा लगा जैसे उसने कोई बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली हो।
और शायद उसी पल, दोनों के दिलों में एक ऐसा एहसास जन्म ले चुका था, जिसका नाम अभी किसी ने नहीं लिया था... लेकिन किस्मत उसे धीरे-धीरे मोहब्बत में बदलने वाली थी।साल बीतते गए।
वक्त के साथ अयान और महक की दोस्ती गहरे प्यार में बदल गई। जो लड़का कभी किसी से खुलकर बात नहीं करता था, वह अब अपनी हर खुशी और हर परेशानी सबसे पहले महक से साझा करता था। और जो लड़की हर समय मुस्कुराती रहती थी, उसकी मुस्कान की सबसे बड़ी वजह अयान बन चुका था।
दोनों परिवारों को भी धीरे-धीरे उनके रिश्ते के बारे में पता चल गया। शुरुआत में कुछ सवाल हुए, कुछ नाराज़गियाँ भी आईं, लेकिन जब सबने देखा कि दोनों एक-दूसरे की कितनी इज़्ज़त करते हैं और कितना सच्चा प्यार करते हैं, तो आखिरकार सब मान गए।
एक सादगी भरे लेकिन बेहद खूबसूरत निकाह में अयान और महक हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए।
निकाह के बाद जब महक पहली बार अयान के घर आई, तो उसने मुस्कुराकर कहा,
"आज से यह घर नहीं... हमारी दुनिया है।"
अयान ने पहली बार बिना झिझक उसके हाथ अपने हाथों में लिए और कहा,
"और तुम... मेरी दुनिया की सबसे खूबसूरत दुआ हो।"
महक की आँखें खुशी से भर आईं।
समय के साथ दोनों ने हर खुशी और हर मुश्किल साथ मिलकर झेली। जब भी कोई परेशानी आई, उन्होंने एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ा।
कुछ वर्षों बाद उनके घर एक प्यारी-सी बेटी ने जन्म लिया। अयान ने उसे गोद में उठाकर कहा,
"यह हमारी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत निशानी है।"
महक मुस्कुराकर बोली,
"और इसकी मुस्कान बिल्कुल तुम्हारी जैसी है।"
अयान हँस पड़ा।
जिस लड़के की मुस्कान कभी बहुत कम दिखाई देती थी, आज वही अपनी बेटी के साथ हर पल खिलखिलाकर हँसता था।
एक शाम दोनों अपने घर की छत पर बैठे डूबते सूरज को देख रहे थे।
महक ने अयान के कंधे पर सिर रखकर धीरे से पूछा,
"अगर मुझे फिर से ज़िंदगी मिले... तो क्या तुम फिर मेरे बनोगे?"
अयान ने बिना एक पल गंवाए जवाब दिया,
"हर जन्म में... हर दुआ में... हर साँस में... मैं सिर्फ़ तुम्हें ही चुनूँगा।"
महक की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।
अयान ने उन्हें अपने हाथों से पोंछते हुए कहा,
"जब मैंने पहली बार तुम्हें बस स्टॉप पर मुस्कुराते देखा था, तब नहीं जानता था कि एक दिन वही मुस्कान मेरी पूरी ज़िंदगी बन जाएगी।"
महक ने मुस्कुराकर कहा,
"और मुझे उस दिन ही महसूस हो गया था कि यह शर्मीला लड़का एक दिन मेरा सबसे बड़ा सहारा बनेगा।"
दोनों ने एक-दूसरे का हाथ कसकर थाम लिया।
सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था, लेकिन उनकी मोहब्बत की रोशनी पहले से भी ज़्यादा चमक रही थी।
कभी-कभी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत कहानियाँ शोर से नहीं, बल्कि एक शर्मीले लड़के की ख़ामोशी और एक मुस्कुराती लड़की की सच्ची मोहब्बत से शुरू होती हैं।
समाप्त।