# एपिसोड 3: बर्बादी का पहला सौदाबारिश अभी भी तेज थी। सनी और लकी को पीछे छोड़कर आर्यन जब रिया के पास पहुँचा, तो वह एक बड़ी छतरी के नीचे खड़ी चुपचाप उसी का इंतजार कर रही थी। आर्यन सिर से पांव तक भीग चुका था, लेकिन उसके बदन की ठंडक दिल तक नहीं पहुँच रही थी। उसे इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि उसके जिगरी यार उससे नाराज होकर गए हैं; उसकी आँखें तो बस रिया की उस हल्की सी मुस्कान पर टिकी थीं।"तुम्हारे दोस्त तुम्हें मेरे खिलाफ भड़का रहे थे ना?" रिया ने बहुत ही मासूमियत और नजाकत से अपने नाजुक हाथों से आर्यन के भीगे हुए चेहरे से पानी पोंछते हुए पूछा।आर्यन ने बिना एक पल गंवाए उसका हाथ अपनी हथेलियों में कसकर थाम लिया, "मुझे इस दुनिया की कोई परवाह नहीं है रिया। तुम कहो तो मैं इसी पल सांस लेना छोड़ दूं, बस तुम मुझसे कभी दूर मत जाना।"रिया की आँखों में एक अजीब सी चमक कौंध गई। उसने अपना सिर धीरे से आर्यन के सीने पर टिका दिया और बहुत ही धीमी, मीठी और बहकाने वाली आवाज में बोली, "मैं तुमसे दूर कैसे जा सकती हूँ आर्यन? मैं तो हमेशा हमारे भविष्य के बारे में ही सोचती रहती हूँ। इस छोटे से शहर फाजिल्का में रखा ही क्या है? तुम कब तक यहाँ इस छोटी-मोटी नौकरी के चक्कर में धक्के खाते रहोगे?"आर्यन ने थोड़ा चौंककर और हैरानी से पूछा, "तो फिर हम क्या करेंगे रिया?"वहाँ खड़े होकर रिया ने अपना वो शातिर जाल फेंका, जो सीधे आर्यन के दिल में उतर गया। "आर्यन, मेरा एक बहुत बड़ा सपना है... सिर्फ मेरे लिए नहीं, हमारे लिए। मैं अमेरिका जाना चाहती हूँ। वहाँ दिन-रात मेहनत करके पहले खुद सेट होना चाहती हूँ। बस एक बार मैं वहाँ जम जाऊँ, फिर मैं तुम्हें भी तुरंत वहीं बुला लूँगी। सोचो आर्यन, तब हमारी लाइफ कितनी सेट हो जाएगी! वहाँ हमारा अपना एक छोटा सा घर होगा, जहाँ हमें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं होगा। बस तुम होगे, और मैं होऊँगी... हमेशा-हमेशा के लिए।"बातें करते-करते अचानक रिया की आँखों से झूठे आंसू छलक आए। उसने रोने जैसी आवाज में कहा, "लेकिन... लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं आर्यन। लगता है हमारा एक साथ जीने-मरने का यह सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा। हम कभी एक नहीं हो पाएंगे..." और वह फफककर रोने का नाटक करने लगी।रिया के उन नकली आंसुओं और उस 'सुनहरे भविष्य' के झूठे झांसे ने आर्यन के सोचने-समझने की बची-खुची ताकत को भी पूरी तरह खत्म कर दिया। वह नासमझ लड़का अपनी ही तबाही और बर्बादी का सौदा करने के लिए तैयार बैठा था। उसने रिया को अपनी बाँहों में कसकर भींच लिया और कांपती हुई आवाज में बोला, "तुम रोना बंद करो रिया। अमेरिका सिर्फ तुम जाओगी। यह सपना हम दोनों का है और इसे पूरा करके मैं दिखाऊंगा। चाहे इसके लिए मुझे खुद को ही क्यों ना बेचना पड़े।"...उसी रात जब आर्यन भारी कदमों से अपने घर पहुँचा, तो आँगन का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था।घर के बीचों-बीच रखी पुरानी चारपाई पर उसके पिता, विक्रम, सुकून से बैठे थे। उनके चेहरे पर उम्र की गहरी लकीरें थीं, लेकिन आँखों में आने वाले कल का एक अलग ही संतोष और चमक थी। पास ही माँ सावित्री कुर्सियों पर बैठी थीं और छोटी बहन नेहा मुसकुराते हुए घर के सदस्यों के लिए गरमा-गरम चाय लेकर आ रही थी।विक्रम ने चाय का कप अपने हाथ में लेते हुए प्यार से कहा, "सावित्री, आज हमारी नेहा के लिए एक बहुत ही बेहतरीन रिश्ता आया है।" उनकी आवाज में एक पिता का गर्व साफ झलक रहा था। "लड़के वाले बहुत ही शरीफ और सुलझे हुए हैं। बस अब भगवान का शुक्र है कि हमारे पास वो चार किले की पुश्तैनी जमीन है। उसे बेचकर मैं अपनी बेटी को राजा बेटी की तरह विदा करूँगा, और जो पैसे बचेंगे, उससे हमारे आर्यन का भी कोई ढंग का काम सेट करवा दूंगा। इसके बाद मैं इस दुनिया से चैन की नींद मर सकूंगा।"घर के पिछले हिस्से की दीवार की ओट में खड़ा आर्यन अपने पिता की एक-एक बात अपने कान से सुन रहा था। एक तरफ उसकी अपनी बहन की डोली और उसके बूढ़े बाप के खून-पसीने की वो अमूल्य पुश्तैनी जमीन थी... और दूसरी तरफ रिया का दिखाया हुआ वो अमेरिका का झूठा और कागजी सपना था। कोई भी समझदार इंसान अपने परिवार और अपनों को चुनता, लेकिन इश्क में पूरी तरह अंधा हो चुका इंसान सही और गलत की हर तमीज भूल जाता है। आर्यन ने अपने पिता की इज्जत की पगड़ी और अपनी बहन की खुशियों को रिया के उन दो कौड़ी के झूठे आंसुओं पर हमेशा के लिए कुर्बान करने का पक्का फैसला कर लिया।अगले दिन, जब दोपहर के वक्त घर बिल्कुल सूना था और कोई नहीं था, तो आर्यन ने दबे पाँव आगे बढ़कर अपनी कांपती उंगलियों से घर की पुरानी अलमारी खोली। उसने अंदर से विक्रम के वो जमीन के तमाम असली कागजात बाहर निकाल लिए, जिन्हें उसके पिता ने अपनी जान से भी ज्यादा हिफाजत से संभाल कर रखा था। आर्यन के दिल का एक कोना चीख रहा था कि वह क्या कर रहा है, उसे अच्छी तरह पता था कि ये सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं, उसके बाप की इज्जत और पसीना हैं। पर उस वक्त उन कागजों पर उसे अपनी आँखों से कुछ नजर नहीं आ रहा था, सिवाय रिया के उस मकर और मुस्कुराते हुए चेहरे के।वह सीधे शहर भागा और कौड़ियों के भाव में वो पूरी जमीन चुपचाप बेच आया।कुछ ही दिनों बाद, जब आर्यन ने रुपयों से भरा हुआ भारी बैग लाकर सीधे रिया के हाथों में थमाया, तो रिया की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसने खुशी के मारे झट से आर्यन के गालों पर किस किया और बोली, "आर्यन, तुमने आज सचमुच मेरी पूरी जिंदगी बना दी। मैं अमेरिका पहुँचते ही फौरन तुम्हारे लिए वीजा और कागजात भेजूंगी। मैं तुम्हारा वहीं इंतजार करूंगी आर्यन, पक्का!"और फिर, देखते ही देखते वो दिन भी आ गया जब रिया फ्लाइट पकड़कर अमेरिका उड़ गई। एयरपोर्ट की उस भारी भीड़ के बीच आर्यन बिल्कुल अकेला खड़ा था। उस नासमझ को लग रहा था कि उसने मोहब्बत की इस जंग में दुनिया की सबसे बड़ी फतह हासिल कर ली है। वह अपने खाली हाथों और बंजर हो चुकी उम्मीदों के साथ घर लौट रहा था, लेकिन उसका दिल इस झूठे भ्रम से भरा हुआ था कि उसकी रिया एक दिन उसे भी अपनी उस सपनों की दुनिया में बुला लेगी।उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि फाजिल्का के उस छोटे से, हँसते-खेलते घर में वह अपने ही हाथों से एक ऐसा भयंकर तूफान भेज चुका है, जो उसकी माँ का सुहाग, उसकी बहन की डोली की खुशियां और उसका खुद का दिमागी संतुलन—सब कुछ एक झटके में हमेशा के लिए तबाह करने वाला था।