# एपिसोड 4: चिता की आग और उजड़ा घररिया को अमेरिका गए हुए पूरा एक साल बीत चुका था। फाजिल्का की तंग गलियों में आर्यन अब किसी ज़िंदा लाश की तरह भटकता रहता था। उधर से आने वाली प्यार भरी बातों का सिलसिला अब पूरी तरह थम चुका था, और उसकी जगह सिर्फ पैसों की लगातार माँग ने ले ली थी। कभी वीज़ा की फीस के नाम पर, कभी वहाँ के मकान के किराए के नाम पर, तो कभी खुद को पूरी तरह सेटल करने के बहाने—रिया ने सीधे-सादे आर्यन को अपना एटीएम मशीन बना रखा था।आर्यन इस कदर प्यार के नशे में अंधा हो चुका था कि उसने गाँव के रिश्तेदारों, जान-पहचान वालों और स्थानीय साहूकारों से झूठ बोल-बोल कर भारी कर्ज लेना शुरू कर दिया था। कभी वह लोगों से कहता कि "बापू की तबीयत खराब है और दवाइयों का खर्च है," तो कभी बहाना बनाता कि "बहन की शादी के लिए कुछ पैसों की कमी पड़ रही है।" पूरा गाँव आर्यन की पुरानी शराफत और उसके परिवार की इज्जत पर आँख मूँदकर यकीन करता था, लेकिन किसी को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि वह सारा खून-पसीने का पैसा सात समंदर पार बैठी उस लड़की की झोली में जा रहा है, जो वहाँ अपनी ही दुनिया में मस्त थी।उधर, घर में नेहा की शादी की तारीख पास आ रही थी और सिर्फ कुछ ही दिन बचे थे। पूरे घर में शादियों की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं, लेकिन आर्यन के भीतर हर गुजरते पल के साथ जैसे कोई मौत हो रही थी। उसने हज़ारों बार रिया के नंबर पर फोन मिलाया था, लेकिन अब रिया ने उसका फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया था। कभी रिंग जाते-जाते फोन कट जाता, तो कभी घंटों घंटी बजती रहती पर उधर से कोई जवाब नहीं मिलता था।अंदर ही अंदर घुटते हुए और बेचैनी से पागल हो रहे आर्यन के पास जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो वह सीधा अपने पुराने जिगरी यार सनी और लकी के पास पहुँचा। उसकी आँखें बुरी तरह लाल थीं और हाथ थर-थर कांप रहे थे।"भाई... वो मेरा फोन नहीं उठा रही है," आर्यन की आवाज भर्रा गई। "हफ़्तों बीत गए हैं, उसने एक छोटा सा मैसेज तक नहीं किया। अब शादी बिल्कुल सिर पर आ गई है, मैं बापू को क्या जवाब दूँगा?"सनी ने उसे गुस्से, बेबसी और तरس भरी निगाहों से देखा। "हमने तुझे पहले ही समझाया था आर्यन, कि वो लड़की तुझे सिर्फ लूट रही है। पर तूने हमारी एक न सुनी। अब भी वक्त है, अपने घर वालों के सामने सारा सच उगल दे, वरना कोई बहुत बड़ा अनर्थ हो जाएगा।"आर्यन के पास अब झूठ छुपाने का कोई रास्ता नहीं बचा था। उस रात जब घर में सन्नाटा पसरा हुआ था, उसने अपनी बची-खुची हिम्मत जुटाई और अपनी माँ सावित्री को धीरे से अपने कमरे में बुलाया। जैसे ही उसने अपनी माँ के पैरों में गिरकर यह सच उगला कि उसने घर की पुश्तैनी ज़मीन बेच दी है और सारा पैसा रिया को भेज चुका है, सावित्री के हाथ से पानी का भरा हुआ गिलास छूटकर सीधे ज़मीन पर बिखर गया।"क्या बक रहा है तू आर्यन?... तूने अपने बापू की इज्जत की पगड़ी बेच दी?" सावित्री दहाड़ें मार-मार कर रोने लगी। उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसने गुस्से में आर्यन को झकझोरा, उसे मारा-पीटा, लेकिन आर्यन अपनी जगह पर किसी पत्थर की मूरत की तरह चुपचाप खड़ा रहा। सावित्री का कलेजा अंदर तक फट रहा था— "जिस ज़मीन को तेरे बापू ने अपने खून-पसीने से सींचा था, उसे तूने उस कुलक्षणी के इशारे पर लुटा दिया? अब हम इस दुनिया में कहाँ मुँह दिखाने लायक बचेंगे? हमारी नेहा की डोली इस घर से कैसे उठेगी?"लेकिन इस घर पर टूटने वाला असली कहर तो अभी बाकी था।महज दो दिन बाद, जब सावित्री इस पहाड़ जैसे बोझ को और अधिक अपने सीने में बर्दाश्त नहीं कर पाई, तो उसने फंदे पर लटकते सच को रोते हुए विक्रम को बता दिया। विक्रम उस वक्त चारपाई पर बैठकर बड़े सुकून से नेहा की शादी के आने वाले मेहमानों के कार्ड पर नाम लिख रहे थे। जैसे ही उन्होंने यह सुना, उनके कांपते हाथों से कलम छूटकर नीचे गिर गई। उन्होंने अपने मुँह से एक सिंगल शब्द तक नहीं निकाला, बस अपना कांपता हुआ हाथ अपने सीने पर रखा और धीरे-धीरे दीवार का सहारा लेकर वहीं फर्श पर बैठ गए।वो सदमा इतना गहरा और जानलेवा था कि उनके दिल और उनकी रूह ने उसी पल हमेशा के लिए जवाब दे दिया। रात के सन्नाटे में उन्हें एक बहुत भयानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा, और अगली सुबह सूरज की रोशनी निकलने से पहले ही विक्रम इस नश्वर दुनिया को हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके थे।पल भर में पूरे घर में कोहराम मच गया, चीख-पुकार मच गई। जिस घर से कुछ दिनों बाद हँसी-खुशी के साथ उनकी बेटी नेहा की डोली उठनी थी, उसी आँगन से आज एक पिता का अर्थी और जनाज़ा उठ रहा था।गमगीन माहौल में जनाज़े के ठीक एक कोने में सनी और लकी खामोश खड़े थे। उनके भीतर का खून खौल रहा था। सनी से ये सब देखा नहीं गया, उसने झट से अपनी जेब से फोन निकाला और एक नए नंबर से रिया के नंबर पर डायल किया। इस बार घंटी बजते ही उधर से रिया ने फोन उठा लिया।"हेलो?" उधर से रिया की बिल्कुल बेपरवाह और ठंडी आवाज सुनाई दी।"रिया, मैं सनी बोल रहा हूँ... आर्यन का दोस्त," सनी की आवाज गुस्से से कांप रही थी। "तुझे जरा भी अंदाजा है? तेरे इन कारनामों और धोखे के चक्कर में आर्यन के पिता इस दुनिया से गुजर गए हैं! उन्हें गहरा सदमा लगा और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई है। आर्यन बिल्कुल पागल हो चुका है, उसका पूरा हँसता-खेलता घर उजड़ गया है। तू अभी के अभी सब कुछ छोड़कर वापस आ जा, कम से कम इस मुश्किल वक्त में तो उसका साथ दे!"उधर फोन पर कुछ पल के लिए गहरी खामोशी छा गई। फिर रिया ने बेहद रूखे और लापरवाह लहजे में कहा— "देखो सनी, मुझे बहुत बुरा लग रहा है और दुख है कि अंकल इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन मैं वहाँ वापस आकर क्या करूँगी? मेरा अपना करियर है, मेरी अपनी लाइफ यहाँ सेट हो चुकी है। मैं किसी भी कीमत पर वापस नहीं आ सकती। और हाँ... आर्यन से साफ-साफ कह देना कि वो अब मुझे बार-बार फोन करके परेशान करना बंद कर दे।"इतना कहकर रिया ने बिना एक सेकंड सोचे धड़ से फोन काट दिया।सनी और लकी दोनों सन्न रह गए, उनके मुँह से आवाज तक नहीं निकली। उधर आर्यन दूर खड़ा अपने पिता की जलती हुई चिता की आग को शून्य की तरह देख रहा था, यह जानते हुए भी कि उसकी नासमझी ने उसकी पूरी दुनिया को हमेशा के लिए जलाकर राख कर दिया है।