Impossible Ishq - Episode 22 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 22

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 22

एपिसोड 22 – एक नई दोस्ती, एक नई चुनौती

सुबह के लगभग नौ बज चुके थे।

पूरी रात की ड्यूटी के बाद सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स हॉस्पिटल के गेस्ट ब्लॉक में आराम कर रहे थे। किसी के हाथ में चाय थी, कोई मोबाइल चला रहा था तो कोई पिछली रात की इमरजेंसी की बातें कर रहा था।

आयत बालकनी में खड़ी सुबह की ठंडी हवा महसूस कर रही थी।

तभी पीछे से एक आवाज़ आई।

"कल रात... तुमने बहुत अच्छा काम किया।"

आयत ने मुड़कर देखा।

सामने अर्जुन खड़ा था।

सफेद कोट के ऊपर हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर हमेशा की तरह सधी हुई थी।

आयत भी मुस्कुरा दी।

"थैंक यू... लेकिन अगर आप मुझे संभालते नहीं, तो शायद मैं घबरा जाती।"

अर्जुन ने सिर हिलाया।

"डॉक्टर डरते नहीं... बस पहली बार घबराते हैं। उसके बाद वही घबराहट उन्हें मजबूत बना देती है।"

आयत उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी।

"आप हर बात इतनी आसानी से कैसे समझा देते हैं?"

अर्जुन हल्का-सा हँसा।

"क्योंकि मेरे पापा हमेशा कहते हैं... जो सीखो, उसे अपने तक मत रखो।"

दोनों की बातचीत अभी चल ही रही थी कि पीछे से रीवा आ गई।

"अरे वाह... सुबह-सुबह मेडिकल क्लास चल रही है और मुझे बुलाया भी नहीं!"

तीनों हँस पड़े।

उधर हॉस्पिटल के कॉन्फ्रेंस हॉल में...

डॉ. मीरा, डॉ. कबीर और दूसरे सीनियर डॉक्टर मीटिंग कर रहे थे।

डॉ. मीरा बोलीं,

"अब तक सभी कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अब समय है उनकी असली परीक्षा का।"

डॉ. कबीर ने पूछा,

"क्या सोच रही हैं आप?"

"हम इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज रखेंगे।"

सभी डॉक्टर सहमत हो गए।

कुछ देर बाद पूरे हॉस्पिटल में घोषणा हुई।

"सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स ध्यान दें। तीन दिन बाद इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज आयोजित किया जाएगा। इसमें लखनऊ, कानपुर और आगरा मेडिकल कॉलेज की टीमें हिस्सा लेंगी। विजेता टीम को 'बेस्ट क्लिनिकल टीम ऑफ द ईयर' का सम्मान मिलेगा।"

घोषणा सुनते ही पूरे हॉस्पिटल में उत्साह फैल गया।

रीवा खुशी से बोली,

"वाह! अब तो मज़ा आएगा।"

गौरव ने अर्जुन की तरफ़ देखकर कहा,

"भाई, इस बार भी जीत हमारी ही होगी।"

अर्जुन मुस्कुराया।

"अभी से जीत की बात मत करो। पहले मेहनत करो।"

दूसरी तरफ...

रोहन कॉरिडोर में खड़ा था।

समर उसके पास आया।

"सुना? अब दूसरे कॉलेज भी हमारे सामने होंगे।"

रोहन मुस्कुराया।

"यही तो चाहता था मैं।"

"मतलब?"

"अगर अर्जुन यहाँ हार गया... तो सिर्फ़ कॉलेज में नहीं, पूरे हॉस्पिटल में उसकी इज़्ज़त कम हो जाएगी।"

समर उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया।

उधर पीडियाट्रिक वार्ड में...

करण कुछ फाइलें लेकर जा रहा था।

तभी सामने से सनाया आई।

दोनों एक-दूसरे के सामने रुक गए।

सनाया ने मुस्कुराकर कहा,

"आज तो टकराए नहीं?"

करण भी हँस पड़ा।

"लगता है आज किस्मत ने छुट्टी ले ली है।"

सनाया हल्का-सा हँसी।

"वैसे... उस दिन बच्चे को जिस तरह तुमने चुप कराया था... अच्छा लगा।"

करण ने हैरानी से उसकी तरफ़ देखा।

"मतलब... अब मैं इतना भी बुरा नहीं हूँ?"

सनाया ने आँखें घुमाईं।

"ज़्यादा खुश मत हो... अभी सिर्फ़ थोड़ा-सा इम्प्रूव हुए हो।"

करण हँस पड़ा।

"चलो... शुरुआत तो हुई।"

दोनों अपनी-अपनी राह चल दिए, लेकिन इस बार उनके चेहरे पर मुस्कान थी।

शाम को...

अर्जुन पूरी टीम को हॉस्पिटल की लाइब्रेरी में लेकर गया।

"दोस्तों, तीन दिन बाद प्रतियोगिता है। हम सब मिलकर तैयारी करेंगे।"

आरिफ बोला,

"मैं मेडिसिन वाला हिस्सा देख लूँगा।"

गौरव ने कहा,

"मैं केस स्टडी तैयार करता हूँ।"

रीवा बोली,

"मैं प्रेज़ेंटेशन संभाल लूँगी।"

आयत मुस्कुराकर बोली,

"और मैं सबकी नोट्स तैयार कर दूँगी।"

अर्जुन ने संतोष से सिर हिलाया।

"यही टीमवर्क हमें सबसे अलग बनाता है।"

दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।

उसने धीरे से कहा,

"जितनी मज़बूत ये टीम दिख रही है... उतना ही मज़ा इसे तोड़ने में आएगा।"

लेकिन इस बार उसकी बात समर को भी अच्छी नहीं लगी।

समर ने पहली बार कहा,

"रोहन... मुकाबला जीतना है तो मेहनत से जीत। हर बात में चाल चलना ठीक नहीं।"

रोहन ने उसकी तरफ़ देखा, लेकिन कुछ बोला नहीं।

उसकी चुप्पी बता रही थी कि उसके मन में अभी भी कोई नई योजना चल रही है।

उधर अर्जुन को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था...

कि आने वाली प्रतियोगिता सिर्फ़ ज्ञान की परीक्षा नहीं होगी।

वह भरोसे, नेतृत्व और रिश्तों की भी परीक्षा बनने वाली थी।

क्रमशः...