Impossible Ishq - Episode 24 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 24

Featured Books
Categories
Share

नामुमकिन इश्क - एपिसोड 24

एपिसोड 24– असली परीक्षा

ऑडिटोरियम में एक बार फिर सन्नाटा छा गया।

सभी टीमें अपनी-अपनी जगह पर बैठ चुकी थीं। अब प्रतियोगिता का दूसरा राउंड शुरू होने वाला था।

स्टेज पर डॉ. राजीव मल्होत्रा आए और मुस्कुराते हुए बोले,

"अब तक आपने अपनी किताबों का ज्ञान दिखाया। लेकिन एक डॉक्टर की असली पहचान सिर्फ़ किताबों से नहीं होती। अब देखते हैं कि मुश्किल परिस्थिति में आपकी सोच कितनी तेज़ है।"

इतना कहकर उन्होंने बड़ी स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया।

स्क्रीन पर एक मेडिकल केस दिखाई दिया।

एक मरीज के लक्षण, रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री दी गई थी।

हर टीम को दस मिनट का समय दिया गया ताकि वे चर्चा करके अपना निष्कर्ष बता सकें।

अर्जुन ने फाइल उठाई और पूरी टीम की तरफ़ देखा।

"सब लोग पहले केस ध्यान से पढ़ो। जल्दीबाज़ी में कोई फैसला नहीं लेंगे।"

सभी अपने-अपने नोट्स देखने लगे।

आयत रिपोर्ट पढ़ते-पढ़ते अचानक बोली,

"अर्जुन... मुझे लगता है मरीज की असली परेशानी रिपोर्ट में नहीं, उसकी पुरानी हिस्ट्री में छिपी है।"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"कौन-सी हिस्ट्री?"

आयत ने फाइल का आख़िरी पन्ना दिखाया।

"देखिए... तीन साल पहले भी यही लक्षण आए थे, लेकिन बाद में दूसरी बीमारी निकली थी। अगर हम सिर्फ़ आज की रिपोर्ट देखकर जवाब देंगे तो गलती हो सकती है।"

अर्जुन कुछ पल चुप रहा।

फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

"गुड ऑब्ज़र्वेशन। यही पॉइंट हमें बाकी टीमों से अलग बनाएगा।"

आयत के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।

रीवा तुरंत बोली,

"तो फिर जवाब तैयार करते हैं।"

उधर दूसरी तरफ़ रोहन अपनी टीम के साथ बैठा था।

वह बार-बार अर्जुन की टीम की तरफ़ देख रहा था।

समर ने धीरे से कहा,

"अपने केस पर ध्यान दो।"

रोहन झुंझलाकर बोला,

"मुझे पता है क्या करना है।"

दस मिनट पूरे हुए।

सबसे पहले आगरा मेडिकल कॉलेज ने अपना जवाब दिया।

फिर कानपुर मेडिकल कॉलेज की टीम स्टेज पर गई।

अयान ने पूरे आत्मविश्वास से अपना विश्लेषण रखा।

हॉल तालियों से गूँज उठा।

अब बारी थी...

लखनऊ मेडिकल कॉलेज की।

अर्जुन स्टेज पर पहुँचा।

उसने माइक पकड़ा।

"हमारी टीम का मानना है कि किसी भी मरीज का इलाज सिर्फ़ उसकी वर्तमान रिपोर्ट देखकर नहीं किया जा सकता। उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।"

फिर उसने आयत की तरफ़ देखा।

"इस केस का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट हमारी टीम की सदस्य आयत ने नोटिस किया।"

पूरे हॉल की नज़र आयत पर चली गई।

आयत थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ी।

उसने शांत आवाज़ में पूरा विश्लेषण समझाया।

डॉक्टर एक-दूसरे की तरफ़ देखकर सिर हिलाने लगे।

प्रेज़ेंटेशन खत्म होते ही ज़ोरदार तालियाँ बज उठीं।

डॉ. मीरा मुस्कुराईं।

"Excellent... यही Clinical Thinking कहलाती है।"

आयत की आँखों में खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।

स्टेज से उतरते समय अर्जुन धीरे से बोला,

"आज तुमने कमाल कर दिया।"

आयत मुस्कुराई।

"अगर आपने भरोसा नहीं किया होता, तो मैं बोल भी नहीं पाती।"

अर्जुन ने पहली बार उसकी तरफ़ देखकर कहा,

"अब खुद पर भरोसा करना सीखो।"

यह सुनकर आयत का दिल अनजानी खुशी से भर गया।

उधर रोहन गुस्से में अपनी मुट्ठियाँ भींच चुका था।

"हर बार... हर बार यही लोग क्यों?"

उसी समय स्कोर बोर्ड अपडेट हुआ—

लखनऊ मेडिकल कॉलेज – 92 अंक

कानपुर मेडिकल कॉलेज – 89 अंक

आगरा मेडिकल कॉलेज – 86 अंक

अब सिर्फ़ अंतिम राउंड बाकी था।

दूसरी तरफ़ हॉस्पिटल के गार्डन में थोड़े समय का ब्रेक दिया गया।

करण पानी की बोतल लेकर खड़ा था।

तभी पीछे से सनाया आई।

"मिस्टर टकराने वाले..."

करण हँस पड़ा।

"आज तो टक्कर नहीं हुई।"

सनाया भी मुस्कुरा दी।

"लगता है अब आदत पड़ गई है तुम्हारी।"

करण ने शरारती अंदाज़ में कहा,

"अच्छी आदत है या बुरी?"

सनाया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

"ये अभी सोच रही हूँ।"

इतना कहकर वह आगे बढ़ गई।

लेकिन इस बार करण के चेहरे पर मुस्कान पहले से कहीं ज़्यादा गहरी थी।

उधर दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।

उसने एक लंबी साँस ली।

"आख़िरी राउंड... यही तय करेगा कि असली विजेता कौन होगा।"

उधर अर्जुन अपनी टीम के बीच खड़ा था।

उसने सबकी तरफ़ देखकर कहा,

"याद रखो... जीत से ज़्यादा ज़रूरी है कि हम अपना बेस्ट दें। अगर हम पूरी ईमानदारी से खेलेंगे, तो परिणाम अपने आप हमारे पक्ष में आएगा।"

सभी ने एक साथ सिर हिलाया।

ऑडिटोरियम में फिर से घंटी बजी।

अब शुरू होने वाला था...

इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज का अंतिम और सबसे कठिन राउंड।

क्रमशः...