The caravan continued to move on - 9 in Hindi Thriller by Neeraj Sharma books and stories PDF | काफला यूँ ही चलता रहा - 9

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काफला यूँ ही चलता रहा - 9

------------3*----- गहरे राज 👎उसी जगह खड़ा था यहां कभी कथलीन ख़डी होती थी... आज मानक ने महसूस किया ---- " किसी को धोखे मे मत रखो। " चलो होता है जवानी के जोश मे, पर होश मत खो दो। प्यार हदबंदी से भी आगे निकल जायेगा, किसने सोचा था... प्यार कया है बहुत मानिक ने सर्च की.... जज्बातो की कदर, पैसे की ललक, खूबसूरती, बातो का गिरना या उठना..... 🌹👎गहराई मे ही संतुष्टि है, गिरना कितनी वार, अक्सर हर कोई बड़ी बड़ी पदवी वाले भी यही करते है.... कयो होता है ऐसा, कयो रिश्ते फिर बन जाते है। जैसे जन्मों के, गिर जाने को ही प्यार, जज्बात कहते है... बाहो के कसाव को कया कहोगे, घुटन, स्वर्ग की अनभूति.... फिर दग़ा कयो देते है धोखा कयो देते है। प्यार की असली थोरी कया है कोई नहीं जानता..... कथलीना ने पथरान की फैमलीय से पंगा ले ही लिया था..... टेक्सी ड्राइवर को कहा था, मिया तुम मेरा साथ दो मै पैसे से संतुष्टि करुँगी तेरी... कितना अजीब इत्तफाक.... उसने कहा था विडो मेरी बहन और कुंवारा हुँ अभी तक.... कथलीना ने कहा था ---" शादी कयो नहीं की, तुमने। " उसका जबाब था ---" बस मन ही नहीं किया... " फिर वो बोली ----" 👎कयो डरते हो, मेरे से अगर मिले सबब तो। " मिया हस पड़ा " मैडम आप मजाक करती हो... आप इतनी नीली आँखो वाली मेरे से मजाक करती है.... चलो अगर नसीब मे हुआ तो जरूर... मेरी पहली चॉइस आप ही हो ---" फिर मिया से बोला ----" कथलीन वादा जरूर निभाएगी --- पर जैसे मै कहु, एक वार जरूर बताना है, युसफ कस्तीनो को दग़ा कया रेता फैलता है ---" मिया ने सिर हिला दिया।👎

                              संबंध आखिर कब किसीके न गुवार गुज़र जाते है। मानिक ने सोचा... फिर मेज पर पड़ी काफ़ी को पीने लगा.... पुलिस प्रोफाइल मे जो ऐड था वो पढ़ कर थोड़ा सोचने लगा... ये एक पहेली नमूना कहानी जो एक करिटीकल मरीज की जैसे रिपोर्ट हो.... " दवात की शाही से लिखने की आख़िरी नौबत एक उलटे अक्षर की तरा दर्पण की हदबंदी थी। "  कितना सब कुछ धीरे धीरे साइलेंट किलर की तरा हुआ था। " कुछ पता नहीं था.. कया गुज़र हो जाएगा। मानिक ने सोचा। जैसे फिर चुप सा हो गया। फिर आगे पढ़ना शुरू किया -----" पथरान की फेमली मे --युसफ कस्त्रीनो का ससुर जिसका बगला था फिर उसकी बेटी जाजिया जो शादी शुदा थी युसफ कथलीनो से, एक अंकल जो गेय था.... वो दस साल से शादी कर रहा था पता आपने से छोटे वीनू से, दोस्ती का नाम था उसके बीच। अब युसफ के दो बच्चे जो जवान हो चुके थे, लड़का राकी कथलीनों और बेटी रिम्पी पांच साल छोटी थी आपने भाई से.... बेटा आपने बाप के करेटर के कारण बेहद नफ़रत करता था..... उसने चार पांच वार नस बाह की काट ली थी। पर बेटी को कुछ शायद नहीं पता था, इसलिए वो प्यार हद से जयादा बाप को करता थी। इत्तफाक समय का चक्र ही तो है... गोली तभी चलती है ज़ब निशाना --- दिमाग़ मे शाक्षत हो नहीं तो गोली गलत भी मार्ग बना लेती है।

मानिक ने सोचा ----" कितनी गंभीर स्तिथि चल रही होंगी।

(चलदा )नीरज शर्मा 144702 -------