Aakhiri Koshish - 1 in Hindi Short Stories by Subhan Khan books and stories PDF | आखिरी कोशिश - 1

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आखिरी कोशिश - 1

🌱 आखिरी कोशिश

Episode 1 — एक छोटा-सा सपना

गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।

आरव बारहवीं कक्षा में पढ़ता था। वह पढ़ाई में अच्छा था और हमेशा अच्छे अंक लाता था। उसके पिता कई साल पहले गुजर चुके थे। उसके बाद उसकी माँ ने ही उसे पाल-पोसकर बड़ा किया था।

आरव की माँ सिलाई का काम करती थी। सुबह से शाम तक वह कपड़े सिलती और उसी कमाई से घर का खर्च चलाती। घर में ज्यादा सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन माँ ने कभी आरव को किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।

आरव अक्सर अपनी माँ को देर रात तक सिलाई करते देखता था।

एक रात उसने पूछा,
“माँ, आप इतना काम करती हो। आपको थकान नहीं होती?”

माँ मुस्कुराई और बोली,
“थकती तो हूँ बेटा, लेकिन तुम्हें पढ़ते हुए देखती हूँ तो सारी थकान दूर हो जाती है।”

आरव कुछ नहीं बोला। उसने उसी रात मन में एक सपना देखा—एक दिन वह इतना सफल बनेगा कि उसकी माँ को कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

अगले दिन स्कूल में शिक्षक ने सभी विद्यार्थियों से पूछा,
“तुम लोग बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?”

किसी ने डॉक्टर बनने की बात कही, किसी ने इंजीनियर और किसी ने पुलिस अधिकारी बनने की।

जब आरव की बारी आई तो वह कुछ पल चुप रहा।

शिक्षक ने पूछा,
“आरव, तुम क्या बनना चाहते हो?”

आरव ने धीरे से कहा,
“सर, मैं ऐसा इंसान बनना चाहता हूँ जिससे मेरी माँ को कभी किसी चीज की चिंता न हो।”

कक्षा में कुछ पल के लिए शांति छा गई।

शिक्षक उसके पास आए और बोले,
“तुम्हारा सपना बहुत अच्छा है। लेकिन याद रखना, सपने केवल देखने से पूरे नहीं होते। उनके लिए रोज मेहनत करनी पड़ती है।”

आरव ने सिर हिलाया और मन ही मन तय किया कि वह अपनी पूरी मेहनत करेगा।

लेकिन घर पहुँचते ही उसकी खुशी चिंता में बदल गई।

उसने देखा कि उसकी माँ सिलाई मशीन के पास बैठी परेशान थी।

“क्या हुआ माँ?”

माँ ने मशीन चलाने की कोशिश करते हुए कहा,
“मशीन खराब हो गई है।”

आरव ने मशीन को ध्यान से देखा।

“इसे ठीक कराने में कितने पैसे लगेंगे?”

माँ ने कुछ नहीं कहा।

आरव समझ गया कि पैसे की समस्या है।

उसने धीरे से पूछा,
“माँ, अगर मैं स्कूल छोड़कर काम करने लगूँ तो?”

माँ ने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“बिल्कुल नहीं!”

“लेकिन माँ, मैं आपकी मदद करना चाहता हूँ।”

माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा।

“बेटा, मेरी परेशानी की वजह से अपना भविष्य मत खराब करना। मैं किसी तरह यह सब संभाल लूँगी, लेकिन तुम्हारी पढ़ाई नहीं रुकेगी।”

उस रात आरव देर तक सो नहीं पाया।

एक तरफ माँ की परेशानी थी और दूसरी तरफ उसका सपना।

सुबह उसने एक फैसला किया।

वह स्कूल नहीं छोड़ेगा।

लेकिन माँ की मदद करने के लिए कोई रास्ता जरूर निकालेगा।

अगले दिन स्कूल के बाद वह गाँव की गलियों में निकल पड़ा। उसके मन में सिर्फ एक सवाल था—

“मैं पढ़ाई के साथ-साथ माँ की मदद कैसे करूँ?”

उसे नहीं पता था कि उसी दिन मिलने वाला एक इंसान उसके इस सवाल का जवाब बनने वाला था।

— Episode 1 समाप्त —
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