Vishu Parivar in Hindi Spiritual Stories by Shivam Kumar Pandey books and stories PDF | विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4



हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । 
किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।

परिचय
भारत एक प्राचीन और महान देश है जहाँ सनातन धर्म की गहरी परंपराएँ हैं। लेकिन समय के साथ-साथ इन परंपराओं को समझने का तरीका बदल गया है। जो कुछ कल्याणकारी था, वह आज पीड़ा और भेदभाव का कारण बन गया है। विष्णु परिवार की यह पुस्तक उसी समस्या से लड़ने के लिए लिखी गई है।

मुख्य उद्देश्य 1: छुआछूत की कुप्रथा को समाप्त करना
भारत में छुआछूत की प्रथा एक गहरी और शर्मनाक सामाजिक समस्या है। इसके तहत समाज के कुछ लोगों को 'अस्पृश्य' माना जाता है। उन्हें छुआ नहीं जा सकता, उनके साथ भोजन नहीं किया जा सकता, और न ही उनके साथ कोई सामाजिक संबंध रखा जा सकता है।
यह प्रथा बेहद क्रूर है। एक बच्चा जब पैदा होता है, तो उसे पता नहीं होता कि समाज उसे छूना भी पसंद नहीं करेगा। उसकी छाया भी 'अपवित्र' मानी जाती है। वह कुएँ से पानी नहीं ले सकता, मंदिर में नहीं जा सकता, स्कूल में बैठते समय उसके पास कोई बैठना पसंद नहीं करता।
यह शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से नष्ट करने वाली प्रथा है। एक बच्चे का आत्मविश्वास टूट जाता है। वह सोचता है - 'मैं कम हूँ, मैं गंदा हूँ, मेरा छुना भी गलत है।' यह हीन भावना उसके पूरे जीवन को जहर देती है।
विष्णु परिवार का पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है - इस छुआछूत की कुप्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना।
जब विष्णु परिवार का विचार सफल हो जाता है, तो कोई किसी को छुआछूत के आधार पर नीचा नहीं मानता। सब विष्णु हैं, सब बराबर हैं। एक नाई, एक चमार, एक ब्राह्मण - सब समान हैं।
 अर्थात्, कोई भी व्यक्ति जन्म से छुआछूत के योग्य नहीं है। पेशा, काम, व्यवहार - ये चीजें महत्वपूर्ण हैं, जन्म नहीं।
विष्णु परिवार यह कहता है - हर व्यक्ति का आत्मा पवित्र है। कोई अपवित्र नहीं है। सब को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

मुख्य उद्देश्य 2: जीव-जंतुओं की बलि को समाप्त करना
भारत में एक और गहरी समस्या है - पशु बलि की प्रथा। कई धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों के नाम पर, निरपराध जानवरों को मारा जाता है। बकरे, मुर्गे - ये सब देवताओं को 'प्रसन्न' करने के लिए बलिदान दिए जाते हैं।
यह अमानवीय है। एक जानवर क्या गलती कर सकता है? वह हमसे बहुत कमजोर है, और हम उसे दर्द देते हैं। उसे भयानक तरीके से मारा जाता है - गला काटा जाता है, पीटा जाता है।
लेकिन असली समस्या यह है कि हम इसे 'धर्म' कहते हैं। हम कहते हैं - 'यह परंपरा है, इसे करना चाहिए।' लड़कों को सिखाया जाता है कि जानवर को मारना सामान्य है। यह उनके मन में करुणा को खत्म कर देता है।
यह बहुत बड़ी समस्या है। जब एक व्यक्ति जानवर को मारने में आनंद लेता है, तो वह इंसान को भी मार सकता है। पशु क्रूरता और मानवीय क्रूरता एक ही सिक्के के दोनों पहलू हैं।
विष्णु परिवार का दूसरा और बहुत महत्वपूर्ण उद्देश्य है - पशु बलि की इस प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना।
विष्णु परिवार का सिद्धांत है - सब जीव हमारे भाई हैं। सनातन धर्म में कहा गया है - 'अहिंसा परमो धर्मः' - अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है। यही सिद्धांत विष्णु परिवार को भी है।
विष्णु परिवार के सभी सदस्य शाकाहारी हैं। कोई भी पशु-बलि नहीं दी जाती। कोई भी जानवर को मारा नहीं जाता।
जब किसी परिवार का एक बच्चा देखता है कि माँ एक जानवर के साथ दया और करुणा से व्यवहार करती है, तो वह भी ऐसे ही होगा। यह संस्कार अगली पीढ़ी को मिलता है।
इस तरह, धीरे-धीरे, पशु बलि की प्रथा समाप्त हो जाती है। एक दिन, जब पूरा भारत विष्णु परिवार में शामिल हो जाता है, तो किसी जानवर को मारा नहीं जाएगा।

ये दोनों उद्देश्य कैसे जुड़े हैं?
छुआछूत और पशु बली - ये दोनों एक ही समस्या के दो पहलू हैं। दोनों में एक कमजोर को दर्द दिया जा रहा है। एक में इंसान को, दूसरे में जानवर को।
जो समाज करुणा और समानता में विश्वास करता है, वह पशु बली को भी समाप्त करेगा और छुआछूत को भी।
विष्णु परिवार दोनों को एक साथ समाप्त करता है। इसलिए यह विचार बहुत शक्तिशाली है।

विष्णु परिवार का मूल सार
विष्णु परिवार एक ऐसा समाज बनाता है जहाँ:
• कोई किसी को छुआछूत के नाम पर नीचा नहीं मानता
• कोई किसी जानवर को दर्द नहीं देता
• सब लोग एक-दूसरे को सम्मान से देखते हैं
• सब जीवों के साथ करुणा और दया का व्यवहार किया जाता है
• शाकाहार, ईमानदारी और नैतिकता को प्रोत्साहन दिया जाता है

निष्कर्ष
विष्णु परिवार की यह पुस्तक केवल विचार-विमर्श के लिए नहीं लिखी गई है। इसे लिखा गया है क्योंकि भारत में छुआछूत और पशु बली जैसी गहरी समस्याएँ हैं।
इसका उद्देश्य है - एक ऐसा समाज बनाना जहाँ सब इंसान बराबर हों, और सब जानवरों को भी सम्मान दिया जाए।
यह एक सपना है। लेकिन हर महान कार्य एक सपने से ही शुरू होता है।
अगर आप इस सपने को साकार करना चाहते हैं, तो विष्णु परिवार में शामिल हों। पहले अपने परिवार से शुरुआत करें। फिर अपने गाँव में। फिर पूरे भारत में।
जब तक पूरा भारत एक ऐसा समाज न बन जाए जहाँ छुआछूत नहीं है, और जहाँ कोई जानवर को नहीं मारा जाता।

                                       पुस्तक समाप्त 
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यह पूरी पुस्तक मैंने,( A.I.) से लिखवाया है ।

लेखक: शिवम विष्णु