Virginity in Hindi Love Stories by Ritu Kumari books and stories PDF | वर्जिनिटी

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वर्जिनिटी

मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। डॉक्टर का साफ़ और कड़ा निर्देश था—"अगले 48 घंटों के भीतर 50 लाख रुपये का इंतज़ाम करना होगा, वरना हम आपके पिता को बचा नहीं पाएंगे।"
माया ने मदद के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के हर संभव दरवाज़े को खटखटाया। हर जगह से उसे सिर्फ़ दिलासा, बहाने और नाकामी ही मिली। जब घड़ी की सुइयां टिक-टिक करके उसके पिता की ज़िंदगी का समय छीन रही थीं, तब शहर के एक गुप्त और बेहद प्रभावशाली 'हाई-सोसाइटी क्लब' के बारे में उसे पता चला। उस काली दुनिया का एक ही नियम था—अपनी अनछुई मासूमियत और मजबूरी को नीलाम करो और बदले में पिता की साँसों का सौदा कर लो। आँखों में बेबसी के आँसू और सीने में पत्थर रखकर माया ने पिता की जान बचाने के लिए इस खौफनाक रास्ते को चुन लिया।
नीलामी की रात, शहर के सबसे आलीशान और रहस्यमयी क्लब के विशाल हॉल में गूंजता सन्नाटा किसी दुःस्वप्न जैसा था। मखमली परदों के पीछे, चेहरे पर बारीक घूँघट गिराए खड़ी माया का शरीर डर के मारे थर-थर कांप रहा था। हॉल में शहर के बड़े-बड़े रईस, अय्याश और नकाबपोश व्यापारी बैठे थे। माया को एक बेसकीमती शो-पीस की तरह स्टेज पर ला खड़ा किया गया।
एंकर की भारी आवाज़ माइक पर गूंजी—"लेडीज एंड जेंटलमैन, आज रात की सबसे नायाब और अनछुई कली... इसकी वर्जिनिटी की शुरुआती बोली 10 लाख रुपये!"
पहली बोली: 15 लाख...
दूसरी बोली: 30 लाख...
तीसरी बोली: 50 लाख...
हर नई बोली के साथ माया का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और उसके गालों पर बेबसी के गरम आँसू ढल रहे थे। उसे लग रहा था कि उसकी आत्मा उसी वक्त मर चुकी है। तभी हॉल के एक अंधेरे कोने से गूंजती हुई एक कड़क, भारी और रोबीली आवाज़ ने पूरे माहौल को थाम दिया:
"1 करोड़ रुपये।"
हॉल में अचानक गहरा सन्नाटा छा गया। किसी की भी उस बोली के आगे एक भी शब्द बोलने की हिम्मत नहीं हुई। यह आवाज़ शहर के सबसे अमीर, सख्त, बेपरवाह और खौफ़नाक बिज़नेसमैन आर्यन मल्होत्रा की थी। आर्यन की गहरी, तीखी और शिकारी नज़रें सीधे स्टेज पर खड़ी कांपती हुई माया पर टिकी थीं। उसने बिना किसी देर के माया की कीमत चुका दी और उसे अपने नाम कर लिया।
नीलामी खत्म होते ही माया को क्लब के सबसे ऊपरी फ्लोर के एक आलीशान, बंद और अंधेरे कमरे में ले जाया गया। कमरे के भारी दरवाज़े के लॉक होने का साउंड सुनते ही माया की साँसें अटक गईं। कुछ ही पलों बाद दरवाज़ा खुला और आर्यन अपनी कोट के बटन खोलते हुए कमरे में दाखिल हुआ।
आर्यन ने धीमे और भारी कदमों से माया की तरफ़ बढ़ना शुरू किया। उसके चेहरे पर एक खतरनाक, जुनूनी और मालिकाना मुस्कान थी। माया डर के मारे पीछे हटने लगी, यहाँ तक कि उसकी पीठ ठंडी दीवार से जा टकराई। आर्यन ने अपनी दोनों बाहें दीवार पर टिकाकर माया को अपने जिस्म के घेरे में पूरी तरह कैद कर लिया।
उसने अपनी गर्म उंगलियों से माया का घूँघट धीरे से उठाया और उसकी गर्दन के पास झुकते हुए मदहोश कर देने वाली आवाज़ में कहा:
"तुम्हें क्या लगा था माया? 1 करोड़ रुपये खर्च करके मैं यहाँ कोई समाज सेवा करने आया हूँ? आज रात से तुम पर, तुम्हारी हर साँस पर और तुम्हारे इस जिस्म पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा हक़ है।"
माया ने रोते हुए उसके सीने पर अपने कांपते हाथ रखे और धकेलने की कोशिश की, लेकिन आर्यन ने उसकी दोनों कलाई थामकर दीवार से सटा दीं और उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुरा दिया—एक ऐसा जुनून जो अब माया को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में लेने वाला था।