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"Mere Paas Maa Hai" Topic: Aakhiri Sahaara
# मेरे पास माँ है
## Episode 1 — आख़िरी सहारा
**[SFX: तेज़ बारिश… दूर कहीं बिजली गरजती है…]**
**Narrator:**
कहते हैं… दुनिया में इंसान कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए,
जब उसकी आँखों से आँसू निकलते हैं…
तो उसे सबसे पहले अपनी माँ ही याद आती है।
लेकिन अगर एक दिन…
उसी माँ पर ऐसा इल्ज़ाम लग जाए,
जिसे सुनकर पूरा शहर उससे नफरत करने लगे…
तो क्या उसका बेटा फिर भी उसका हाथ थामेगा?
यह कहानी है **आरव** की…
एक ऐसे लड़के की, जिसके पास दौलत नहीं थी…
बड़ी पहचान नहीं थी…
लेकिन उसके पास एक चीज़ थी…
**उसकी माँ।**
---
**[SFX: दरवाज़ा खुलने की आवाज़]**
**माँ:**
आरव बेटा… तू आ गया?
**आरव:**
हाँ माँ… लेकिन तुम अभी तक सोई नहीं?
**माँ:**
तेरा इंतज़ार कर रही थी।
**आरव:**
इतनी रात हो गई है माँ… रोज़ मेरा इंतज़ार मत किया करो।
**माँ हल्की मुस्कान के साथ:**
माँ हूँ बेटा…
बच्चे के लौटने तक माँ की आँखों को नींद कहाँ आती है?
**[हल्का emotional music]**
आरव कुछ नहीं बोलता।
वह माँ के पास बैठ जाता है।
उसकी नज़र माँ के पुराने, फटे हुए हाथों पर पड़ती है।
**आरव:**
माँ… एक दिन मैं तुम्हारे ये सारे दुख खत्म कर दूँगा।
**माँ:**
मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।
**आरव:**
तो क्या चाहिए?
**माँ:**
बस… तू हमेशा मेरे साथ रहना।
**आरव:**
वादा।
दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते हैं।
लेकिन…
उन्हें क्या पता था…
कि यह उनकी आख़िरी शांत रात थी।
---
### अगले दिन…
**[SFX: सुबह का माहौल… अचानक दरवाज़े पर ज़ोरदार दस्तक]**
**ठक! ठक! ठक!**
**आरव:**
कौन है?
दरवाज़ा खुलता है।
सामने पुलिस खड़ी थी।
**पुलिस अधिकारी:**
तुम आरव हो?
**आरव:**
जी… लेकिन हुआ क्या?
**पुलिस अधिकारी:**
हमें तुम्हारी माँ से पूछताछ करनी है।
**आरव:**
मेरी माँ से? क्यों?
अधिकारी ने जेब से एक फोटो निकाली।
फोटो देखते ही आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।
**आरव:**
ये… ये तो…
फोटो में एक आदमी की लाश थी।
और उस आदमी के पास…
**आरव की माँ का दुपट्टा पड़ा था।**
**आरव:**
नहीं… ये नहीं हो सकता!
**पुलिस अधिकारी:**
तुम्हारी माँ पर हत्या का शक है।
**आरव:**
मेरी माँ किसी को नहीं मार सकती!
अंदर से माँ की आवाज़ आती है—
**माँ:**
आरव…
आरव पलटकर माँ को देखता है।
माँ की आँखों में डर था।
बहुत गहरा डर।
**आरव:**
माँ… तुम मुझे बताओ…
ये सब क्या है?
माँ कुछ सेकंड तक चुप रहती है।
फिर धीरे से बोलती है—
**माँ:**
बेटा…
**उस रात जो हुआ… उसके बारे में किसी को मत बताना।**
**आरव:**
क्यों?
माँ की आँखों से आँसू निकल पड़ते हैं।
**माँ:**
क्योंकि अगर सच बाहर आ गया…
**तो सिर्फ मेरी नहीं… तेरी जान भी चली जाएगी।**
**[SFX: अचानक तेज़ संगीत / heartbeat]**
आरव स्तब्ध रह जाता है।
लेकिन तभी पुलिस अधिकारी चिल्लाता है—
**पुलिस अधिकारी:**
मैडम… हमें आपके कमरे की तलाशी लेनी होगी।
पुलिस अंदर जाती है।
कुछ सेकंड बाद—
**[SFX: लकड़ी की अलमारी खुलने की आवाज़]**
**पुलिस अधिकारी:**
सर… यहाँ कुछ मिला है!
आरव दौड़कर अंदर जाता है।
अधिकारी के हाथ में एक पुराना **लिफाफा** था।
उस पर सिर्फ चार शब्द लिखे थे—
### **“आरव को कभी मत बताना।”**
आरव की धड़कन रुक-सी जाती है।
वह माँ की तरफ देखता है।
**आरव:**
माँ…
**ये किसने लिखा है?**
माँ काँपने लगती है।
और फिर…
वह ऐसा नाम लेती है जिसे सुनकर आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।
**माँ:**
ये चिट्ठी…
**तेरे पिता ने लिखी थी।**
**[SFX: तेज़ dramatic hit]**
**Narrator:**
लेकिन आरव के पिता को मरे हुए…
**बीस साल हो चुके थे।**
**[MUSIC: suspense rises…]**
**Narrator:**
अगर आरव के पिता मर चुके थे…
तो फिर…
**बीस साल बाद उनकी लिखी हुई चिट्ठी वहाँ कैसे पहुँची?**
**जारी रहेगा…**
### ❤️ Episode 2 में…
आरव चिट्ठी खोलेगा और उसे अपने पिता की मौत से जुड़ा ऐसा सच मिलेगा, जो उसकी पूरी ज़िंदगी बदल देगा।