The First Layer of Doubt in Hindi Love Stories by Ritu kumari books and stories PDF | प्यार का जाल - 4

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प्यार का जाल - 4

उस रहस्यमयी मैसेज के बाद आरव की पूरी रात जागते हुए बीती। कमरे की छत को घूरते हुए उसके दिमाग में तरह-तरह के सवाल आंधी की तरह उठ रहे थे। एक तरफ रिया की वह मासूम, बेबाक और सच्ची लगने वाली मुस्कान थी, तो दूसरी तरफ वह अनजान मैसेज का खौफनाक ताना-बाना। आरव ने खुद को बार-बार समझाने की कोशिश की कि शायद कोई उसे और रिया को अलग करने की साज़िश रच रहा है, लेकिन रिया का फोन लगातार बंद मिलना उसके शक को हवा दे रहा था। नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी और घड़ी की टिक-टिक उसके दिल की धड़कन के साथ तालमेल बिठा रही थी।
अगली सुबह सूरज ढलने से पहले ही आरव रिया के बताए हुए हॉस्टल के पते पर पहुँच गया। यह लखनऊ के एक शांत और पॉश इलाके में स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल था। आरव का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, हाथों में हल्की सी ककंपी थी। उसने हॉस्टल के बड़े लोहे के गेट पर खड़े गार्ड से रिया के बारे में पूछा और नम्रता से अनुरोध किया कि वह उसका नाम हॉस्टल के एंट्री रजिस्टर में चेक करे।
गार्ड ने थोड़ा हिचकिचाते हुए रजिस्टर के धूल भरे पन्नों को पलटा, अपना चश्मा सही किया और आरव की तरफ अजीब नज़रों से देखा। "रिया नाम की कोई लड़की इस हॉस्टल में नहीं रहती, बेटा। आप गलत पते पर आए हैं।"
आरव का रंग फ़ाख्ता हो गया। "यह कैसे हो सकता है? उसने खुद मुझे इसी हॉस्टल का नाम और कमरा नंबर बताया था। क्या आप एक बार फिर से पिछले हफ़्तों के रिकॉर्ड चेक करेंगे?"
गार्ड ने रजिस्टर आरव की तरफ़ घुमा दिया। पिछले तीन महीनों के पूरे रिकॉर्ड में 'रिया' नाम की किसी लड़की का कोई नाम दर्ज नहीं था। आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि रिया ने उससे इतना बड़ा झूठ क्यों बोला। अगर वह इस हॉस्टल में नहीं रहती थी, तो वह हर शाम हॉस्टल जाने का बहाना बनाकर कहाँ गायब हो जाती थी? क्या उसका पूरा अस्तित्व ही एक झूठ पर टिका था?
उसी पल आरव की जेब में रखे फोन पर एक बार फिर वाइब्रेशन हुआ। आरव ने कांपते हाथों से फोन निकाला। यह वही अनजान नंबर था। इस बार मैसेज में कोई टेक्स्ट नहीं, बल्कि एक फोटो अटैच थी।
आरव ने धड़कते दिल के साथ फोटो को डाउनलोड किया और जैसे ही स्क्रीन पर तस्वीर साफ हुई, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। फोटो में रिया लखनऊ के एक बहुत बड़े बिज़नेस टाइकून, विक्रम मेहरा के साथ एक आलीशान फाइव-स्टार होटल की लॉबी में खड़ी थी। विक्रम मेहरा वही इंसान था जिसके खिलाफ आरव की आईटी कंपनी एक बहुत बड़े वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) और मनी लॉन्ड्रिंग के केस की गोपनीय जाँच कर रही थी। फोटो के नीचे एक छोटा मगर बेहद कड़वा कैप्शन लिखा था:
"रिया तुम्हारी मोहब्बत नहीं, विक्रम मेहरा की सबसे शातिर मोहरा है। जो गोपनीय डेटा तुम अपनी कंपनी के सर्वर से हैंडल कर रहे हो, रिया उसी तक पहुँचने के लिए तुम्हारे इतने करीब आई थी।"
यह पढ़ते ही आरव का सिर चक्रा गया। सांसें तेज़ हो गईं और उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे। जिस लड़की को उसने अपने दिल की मल्लिका मान लिया था, क्या वह वाकई उसकी ज़िंदगी, उसके करियर और उसके भरोसे को तबाह करने आई एक पेशेवर जासूस थी? क्या उनकी वह पहली कैफे की मुलाकात, वह बारिश की बूँदें, वह कॉफ़ी और वे मीठी बातें... सब एक पूर्वनिर्धारित स्क्रिप्ट का हिस्सा थे?
आरव रास्ते पर बेसुध सा खड़ा था। उसके चारों तरफ गाड़ियाँ गुज़र रही थीं, लेकिन उसे सिर्फ अपने दिल के टूटने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। उसकी आँखों के सामने प्यार का हसीन सपना एक भयानक और जानलेवा जाल में बदल चुका था।