एपिसोड 1: अनजानी मुलाकात
लखनऊ की बारिश में भीगती वह शाम कुछ ख़ास थी। गोमती नगर के एक छोटे और शांत कैफे में मंद-मंद संगीत बज रहा था और बाहर की बूंदों की आहट कांच की खिड़कियों पर साफ़ सुनाई दे रही थी। हवा में ताज़ा पिसी हुई कॉफ़ी और सोंधी मिट्टी की महक घुली हुई थी।
आरव कैफे के एक कोने वाली मेज़ पर बैठा अपनी डायरी में कुछ लिख रहा था। आरव स्वभाव से बेहद शांत, गंभीर और अपनी ही दुनिया में खोया रहने वाला लड़का था। उसके लिए किताबें और उसकी डायरी ही सबसे अच्छे दोस्त थे। वह अपनी कॉफ़ी का घूँट भरते हुए खिड़की से बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रहा था, तभी कैफे का मुख्य दरवाज़ा खुला और हवा के एक ठंडे झोंके के साथ रिया अंदर आई।
रिया बारिश में थोड़ी भीग चुकी थी। उसकी बिखरी हुई जुल्फ़ों से पानी की छोटी-छोटी बूंदें टपक रही थीं। लाल रंग के कुर्ते में वह किसी ताज़ा खिले फूल जैसी लग रही थी। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक और चेहरे पर एक चंचल मुस्कान थी। कैफे लगभग पूरा भरा हुआ था। रिया ने चारों तरफ नज़र दौड़ाई, लेकिन उसे कोई खाली मेज़ नहीं दिखी। आखिर में उसकी नज़र आरव की मेज़ पर पड़ी, जहाँ एक कुर्सी खाली थी।
रिया मुस्कुराते हुए आरव की मेज़ के पास आई और अपनी धीमी मगर सुरीली आवाज़ में बोली, "सुनिए... क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ? बाकी सारी मेज़ फुल हैं, और बाहर बारिश बहुत तेज़ है।"
आरव ने अपनी डायरी से नज़रें उठाईं। पहली बार रिया को देखते ही आरव के दिल की धड़कन एक पल के लिए थम सी गई। उसकी बेबाक आँखों में ऐसा जादू था कि आरव कुछ क्षणों के लिए बोलना ही भूल गया। फिर खुद को संभालते हुए उसने धीरे से मुस्कुराकर सिर हिलाया और कहा, "हाँ, बिल्कुल... आप बैठ सकती हैं।"
रिया ने अपनी भीगी हुई छतरी एक तरफ रखी और कुर्सी खींचकर बैठ गई। "थैंक यू! मेरा नाम रिया है," उसने गर्मजोशी से अपना हाथ आगे बढ़ाया।
आरव ने हिचकिचाते हुए हाथ मिलाया और कहा, "मैं आरव हूँ।"
उस पहली मुलाकात में दोनों के बीच औपचारिक बातें शुरू हुईं—बारिश, लखनऊ का मौसम और कॉफ़ी का स्वाद। लेकिन बात करते-करते समय का पता ही नहीं चला। रिया जितनी ज़िंदादिल और खुलकर बोलने वाली थी, आरव उतना ही कम बोलने वाला था। फिर भी, रिया की बातों में एक ऐसा खिंचाव था जो आरव को अपनी ओर खींच रहा था। आरव, जो किसी अनजान इंसान से दो मिनट भी बात करने में कतराता था, आज एक अनजान लड़की के साथ घंटों से मुस्कुराकर बातें कर रहा था।
जब बारिश थोड़ी धीमी हुई, तो रिया ने अपनी घड़ी देखी और चौंककर उठी। "अरे बाप रे! बहुत देर हो गई, मुझे निकलना होगा," उसने अपना बैग संभालते हुए कहा। फिर आरव की तरफ देखकर एक हसीन मुस्कान के साथ बोली, "आज की कॉफ़ी और आपकी कंपनी बहुत अच्छी रही, आरव। उम्मीद है फिर मुलाकात होगी!"
आरव बस मुस्कुराकर रह गया। रिया कैफे से बाहर निकल गई, लेकिन आरव की नज़रें काफी देर तक उस दरवाज़े को ही तकती रहीं। वह अपने सीने में एक अजीब सा मीठा दर्द और अनजानी सी खुशी महसूस कर रहा था। उस शाम बारिश तो थम गई थी, लेकिन आरव के दिल में प्यार की एक नई शुरुआत का तूफ़ान दस्तक दे चुका था। उसे यह नहीं मालूम था कि यह अनजानी मुलाकात उसकी जिंदगी को किस मोड़ पर ले जाने वाली है।