fairy in a dream in Hindi Children Stories by Vandna Sharma books and stories PDF | सिया का सपना

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सिया का सपना





सिया का सपना

सिया स्कूल जाने के लिए घर से निकली ही थी कि अचानक जोर की बारिश शुरू हो गई। बादल ऐसे गरज रहे थे जैसे आसमान भी आज स्कूल जाने से मना कर रहा हो। सिया ने सोचा, "वापस घर चली जाऊं?" पर फिर मन में आया, "एक दिन भीग जाने से क्या हो जाएगा।" 

वो छाता लिए बिना ही भागती हुई स्कूल पहुंची। पूरी तरह भीग चुकी थी। गेट पर ही अंग्रेजी वाली मैडम मिल गईं। उन्हें गुस्सा आ गया। 
"घर नहीं बैठ सकती थी? स्कूल आना इतना जरूरी था? जाओ क्लास में बैठो। बारिश रुक जाए तो घर चले जाना। तुम्हें अकेले क्या पढ़ाना है!"

सिया चुपचाप सिर झुकाकर क्लास में चली गई। आज कोई बच्चा नहीं आया था। पूरी क्लास खाली थी। सिया को बुरा तो लगा, पर उसने हार नहीं मानी। 

उसने ब्लैकबोर्ड पर रंग-बिरंगी ड्राइंग बनानी शुरू की। फिर अपनी कॉपी के पन्ने फाड़े, उन पर सुंदर चित्र बनाए, छोटी-छोटी कविताएं लिखीं और पूरी क्लास की दीवारों पर चिपका दीं। खाली क्लास को उसने अपने रंगों से सजा दिया।

थोड़ी देर बाद मैडम क्लास में आईं। खाली और उदास क्लास को इस तरह सजा देखकर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने सिया को गले लगा लिया। 
"शाबाश बेटा! चलो मेरे साथ।"

मैडम सिया को स्कूल की लाइब्रेरी ले गईं। "इनमें से जो किताब अच्छी लगे ले लो और यहीं बैठकर पढ़ो।"
सिया ने दो कहानी की किताबें निकालीं और मासूमियत से पूछा, "मैम, क्या मैं इन्हें घर ले जाकर पढ़ सकती हूं?"
मैडम मुस्कुराईं, "हां बेटा, ले जाओ।"

सिया खुशी-खुशी किताबें बैग में रखकर घर के लिए निकली। रास्ते में उसे एक छोटी सी बिल्ली मिली। ठंड से ठिठुर रही थी, भीग रही थी। सिया का दिल पिघल गया। उसने अपने दुपट्टे से बिल्ली को पोंछा, गोद में उठाया और घर ले आई। 

घर आकर उसने बिल्ली को तौलिए से सुखाया, गर्म कपड़े में लपेटा, उसे दूध पिलाया और खुद भी खाना खाकर सो गई। दिनभर की थकान और बारिश के बाद उसे गहरी नींद आ गई।

नींद में सिया ने एक सपना देखा। 
उसकी वही बिल्ली अब एक सुंदर परी बन गई थी। उसकी पोशाक चमक रही थी। परी ने प्यार से सिया का हाथ पकड़ा और कहा, 
"सिया तुमने मेरी मदद की है। आज मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूं। बोलो, तुम्हें क्या चाहिए?"

सिया का बालमन खुशी से उछल पड़ा। उसने कहा, 
"परी दीदी, मेरे लिए एक बड़ा सा घर बना दो। उसमें एक सुंदर झूला लगा दो। मेरा सारा होमवर्क भी कर दो। और... और मुझे बहुत भूख लगी है, कुछ खाने को भी दे दो।"

परी ने ताली बजाई और एक पल में सब कुछ हो गया। बड़ा सा घर, उसमें झूला, मेज पर गरमा-गरम खाना और सिया की कॉपी में अपने आप होमवर्क लिखा जा रहा था। 

सिया खुशी से चिल्लाई, "मम्मी! मम्मी! देखो हमारा नया घर!"

तभी एक प्यारी सी चपत उसके गाल पर पड़ी। 
"सिया उठो! खाना खा लो। कितना सोएगी?"

सिया हड़बड़ाकर उठी। देखा तो वो अपने पुराने वाले कमरे में थी। ना कोई बड़ा घर था, ना झूला। बिल्ली भी वहां नहीं थी। 

सिया ने मायूस होकर पूछा, "मम्मी, वो बिल्ली मौसी कहां गई?"
मम्मी हंसकर बोलीं, "वो तो थोड़ी देर में ही खाकर चली गई अपने घर।"

सिया ने अपना माथा पकड़ा और धीरे से बोली, "काश... काश ये सपना सच होता।"

मम्मी ने सिया का सिर सहलाया और पूछा क्या सपना देखा हमारी सिया ने।सिया ने सारा किस्सा सुना। दोनों खूब हंसे। 
मम्मी ने कहा, "बेटा, सपने सच करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। तुमने आज क्लास सजाई, किताबें पढ़ीं, एक जानवर की मदद की। तुम आगे बढ़ोगी तो एक दिन तुम्हारा अपना बड़ा घर भी होगा और झूला भी।"

सिया समझ गई। उसने मुस्कुराकर कहा, "ठीक है मम्मी। मैं मेहनत करूंगी।"

उस रात सिया फिर सोई, पर इस बार बिना किसी सपने के। क्योंकि उसे पता था, अपने सपने उसे खुद सच करने हैं।

*सीख:* दया करो, मेहनत करो और सपने देखो। क्योंकि जिंदगी सच में खूबसूरत है। 
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली