This is how Sawan rained - 31 in Hindi Love Stories by Devaki Singh books and stories PDF | ऐसे बरसे सावन - 31

Featured Books
Categories
Share

ऐसे बरसे सावन - 31

उधर हॉल में बैठे बैठे स्वास्तिक बार बार घड़ी को निहारने में लगा रहता है तभी कॉल बेल बजती हैं.....

अभिराम के पिता - अभी, बेटा दरवाज़ा पर देखो कौन आया है l

जैसे ही कॉल बेल बजती हैं वैसे ही स्वास्तिक को लगता है जैसे उसके दिल की घंटी बज गयी हो ....उतावले पन में वह अभिराम से कहता है, "तू बैठ मैं देखता हूं l"

बहुत खुश होते हुए बालों को थोड़ा सेट करते हुए जाकर दरवाज़ा खोलता हैं पर दरवाजे पर आए व्यक्ति को देखकर उसका सारा का सारा मूड ऑफ हो जाता हैं l

अभिराम के पिता - कौन हैं बेटा ???

स्वास्तिक - अंकल जी वो, "फ्रेश एंड फूड" वाला डिलीवरी बॉय आया है l

अभिराम को उसकी बात सुनकर बहुत जोड़ से हँसी आ जाती हैं ....उसके पापा भी वहीं बैठे थे इसलिए वह मोबाइल में देखकर हंसने का नाटक करता हैं और दरवाजे पर डिलीवरी बॉय को देखकर स्वास्तिक का चेहरा पहले ही उतर गया था ऊपर से अभिराम की हंसी जैसे उसे चिढ़ा रही है.... वह चुपचाप डिलीवरी बॉय से समान लेता है और अधीरा को दे देता है l

थोड़ी देर बाद फिर कॉल बजती हैं..... वह सोचता है इस बार पक्का मीरा ही होगी ऐसा सोचकर वह फिर से एक्साइटमेंट में जाकर दरवाज़ा खोलता हैं पर इस बार दूध वाला था उसे देखकर उसका फिर से मुंह बन जाता है l

 दूध वाला कहता है, " भैया जी आज त्योहार हैं न इसलिए दूध लाने में देर हो गई....जरा मैडम जी से कह दीजियेगा नहीं तो वो हमको डांट मारेंगी और दूध की बोतल दे देता है " स्वास्तिक चिढ़ते हुए....ठीक हैं तुम जाओ ....हम उनसे कह देंगे l"

दूध वाला जोर जोर से बोल रहा था तो उसकी बातें अंदर तक सुनाई दे रही थी.....उनकी बातें सुनकर अभिराम की हंसी रुक नहीं रही थी ......उधर स्वस्तिक के मूड के 12 बज गये थे l

थोड़ी देर बाद अभिराम के पिता अपने रूम में चले जाते हैं.....हॉल में अब सिर्फ अभिराम और स्वास्तिक होते हैं......इस बार फिर कॉल बेल बजती हैं .....दोनों एक-दूसरे को देखते हैं l

अभिराम कहता है - तू जाएगा या मैं जाऊँ ?

स्वस्तिक - मैं ही जाऊँगा हर बार पोपट बनना थोड़े ना लिखा होता है इसलिए इस बार भी मैं ही जाऊँगा l हॉल में अभिराम के सिवा कोई नहीं है इसलिए हॉल में लगे आईने में अपनी शक़्ल देखता है, और बालों को संवारते हुए दरवाज़ा खोलता हैं l

दरवाज़ा खोलते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह जाती हैं l सामने साड़ी में मीरा को देखकर उसे देखते ही रह जाता है और इस क़दर खो जाता है कि वह अपनी पलकें झपकाना भी भूल जाता है...... जब थोड़ी देर हो जाती हैं..... तो मीरा धीरे से कहती हैं ऐसे ही दरवाजे पर ही घूरते रहोगे या घर के अन्दर आने के लिए भी कहोगे l

तब तक अभिराम भी आवाज़ दे देता है फिर से कोई डिलीवरी बॉय आ गया क्या अभिराम की आवाज सुनकर वह झेंप जाता है और कहता है नहीं इस बार डिलीवरी गर्ल आई हैं l

डिलीवरी गर्ल सुनकर अभिराम उठकर बाहर की तरफ जाता है और मीरा को देखता है....... . ओह , मीरा तुम आओ अंदर आओ....मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं.... ये पागल न कुछ भी बकता रहता है इसकी बातों पर ध्यान मत देना उसकी बातें सुनकर मीरा मुस्कुराने लगती हैं l

अभिराम स्वास्तिक की तरफ देखते हुए ....जब ये मीरा थी तो तूने इसे इतनी देर से दरवाज़े पर क्यों खड़ा रखा था ....

स्वास्तिक शर्माते हुए - मैं भूल गया था की ये मीरा हैं इसलिए याद करने की कोशिश कर रहा था उसकी बातें सुनकर मीरा भी मुस्कुराने लगती है l

 अंदर आकर मीरा सभी से मिलती हैं और सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देती हैं l

 अधीरा मीरा से कहती हैं - क्या बात हैं दी साड़ी में तो आज आप बहुत ही सुन्दर लग हो 

 
अभिराम की माँ - अरे सुन्दर क्यों नहीं लगेगी ....साड़ी तो भारतीय संस्कृति की पहचान है और वैसे भी साड़ी पहनने पर हर औरत का रूप और भी ज्यादा निखर जाता हैं l

 
स्वास्तिक का मन कर रहा था वह बस मीरा को ही देखता रहे पर यह सबके सामने सम्भव नहीं था इसीलिए सब से नजरें बचाकर बार बार मीरा को देख लेता.... जब जब उनकी नज़रे आपस में टकराती मुस्कुरा कर तुरंत इधर उधर देखने लगता l

 
अधीरा कहतीं हैं चलो भाई हम सब छत पर पतंग उड़ाने चलते हैं ....अब तो मीरा दी भी आ चुकी हैं .....चारों मिलकर छत पर जाते हैं l

 छत पर जाने के बाद अधीरा अभिराम से कहतीं हैं भाई क्यूँ न पतंग उड़ाने का कॉम्पिटिशन किया जाये मैं और मीरा दी....आप और स्वास्तिक भाई ....बहुत मजा आएगा l

 स्वास्तिक - आप दोनों को पतंग भी उड़ाना आता है ?

 अधीरा - तो आप क्या सोचते हो सिर्फ आप को ही पतंग उड़ाना आता है 

 
स्वास्तिक - नहीं,मुझे तो लगता था ल़डकियों को सिर्फ बातें ही बनाना आता है l

 
अधीरा - फिर हो जाये एक एक हाथ हमें सिर्फ बातें बनाना आता है या पतंग उड़ाना अभी साबित कर देते हैं l

 स्वास्तिक - हाँ हाँ क्यों नहीं , अब तो हम भी देखना चाहेंगे आपकी योग्यता l

 सबसे पहले राउन्ड में दोनों ही ग्रुप खूब ऊँचाई तक पतंग ले जाते हैं और इधर अधीरा उन्हें चिढ़ाते हुए देखो हमारी पतंग आप लोगों की पतंग से बहुत ही ज्यादा ऊंची है l

 
स्वास्तिक - अभिराम से क्या कर रहा है यार..... और ऊँची ले जा लगता है आज तू मेरी नाक कटा के ही मानेगा l

 
इधर इन दोनों का ध्यान थोड़ा सा पतंग से हटकर बातों में होता हैं.... उधर मीरा उनकी पतंग काटने ही वालीं होती है तभी अधीरा जोर से कहती हैं, भाई आप लोगों की नाक कटने ही वाली हैं बचा सको तो बचा लो l

 उधर बाजी उनके हाथ से निकल जाती हैं और मीरा उनकी पतंग काट देती हैं अधीरा खुशी से ताली बजाती हैं और नाचने लगती है और चिढ़ाते हुए उन्हें अंगूठा दिखाती हैं l

 स्वास्तिक - तुम्हारी मीरा दी तो लगता हैं काटने में कुछ ज्यादा ही एक्सपर्ट हैं..... फिर अभिराम से चल यार तू दूसरी पतंग ला.... इस बार मैं उडाऊंगा और तू माझा संभालना l