My Dear Professor - Part 39 in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 39

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 39















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अमर की बात सुनकर चारू सुन्न पड जाती है। वो अपलक अमर को देखती रहती है। उहकी समझ मे नही आ रहा था कि हमेशा सबके सामने अनुशासित और सभ्य रहने वाला अमर ऐसा कुछ भी कर सकता है। चारू के मन मे एक.अजीब.सी कशमकश शुरू हो जाती है।

" आपने..उन लोगो को मार दिया । क्यो? " , चारू ने सवाल.किया ।

अमर ने गहरी सांस भरी और कार एक ओर.खडी करदी। 
उसने चारू की तरफ देखा थो पाया की चारू सिकुडी हुई सी सीट से सटी बैठी थी। अमर ने अपना ब्लेजर उतारा और चारू की तरफ बडा दिया। 

चारू ने एक बार अमर को देखा फिर उसके बडे हुए हाथ को । वो हिचकिचाहट से भर उठी। आज भी वो.अमर के सामने उतनी सहज नही थी । एक अजीब से हिचक , शर्म हमेशा उसे अमर के साथ घेरे रहती थी। 

अमर ने गहरी नजरो से चारू को देखा और कुछ सोचकर ना मे सर हिला दिया। वो आगे बडा और उसने चारू के कंधो पर अपना ब्लेजर डाल दिया। इस समय वो चारू से कुछ.इंच की दूरी पर था। चारू पलके झपकाते हुए उसे देखती रही । अमर ने नजरे झुकाकर चारू को डेरा तो उहकि सांस हलक मे ही अटक गई।  चारू से आती कच्ची मिट्टी और पहली बारिश सी खुश्बू अमर को मदहोश कर.रही थी। 

अमर की निगाहे चारू के पूरे चेहरे को टटोल रही थी । जब वो उसकी जॉ ( जबडे ) पर आकर ठहर. गई।.उसके जॉ के नीचे की खाल पर एक तिल था । जो इतना छोटा था की पास से देखने पर भी दिखाई ना दे। अमर का गला सुनने लगा। 
उसने पलके उठाकर चारू को देखा । 

" तुम कुछ पुछ रही थी ? ", अमर ने सवाल किया। उसकी आवाज खराश से भर गई थी। 

चारू हडबडा गई।  वो अमर की निगाहे खुद पर महसूस कर सिहर उठी । 
" जी। आपने उस लोगो को क्यो मारा ? " , स्वंय को.संयत करती चारू ने सवाल किया। 

चारू के सवाल पर अमर के चेहरे के भाव गंभीर हो गए।  

" वो लोग देवदार के पेड काट कर इलिगल मार्केट मे बेंच देते है। मेघराज के जंगल वन्य संपदा से भरे पडे है । और मेघराज और उसके आस पास के जितने मे गांव और शहर.है उनके ऑक्सिजन का सोर्स ये जंगल ही है। इन्हे काट वहा पर कंस्ट्रक्शन कम्पनी खोली जाती । मेघराज की पहाडियो पर माइनिंग बैन है। बट वो भी हो रहा था। आई नीड टू स्टॉप दैट। इसलिए मैनु उनलोगो को मार दिया " 

अमर ने एक एक बात चारू को गंभीरता से समझाई। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी। जयपुर की दोपहर ठंड से सिकुड गई थी। 
चारू जैसे जैसे अमर की बात सुनती जा रही थी । उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे। वो अब अमर को अलग सम्मान से देख रही थी। जब अमर ने ये महसूस किया तो वो.हल्के से हँस दिया। 

चारू झेंप गई।  मगर एक सवाल अब भी था चारू के जहन मे। 

" आपने इतनी हार्श बाते क्यो कही थी मुझसे ? आराम से भी तो मना कर सकते थे ना ! " चारू ने शिकायती लहजे मे सवाल किया । वो.आहत थी अमर के व्यवहार से। 

अमर की आंखे गिल्ट से भर गई।  उसने चारू की तरफ बेबसी से देखा। 
" आई वॉज नोट इन माई सेंसिज। मुझे खुद को नही पता था की उस समय मै क्या चाहता था। तुमसे जो बाते कही उनके पीछे कारण थे। लेकिन मै ये भी जानता हूं की मैनेकही ना कही तुम्हारे आत्मसम्मान पर चोंट पहुचाई थी। " 

चार खिडकी बाहर देखने लगी। वो नही चाहती थी की अमल उसकी आंखो मे उमड आई नमी देखे। 

" आगे से लेफ्ट ले लेना । टोल से पहले ही है मेरी सोसाइटी। ", चारू स्पाट लहजे मे बोली। 

वो अब कोई बात नही करना चाहती थी। जो भी हो..अमर के तिरस्कार ने उसक दिल पर गहरी चोट पहुंचाई थी। उसके बाद जो कुछ भी उसके जीवन मे हुआ कही ना कही वो जुडा था अमर के तिरस्कार से। 

अमर ने थोडी देर चारू को देखा फिर गाडी आगे बडा दी। 



थोडी देर बाद गाडी चारू की सोसाइटी बिल्डिंग के सामने खडी थी। बारिश अब तेज हो गई थी। ऐसे मे अमर का वापस जाना चारू को सही नही लग रहा था। उसने अमर की तरफ देखा तो अमर उसे ही निहार रहा था। 

चारू चिढ गई।  " ये क्या आप जब देखो हमे घूरते रहते हो ! " 

अमर.हँस दिया। चारू का मुंह बन गया । वो बडबढाते हुए कार से उतरने लगी कि अमर ने दरवाजे पर हाथ रख दिया। चारू की सांसे मानो उसके गले मे ही अटक गई।  उसने अमर को सकपका कर देखा। अमर भी उसे ही देख रहा था। 
चारू इस समय सीट और अमर के हाथ के बीच थी। अमर उसकी तरफ झुकने लगा। चारू की धडकने रफ्तार पकडने लगी। उसके गाल सुर्ख हो गए।  होंठ हल्के से खुल गए।  वो.पलके झपकाने लगी। 

अमर आगे बडा और उसने चारू के कंधो पर से अपना ब्लेजर उतार लिया। 

" ब्रीथ प्रोफेसर....ब्रीथ । मै बस अपना ब्लेजर ले रहा था। " , कहकर अमर पीछे हट गया।

उसकी आंखे शरारत से चमक उठी । वो मस्ती से मुस्कुरा दिया। 


चारू भौचक्की सी अमर को देखती रही । उसके कान गर्म हो गए थे। वो शर्म से लाल हो गई थी। उसने अमर को घूरा और गाडी से उतर गई। 

अमर उसे भाग कर बिल्डिंग के अंदर जाते देख हँसता रहा। वो तब तक वहां सु नही गया जबतक चारू बिल्डिंग के अंदर नही चली गई।.



क्रमशः 


इस भाग मे इतना ही। अगले भाग के लिए  पांच कमेंट करे । इतना आलस मत करिए।  कहानी पर समीक्षा करो।