Namumkin Ishq in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 41

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 41

एपिसोड 41 — रुद्र वशिष्ठ का सच
पुराने सेंट मेरीज़ हॉस्पिटल के उस सुनसान कॉरिडोर में हर कोई एक-दूसरे को देख रहा था।
अर्जुन की नजर उस तस्वीर पर टिकी थी, जो उस रहस्यमयी आदमी के हाथ में थी।
तस्वीर में छोटी-सी आयत अपनी माँ नूरजहाँ के साथ खड़ी थी।
लेकिन उनके पीछे जो आदमी था...
उसे देखकर अर्जुन के चेहरे का रंग उड़ चुका था।
रुद्र वशिष्ठ।
उसका अपना चाचा।
वही रुद्र वशिष्ठ, जिसके बारे में पूरे परिवार को बताया गया था कि पंद्रह साल पहले उसकी मौत हो गई थी।
अर्जुन ने अविश्वास से कहा,
"ये नहीं हो सकता।"
रहस्यमयी आदमी ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा,
"क्यों नहीं हो सकता?"
"क्योंकि मेरे चाचा की मौत हो चुकी है।"
"तुम्हें ऐसा बताया गया था।"
अर्जुन की आँखों में गुस्सा उतर आया।
"मेरे परिवार के बारे में मुझसे झूठ बोलने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?"
वह आदमी शांत रहा।
"मैंने तुमसे झूठ नहीं बोला, अर्जुन। झूठ तुम्हारे परिवार ने तुमसे बोला है।"
अर्जुन एक कदम आगे बढ़ा।
"साफ-साफ बोलो। रुद्र चाचा जिंदा हैं या नहीं?"
नूरजहाँ की आँखों से आँसू निकल आए।
उन्होंने धीमे से कहा,
"हाँ..."
अर्जुन उनकी तरफ पलटा।
"आपको पता था?"
नूरजहाँ ने नजरें झुका लीं।
"हाँ।"
अर्जुन के चेहरे पर अविश्वास था।
"तो फिर इतने सालों तक आपने मुझे क्यों नहीं बताया?"
नूरजहाँ ने कहा,
"क्योंकि मैं तुम्हें भी उसी खतरे में नहीं डालना चाहती थी, जिसमें आयत को डाल दिया गया था।"
आयत अब तक चुप थी।
लेकिन अब उससे रहा नहीं गया।
"माँ... आखिर रुद्र वशिष्ठ ने मेरे साथ ऐसा क्या किया था?"
नूरजहाँ ने बेटी की तरफ देखा।
उनकी आँखों में दर्द था।
"तुम्हारे जन्म के समय तुम्हारे पिता के पास एक बहुत जरूरी दस्तावेज था।"
आयत ने पूछा,
"कैसा दस्तावेज?"
"तुम्हारे पिता को पता चल गया था कि वशिष्ठ परिवार की कंपनी के अंदर कोई बहुत बड़ा घोटाला कर रहा है।"
अर्जुन चौंक गया।
"मेरे परिवार में?"
"हाँ।"
"कौन?"
नूरजहाँ ने जवाब दिया—
"रुद्र।"
अर्जुन कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गया।
पंद्रह साल पहले
नूरजहाँ की आवाज़ में अतीत उतर आया।
"तुम्हारे पिता को पता चला था कि रुद्र सिर्फ पैसों की चोरी नहीं कर रहा था। वह अपने रास्ते में आने वाले हर इंसान को हटाने की कोशिश कर रहा था।"
"जब तुम्हारे पिता ने उसका विरोध किया, तो रुद्र ने उन्हें धमकी दी।"
आयत की आँखों में आँसू भर आए।
"और फिर मेरे पापा की हत्या कर दी?"
नूरजहाँ ने सिर झुका लिया।
"हाँ।"
आयत की साँसें तेज हो गईं।
"लेकिन आपने मुझे क्यों नहीं बताया?"
"क्योंकि तुम्हारे पिता की मौत के बाद रुद्र तुम्हारे पीछे भी पड़ गया था।"
अर्जुन ने पूछा,
"क्यों?"
नूरजहाँ ने कहा,
"क्योंकि तुम्हारे पिता ने मरने से पहले एक चीज़ मेरे पास छोड़ दी थी।"
"क्या?"
नूरजहाँ ने अपनी मुट्ठी खोली।
उसमें वही पुराना लॉकेट था।
"ये।"
अर्जुन ने लॉकेट को देखा।
"इसमें ऐसा क्या है?"
नूरजहाँ ने कहा,
"इसके अंदर एक छोटी-सी चाबी है।"
आयत चौंक गई।
"चाबी?"
नूरजहाँ ने लॉकेट खोलकर दिखाया।
अंदर सचमुच एक बेहद छोटी धातु की चाबी थी।
"तुम्हारे पिता ने कहा था कि अगर कभी उन्हें कुछ हो जाए, तो इसे तुम्हारे अठारह साल के होने तक सुरक्षित रखना।"
अर्जुन ने तुरंत पूछा,
"और अब आयत कितने साल की है?"
"उन्नीस।"
अर्जुन समझ गया।
"मतलब अब वो चीज़ उसके लिए है।"
नूरजहाँ ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
तभी सामने खड़ा रहस्यमयी आदमी बोला,
"और यही वजह है कि इतने सालों से रुद्र आयत को ढूँढ रहा है।"
अर्जुन को अपने परिवार पर शक
अर्जुन कुछ पल तक चुप रहा।
उसके दिमाग में अपने दादा की डायरी घूम रही थी।
"अगर कभी रहमान वापस आया, तो बच्ची को उसके हवाले मत करना..."
अब उसे समझ आने लगा था कि वह चेतावनी क्यों लिखी गई थी।
लेकिन एक बात अभी भी साफ नहीं थी।
उसने सामने खड़े आदमी से पूछा,
"अगर तुम रुद्र नहीं हो, तो फिर तुम कौन हो?"
वह आदमी मुस्कुराया।
"मेरा नाम कबीर है।"
अर्जुन ने पूछा,
"कबीर?"
"हाँ।"
"और तुम रुद्र के लिए काम करते हो?"
कबीर कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला,
"मैं पहले उसके लिए काम करता था।"
अर्जुन ने गौर से देखा।
"पहले?"
"अब नहीं।"
"तो फिर आयत को यहाँ क्यों लाए?"
कबीर ने कहा,
"क्योंकि मुझे लगा कि उसे सच पता होना चाहिए।"
अर्जुन ने तुरंत कहा,
"अगर सच बताना था तो उसे यहाँ अकेले क्यों बुलाया?"
कबीर के चेहरे पर पहली बार गंभीरता आई।
"क्योंकि रुद्र के आदमी हर जगह हैं। अगर मैं सीधे उसके सामने जाता, तो आयत कभी यहाँ तक नहीं पहुँचती।"
अर्जुन ने आयत की तरफ देखा।
आयत अब भी अपनी माँ के पास खड़ी थी।
अचानक गोली की आवाज़
तभी...
धाँय!
गोली चलने की आवाज़ पूरे हॉस्पिटल में गूँज उठी।
आयत चीख पड़ी।
अर्जुन ने तुरंत उसे अपने पीछे कर लिया।
"सब नीचे झुको!"
दूसरी गोली दीवार से टकराई।
कबीर ने तुरंत लाइट बंद कर दी।
पूरा कॉरिडोर अंधेरे में डूब गया।
बाहर से कई लोगों के कदमों की आवाज़ आने लगी।
"जल्दी! इन्हें ढूँढो!"
अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा,
"कितने लोग हैं?"
कबीर ने कहा,
"कम से कम छह।"
अर्जुन ने आयत और नूरजहाँ की तरफ देखा।
"आप दोनों मेरे पीछे रहिए।"
आयत ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"अर्जुन..."
"डरो मत।"
"लेकिन..."
"मैं हूँ।"
बस दो शब्द।
लेकिन उन दो शब्दों में आयत को जाने क्यों पूरा भरोसा महसूस हुआ।
अर्जुन ने कॉरिडोर के दूसरे रास्ते की तरफ इशारा किया।
"कबीर, कोई दूसरा रास्ता?"
"हाँ। नीचे पुराने स्टोर रूम से होकर बाहर निकल सकते हैं।"
"चलो।"
चारों तेजी से आगे बढ़ने लगे।
लेकिन तभी सामने एक आदमी आ गया।
अर्जुन उससे भिड़ गया।
कुछ ही पलों में वह आदमी जमीन पर गिर पड़ा।
दूसरा आदमी पीछे से आया।
कबीर ने उसे रोक लिया।
आयत और नूरजहाँ आगे निकल गईं।
लेकिन अचानक...
नूरजहाँ रुक गईं।
उन्होंने सामने देखा।
उनके चेहरे पर डर उतर आया।
आयत ने पूछा,
"माँ, क्या हुआ?"
नूरजहाँ ने सामने खड़े व्यक्ति को देखकर कहा—
"रुद्र..."
आयत ने पलटकर देखा।
कॉरिडोर के दूसरे छोर पर एक आदमी खड़ा था।
काले कपड़े...
चेहरे पर हल्की मुस्कान...
और आँखों में ऐसी ठंडक कि आयत का दिल काँप उठा।
अर्जुन भी वहीं आ गया।
उसने उसे देखते ही कहा—
"चाचा..."
रुद्र वशिष्ठ ने मुस्कुराकर कहा,
"बहुत बड़े हो गए हो, अर्जुन।"
अर्जुन की मुट्ठियाँ कस गईं।
"आप जिंदा थे?"
रुद्र हँस पड़ा।
"जिंदा ही नहीं... मैं तुम्हारे परिवार की हर गतिविधि पर नजर रख रहा था।"
अर्जुन ने गुस्से में कहा,
"आपने आयत के पिता को क्यों मारा?"
रुद्र की मुस्कान गायब हो गई।
"क्योंकि उन्होंने मेरे रास्ते में आने की गलती की थी।"
आयत की आँखों से आँसू निकल पड़े।
"आपने मेरे पापा को मारा?"
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
"तुम्हारे पिता बहुत कुछ जानते थे।"
आयत काँपती आवाज़ में बोली,
"और मेरी माँ?"
रुद्र ने कहा,
"तुम्हारी माँ को मैंने नहीं छुआ।"
नूरजहाँ ने तुरंत कहा,
"झूठ!"
रुद्र मुस्कुराया।
"तुम्हें तो उस रात सब याद है, नूरजहाँ?"
नूरजहाँ का चेहरा पीला पड़ गया।
अर्जुन ने उनकी तरफ देखा।
"माँ..."
फिर खुद ही रुक गया।
वह नूरजहाँ को माँ कहने वाला था।
नूरजहाँ ने उसकी तरफ देखा और कहा,
"उस रात... तुम्हारे दादा ने मुझे और आयत को बचाया था।"
अर्जुन की आँखें नम हो गईं।
लेकिन रुद्र ने अचानक कहा—
"नहीं, अर्जुन। तुम्हारे दादा ने आयत को बचाया नहीं था।"
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
"तो क्या किया था?"
रुद्र ने जेब से एक पुराना कागज निकाला।
"उन्होंने आयत की पहचान बदलने के बदले मुझसे एक सौदा किया था।"
अर्जुन स्तब्ध रह गया।
"क्या सौदा?"
रुद्र ने कागज हवा में लहराया।
"अगर तुम सच जानना चाहते हो..."
वह मुस्कुराया।
"तो अपने दादा की पुरानी स्टडी की अलमारी खोलना। तीसरे खाने के पीछे तुम्हें वो दस्तावेज मिलेगा, जो तुम्हारे पूरे परिवार को बर्बाद कर सकता है।"
इतना कहकर रुद्र पीछे हटने लगा।
अर्जुन ने उसे पकड़ने के लिए कदम बढ़ाया।
लेकिन रुद्र ने कहा—
"मुझे पकड़ने से पहले ये याद रखना..."
वह आयत की तरफ देखकर बोला,
"जिस चीज़ के लिए मैं पंद्रह साल से आयत को ढूँढ रहा हूँ, वो चीज़ अब उसके पास नहीं है।"
आयत घबरा गई।
"तो फिर कहाँ है?"
रुद्र ने मुस्कुराकर कहा—
"तुम्हें खुद नहीं पता कि वो चीज़ तुम्हारे अंदर छिपी है।"
और अगले ही पल उसने धुआँ छोड़ने वाला कैन फेंक दिया।
पूरा कॉरिडोर धुएँ से भर गया।
अर्जुन ने तुरंत आयत को अपने करीब खींच लिया।
"आयत!"
"मैं यहाँ हूँ!"
लेकिन जब धुआँ थोड़ा कम हुआ...
रुद्र गायब था।
और उसके साथ...
कबीर भी गायब था।
अर्जुन ने चारों तरफ देखा।
"कबीर कहाँ गया?"
नूरजहाँ ने घबराकर कहा,
"वो रुद्र के साथ था..."
अर्जुन ने तुरंत सिर हिलाया।
"नहीं।"
उसकी आँखों में शक था।
"मुझे लगता है कबीर ने शुरू से हमसे कुछ छिपाया है।"
आयत ने अर्जुन की तरफ देखा।
"अब क्या होगा?"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"अब मैं अपने घर जाऊँगा।"
"क्यों?"
अर्जुन ने गंभीर स्वर में कहा—
"क्योंकि मुझे अपने दादा की स्टडी में वो दस्तावेज ढूँढना है... जो शायद तुम्हारी पूरी जिंदगी का सच बदल देगा।"
लेकिन अर्जुन को अभी यह नहीं पता था कि उसी वक्त...
वशिष्ठ हवेली में कोई उसकी दादा की स्टडी का ताला खोल चुका था।
और अलमारी के तीसरे खाने से...
वही पुरानी फाइल गायब हो चुकी थी।
क्रमशः...