The Kaushambi Files(Season 1: THE UNTOLD CURSE) in Hindi Horror Stories by Dharmendra Kumar books and stories PDF | द कौशाम्बी फाइल्स (सीजन 1: द अनटोल्ड कर्स)

Featured Books
Categories
Share

द कौशाम्बी फाइल्स (सीजन 1: द अनटोल्ड कर्स)

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार
विधा (Genre): हॉरर, सस्पेंस, पौराणिक थ्रिलर
महत्वपूर्ण नोट (Disclaimer): यह कहानी पूरी तरह से एक काल्पनिक हॉरर स्टोरी (Fictional Horror Story) है। कहानी का मुख्य प्लॉट, घटनाएँ और भूतिया तत्व लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। हालांकि, कहानी को रोमांचक बनाने के लिए कौशाम्बी जिले के कुछ वास्तविक ऐतिहासिक स्थानों (जैसे राजा उदयन का किला, कड़ा धाम और घोषिताराम विहार) के बैकग्राउंड का इस्तेमाल किया गया है। इस कहानी का उद्देश्य किसी भी स्थान, धर्म या स्थानीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या अंधविश्वास फैलाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि पाठकों को एक बेहतरीन और रोंगटे खड़े कर देने वाला मनोरंजन प्रदान करना है।

एपिसोड 1: राजा उदयन के किले का 'अदृश्य कमरा'
यमुना नदी से उठने वाली ठंडी हवाएं जब राजा उदयन के किले के प्राचीन खंडहरों से टकरा रही थीं, तो ऐसा लग रहा था मानो कोई सदियों पुराना साया धीरे-धीरे सांस ले रहा हो। रात के सन्नाटे में किले की काली दीवारें किसी सोए हुए राक्षस जैसी दिख रही थीं।

"भाई राघव, मुझे यह आइडिया बिल्कुल ठीक नहीं लग रहा। सरकार ने बोर्ड पर साफ-साफ लिखा है—शाम पांच बजे के बाद यहाँ जाना सख्त मना है। अगर पुलिस ने पकड़ लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे," अमित ने अपने कंधे पर भारी कैमरा संभालते हुए डरते हुए कहा। दिसंबर की इस सर्द रात में हवा बर्फीली थी, फिर भी अमित के माथे पर डर के मारे पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

राघव ने अपने हाथ में पकड़े हुए ईएमएफ (EMF) मीटर को देखा, जिसकी स्क्रीन पर अभी हरी बत्ती जल रही थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "अमित, आज हम दुनिया को दिखाएंगे कि कौशाम्बी के इस ऐतिहासिक किले के नीचे छिपे 'अदृश्य कमरे' का असली सच क्या है।"

दोनों ने चुपके से पुरातत्व विभाग के जंग लगे लोहे के गेट को पार किया। किले के अंदर पैर रखते ही चारों तरफ एक अजीब और खौफनाक सन्नाटा छा गया। झाड़ियों में होने वाली झींगुरों की आवाज़ भी अचानक बंद हो गई, मानो कोई अदृश्य ताकत उन्हें चुप रहने का इशारा कर रही हो।

राघव और अमित मोबाइल की टॉर्च जलाकर किले के उस हिस्से की तरफ बढ़े जो पूरी तरह ढह चुका था। पुरानी ईंटें और काली पड़ चुकी दीवारें टॉर्च की रोशनी में डरावनी आकृतियां बना रही थीं। अचानक, राघव के हाथ में पकड़ा हुआ EMF मीटर 'बीप-बीप-बीप' की तेज़ आवाज़ करने लगा। हरी बत्ती झटके से लाल हो चुकी थी और मीटर की सुई आखिरी छोर पर आकर कांप रही थी। आसपास की ऊर्जा अचानक बदल गई थी।

"राघव... देख वो क्या है..." अमित की आवाज़ डर के मारे गले में ही फंस गई। उसने अपने कैमरे की लाइट एक टूटी हुई मीनार के नीचे जा रहे बेहद संकरे रास्तों की तरफ घुमाई।

वहाँ ज़मीन के अंदर जाती हुई कुछ पुरानी सीढ़ियां थीं, जो पुरातत्व विभाग के आधिकारिक नक्शे में कहीं नहीं थीं। यही वह 'अदृश्य कमरा' था, जिसके बारे में कौशाम्बी के स्थानीय लोग दबी ज़ुबान में बात करते थे। सीढ़ियों से नीचे उतरते ही एक अजीब सी सड़न और कपूर की तीखी महक आ रही थी। कमरे के बीचों-बीच एक पुराना, बिखरा हुआ हवन कुंड था और पत्थरों की दीवारों पर कोयले से अजीबोगरीब तांत्रिक आकृतियां बनी थीं।

"अमित, लाइव रिकॉर्डिंग चालू रखना," राघव ने उत्साहित होते हुए फर्श पर पड़े एक पुरानी तांत्रिक किताब के फटे हुए पन्ने की तरफ़ हाथ बढ़ाया। लेकिन जैसे ही राघव की उंगलियों ने उस शापित पन्ने को छुआ, पूरे तहखाने का तापमान अचानक गिर गया। उनकी सांसें धुएं की तरह मुंह से बाहर आने लगीं।

तभी, उस अंधेरे तहखाने के सबसे गहरे कोने से किसी के ज़ोर-ज़ोर से सिसकने की आवाज़ आई... जैसे कोई औरत वहाँ बैठकर रो रही हो।

"राघव! कोई है वहाँ! भागो यहाँ से!" अमित बुरी तरह चिल्लाया और बिना सोचे-समझे सीढ़ियों की तरफ भागा। राघव ने भी अपनी जान बचाने के लिए पीछे दौड़ लगा दी। दोनों हांफते हुए किसी तरह तहखाने से बाहर निकले और किले के पिछले हिस्से की तरफ भागे, जहाँ यमुना नदी का पथरीला किनारा था।

रात के सन्नाटे में यमुना का पानी बिल्कुल काले तेल की तरह चमक रहा था। दोनों नदी के किनारे आकर रुके और घुटनों पर हाथ रखकर हांफने लगे।

"मैंने कहा था न राघव, वहाँ कोई भूतिया ताकत है!" अमित रोने लगा।

"शांत हो जाओ अमित, वो सिर्फ हवा का भ्रम था..." राघव खुद को तसल्ली दे रहा था, लेकिन उसके अपने हाथ कांप रहे थे।

तभी, यमुना नदी के शांत पानी में एक तेज़ हलचल हुई। पानी के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा भंवर बनने लगा। राघव और अमित की नजरें पानी पर टिक गईं। पानी के ठीक ऊपर, कोहरे को चीरते हुए एक सफ़ेद साया हवा में तैरने लगा। वह एक औरत की आकृति थी, जिसके लंबे बाल पानी में बिखरे हुए थे, लेकिन उसका चेहरा... उसका चेहरा पूरी तरह गायब था। वहाँ सिर्फ दो जलती हुई लाल आँखें थीं, जो सीधे राघव को घूर रही थीं।

उस साये ने धीरे से अपना हाथ उठाया और उसकी एक उंगली राघव की तरफ उठी। तभी हवा में एक भारी, गूंजती हुई डरावनी आवाज़ आई—"तुमने उसकी नींद खराब कर दी है... अब बलि पूरी होगी।"

इससे पहले कि राघव या अमित कुछ समझ पाते, यमुना नदी का पानी अचानक उफनने लगा और एक बहुत बड़ा काला हाथ पानी से बाहर निकला। उसने अमित के पैर को पकड़ा और उसे घसीटते हुए गहरे पानी की तरफ खींचने लगा। "राघव! मुझे बचाओ!!" अमित की आखिरी दर्दनाक चीख गूंजी और वह उस गहरे काले पानी में समा गया।

राघव स्तब्ध खड़ा रह गया। उसने घबराकर पीछे किले की तरफ मुड़कर देखा, तो मीनार के ऊपर कोई खड़ा था... एक भयानक तांत्रिक, जिसके हाथ में वही काली किताब थी जिसका पन्ना राघव ने तहखाने में छुआ था।...अब आगे!

"क्या राघव अपने दोस्त अमित को यमुना के उस खूनी साये से बचा पाएगा? कौन है वह रहस्यमयी तांत्रिक जो किले की मीनार से यह सब देख रहा था? जानने के लिए बने रहिए 'द कौशाम्बी फाइल्स' के अगले रोमांचक भाग के साथ। एपिसोड 2 जल्द ही आ रहा है, तब तक के लिए पढ़ते रहिए!"