Cyber Crime - 2 in Hindi Magazine by Virendra Dewangan books and stories PDF | साइबर क्राइम - 2

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साइबर क्राइम - 2

गतांक से आगे...
केस नंबर-2 
फर्जी शेयर ट्रेडिंग से 94 लाख की साइबर ठगी-
छग राज्य के ही रायपुर के देवेंद्र नगर थाना में अपराध दर्ज किया गया कि सीए आशीष कृष्णानी और उनकी पत्नी से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 94 लाख की आनलाइन ठगी हुई है।

इसकी जांच रेंज साइबर थाना की टीम ने शुरू की, तो पता चला कि शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर पश्चिम बंगाल के 24 परगना का 12वीं पास साइबर ठग ने उक्त सीए से भारी-भरकम रकम ठग लिया है।

आरोपी भाई-भाई नामक इंटरप्राइजेस कंपनी बनाकर बैंक खाता खोला था और उसमें पैसा निवेश कराता था।

आरोपित का नाम अब्दुल रहमान मुल्ला है, जिसको छग पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है और ठगी के 24 लाख रुपया होल्ड करवा चुकी है। उसके साथी भी ठगी के गोरखधंधे में शुमार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

पुलिस का दावा है कि इन आरोपियों के खिलाफ आनलाइन ठगी के पांच राज्यों में मामले दर्ज है।

आरोपित अब्दुल व उसके शातिर साथी शेयर ट्रेडिंग के नाम पर कारोबारी और फायनेंस के जानकारों को फंसाते थे। फिर उनसे मोबाइल एप डाउनलोड करवा कर उसी के जरिए लाखों रुपया निवेश करवाते थे।

केस नंबर-3
छग के ही राजनांदगांव के बसंतपुर इलाके का रहनेवाला एक व्यापारी शेयर मार्केट में रकम कई गुना करने के चक्कर में ऐसा फंसा कि अपने सहित नातेदारों की धनराशि भी ठगों के सुपुर्द कर डाला।

राजनांदगांव एएसपी के अनुसार, ‘‘प्रारंभ में कारोबारी को कमाई हुई, जिससे वह लालच में आ गया और अपने समेत रिश्तेदारों का 3 करोड़ 40 लाख रुपये शेयर मार्केट में झोंक दिया।’’

हालांकि शुरूआत में ब्रोकरों ने उसको चेताया भी कि इस बिजनेस में उतार-चढ़ाव होता रहता है, लेकिन फिर भी वह रिश्तेदारों से रकम उधारी मांग-मांग कर ठगी के जाल में फंसता चला गया।

जब उस को अहसास हुआ कि वह ठगा गया है, तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज किया। पुलिस एक ठग को राजस्थान और दूसरे ठग को केरल से गिरफ्तार किया।

पुलिस की जांच से खुलासा हुआ है कि आरोपित धनराशि को केरल, यूपी, असम आदि राज्यों में स्थित अपने खातों में डलवाते थे और केरल से निकालते थे।

यही नहीं, आरोपियों ने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 60 लाख रुपया दुबई से निकाले।

एएसपी के मुताबिक इस प्रकरण में 50 लाख रुपया होल्ड करवाए गए हैं।

...और भी हैं मामले-यह तो एक राज्य का प्रमुख मामला है. इसके अलावा देश के हर राज्य व जिलों में ऐसे कारनामों की बाढ़-सी आ गई है। इससे सभी नागरिकों को चेत जाना चाहिए और ऐसे कॉलों से सतर्क व होशियार रहना चाहिए। साइबर ठगी से बचने का यही एकमात्र प्राथमिक उपाय है।

गोपनीयता का सवाल-हम डिजिटल और इंटरनेट के युग में जी रहे हैं। हमारा हर खाता नंबर, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, पेन नंबर, एटीएम नंबर, क्रेडिटकार्ड नंबर और बीमा पालिसी नंबर डिजिटल हो चुका है।

सवाल यही कि ये तमाम जानकारियां जब बैंकों व बीमा कंपनियों के पास हैं और वे दावा करती हैं कि हमारा खाता नंबर सुरक्षित है, तो वे लीक कहां से हो रही हैं?

क्या बैंकों का यह दायित्व नही बनता कि वे अपने खाताधारकों की जानकारियां चाक-चौबंद रखें कि कोई ग्राहकों की गोपनीय जानकारियों पर सेंधमारी न करने पाए।

माना कि इस काम में बैंक मैनेजर व उनका नियमित कर्मचारी शामिल नहीं होगा। पर, इसकी क्या गारंटी, जो बैंकों में अनियमित तौर पर काम पर लगाए जाते हैं, वे चंद रुपयों के लालच में ऐसी गोपनीय जानकारी किसी को नहीं दे रहे होंगे।

यही हाल बीमा कंपनियों का है. किसी की पालिसी कब परिपक्व हो रही है, इसकी जानकारी बीधाधारकों से पहले ठगों को कैसे पता चल जाती है?

ठगों के ठिकाने-साइबर ठगी के मामले में झारखंड का जामताड़ा अभी तक सुर्खियों में रहा है. पर, अब मेवात (हरियाणा-राजस्थान), दिल्ली व प. बंगाल, यूपी का देवसेरस गांव साइबर ठगी के लिए विख्यात हो रहे हैं।

हर इलाके के अपने तरीके व पैतरे होते हैं। जैसे अलवर, भिवाड़ी, कामन, डीग, नुहू, मेवात और देवसेरस के ठग नातेदार बन कर ठगी करते हैं, तो कई सेक्सटार्शन, क्रेडिटकार्ड के माध्यम से जालसाजी का जाल फैलाते हैं।

वहीं, नालंदा, देवधर व जामताड़ा के जालसाज गूगल सर्च व आनलाइन शापिंग के मार्फत ठगी का जाल बिछाते हैं।

इनके अलावा दिल्ली व नोयडा के ठग फ्रेंचायजी व बोगस टॉस्क का सहारा लेते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में ठग सिम का जखीरा व टेलीफोन नंबरों की सूची लेकर खेत-खलिहानों में चले जाते हैं और वहां दिनभर रहकर अपना गोरखधंधा चलाते हैं और उपयोग किए गए सिम को मिट्टी में दफन कर देते हैं।

जबकि शहरी क्षेत्रों में यही कार्य बागानों में, सुने व खंडहरयुक्त भवनों में, किराये के मकानों में, आउटरों की सूनी गलियों में करते हैं और सिम को गटर में फेंक देते हैं।

ज्यादातर ठग अलग-अलग राज्यों से सिम खरीदते हैं, ताकि पुलिसवालों व पीड़ितों को शक न हो कि ठग कहां से ठगी का साम्राज्य चला रहे हैं।

साइबर क्राइम से बचने के उपाय-
1. गर कोई फ्लिपकार्ट, स्विगी, अमेजन, जोमैटो आदि के नाम पर आपको काल कर 1 से 9 नंबर दबाने के लिए कहे या ओटीपी शेयर करने के लिए कहे, तो फोन तुरंत डिस्कनेक्ट कर दें।

2. साथ ही वीडियो मोड में किसी कॉल का जवाब न ही दें, तो अच्छा है।

3. अगर कोई आपको पुलिस, सीबीआई, ईडी, जीएसटी, आईटी, विधि आदि विभाग से आनलाइन नोटिस मिलने, जांच होने या प्राथमिकी दर्ज करने की बात करे, तो ऑफलाइन सत्यापित करने के लिए उसका कॉल बंद कर दें। हमेशा जांचे कि संबंधित पत्र सरकारी पोर्टल से है।

4.यदि आपके पास सूचना आए कि आपका पारिवारिक सदस्य दुघर्टनाग्रस्त होकर हास्पिटल में एडमिट है। फिर तत्काल रुपयों की मांग करे, तो उसके झांसे में न आकर पहले इसकी पुष्टि परिवार के सदस्यों से या अस्पताल से करें।

5. कोई ठग पुलिस अफसर बनकर आपसे आपके आधारकार्ड, पेनकार्ड या क्रेडिटकार्ड आदि के बारे में पूछताछ करे, तो ऐसा अधिकारी निश्चय ही धोखेबाज हो सकता है। 

6. आपके पास कॉल आए कि ट्राई यानी भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण आपका फोन बंद करनेवाला है. तो उसका उत्तर हरगिज न दें. यह फ्रॉड हो सकता है।

7. आपकी जानकारी के बगैर रमी में या किसी प्रतियोगिता में रुपये जीतने की सूचना फोन, एसएमएस या वाट्सएप से आए, तो आप उसको रिस्पांस न करें. यह साइबर फ्राड है।

8. कोई कहे कि आपके पैकेट में ड्रग्स है, आपके घर पर ड्रग्स या जंगली जानवरों की चमड़ी या उसके शरीर के अंग पाए गए हैं और पुलिस से बचने के तरीके बताए, तो निश्चित जानिए कि यह ठगराज है।

हमेशा सतर्क रहें-
आपको हर हाल में किसी अजनबी व्यक्ति को अपना पता, लोकेशन, फोन नंबर, आधार नंबर, पैन नंबर, जन्म तिथि या अन्य कोई व्यक्तिगत जानकारी फोन या मैसेज पर साझा नहीं करनी चाहिए।

अगर कोई कॉल कर पूछ रहा है, तो उसकी न तस्दीक करें, न इंकार। ऐसे कौल को फौरन काटें और नंबर को ब्लॉक करें।

इसके बावजूद कोई आपको परेशान कर रहा है और कह रहा है कि आप डिजिटल अरेस्ट हो चुके हैं, तो बगैर झिझक तत्काल साइबर पुलिस को 1930 नंबर पर सूचना देकर चौकस रहें। क्योंकि साइबर ठग आप की गाड़ी कमाई पर सेंधमारी करने का प्लान कब बना लें, कहा नहीं जा सकता?
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