अभी तक मैंने आपको अंधकार के बारे में और अंधकार की तबाही के बारे में बताया।
अब मैं आपको बताने जा रही हूं, अंधकार की योगिनी माँ जिसका नाम" ताई- सा" था।
उस महा- योगिनी मां ताई सा का अतीत भी कम भयानक नहीं था। वह किसी समय एक बहुत बड़े राज्य की राजकुमारी हुआ करती थी।
उसके पिता, उस विशाल साम्राज्य के राजा ने, किन्ही कारणों से अपनी पांचों पुत्रियों को अपने ही राजमहल से बाहर निकलवा दिया था।
उन पांँच राजकुमारियों में सबसे बड़ी बहन ताई सा ही थी। जो आगे चलकर महा- योगिनी बनी और जिसने अपनी अलौकिक तथा तंत्र शक्तियों से खुद को अमर कर लिया।
बाकी की चार बहनों को उसने चार अलग- अलग दिशाओं में फैला दिया था, और खुद काल और अंधकार की साधना में लीन हो गई।
जब उस योगिनी ने अपनी तबाही और बदले की आग को एक नया आकार देने के लिए" अंधकार" को जन्म दिया, तो वह इस दुनिया के लिए मौत का परवाना बन गया।
अंधकार" के नाम मात्र से ही बड़े-बड़े साम्राज्य बिना युद्ध किए ही घुटनों पर आ जाते थे। क्योंकि वह जानते थे, कि अब मौत खुद अंधेरा बनकर आ चुकी है।
जब उस महा शैतान का तांडव थम जाता और उसकी माँ उस महा- योगिनी का बुलावा आता, तो वह वापस अपनी इस गुप्त और खौफनाक" अंधकार की नगरी" मैं लौट जाता था।
उस जादूई और भयानक नगरी में जाकर, सदियों पुरानी असीम शक्तियां और अपनी मांँ के तंत्र मंत्र के बल पर वह फिर से गहरी और लंबी नींद में सो जाता था।
उसके गायब होते ही दुनिया का वह भयानक मंजर ऐसे गायब हो जाता था, जैसे कभी वहां कोई कयामत आई ही ना हो।
लोगों को कुछ सादियों का वह चैन तो मिल जाता था, लेकिन उनके भीतर एक अनजान खौंफ हमेशा जिंदा रहता था,
की न जाने कब फिर से अमावस्या की काली रात लौटेगी, कब आसमान में बिजली कड़केगी और कब वह योगिनी मां अपने उसे महा शैतान बेटे को फिर से जगा कर इस दुनिया पर कयामत ढाने के लिए छोड़ देगी।
जब उस महा योगिनी माँ ने देखा कि उसका बेटा" अंधकार" जो कालों का काल है, तूफानों और काली रातों का राजा है। वह इस भयानक दुनिया में अकेला है, तो उसके मन में एक और खतरनाक विचार आया।
उसने सोचा कि उसका बेटा अकेला क्यों रहे?
तभी उस योगिनी माँ में अपनी सर्वोच्च और सबसे खौफनाक तंत्र शक्तियों से ग्यारह अति भयानक और अमानवीय शक्तियों-
(देवियों या जोगिनियो जैसी महाशक्तियां की रचना की)
वे ग्यारह शक्तियां साधारण नहीं थी, बल्कि उनमें ब्राह्मंड का सारा जहर, कयामत की आग और हर दिशा का अंधकार समाया हुआ था।
जब वे ग्यारह भयानक शक्तियां प्रकट हुई, तो पूरी अंधकार की नगरी उनके प्रलयंकारी रूप से कांप उठी।
वह उस महा शैतान' अंधकार' की पत्नियां और उसकी महा सेनानी बनाकर उसके साथ खडी हो गई, ताकि जब वे सब मिलकर धरती पर उतरे, तो कोई उनका मुकाबला करने वाला इस ब्रह्माण्ड में शेष ना बचे।
अंधकार की वह ग्यारह प्रलयंकारी बीवियां। उस अंधकार से भी ज्यादा भयानक, शक्तिशाली और महाविनाशणी थी।
वह तो एक साथ ग्यारह अलग- अलग दिशाओं से अंधकार फैलाती थी।
उसे महा शैतान" अंधकार" कि वे ग्यारह पत्नियां (शक्तियां) अपने पति से भी कई गुना अधिक खौफनाक और क्रूूर थी।
उनकी तबाही की कोई सीमा नहीं थी। जब वे अपने पति के साथ या अकेले भी किसी राज्य की ओर बढाती थी, तो उनके नाम मात्र से ही सदियों पुराने साम्राज्य थरथरा उठते थे।
वे एक-एक करके बड़े-बड़े राज्यों को नेस्तनाबूद करती चली गई। राजा महाराजाओं के मुकुट धूल में मिल गए और प्रजा चिखती हुई इतिहास के पन्नों से हमेशा के लिए गायब हो गई। बस्तियों की जगह सिर्फ राख और धधकती हुई चिताएं बचीं।
यह मंजर देखकर महायोगिनी सांस (अंधकार की मां) फूले नहीं समा रही थी। उसका घमंड और उसका अहंकार सातवें में आसमान पर पहुंच गया था। उसे अपनी इस शैतानी कुल की बहूऔं पर गर्व होने लगा था।
सोच कर की पहले अकेला उसका बेटा तबाही मचाता था, लेकिन अब तो उसकी यह ग्यारह बहुएं उससे भी बडी शैतान साबित हुई है, जो शैतानों की भी महारानी है।
अब उस अधंकार की रात का साय और उसका खौफ इतना फैल चुका था, की सदियां बीत जाने के बाद भी वह काल थमने का नाम नहीं ले रहा था। हवा का हर झौंका, हर विरान रास्ता और हर गुजरता दिन सिर्फ एक ही खौफ लेकर आता था।
कि अब इस दुनिया को बचाने वाला कोई नहीं बचा है, क्योंकि इन महा शैतानों के आगे हर तरफ सिर्फ और सिर्फ मौत का पहरा बैठ चुका है।
(जब सबको लगता है कि इस दुनिया को बचाने वाला कोई नहीं बचा है, तभी इस कुदरत का ऐसा करिश्मा होता है कि अंधकार की नगरी भी कांप जाएगी।
अब यह कौन सा करिश्मा होने वाला है इस जानने के लिए पूरी दास्तान को जानिए) अब आगे..
(योग करते हुए योगिनी माँ)
उस महायोगिनी मां की जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ कि उसकी अपनी ही काया, उसका अपना ही शरीर भीतर से कांप उठा।
एक गहरी सिहरन और अजीब सा दर्द उसके रोम रोम में दौड गया। उसके भीतर की शैतानी चेतना और उसका अंतर मन चीख- चीखकर कह रहा था-
कोई आ रहा है!
इस धरती पर कोई ऐसा जन्म ले चुका है, जो मेरे इस अजय बेटे' अंधकार' और उन ग्यारह प्रलयकारी बहूऔं का अंत करने के लिए आ रहा है।
उसको खौंफ और अनजाने डर से बेचैन होकर, उसे महायोगिनी ने अपनी तंत्र शक्तियों से चारों दिशाओं में फैली अपनी उन चारों बहनों
(जिन्हें उसने कभी अलग- अलग दिशाओं में भेजा था)
को तुरंत बुलवा लिया।
जब वे चारों बहनें अपनी महाशक्तियों के साथ वहां प्रकट हुई, तो उसे योगिनी ने गुस्से और घबराहट में उनसे कहा।
जाओ! और पता लगाओ वह कौन है? जो मेरे बेटे और मेरी बहूऔं को खत्म करने के लिए इस दुनिया में आ रहा है? कौन है वह जो हमारे इस साम्राज्य को चुनौती देने की हिम्मत कर रहा है?
लेकिन उन चारों बहनों ने अपनी माया और दृष्टियों से देखकर आवक रह गई और उत्तर दिया- बहन, हमने चारों दिशाओं में छान मारा है, हमें दूर- दूर तक ऐसा कोई नजर नहीं आता। कोई भी ऐसा नहीं है जो हमारे इस काल को हरा सके। आप वहम कर रही हैं, ऐसा होना नामुमकिन है!
अपनी बहनों की यह बात सुनकर उस महायोगिनी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह आग बबूला होकर चिल्लाई-
तुम सब अंधी हो चुकी हो! तुम्हें कुछ नहीं दिखता! जाओ, अपनी अपनी दिशाओं में वापस लौट जाओ और पहरा सख्त कर दो।
उसने गुस्से में सबको वापस भेज तो दिया, लेकिन उसके खुद के भीतर एक अजीब सी बेचैनी और डर बैठ गया।
वह खुद से सवाल करने लगी- आखिर यह अंजाना साया कौन है? जो मेरे बेटे से भी ज्यादा भयानक और शक्तिशाली होने का एहसास कर रहा है?
क्या वह कोई आम इंसान है या कोई तुच्छ जीव? या फिर यह खुद इस जल, तूफान, बिजली और इन काली रातों का कोई नया रूप है, जो हमारे पूरे राजवंश को लीलने के लिए आ रहा है?
बताइए आप सबको क्या लगता है, आखिर ऐसा कौन है? जो योगिनी माँ की बेचैनी बन गया, कौन है जो इस धरती पर आने वाला है या आ चुका है!
यह जानने के लिए पढते रहिए अंधकार की रात अध्याय 3
लेखिका कहानियों की लहर