Red Door in Hindi Fiction Stories by M noctis books and stories PDF | Red Door

Featured Books
Categories
Share

Red Door

रात के लगभग ग्यारह बज चुके थे।
शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी इमारत खड़ी थी। उसकी टूटी हुई खिड़कियों से हवा सीटी बजाती हुई अंदर जा रही थी।
इमारत के ऊपर लगा जंग लगा बोर्ड आधा टूट चुका था—
"सेंट मार्था मानसिक चिकित्सालय"
कभी यहाँ सैकड़ों मरीज रहा करते थे। लेकिन पिछले कई दशकों से यह जगह बंद थी। लोग कहते थे कि रात के समय यहाँ से चीखने की आवाज़ें आती थीं।
कभी किसी बच्चे के रोने की। कभी किसी औरत के चिल्लाने की। और कभी...
किसी ऐसे इंसान की चीख, जिसकी आवाज़ इंसानी नहीं लगती थी। आज रात वहाँ तीन लोग खड़े थे।
नकुल, लंबा काला कोट पहने, हाथ में एक पुराना चमड़े का बैग और चेहरे पर हमेशा की तरह शांत भाव।
उसके पीछे सिया खड़ी थी। उसकी नजरें लगातार अस्पताल की इमारत पर घूम रही थीं।
और तीसरा था—
विवान।
हाथ में कैमरा, चेहरे पर डर छिपाने की असफल कोशिश।
उसने इमारत को ऊपर से नीचे तक देखा फिर नकुल की तरफ देखा।
विवान: "एक बात पूछूं?"
नकुल ने बिना उसकी तरफ देखे कहा—
नकुल: "पूछो।"
विवान: "हमारे काम में कभी ऐसी जगह क्यों नहीं आती जहाँ भूत की जगह बस चोर मिले?"
सिया हंस पड़ी।
नकुल ने उसे देखा।
नकुल: "तुम चाहो तो वापस जा सकते हो।"
विवान ने तुरंत कैमरा ऑन किया।
विवान: "नहीं, नहीं। मैं तो बस माहौल हल्का कर रहा था।"
सिया: "डर गए?"
विवान: "मैं? बिल्कुल नहीं।"
उसी वक्त—
ठक।
अस्पताल की तीसरी मंजिल की एक खिड़की अपने आप बंद हो गई।
विवान चुप हो गया। कुछ सेकंड तक उसने खिड़की को देखा।
फिर धीरे से बोला—
विवान: "...हवा थी।"
सिया मुस्कुराई।
सिया: "खिड़की अंदर की तरफ बंद हुई है।"
विवान ने कैमरा नीचे कर लिया।
विवान: "मैंने कहा था ना, हवा बहुत ताकतवर थी।"
नकुल बिना कुछ कहे अस्पताल के मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ गया।
पुराने अस्पताल के अंदर दरवाजा हल्का सा धक्का देते ही खुल गया।
क्रीईईईक...
तीनों अंदर चले गए। सड़े हुए फर्नीचर की गंध पूरे हॉल में फैली थी। दीवारों पर पुराने पेंट के नीचे काले धब्बे दिखाई दे रहे थे। फर्श पर टूटे हुए कांच और पुराने कागज बिखरे पड़े थे।
विवान कैमरे से चारों तरफ रिकॉर्ड कर रहा था। कैमरे की स्क्रीन पर सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था।
लेकिन...
अचानक स्क्रीन पर एक काली आकृति दिखाई दी। विवान रुक गया उसने कैमरा नीचे किया।
पीछे देखा कुछ नहीं था। फिर कैमरे की स्क्रीन देखी आकृति गायब थी।
विवान: "नकुल..."
नकुल ने उसकी तरफ देखा।
विवान: "अभी कैमरे में कोई था।"
नकुल: "मुझे पता है।"
विवान का चेहरा उतर गया।
विवान: "आपको पता था?"
नकुल: "हाँ।"
विवान: "और आपने बताया नहीं?"
नकुल: "तुम वैसे भी अंदर आ गए थे।"
विवान: "ये कैसी motivation है?"
सिया फिर हंसने लगी।
लेकिन तभी उसकी हंसी रुक गई।उसने सामने देखा।
गलियारे के दोनों तरफ बने कमरों के दरवाजे धीरे-धीरे खुलने लगे।
एक।
दो।
तीन।
फिर...
सारे।
सिया की आंखें गंभीर हो गईं।
सिया: "नकुल..."
नकुल: "मैं महसूस कर रहा हूं।"
अंधेरे कमरों से धुंधली आकृतियां बाहर निकलने लगीं।
एक बूढ़ा आदमी।
एक बच्चा।
एक औरत।
कुछ के चेहरे ही नहीं थे। कुछ की गर्दन अजीब तरीके से मुड़ी हुई थी। विवान पीछे हट गया।
विवान: "कितनी हैं?"
नकुल ने चारों तरफ देखा।
नकुल: "लगभग तीस।"
विवान ने धीरे से कैमरा नीचे किया।
विवान: "मुझे लगता है... आज तीस तक गिनने की जरूरत नहीं है।"
लेकिन अजीब बात यह थी कि कोई आत्मा हमला नहीं कर रहा थी। वे बस...
उन्हें देख रहे थी जैसे किसी चीज़ से डर रहे हों।
सिया ने यह बात नोटिस की।
सिया: "ये हमसे डर नहीं रहे।"
नकुल की नजर गलियारे के आखिरी हिस्से पर टिक गई।
नकुल: "नहीं।"
अचानक—
धड़ाम!
गलियारे के अंत में एक लोहे का दरवाजा बंद हो गया सारी आत्माएं एक साथ पीछे हट गई।
विवान ने फुसफुसाकर पूछा—
विवान: "अब क्या हुआ?"
नकुल ने गंभीर आवाज में कहा—
नकुल: "अब पता चलेगा कि ये किससे डर रहे थे।"
दरवाजे के पीछे से हल्की सी आवाज आई।
स्स्स्स्स्स...
जैसे कोई चीज जल रही हो फिर दरवाजे के नीचे से...
आग की एक पतली लकीर बाहर आई।
सिया ने तुरंत हाथ उठाया।
सिया: "पीछे हटो!"
तीनों पीछे हुए।
धड़ाम!
लोहे का दरवाजा हवा में उड़ता हुआ उनके सामने आ गिरा। अंदर से आग का एक विशाल गोला निकला।
उसके बीच एक आकृति खड़ी थी।
मानव जैसी लेकिन पूरी तरह जली हुई। उसका शरीर राख और काली त्वचा से ढका था आंखों के अंदर आग जल रही थी।
और उसके मुंह से निकलती हर सांस के साथ धुआं बाहर आ रहा था। बाकी आत्माएं डरकर दीवारों के अंदर गायब होने लगे।
विवान की आवाज कांप गई।
विवान: "ये... बाकी सबसे अलग है।"
नकुल ने अपना हाथ उठाया उसकी उंगलियों के बीच एक talisman आ गया।
नकुल: "ये इस जगह का सबसे शक्तिशाली आत्मा है।"
आकृति ने सिर उठाया और चीखी।

आआआआआआआआआ—!

पूरी इमारत कांप गई, खिड़कियां टूटने लगीं। विवान ने अपने कान बंद कर लिए।
विवान: "ये अस्पताल अभी भी खड़ा कैसे है?!"
आग का एक विशाल वार उनकी तरफ आया, सिया ने तुरंत दोनों हाथ आगे किए।
सिया: "Barrier!"
एक चमकती हुई दीवार उनके सामने बन गई।
धड़ाम!
आग barrier से टकराई सिया के पैर जमीन पर घिसट गए और उसके चेहरे पर तनाव आ गया।
सिया: "ये बहुत ताकतवर है!"
नकुल आगे बढ़ा।
उसने कई talismans हवा में फेंके।
नकुल: "bind!"
ताबीज़ों से चमकती हुई जंजीरें निकलीं और आत्मा को बांधने लगीं। कुछ सेकंड के लिए आत्मा रुक गई।
फिर—
चटाक!
एक-एक करके सारी जंजीरें जलकर राख हो गईं। नकुल की आंखें थोड़ी संकरी हो गईं।
नकुल: "हम्म..."

विवान ने पीछे से पूछा—
विवान: "ये 'हम्म' अच्छा वाला था या बुरा वाला?"
नकुल ने उसकी तरफ देखा।
नकुल: "भागने वाला।"
विवान: "कहां?"
नकुल: "जहां तक भाग सकते हो।"
विवान ने तुरंत कैमरा पकड़ा और दौड़ने लगा।
विवान: "सिया! मैं तुम्हारा इंतजार बाहर करूंगा!"
सिया: "डरपोक!"
विवान: "जिंदा डरपोक!"
सिया के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
लेकिन अगले ही पल आत्मा फिर हमला करने लगी।
नकुल उसके सामने खड़ा था।
उसने देखा—
आत्मा की आग केवल गुस्से से नहीं जल रही थी।
उस आग के अंदर कुछ और था।
दर्द।
बहुत पुराना दर्द। नकुल की आंखें बदल गईं।
नकुल: "तुम आखिर हो कौन?"
आत्मा चीखी।
नकुल ने हाथ बढ़ाया और सीधे उसके spiritual core को छू लिया।
और उसी पल—
दुनिया बदल गई।
नकुल ने खुद को उसी अस्पताल में देखा लेकिन वह अस्पताल नया था लगभग सौ साल पहले। गलियारे में लोग चल रहे थे। मरीजों को कमरों में बंद किया जा रहा था। चीखें आ रही थीं।
फिर उसने एक आदमी को देखा एक साधारण आदमी।
डरा हुआ।
कमजोर।

उसके हाथ बंधे हुए थे। कुछ लोग उसे घसीटकर एक कमरे में ले जा रहे थे। दरवाजा बंद हुआ अंदर से उसकी चीख सुनाई दी।
फिर दूसरी।
फिर तीसरी।
नकुल की आंखों के सामने उस आदमी को यातनाएं दी गईं।

दिन बीते।

फिर महीने।

लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया।
आखिरकार वह आदमी उसी कमरे में मर गया।
अकेला..अंधेरे में।
उसकी आखिरी सांस के साथ एक बात निकली—
"मुझे... बाहर निकालो..."
दृश्य खत्म हुआ।
नकुल वापस वर्तमान में आ गया।
आत्मा अभी भी उसके सामने थी।
लेकिन अब नकुल उसे सिर्फ एक monster की तरह नहीं देख रहा था।
सिया ने पूछा—
सिया: "क्या देखा?"
कुछ सेकंड तक नकुल चुप रहा।
फिर उसने धीरे से कहा—
नकुल: "ये हमेशा से आत्मा नहीं थी।"
उसने सामने जलती हुई आकृति को देखा।
नकुल: "इसे इंसानों ने बनाया।"

सिया समझ गई।
उसने दोनों हाथ जोड़ लिए उसकी barrier spirit को चारों तरफ से घेरने लगी। इस बार barrier उसे रोकने के लिए नहीं था बल्कि उसे शांत करने के लिए था।
नकुल धीरे-धीरे उसके करीब गया।
आत्मा ने हमला नहीं किया। उसकी आग कम होने लगी।
नकुल ने उसका सिर छुआ।
नकुल: "तुम्हें बहुत इंतजार करना पड़ा।"
आग बुझने लगी।
नकुल: "अब खत्म करो।"
आत्मा की आंखों में पहली बार गुस्सा नहीं था।
सिर्फ थकान।
एक इंसानी चेहरा कुछ पल के लिए आग के भीतर दिखाई दिया फिर वह धीरे-धीरे प्रकाश में बदल गया।
और...
गायब हो गया।

पूरा अस्पताल शांत हो गया।

बाकी आत्माएं भी एक-एक करके गायब होने लगीं।
कुछ ही क्षणों में वहाँ केवल खाली कमरे और टूटी दीवारें रह गईं।

तभी पीछे से आवाज आई—

विवान: "तो... हो गया?"
नकुल और सिया ने उसकी तरफ देखा।
विवान दरवाजे के पीछे आधा छिपा हुआ था।
सिया: "तुम तो बाहर जाने वाले थे।"
विवान: "मैं गया था।"
नकुल: "फिर वापस क्यों आए?"
विवान ने कैमरा उठाया।
विवान: "कैमरा अंदर रह गया था।"
नकुल ने कैमरे की तरफ देखा।
नकुल: "तुम कैमरा लेकर गए थे।"
विवान कुछ सेकंड चुप रहा।
विवान: "...तो शायद मैं डर के मारे वापस आ गया।"
सिया हंस पड़ी।
तीनों धीरे-धीरे अस्पताल से बाहर निकलने लगे।
पीछे पुरानी इमारत अंधेरे में खड़ी थी।
नकुल ने एक बार पलटकर देखा।
तीसरी मंजिल की खिड़की में कुछ पल के लिए एक आदमी की परछाईं दिखाई दी।
वह आदमी...
मुस्कुरा रहा था फिर परछाईं गायब हो गई।
नकुल ने कुछ नहीं कहा वह आगे बढ़ गया।
आसमान में बादल धीरे-धीरे चांद को ढक रहे थे।
और उस रात...
सेंट मार्था अस्पताल की आखिरी चीख भी हमेशा के लिए शांत हो गई।