aarav or meera in English Love Stories by Dheeraj kumar Kashyap books and stories PDF | aarav or meera

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aarav or meera

बारिश में मिला प्यार
शहर में उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी। सड़कें पानी से भर गई थीं और लोग बारिश से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। उसी भीड़ में आरव भी बस स्टॉप पर खड़ा अपनी बस का इंतजार कर रहा था।
आरव एक साधारण लड़का था। वह एक छोटी-सी कंपनी में काम करता था। उसका जीवन काम और घर के बीच ही गुजरता था। वह प्यार पर ज्यादा विश्वास नहीं करता था, क्योंकि उसे लगता था कि सच्चा प्यार अब सिर्फ कहानियों में ही मिलता है।
तभी उसकी नजर एक लड़की पर पड़ी। वह लड़की बारिश में भीगते हुए बस स्टॉप तक आई। उसके हाथ में एक छोटी-सी किताब थी और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
आरव ने अपना छाता उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा, “आप चाहें तो मेरे छाते के नीचे खड़ी हो सकती हैं।”
लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “धन्यवाद।”
उसका नाम मीरा था।
दोनों कुछ देर चुपचाप खड़े रहे। फिर मीरा ने अपनी किताब खोली और पढ़ने लगी। आरव ने पूछा, “आपको किताबें पढ़ना पसंद है?”
मीरा ने कहा, “हाँ, बहुत ज्यादा। किताबों में मुझे अपनी दुनिया मिलती है।”
आरव हंसते हुए बोला, “और मुझे लगता था कि किताबें सिर्फ समय बिताने के लिए होती हैं।”
मीरा ने कहा, “शायद आपने अभी तक सही किताब नहीं पढ़ी।”
दोनों हंस पड़े।
कुछ देर बाद बस आई। मीरा बस में बैठ गई और जाने से पहले उसने आरव की तरफ देखकर कहा, “शायद फिर मुलाकात होगी।”
आरव ने मुस्कुराकर कहा, “उम्मीद रहेगी।”
अगले दिन आरव उसी समय बस स्टॉप पर पहुंच गया। उसे खुद नहीं पता था कि वह बस का इंतजार कर रहा था या मीरा का।
कुछ मिनट बाद मीरा वहां आ गई। दोनों को देखकर खुशी हुई। धीरे-धीरे उनकी रोज मुलाकात होने लगी। कभी वे चाय पीते, कभी किताबों की बातें करते और कभी बिना कुछ कहे बस साथ बैठते।
समय बीतता गया और दोनों को एक-दूसरे की आदत हो गई।
एक दिन मीरा बहुत उदास थी। आरव ने पूछा, “क्या हुआ?”
मीरा ने कहा, “मुझे अगले महीने दूसरे शहर जाना पड़ेगा। मेरे पिता का वहां ट्रांसफर हो गया है।”
आरव कुछ देर चुप रहा। उसके दिल में बहुत कुछ था, लेकिन वह कह नहीं पाया।
मीरा ने पूछा, “तुम कुछ कहोगे नहीं?”
आरव ने धीमी आवाज में कहा, “अगर मैं कहूं कि तुम्हारे जाने के बाद मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी, तो क्या तुम रुक जाओगी?”
मीरा की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, “अगर तुम पहले कह देते, तो शायद मैं जाने से डरती नहीं।”
आरव ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “मैं तुम्हें रोकना नहीं चाहता। मैं बस इतना चाहता हूं कि दूरी हमारे रिश्ते को खत्म न करे।”
मीरा मुस्कुराई और बोली, “सच्चा प्यार दूरी से खत्म नहीं होता।”
अगले दिन मीरा शहर छोड़कर चली गई। आरव के लिए दिन बहुत खाली हो गए। दोनों फोन पर बातें करते, एक-दूसरे को संदेश भेजते और अपनी छोटी-छोटी बातें साझा करते।
कई महीने बीत गए।
एक शाम आरव उसी पुराने बस स्टॉप पर खड़ा था। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। वह अपना छाता खोलने ही वाला था कि किसी ने पीछे से कहा, “आज भी छाता किसी के साथ बांटोगे?”
आरव ने पीछे मुड़कर देखा।
सामने मीरा खड़ी थी।
आरव की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उसने कहा, “तुम वापस आ गई?”
मीरा मुस्कुराकर बोली, “मैंने कहा था ना, शायद फिर मुलाकात होगी।”
आरव ने अपना छाता उसकी तरफ बढ़ाया और कहा, “इस बार मैं तुम्हें जाने नहीं दूंगा।”
मीरा ने मुस्कुराकर उसका हाथ पकड़ लिया।
बारिश पहले की तरह तेज थी, लेकिन इस बार दोनों अकेले नहीं थे।
उन्हें समझ आ गया था कि सच्चा प्यार किसी खास जगह या समय का मोहताज नहीं होता। कभी-कभी एक छोटी-सी मुलाकात पूरी जिंदगी बदल देती है।