एक अधूरी मुलाकात
रिया एक छोटे से शहर में रहने वाली लड़की थी। उसके सपने बहुत बड़े थे। वो लेखिका बनना चाहती थी, लेकिन घरवालों का दबाव था कि शादी कर ले। एक दिन उसने फैसला किया कि वो अपना शहर छोड़ कर मुंबई जाएगी अपने सपनों को पूरा करने।
मुंबई का सफर आसान नहीं था। ट्रेन में उसकी मुलाकात अमन से हुई। अमन भी एक संघर्ष करने वाला लड़का था, अभिनेता बनना चाहता था। दोनों में दोस्ती हो गई। ट्रेन के उस लंबे सफर में दोनों ने अपने दुख, अपने सपने साझा किए। रिया को पहली बार लगा कोई उसको समझ रहा है।
मुंबई पहुंच कर दोनों अलग हो गए, लेकिन फोन नंबर ले लिया। रिया ने एक छोटे से पीजी में रहना शुरू किया और एक पब्लिशिंग हाउस में इंटर्नशिप करने लगी। अमन ऑडिशन देता रहा। रोज़ रात को दोनों फोन पर बात करते, एक दूसरे को हिम्मत देते।
एक साल बीत गया। रिया की पहली कहानी एक बड़े मैगजीन में प्रकाशित हुई। उस दिन वो बहुत खुश थी, सबसे पहले अमन को बताया। अमन भी उस दिन बहुत खुश था, उसको एक विज्ञापन फिल्म में काम मिला था। दोनों ने तय किया कि मरीन ड्राइव पर मिलेंगे जश्न मनाने।
शाम के 6 बजे रिया मरीन ड्राइव पहुंची। समुंदर की हवा, लोग, सब कुछ कितना खूबसूरत लग रहा था। वो अमन का इंतजार करने लगी। 6 से 7 बज गए, अमन नहीं आया। फोन किया तो स्विच ऑफ। रिया को गुस्सा आया और दुख भी। वो वापस चली गई।
अगला एक हफ्ता अमन का कोई फोन नहीं आया। रिया ने गुस्से में उसका नंबर डिलीट कर दिया। उसने सोचा, शायद अमन अपने काम में व्यस्त हो गया और दोस्ती भूल गया। उसने अपने काम पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
दो साल बाद, रिया एक प्रसिद्ध लेखिका बन चुकी थी। एक दिन एक अवॉर्ड फंक्शन में उसकी मुलाकात एक निर्देशक से हुई, जो अमन का दोस्त निकला। बात बात में रिया ने अमन का नाम लिया। निर्देशक ने बताया कि उसी दिन जब मरीन ड्राइव पर मिलना था, अमन का एक्सीडेंट हो गया था, ऑटो ने टक्कर मार दी थी। वो 3 महीने अस्पताल में था, उसका फोन टूट गया था। ठीक होने के बाद वो रिया को ढूंढने उसके पीजी गया, पर रिया वहां से शिफ्ट हो चुकी थी।
रिया सुन कर हैरान हो गई। उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने तुरंत निर्देशक से अमन का नया नंबर लिया और फोन किया।
दूसरी तरफ अमन की आवाज थी। दोनों कुछ देर चुप रहे, फिर रिया बोली - तुम ठीक हो? अमन बोला - हाँ, बस तुम्हारी उस अधूरी मुलाकात का इंतजार अभी भी है।
अगली शाम दोनों फिर से मरीन ड्राइव पर मिले, जहाँ उनकी कहानी अधूरी रह गई थी। इस बार वो मुलाकात पूरी हुई। समुंदर गवाह था उनकी दोस्ती का, उनके प्यार का। कहानी खत्म नहीं हुई, बस एक नई शुरुआत हुई थी।
उस शाम के बाद रिया और अमन ने तय किया कि वे कभी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। रिया ने अपनी नई किताब अमन के नाम की और अमन ने अपनी पहली फिल्म रिया को समर्पित की। उनकी अधूरी मुलाकात ने उन्हें सिखाया कि इंतजार में भी प्यार जिंदा रहता है।