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गहरे अंधेरे कमरे में ऊँची खिड़की से आती हल्की-सी चाँद की रोशनी एकमात्र उजाला थी।
कमरे के मास्टर बेड पर एक लड़की पड़ी थी, जिसके हाथ और पैर जंजीरों से बँधे थे
उसके मुँह और आँखों पर पट्टी बँधी थी।
वह बुरी तरह घबराई हुई थी
उसका पूरा शरीर डर से काँप रहा था।
वह बार-बार अपने हाथ-पैर छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जंजीरों की पकड़ से आज़ाद नहीं हो पा रही थी।
हर बार जंजीरों के हिलने से कमरे में एक तेज़ खनखनाहट गूँज उठती, जो उस सन्नाटे में और भी डरावनी लगती थी।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं
वह अपने मुँह पर बँधी पट्टी के पीछे से कुछ कहने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ घुटकर रह जाती थी।
आँखों पर बँधी पट्टी आँसुओं से पूरी तरह गीली हो चुकी थी। उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था
उसे बस कमरे का सन्नाटा, अपने दिल की तेज़ धड़कन और जंजीरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
अचानक कमरे में कहीं से हल्की-सी आहट सुनाई दी।
वह एकदम से ठिठक गई।
उसका शरीर डर से अकड़ गया
उसने साँस तक रोक ली और अपने कानों को उस आवाज़ की दिशा में लगाने की कोशिश करने लगी।
कुछ पल तक सब कुछ शांत रहा।
फिर वही आहट दोबारा सुनाई दी।
इस बार पहले से थोड़ी करीब
उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं
वह घबराकर बेड पर छटपटाने लगी
जंजीरें खनखनाईं, लेकिन उस आवाज़ के अलावा कमरे में कोई हलचल नहीं हुई।
वह समझ नहीं पा रही थी कि वहाँ कोई मौजूद था या उसका डर ही उसे ऐसी आवाज़ें सुनने पर मजबूर कर रहा था।
उसने सिर हिलाकर आँखों की पट्टी खोलने की कोशिश की, मगर पट्टी अपनी जगह बँधी रही।
चाँद की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसके गालों पर बहते आँसू मोतियों की तरह चमक रहे थे, लेकिन उस खूबसूरत चेहरे पर अब सिर्फ दहशत थी।
उसकी उम्र लगभग 20 साल थी
कुछ देर पहले तक वह चाहे जितनी भी हिम्मत जुटाने की कोशिश कर रही थी, अब उसका डर उस पर हावी होता जा रहा था।
वह बस यही चाहती थी कि कोई दरवाज़ा खोले, कोई उसकी आवाज़ सुने और उसे इस अंधेरे कमरे से बाहर निकाल ले।
लेकिन कमरा अब भी खामोश था।
और वह उस खामोशी में किसी अनजान आहट के दोबारा सुनाई देने का इंतज़ार कर रही थी।
तभी दरवाजे के खुलने की आवाज आईं
चरर…….
चरर…….
और किसी के चलने की भारी कदमों की आवाज आई
टक……
टक……टक……
लड़की झटपटाने लगी उसके आंसू तेज बहने लगे वो कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी पर अब बेकार
वो आवाज धीरे धीरे उसके पास आई
उसे महसूस हुआ कि कोई उसके पास बेड पर बैठा है
लेकिन कोई आवाज नहीं हुई बस आवाज थी तो लड़की के जंजीरों की
सामने बैठे शख्स के महंगे परफ्यूम की खुशबू उस लड़की को महसूस होने लगी
शख्स ने हाथ उठाकर बहुत आराम से लड़की के होंठो से पट्टी हटाई लेकिन आँखो से नहीं
पट्टी हटते ही लड़की ने गहरी सांस ली
क……कौन हो तुम ?
म…मुझे य…यहां क्यों कैद किया है ?
लड़की के रोने की आवाज उस कमरे की खामोशी को तोड़ रही थी लेकिन सामने से उसे कोई जवाब नहीं मिला …… ।