Mafia’s possession chapter 7 in Hindi Women Focused by Luna Rinn books and stories PDF | Mafia’s possession chapter 7

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Mafia’s possession chapter 7

अब तक

फ़ना के जाने के बाद अब मैनेजर भी कुछ नहीं कर सकता था। वह खुद घबरा गया था कि वह मिस्टर भारद्वाज को कैसे एक्सप्लेन करेगा।

घर पहुंच कर फ़ना रोजाना की तरह सो गई, लेकिन आज बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी। उसी वक्त फ़ना का फोन रिंग करने लगा और जैसे ही उसने कॉल पिक किया। फोन पर उसे कुछ ऐसा सुनने को मिला, जिससे फ़ना के होश उड़ गए और फ़ना की आंखों से झर झर आंसू बहने लगे। वह बिना सोचे समझे उठी और उसके बाद वह उन्हीं कपड़ों में अस्पताल के लिए निकल गई। आने वाले दौर में फ़ना के साथ क्या होने वाला था, यह फ़ना खुद भी नहीं जानती थी।

अब आगे-

फ़ना को जब अस्पताल से कॉल आया था तो वह बिना सोचे समझे हॉस्पिटल के लिए निकल गई थी। जब वह अस्पताल पहुंची, तो वहां पर एक सरप्राइज उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था।

फ़ना जल्दी से उस डॉक्टर के पास आई, जिसका कॉल आया था। उनसे बात कर रही थी तो डॉक्टर ने उसे यह बताया कि उसके भाई का ऑपरेशन उन्हें कल ही करना होगा, वरना उसे बचाना इंपॉसिबल हो जाएगा। यह सुनते ही फ़ना के तो पैरों तले से जमीन खिसक गई, मानो उसकी दुनिया ही उजड़ गई थी। क्योंकि अभी उसके पास 10 दिन का वक्त था और अब कल ही ऑपरेशन करना पड़ेगा।

फ़ना ने घबराते हुए कहा, "लेकिन डॉक्टर आपने कहा था, अभी 10 दिन का वक्त है और अचानक से आप मुझसे ऐसे कहेंगे कि मैं पैसों का इंतजाम कर लूं, तो यह कैसे पॉसिबल है, मुझे थोड़ा तो वक्त दीजिए।"

"देखिए, हम कुछ नहीं कर सकते इसमें, अगर आप अपने भाई को नहीं बचा सकती है, तो इसे यहां से ले जाइए। हमारे हॉस्पिटल में पेशेंट की कमी नहीं है।" उस डॉक्टर के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर तो फ़ना जैसे टूट गई थी और इंसानियत भी दुनिया में मर गई थी।

लेकिन फ़ना उस डॉक्टर से बदतमीजी नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसे अपने भाई की जान बचानी थी। इसलिए उसने डॉक्टर के सामने गिड़गिड़ाते हुए, अपने हाथ जोड़कर कहा, "प्लीज, मुझे थोड़ा वक्त दीजिए, मैं कल तक पैसे का इंतजाम कैसे कर सकती हूं।"

"प्लीज, आप अपने भाई की डेड बॉडी यहां से ले जा सकती हैं, हम एक जिंदा लाश को अपने हॉस्पिटल में कब तक रखेंगे। हॉस्पिटल बिल कितना हो चुका है कि आप उसे भी पे नहीं कर पा रही है। हमारे और भी पेशेंट है। हम आपके भाई में ही सारा वक्त नहीं दे सकते हैं।" फ़ना डॉक्टर के पैरों में गिर गई और बोली, "प्लीज़ डॉक्टर, समझने की कोशिश कीजिए, मैं कल तक पैसे का इंतजार नहीं कर पाऊंगी और यह कोई छोटी रकम नहीं है। 15 लख रुपए, अगर मैं खुद को भी बेच दूंगी, तो कोई मुझे नहीं देगा। देखिए, मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूं।" "फ़ना जी, मैं डॉक्टर हूं, मैं आपको कल तक का ही वक्त दे सकता हूं, क्योंकि हम ऑलरेडी काफी दिनों से वेट कर रहे हैं। आपका भाई के बचने के चांसेस भी कम है। लेकिन अगर आप ओर देर करेंगी, तो फिर हम कोई गारंटी नहीं लेते हैं।"

 इतना बोलकर वह डॉक्टर वहां से चले जाते हैं। वह फ़ना के आंसुओं या उसके गिड़गिड़ने आने को अवॉयड कर देते हैं। वैसे भी डॉक्टर पत्थर दिल होते हैं। उसने सिर्फ सुना ही था और आज तो वह देख भी चुकी थी। फ़ना टूट कर बिखर चुकी थी और वह अपने भाई के पास में खड़ी हुई थी और आंसू बहा रही थी।

फ़ना ने अपने भाई के हाथों को कसकर पकड़ हुआ था और जोर-जोर से रो रही थी। "मुझे माफ कर दो, आशु अगर मैं आज तुम्हें नहीं बचा पाई, तो मैं कभी खुद को माफ नहीं कर पाऊंगी। मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूं, लेकिन तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर पा रही।"

फ़ना जाने कब तक वहां पर ऐसे ही बैठकर रोती रही और उसके बाद उसे अचानक से याद आ जाता है कि उसे काम पर भी जाना है। इसलिए वह अपना पर्स उठाती है और फिर वहां से निकल गई। वह धीरे-धीरे सड़क पर चल रही थी। शाम का वक्त था, बारिश हो रही थी, लेकिन फ़ना को बारिश से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। फ़ना वही घुटनों के बल बैठ गई और अपने हाथों से मुंह छुपा कर जोर जोर से रोने लगी। वह चिल्ला रही थी, "मैं ही क्यों, मेरे साथ ही क्यों हो रहा है, मुझे ही क्यों पनिशमेंट मिल रही है, मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है।

मेरी जिंदगी में इतने दर्द क्यों है भगवान जी, प्लीज कुछ करिए, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा। मैं कल कहां से इतने पैसे लेकर आऊंगी।"

फ़ना वहीं पर बैठे-बैठे ना जाने कब तक अपने आंसू बहाती रही। एक वक्त ऐसा आया कि उसके आंसू भी सूख गए थे और वह ठंड में ही कांप रही थी। उसके पास पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे।

फ़ना अपने कांपते हुए पैरों से खड़ी हुई। आज उसका दिल चाह रहा था कि वह एक कार के सामने चली जाए और वह कार उसे टक्कर मार कर एक्सीडेंट कर दे और उसी में फ़ना की जान निकल जाए।

फ़नाके दिमाग में सुसाइड करने के ही ख्याल आ रहे थे। वह अपनी जिंदगी से तंग आ चुकी थी। अपने मॉम डैड के पास जाना चाहती थी। जब तक उसके मॉम डैड उसकी जिंदगी में थे, उसे कोई दुख और थी ,उनकी पर आप आज वह क्या बन चुकी है।"

लेकिन फ़ना की आंखों के सामने अपने भाई आशु का चेहरा घूमने लगा। इसलिए वह अपने धीरे-धीरे कदमों से हॉस्टल की तरफ बढ़ने लगी। होटल वालों से बोलकर फ़ना आज बार क्लब नहीं जाती।

फ़ना अपनी चौल में पहुंच गई थी। कमरे में पहुंच कर फ़ना चुपचाप एक कोने में बैठी हुई थी। उसने अपना मुंह घुटनों में छुपा लिया था और सिसक रही थी।

उसका फोन रिंग कर रहा था। फ़ना ने अपना फोन देखा तो उसे बार के मैनेजर का कॉल आ रहा था। पर उसने जैसे ही कॉल पिक किया, दूसरी तरफ से उस मैनेजर की गुस्से भरी आवाज सुनाई दी, "तुम कहां रह गई लड़की, अभी तक आई क्यों नहीं, तुम जानती हो ना कि मिस्टर भारद्वाज को अगर गुस्सा आ गया, तो फिर वह तुम्हारे घर से तुम्हें उठा लेंगे। तुम आखिर चाहती क्या हो कि हमारा बार तुम्हारी वजह से तहस-नहस हो जाए। चुपचाप जल्दी से आ जाओ और खबरदार, जो मना करने की कोशिश की।" मैनेजर इतने गुस्से में था और उसने बिना सोचे समझे फ़ना को सुनाना शुरू कर दिया था।

 मैनेजर की डांट से फ़ना के आंसू ओर तेजी से बहने लगे। उसने हिम्मत करके फोन पर कहा, "आई एम सॉरी मैनेजर सर, बट मैं आज नहीं आऊंगी।"

"चुप चाप बार में आओ, तुम्हारी वजह से हम बहुत बड़ी प्रॉब्लम में फंस जाएंगे। मिस्टर विक्रम भारद्वाज बहुत गुस्से में है और वह तुम ही ही ढूंढ रहे हैं। उन्होंने दो बार तुम्हें बुलाने के लिए हमें ऑर्डर दिया है और अगर तुम अब नहीं आई, तो तुम सोच भी नहीं सकती कि वह तुम्हें घर से उठा लेंगे और उसके बाद, तुम्हारे साथ जो होगा, तुम उसकी जिम्मेदार खुद होगी। जल्द से जल्द रेडी होकर बार में आओ और मिस्टर विक्रम भारद्वाज को ड्रिंक सर्व करो वह। तुम्हारे ही हाथ से ड्रिंक करके पीते हैं। तुम जानती हो ना। उसके बावजूद भी तुम आज लेट हो और अगर तीसरी बार में तुम उनके सामने नहीं हाजिर हुई, तो उसके बाद वह इस बार कोई आग लगा देंगे।"

यह सुनते ही फ़ना घबरा गई और वह मैनेजर से बोली, "लेकिन आज मेरे अंदर हिम्मत नहीं है, मेरा सर दर्द हो रहा है और मुझे फीवर है। प्लीज, आप कुछ करिए, मिस्टर विक्रम भारद्वाज के लिए तो मैं वहां पर काम नहीं करती ना।"

अब तुम मुझसे जुबान लड़ा रही हो। तुम्हें पैसे चाहिए कि नहीं चाहिए मिस्टर भारद्वाज को मना करोगी। तुम तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, किसी की हिम्मत नहीं होती, उनके सामने चू करें।

 फ़ना श्री विक्रम को याद कर कांप जाती है। क्योंकि वह जानती थी कि मिस्टर भारद्वाज अगर गुस्से में आ गए, तो वह क्या ही करेंगे। उनका कोई भरोसा नहीं है, अगर उन्होंने उसे घर से उठा लिया तो, क्योंकि मिस्टर भारद्वाज ने पिछली बार, जो उसके साथ हैवानियत की थी, आज भी वह फ़ना की रूह कंपा देती थी।

फ़ना पहले से ही इतनी टेंशन में थी और अब मैनेजर ने उस पर इतना प्रेशर डाल दिया था कि फ़ना का दिल टूट गया था और वह बिना किसी भाव भाव के तैयार होने लगी।

इधर मैनेजर बार में डरा हुआ था कि अगर फ़ना सही वक्त पर नहीं पहुंची तो मिस्टर भारद्वाज कहीं गुस्से में आकर उसके साथ कुछ बुरा ना कर दे। क्योंकि मिस्टर भारद्वाज ने उसे धमकी दी थी। वह उसकी बिल्कुल बगल में ही बैठे हुए थे और मैनेजर खड़ा हुआ था।

"Mr. भारद्वाज फ़ना बस अभी पहुंच जाएगी। अगर आप कहे तो मैं किसी ओर वेट्रेस को भेज देता हूं। जब तक वह आपकी सेवा करेगी।"

मिस्टर भारद्वाज ने पैनी नजरों से मैनेजर की तरफ देखा और फिर उसे घूरते हुए बोला, "दफा हो जाओ यहां से और जब वह आ जाए, तो उसे भेज देना मेरे पास।"

मैनेजर ने अपना सर हां में हिला दिया। वह जाते हुए यह सोचने लगा कि आखिर फ़ना में ऐसा क्या है कि मिस्टर भारद्वाज को उसके हाथ से ड्रिंक पीनी है, क्योंकि जब से मिस्टर भारद्वाज आए थे, उन्होंने किसी से भी ड्रिंक सर्व करने के लिए नहीं कहा था और कोई भी उनके पास आता, तो वह उसे गुस्से से यूं देखेते, जैस उसकी जान ले लेंगे। जैसे वह शख्स अभी 2 मिनट में यहां से नहीं गया तो।

मिस्टर भारद्वाज ने अपनी वॉच की तरफ देखा। 20 मिनट हो गए थे, लेकिन फ़ना अभी तक नहीं आई थी। जिससे उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने जोर से वाइन की बोतल टेबल पर पटक दी।