अध्याय 5 : सुहागरात और पुलिस का छापा
धाँय!
गोली की आवाज सुनते ही पूरी हवेली में भगदड़ मच गई।
नित्या घबरा कर उठ गई, "पुलिस! पुलिस आ गई! अब तू गया रुद्र!"
उसके चेहरे पर पहली बार एक उम्मीद की रोशनी आई।
रुद्र ने खिड़की से बाहर देखा। नीचे रायपुर के SP, इंस्पेक्टर यादव, 20 पुलिस वालों के साथ खड़े थे।
"रुद्र सिंह राजावत! तुम्हें नित्या शर्मा के किडनैपिंग के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है! बाहर आओ!" लाउडस्पीकर पर आवाज आई।
रुद्र ने पीछे मुड़कर नित्या को देखा। नित्या मुस्कुरा रही थी।
"सुना? तेरा खेल खत्म।"
रुद्र मुस्कुराया। वही सनकी मुस्कान।
"खेल तो अब शुरू हुआ है, बीवी।"
उसने अलमारी से अपना काला कुर्ता निकाला और पहन लिया। सिंदूर लगी हुई नित्या को देखकर बोला, "चल, तुझे भी सबको बताना है कि तू मेरी बीवी है।"
"मैं कभी नहीं कहूंगी!" नित्या ने कहा।
"कहेगी।" रुद्र ने उसका हाथ पकड़ा और उसे घसीटते हुए नीचे ले गया।
हवेली का बड़ा सा दरवाजा खुला।
SP यादव ने बंदूक तान दी, "रुद्र, लड़की को छोड़ दो!"
रुद्र के 50 गार्ड भी छत पर बंदूकें लेकर खड़े हो गए। एक तरफ पुलिस, एक तरफ रुद्र की आर्मी।
तभी भीड़ को चीरते हुए एक औरत आई - नित्या की माँ।
"नित्या! मेरी बच्ची!" माँ रोते हुए भागी।
"माँ!" नित्या भी रो पड़ी और अपनी माँ से लिपट गई।
SP ने कहा, "देखा? लड़की खुद कह रही है इसे बचाओ। रुद्र, तुम गिरफ्तार हो।"
सबको लगा रुद्र अब जाएगा जेल। पर रुद्र ने जेब से एक कागज निकाला और SP के मुँह पर फेंक दिया।
"ये क्या है?" SP ने कागज खोला।
उसमें था - *Marriage Certificate. रुद्र सिंह राजावत और नित्या शर्मा का।* साथ में मंडप की फोटो, जिसमें नित्या मांग में सिंदूर लगाए बैठी है। और पंडित जी का साइन।
SP का चेहरा उतर गया।
"ये... ये शादी सर्टिफिकेट है। ये तो 2 घंटे पहले ही रजिस्टर्ड हुआ है।"
नित्या चिल्लाई, "झूठ है! ये जबरदस्ती की शादी है! सर, इसने मेरी स्कूटी जलाई, मुझे किडनैप किया!"
रुद्र ने एकदम शांत आवाज में कहा, "SP साहब, मेरी बीवी थोड़ी गुस्से में है। सुबह हमारा छोटा सा झगड़ा हुआ था, तो नाराज होकर मायके जाने की जिद कर रही है। बीवी का गुस्सा है। आप तो समझते हैं।"
उसने नित्या को खींच कर अपने सीने से लगा लिया।
"बोलो जान, बोलो सबको कि तुम मेरी बीवी हो। वरना... तुम्हारी माँ यहीं खड़ी है।"
नित्या ने अपनी माँ को देखा। रुद्र के एक इशारे पर एक गार्ड ने उसकी माँ की तरफ बंदूक तान दी।
डर से नित्या कांप गई।
आँखों में आँसू लिए, दांत पीसते हुए नित्या ने कहा, "हाँ... मैं... मैं इसकी बीवी हूँ।"
पुलिस के होश उड़ गए। SP ने कहा, "देखिए मैडम, अगर आप पर कोई दबाव है तो बताइए।"
नित्या कुछ बोलती, उससे पहले रुद्र ने उसकी मांग का सिंदूर सबको दिखाया, "दबाव? SP साहब, ये देखिए। ये सिंदूर। ये मेरी जंगली बिल्ली अब पालतू बिल्ली बन गई है।"
SP ने कागज वापस दिया, "ये तो घर का मामला है। हम कुछ नहीं कर सकते। चलो सब।"
पुलिस चली गई।
नित्या की माँ रोते हुए बोली, "नित्या, तूने हाँ क्यों बोला?"
नित्या कुछ नहीं बोल पाई। रुद्र ने उसकी माँ को 10 लाख का चेक दिया, "सासू माँ, आप घर जाइए। आपकी बेटी अब राज करेगी। महीने का खर्चा मैं भेजता रहूंगा।"
माँ को भी गार्ड जबरदस्ती गाड़ी में बिठा कर ले गए।
रात हो गई।
हवेली फिर से सजी हुई थी। कमरे में गुलाब के फूल बिछे थे। दूध का गिलास रखा था।
आज रुद्र और नित्या की सुहागरात थी।
नित्या दुल्हन के जोड़े में बेड पर बैठी रो रही थी।
रुद्र कमरे में आया। उसने दरवाजा बंद किया और शेरवानी उतार कर सिर्फ कुर्ते में आ गया।
वो बेड पर आया। नित्या पीछे खिसक गई।
"डर मत।" रुद्र ने कहा। "मैंने कहा था ना, जबरदस्ती नहीं करूँगा।"
उसने जेब से एक छोटी सी डिब्बी निकाली। उसमें एक बहुत महंगी हीरे की अंगूठी थी।
"आज से तू मेरी हुई। तो ये हक बनता है।"
उसने नित्या का हाथ पकड़ा और अंगूठी पहनाने लगा।
तभी नित्या ने गुस्से में दूध का गिलास उठाया और रुद्र के ऊपर फेंक दिया। पूरा दूध उसकी शेरवानी पर गिर गया।
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया।
रुद्र ने अपने सफेद कुर्ते पर गिरा हुआ दूध देखा। फिर नित्या को देखा।
नित्या को लगा अब वो मरेगी।
पर रुद्र ने कुछ नहीं कहा। उसने धीरे से अपना कुर्ता उतार दिया। अब वो ऊपर से...
नित्या ने आँखें बंद कर लीं।
रुद्र हँसा और उसके कान में बोला, *"दूध तो तुझे मुझे पिलाना था, बीवी... गिरा क्यों दिया? चलो कोई नहीं, अब सीधा यहीं से पी लेता हूँ..."*
उसने नित्या को बेड पर धकेल दिया।
अगले अध्याय में क्या होगा?
क्या रुद्र अपनी हद पार कर देगा? क्या नित्या अपनी सुहागरात पर खुद को बचा पाएगी? और तभी हवेली के तहखाने से एक लड़की के चीखने की आवाज क्यों आएगी जो बिल्कुल नित्या जैसी होगी?
जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 6 : तहखाने में दूसरी नित्या