Why every time? in Hindi Drama by Miss angel books and stories PDF | हर बार में ही क्यों ?

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हर बार में ही क्यों ?

भाग 1 — खुशियों से पहले का तूफ़ान

लेखिका — Miss Angel

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लखनऊ — सुबह के 7:30 बजे

"काव्याआआआ...!"

पूरे घर में एक महिला की आवाज़ गूँज उठी।

"काव्या! उठ भी जा महारानी! आठ बजने वाले हैं!"

कमरे के अंदर एक लड़की रजाई में मुँह छिपाए सो रही थी।

बिखरे हुए बाल, तकिए के नीचे दबा मोबाइल और चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान।

यह थी काव्या शर्मा।

उम्र — 20 साल।

स्वभाव — चुलबुली, ज़िद्दी, थोड़ी नटखट और बेहद भावुक।

काव्या उन लड़कियों में से थी जो खुद परेशान होकर भी दूसरों को हँसाना जानती थीं।

लेकिन उसकी एक आदत बहुत खराब थी।

वह जिस इंसान को अपना मान लेती थी, उस पर आँखें बंद करके भरोसा कर लेती थी।

"काव्याआआ!"

इस बार आवाज़ के साथ दरवाज़ा भी खुल गया।

उसकी माँ, सुमित्रा शर्मा, हाथ में पानी का गिलास लिए खड़ी थीं।

"उठ रही है या पानी डालूँ?"

काव्या ने रजाई के अंदर से जवाब दिया।

"मम्मी, बस पाँच मिनट!"

"पिछले आधे घंटे से तेरे पाँच मिनट खत्म नहीं हो रहे!"

काव्या अचानक उठकर बैठ गई।

"मम्मी! आपको पता है, नींद पूरी न होने से इंसान की खूबसूरती कम हो जाती है!"

सुमित्रा ने कमर पर हाथ रखा।

"तो फिर तू बचपन से ही इतनी देर क्यों सोती है?"

"मम्मी!"

काव्या ने तकिया उठाकर मुँह छिपा लिया।

सुमित्रा हँसते हुए कमरे से बाहर चली गईं।

काव्या भी हँस पड़ी।

उसे क्या पता था कि कुछ ही दिनों बाद इसी कमरे में उसकी हँसी की जगह एक लंबी खामोशी रहने वाली थी।

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शर्मा परिवार

काव्या एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी थी।

उसके पिता महेश शर्मा एक छोटी-सी कपड़ों की दुकान चलाते थे।

माँ सुमित्रा गृहिणी थीं।

उसका बड़ा भाई करण शर्मा, उम्र 25 साल, एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था।

करण अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करता था, लेकिन दोनों की लड़ाई भी रोज़ होती थी।

उस सुबह भी कुछ ऐसा ही हुआ।

काव्या तैयार होकर नीचे आई।

गुलाबी कुर्ती, सफेद जींस, खुले बाल और कानों में छोटी-छोटी बालियाँ।

करण नाश्ते की मेज़ पर बैठा था।

उसने काव्या को देखा।

"अरे वाह! आज सूरज पश्चिम से निकला क्या?"

काव्या ने आँखें छोटी कीं।

"क्यों?"

"क्योंकि आज हमारी कुंभकर्ण की बहन आठ बजे उठ गई!"

"भैया!"

"हाँ, बोलो महारानी!"

काव्या ने उसकी प्लेट से पराठा उठा लिया।

"अब यही तुम्हारी सज़ा है!"

करण चिल्लाया।

"मम्मी! देखो आपकी बेटी चोरी कर रही है!"

काव्या मुँह बनाकर बोली।

"चोरी नहीं, टैक्स वसूल रही हूँ!"

पूरा परिवार हँस पड़ा।

महेश ने प्यार से काव्या के सिर पर हाथ रखा।

"हमारी बिटिया हमेशा ऐसे ही हँसती रहे।"

काव्या ने मुस्कुराकर कहा।

"पापा, मैं तो पूरी दुनिया को हँसाऊँगी!"

महेश ने जवाब दिया।

"बस अपनी हँसी कभी मत खोना।"

काव्या ने उनकी बात पर सिर हिला दिया।

उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यही पिता अपनी बेटी की एक मुस्कान देखने के लिए तरस जाएँगे।

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कॉलेज — सुबह 10:15 बजे

"काव्याआआ!"

पीछे से किसी ने उसे ज़ोर से पुकारा।

काव्या पलटी।

सामने उसकी सबसे अच्छी दोस्त रिया मल्होत्रा खड़ी थी।

दोनों की दोस्ती स्कूल के दिनों से थी।

काव्या के लिए रिया सिर्फ़ दोस्त नहीं, उसकी बहन जैसी थी।

उसके दिल की हर बात रिया जानती थी।

"कहाँ मर गई थी तू?" रिया ने पूछा।

काव्या ने मुँह बनाया।

"सुबह-सुबह मरने की बातें मत किया कर! अभी तो मुझे शादी करनी है, बच्चे पालने हैं और बूढ़ी होकर अपने पति को परेशान भी करना है!"

रिया ज़ोर से हँस पड़ी।

"और पति कौन होगा?"

काव्या के गाल हल्के गुलाबी हो गए।

रिया ने उसे छेड़ा।

"ओहो! नाम सुनते ही चेहरा लाल!"

"चुप कर!"

"अच्छा, तो आज भी आरव से मिलने जा रही है?"

काव्या ने धीरे से सिर हिलाया।

आरव खन्ना।

उम्र — 23 साल।

अमीर परिवार का इकलौता बेटा।

आकर्षक व्यक्तित्व, मीठी बातें और सामने वाले को अपनी बातों में उलझा लेने का हुनर।

काव्या पिछले दो साल से उससे प्यार करती थी।

उसके लिए आरव सिर्फ़ उसका प्रेमी नहीं था।

वह उसका पहला प्यार, पहला विश्वास और भविष्य का सबसे खूबसूरत सपना था।

रिया ने मुस्कुराकर पूछा।

"काव्या, तू आरव पर इतना भरोसा कैसे कर लेती है?"

काव्या ने बिना सोचे जवाब दिया।

"क्योंकि वह कभी मेरा भरोसा नहीं तोड़ेगा।"

रिया कुछ पल उसे देखती रही।

फिर नज़रें फेर लीं।

"हाँ... शायद।"

काव्या ने ध्यान नहीं दिया।

अगर उस दिन उसने रिया की आँखों में छिपी बेचैनी पढ़ ली होती, तो शायद आगे की कहानी कुछ और होती।

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शाम 5 बजे — गोमती रिवरफ्रंट

हल्की ठंडी हवा चल रही थी।

सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था।

काव्या नदी के किनारे खड़ी बार-बार अपना मोबाइल देख रही थी।



आरव ने उसे पाँच बजे बुलाया था।

लेकिन अब साढ़े पाँच हो चुके थे।

"जनाब को तो समय की कोई कद्र ही नहीं!"

काव्या बड़बड़ाई।

तभी पीछे से किसी ने उसकी आँखों पर हाथ रख दिए।

"पहचान 


༺❀ 𝑾𝒓𝒊𝒕𝒕𝒆𝒏 𝒃𝒚 𝑴𝒊𝒔𝒔 𝑨𝒏𝒈𝒆𝒍 ❀༻