Sneh in Hindi Short Stories by Anjali Dhabhai books and stories PDF | स्नेह

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स्नेह

मां कितने जतन से अपने बच्चों को पालपोस कर बड़ा करती हैं। वो चाहे अकेली हो या परिवार के साथ पर वो अपने बच्चों को परवरिश देती हैं ,पर क्या बच्चे अपनी एक माँ को ढंग से रख पाते हैं वो प्यार दुलार दे पाते हैं यही सब मांजी सोचते सोचते।                                                  जैसे ही बाथरूम में मांजी नहाने घुसी अचानक चप्पल से फिसली और गिर पड़ी ।दर्द से कराहते हुई अपने आप को संभाला और जैसे तैसे कर के स्वयं उठी और वापस अंदर कमरे में आई देखा तो हाथो से खून निकल रहा था । तीन तीन ,बेटे बहु  ,पोते पोती सब हैं भर पूरा परिवार लेकिन आज उनके पास कोई भी नही है । बड़ी बहू तो बहुत मीठा बोलती है और सब को अच्छी भी लगती हैं लेकिन बड़ा  बेटा बैंक में मैनेजर हैं तो वो अपने बीवी बच्चों को लेकर शहर चला गया ।  मंझली बहू को किसी से कोई मतलब नही वो अपने आप मे ही मस्त रहती है एक बेटा है वो अंग्रेजी स्कूल में पढ़ता हैं वो भी अपने पति के साथ ही बड़े शहर में जाकर रहने लगी । छोटी बहू बहुत कड़वा बोलती हैं पर सच बोलती हैं  उसे जैसा लगता हैं वही बात वो मुँह पर कह देती है, एक बार मांजी और छोटी बहू की किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई तो छोटी बहू ने कहा सेवा में ही करुँगी देख लेना । तो मांजी ने भी तुनक कर कहा तुझ से तो मैं  कभी न करवाऊ  मेरी सेवा देख लेना । बात आई गई हो  गई वैसे छोटी बहू भी बेटे के साथ अपने नए घर मे शिफ्ट हो चुकी थी। पर आज मांजी की ऐसी हालत होगई थी  कि किसी को तो बुलाना ही पड़ेगा या उनके पास जाना पड़ेगा ।सबसे पहले बड़ी बहू को फोन किया तो वो बोली मांजी मेरी तो खुद की तबियत ठीक नही वहाँ मै आ नही सकती और यहाँ भी आप आओगी तो आपकी कौन सार सम्भाल करेगा ,दवाई लो ठीक हो जाओगी  फिर देखते हैं। बहु की बात सुन दिल तो बहुत दुखी हुवा पर क्या करे ।फिर मझली बहु को फोन किया तो उसने कहा कि मेरे बेटे के एग्जाम है सो में तो बिल्कुल भी फुर्सत में नही हूँ ।अब मांजी ने सोचा छोटी बहू को तो फोन करके कोई फायदा नही वो कोनसी आएगी यह सोच कर फोन नही किया । शाम को अचानक फोन की घण्टी बजी मांजी ने फोन उठाया उधर से आवाज आई क्यो मांजी गिर पड़ी ना तुम्हारी लाडली बहुएं नही आई ना सब खबर हैं मुझे आपकी पूरी जासूसी रखती हूँ कि कहि तकलीफ में तो नही है।मांजी कुछ नही बोली  उन्हें पता था ये कड़वी बोलती हैं पर सत्य बोलती हैं फिर बोली कि कल तुम्हारे पोते को लेने भेज रही हूं अपना समान लेकर उसके साथ यहाँ आजाओ और फिर यही रहना आराम से  ,मांजी मैने भी उस दिन ठान लिया था जब सेवा करने की जरूरत होगी तो मै ही करुँगी देखे कौन रोकता हैं मुझे ,यह सुन मांजी की आँखों से आँसू बहने लगे।।                    अंजली धाभाई ,सीकर राजस्थान