दास्तान-ए-अश्क - 21

वह कई दिनों से देख रही थी उसका नंना बहुत रोता था!
दूध भी नहीं पीता था जैसे जैसे वह बड़ा होता जा रहा था उसकी फिजिकल ग्रोथ बहुत कम थी! उस दिन उस को बहोत ज्यादा रोता हुवा देखकर बिलबिला उठी! 
"चुप हो जा बेटा ... क्यों रो रहा है इतना.
?"
पर आज वो चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था ! 
हार कर वो अपनी सासू मां के पास गई ! "मम्मी... देखो ना  नन्ना कितना रो रहा है..! 
मम्मी भी उसकी नीली पड रही बोडी को देखकर परेशान हो गई..! कुछ हद तक वो भी घबरा गई! 
आनन-फानन में उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया..! 
वो बदहवास कभी डॉक्टर की तरफ और कभी रो रहे अपने बच्चे की तरफ देखती है! 
"क्या हुआ इसे क्यों इतना रो रहा है यह आज..?
चेक अप करने के बाद डॉक्टर बताते हैं कि तुम्हारे बच्चे को एक बहुत अजीब सा रोग है! इस के दिल में छेद है !और यह बीमारी लाखों में किसी एक बच्चे में होती है !"
डॉक्टर की बात सुनकर वह सन्न रह जाती है !
और पास पड़ी हुई कुर्सी पर भरभरा कर गिर पड़ती है !
"हे भगवान ये कैसी परीक्षा ले रहा है तू मेरी अभी कितने और दर्द बाकी है..? मेरी जिंदगी में एक यही तो एक जीने की वजह है..! 
मेरे जीने की वह एक वजह भी मुझसे छीन लेना चाहता है ?
क्यों मेरे साथ ऐसा कर रहा है? ऐसा क्या बुरा काम किया है मैंने ..?
वह बावलों की तरह रो चिल्ला रही थी! तभी डॉक्टर कहते ने उसे सांत्वना दी! 
"घबराओ मत ..! इस बीमारी का इलाज है..! समय के साथ कई बच्चों में यह बीमारी अपने आप ही खत्म हो जाती है..! और अगर नहीं होती तो इसके लिए एक ऑपरेशन करवाना होता है 12 साल की उम्र में ..!
लेकिन तब तक आपको इसका बहुत ख्याल रखना होगा..! इसके खाने का इसके पीने का और इसकी हर बात को बहुत केयरफुली लेना होगा...!
डॉक्टर आप जैसा कहेंगे मैं वैसा करूंगी ..! मैं अपने बच्चे को कुछ नहीं होने दूंगी..!अपनी जान से भी ज्यादा इसका ख्याल रखूंगी ..! बस आप मुझे बता दो कि मुझे करना क्या है..?"
"देखो पहली बात तो ये की इसे ज्यादा रोने नहीं देना..! और दूसरा ऐसे बच्चों को भूख कम लगती है..! लेकिन आपको टाइम के मुताबिक इसको खाने को देना होगा जो भी चीज अच्छी लगे जैसे !
जो भी चीज इसको पसंद आए वह इसको खाने को देनी है! लेकिन ध्यान रहे इसको घी और तेल कम मात्रा में देना है ..!
दूध बहुत और हो सके तो ईसे अंडा और मांस भी खाने को देना है ..!
जैसे-जैसे से बड़ा होगा इसका हार्ट का जो छेद है वह अपने आप भरने लगेगा..!
और अगर ऐसा नहीं भी होता तो 12 साल की उम्र में एक ऑपरेशन होगा ..! जिससे ये बिल्कुल भी ठीक हो जाएगा ..! लेकिन तब तक आपको इसका बहुत ध्यान रखना है!
"हां डॉक्टर मैं अपनी जान से भी ज्यादा अपने बच्चे का ध्यान रखूंगी..! क्योंकि ये बच्चा है तो मैं हूं ..! मेरे बच्चे को कुछ हुआ तो मैं भी जिंदा नहीं रहूंगी..!
बी केयरफुल..!
ईतना कहकर डॉक्टर चले गए !
घर पर ये खबर सुन सब के चहरे उतर गए थे! एक खुशी की उम्निद थी वो भी उपर वाला छीन लेना चाहता था!
उसने बच्चा दिया भी तो कैसा जिसके जीने की कोई उम्मीद ही नहीं है जिस को जिंदा रखने के लिए ना जाने कितने पापड़ बेलने पड़ेंगे.!
एक साथ किसी की भी जिंदगी में अगर इतनी परेशानियां आती है तो कोई भी इंसान टूट जाता है पर उसने हार नहीं मानी बल्कि अपने आप को और मजबूत बना लिया था!
फिर से एक जंग लड़ने की मौत के साथ जंग..! 
हार गार मारने का मतलब था एक साथ दो-दो दीपक का बुझ जाना!
डॉक्टर के कहे अनुसार  वह बच्चे का अच्छी तरह ख्याल रखना  लगी थी क्योंकि यह बच्चे के साथ उसने छोटे-छोटे अनमोल लम्हे बिताए थे!  इसके साथ अपनी खुशियां बांटने के बहुत सारे वादे किए थे!
वह खुशियों के पल जो जिंदगी से उधार थे  वो जिना चाहती थी..!
जितनी कमियां उसने अपनी जिंदगी में महसूस की थी  वह सब कुछ अपने बच्चे को देख कर अपने अरमान पूरा कर  मैं चाहती थी!
जब से बच्चे की बीमारी के बारे में सुना था घर के सारे सदस्यों का उसके प्रति व्यवहार बदल गया था सभी जैसे उस बच्चे से उम्मीद को खो चुके थे ससुर जी और सास ने तो अपने बेटे को कह भी दिया!
बेटा इस बच्चे की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही पाल पोस कर कुछ बड़ा भी कर लेंगे और यह हमें छोड़ कर चला गया तो फिर से यह घर खाली मकान हो जाएगा..!
ईस घर में एक और बच्चे की जरूरत है  मेरे बच्चे ..!
उसे अपने ससुर पर बहुत गुस्सा आ रहा था! क्योंकि जो नजर के सामने था उसकी तरफ  उनकी निर्लेपता  उसे बहुत कठी थी! 
अभी जिस हालत में नन्हा था  उसको परिवार की बहुत जरूरत थी मां की जरूरत थी वह नहीं चाहती थी कि इस समय एक और बच्चे को पेट में पालकर अपने नन्हे की परेशानी को जरा भी नजरअंदाज कर जाए..! 
मगर सदियों से एकजुट रहे पुरुष समाज ने कभी स्त्रियों की इच्छाओं को बर होने नहीं दिया..! उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचा कर हमेशा उसके अस्तित्व को ललकारा है!
अपनी स्वतंत्रता को  उसने हमेशा खंडित होते देखा है..! 
तो अब भी वह कैसे अपनी मनमर्जी से जी सकती थी  आज तक उसकी मर्जी तो चली ही नहीं थी चला था तो सिर्फ उसके पति ससुर और सास का एक तरफा राज..!
बहुत परेशान थी वह अपने नन्हे को लेकर उसकी छोटी सी जान को बचा पाएगी या नहीं फिक्र होने लगी थी उसे..
          ( क्रमश:)

वह छोटा बच्चा उसकी जिंदगी में आई एकमात्र खुशी को लूट कर चला जाएगा या फिर कुदरत  को कुछ और ही मंजूर था एक औरत सहनशीलता की सारी हदें पार कर सकती है वह तो मैंने दास्तान की नायिका से मिलकर जाना..!

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