जंग-ए-जिंदगी - 12

जंग ए जिंदगी 12

वीर डाकू रानी का डाकू सिहासन तैयार करवाने के लिए कुछ सिपाहियों को सूचना देने लगा कुछ  सिपाहियों को सामान लेने के लिए लगा दिया तो कुछ सिपाहियों ने एक अच्छी सी जगह सब कुछ ठीक करने के लिए कह दिया तभी वीर को एक विचार आया वह तुरंत ही डाकू रानी के पास पहुंचा


तभी डाकू रानी राज महल के बारे में सोच रही है उसे लगता है कि अब वह अकेली रह गई है उसे अच्छा नहीं लग रहा है जैसे एक एक दिन एक 1 बरस के जैसे बिक रहा है उसे लगा उसे अब बंसी की आवश्यकता है लेकिन बंसी को कैसे लाया जाए हां यह काम वीर अवश्य कर सकता है यह काम वीर को ही दूंगी



डाकू रानी ने दो तालियां बजाई और एक सैनिक आया उसने कहा वीर को बुलाओ तभी सिपाही बोला वीरचंद्र आपको मिलने आ चुके हैं


वीर अंदर आया जय श्री कृष्णा

डाकू रानी ने श्री कृष्णा कहा फिर वह बोली तुम्हें कैसे पता मैं तुम्हें याद कर रही हूं तभी

वीर बोला यह तो दिल की बात है हम कैसे बता सकते हैं

फिर डाकू रानी बोली हम तुम्हे एक काम देना चाहते हैं अगर तुम मुझे कर दो तो तुम्हारी बड़ी मेहरबानी रहेगी तभी


वीर बोला मैं तुम पर कैसे मेहरबानी कर सकता हूं तुमने हमारे पर जो मेहरबानी है कि वह क्या कम है?


डाकू रानी बोली छोड़ो मुझे बंसी चाहिए तभी

वीर बोला बंसी मैं कुछ समझा नहीं

डाकू रानी हंस कर बोली बंसी यानी मेरी दोस्त मेरी जिगरी मेरी जान मेरी धड़कन जिसे मैं राजमहल में भानुपुर के राज महल में छोड़ कर आई हूं मुझे पता है वह भी मेरे बिना कुछ अच्छा नहीं महसूस कर रही होगी फिर भी आज मुझे बहुत याद आ रही है उसकी



तुम जाओ और बंसी को हमेशा के लिए मेरे पास लेकर आ जाओ तब

वीर बोला जैसी आपकी आज्ञा डाकू रानी

तब डाकू रानी बोली आप की नहीं तुम्हारी आज्ञा


डाकू रानी ठीक है अब मैं चलता हूं


बंसी राजकुमारी दिशा के कक्ष में है वह राजकुमारी दिशा की तस्वीर के साथ बातें कर रही है बंसी कह रही है मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी तुम मुझे अकेले छोड़ कर चली गई




हम दोनों छोटी छोटी थी तब से साथ है लेकिन तुमने मुझे छोड़ दिया 6 महीनों से छोड़ दिया मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी तुम ऐसे कैसे कर सकती हो तुम्हें मेरी याद भी नहीं आती लेकिन मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है 1 दिन जिससे 1 साल का बीत रहा है तुमने मुझे वादा किया था तू मुझे लेने जरूर आएगी लेकिन नहीं आई याद रखना मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी कभी नहीं

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सुबह हुई राज महल में एक चूड़ी बेचने वाला आया उसने महाराजा सूर्य प्रताप के मंत्री सुमेर उसे परवानगी ली वह कक्ष कक्ष में जाकर सबको पूछेगा चिड़िया लेनी है या नहीं वह चूड़ी बेचने वाला राज महल में प्रवेश कर चुका पहले उसने "राजमाता" को चूड़ी दी फिर "जननी" को भी चूड़ी बेचने फिर मनोरमा हेमलता करुणा सब को भी चूड़ी दी कुछ सेविकाएं चूड़िया खरीदी।



फिर सहदेव आया सहदेव ने चूड़ी बेचने वालों को रोका चूड़ी बेचने वाला डर गया उसे लगा सहदेव ने मुझे पहचान लिया अब क्या होगा न जाने में अपने आप को कैसे बचा लूंगा लोग कहते हैं सहदेव वास्तव में सहदेव की तरह है सहदेव से कुछ छुपा नहीं रहता।





वह चूड़ी बेचने वाला सहदेव के पास गया जी जी जी बोलिए राजकुमार जय श्री कृष्णा


सहदेव बोला तुम इतने कांपते क्यों हो मैंने तो तुम्हें कुछ नहीं कहा

तभी चूड़ी बेचने वाला बोला राजकुमार आ आ आ आज से पहले मैंने कभी राजकुमार से बात नहीं की मैं सिर्फ गलियों गलियों में जाकर ही चूड़ी बेचता लेकिन आज पहली बार मैं बहुत बड़े दाम की चूड़ियां लाया और राज महल में बेचने आया तो




राजकुमार बोला छोटी राजकुमारी दिशा को अच्छी लगे ऐसी चिड़िया मुझे दे दो


फिर चूड़ियां बेचने वाला बोला आप मुझे छोटी राजकुमारी दिखाइए फिर मैं आपको उसके लिए चूड़िया दूंगा ऐसे कैसे मैं उसके लिए दे दू मुझे कैसे पता वह राजकुमारी दिशा कैसी है मतलब दिखने में कैसी है



राजकुमार सहदेव बोला ठीक है मैं तुम्हें उसके बारे में बताता हूं उसकी ऊंचाई अच्छी है मतलब नाप की है वह दिखने में बहुत ही सुंदर है उसका चेहरा गोल है उसके हाथ आगे से पतले और खंबे की ओर ऊपर जाते हुए हाथ गाढ़े हैं।


चूड़ियां बेचने वाला ने कहा ठीक है ठीक है लो आप की राजकुमारी को यह चूड़िया बहुत अच्छी लगेगी तभी

सहदेव बोला हां राजकुमारी दिशा को लाख की चूड़ियां बहुत पसंद है और वह सदैव लाख की चूड़ियां पहनती है कांच की चूड़ियां बिल्कुल पसंद नहीं




सहदेव ने चूड़ी बेचने वाले को दाम दिया चूड़ी बेचने वाला आगे चला वह चूड़ी बेचते बेचते बंसी के पास पहुंच गया उसने कहा चूड़ियां ले लो चूड़ियां बहुत अच्छी है और तुम पर बहुत अच्छी जचेगी



बंसी गुस्से होकर बोली हमें नहीं लेनी है यहां से जाओ

फिर चूड़ी बेचने वाला ने फिर से कहा ले लो ले लो बहुत अच्छी है

बंसी बोली हमें नहीं लेनी है

चूड़ी बेचने वाला बोला तुम पर बहुत अच्छी चेगी



बंसी बोली एक बार बोला ना नहीं लेनी है मतलब नहीं लेनी है




सामने से राजमाता आए और बोले चूड़ी बेचने वाला अगर बंसी को नहीं लेनी है तो तू उसे तंग क्यों कर रहा है

चूड़ी बेचने वाला बोला इस राज महल में सब ने चूड़ी ले लेकिन एक यही लड़की बची है तो मैंने सोचा इसे भी दे दू और वैसे मेरी चूड़ी भी खत्म हो जाएगी अगर यह 3/4 ले लेगी तो


तभी राजमाता बोली बंसी ले लो इसकी बात सच है सभी ने ली एक तुमने ही नहीं। पूरे राज महल में ऐसी कोई स्त्री या लड़की नहीं जिसने इस चूड़ी बेचने वाले से चूड़ी नहीं ली। 


जिसे बहुत पसंद थी वह तो मुझे छोड़ कर चली गई अब नहीं लेनी है




राजमाता बोली अगर तुम चूड़ी नहीं लोगी तो तुम्हें तुम्हारी सहेली की कसम दे दूंगी


तभी बंसी बोली ठीक है हमारी सहेली की कसम हमें मत देना हमें बिल्कुल पसंद नहीं है ठीक है


बंसी बोली तुम कोई भी चूड़ी  मुझे दे दो


तभी चूड़ी बेचने वाला बोला मैं तुम्हें चूड़ी बेचने नहीं लेने आया हूं

तब बंसी बोली अपनी जबान पर काबू रखो वरना


फिर चूड़ी बेचने वाला बोला वरना तुम कुछ नहीं कर पाओगे क्योंकि तुम्हारी सहेली तुम्हें याद फरमा रही है


फिर बंसी बोली राजकुमारी दिशा


तभी चूड़ी बेचने वाला बोला धीरे धीरे बोलो मैं तुम्हारे लिए पैगाम लेकर आया राजकुमारी दिशा का पैगम।सुनो तुम्हारी राजकुमारी तुम्हें याद कर रही है उसे अब तुम्हारे बिना अकेलापन महसूस होता है उसने मुझे आदेश दिया है कि मैं तुम्हें यहां से उसके पास ले जाऊ।




तभी सामने से राजकुमार चैतन्य आ रहे हैं उसने कहा वह चूड़ी बेचने वाला किसी ले जाने की बात कर रहा है

तभी बंसी बोली किसी को ले जाने कि नहीं चूड़ियां ले जाने की बात कर रहा है वह कहता है कि यह चूड़ियां लेकर मैं चली गई और फिर उसे दाम देने नहीं आई तो तो मैंने कहा मैं भाग नहीं रही हूं सिर्फ चूड़ी लेकर जा रही और दाम लेनेकर आ रही हु  तो चूड़ी बेचने वाले को मुझ पर विश्वास नहीं आ रहा है



ठीक है मैं दे देता हूं ऐसा कहकर राजकुमार चैतन्य चूड़ी के दाम लीजिए फिर वह चला गया।





बंसी बोली हमें कब और कैसे जाना है

तब चूड़ी बेचने वाले ने कहा तुम रात्रि में राज महल से बाहर आ जाना मैं तुम्हें ले जाऊंगा।

फिर बंसी बोली ठीक है लेकिन मैं तुम पर विश्वास कैसे करूं

तब चूड़ी बेचने वाला बोला मतलब वीर बोला तुम्हारी सहेली ने तुम्हारी दी हुई यह चूड़ी दी है।जैसी राजकुमारी वैसी सहेली।देख लो


फिर बंसी ने चूड़ी देखी और कहा ठीक है हमें तुम पर पूरा विश्वास है तुम मुझे लेने आ जाना चूड़ी बेचने वाला ठीक है तुम राज महल के बाहर आ जाना




उधर डाकू रानी बहुत परेशान हो रही उसे लगा वीर पकड़ा गया तो क्या होगा न जाने महाराजा उसके साथ क्या करेंगे। या फिर वीर बंसी के पास पहुंचा होगा या नहीं


तभी बापू आए और बापु ने कहा क्या सोच रही है मेरी राजकुमारी


डाकू रानी ने कहा बापू हम आपसे एक बात कहें


बापू ने कहा कहो क्या बात है


तभी राजकुमारी बोली बापू मैंने वीर को बंसी को लेने भेजा है अगर महाराजा ने उसे पकड़ लिया तो


तभी मंत्री जगजीत सिंह जी बोले क्या तुम ऐसी गलती कैसे कर सकती हो

तब परम चंद्र बोला वह मेरा बेटा है वीर और वीर कभी अपना काम अधूरा छोड़कर नहीं आता है डाकू रानी देख लेना वह तुम्हारी बंसी को लेकर अवश्य आएगा

फिर बापू बोले फिर भी डाकू रानी तुम ऐसा नहीं करना चाहिए था एक बार हमें पूछ लिया होता तुम खुद भटक रही हो अब बंसी को भटकने के लिए यहां मजबूर कर रही हो


तब डाकू रानी बोली हमें माफ कर दीजिए लेकिन हम बंसी के बिना नहीं रह सकती है बस अब तो अंधेरा भी हो गया है रात्री होने में और वीर अभी तक नहीं आया है




बंसी ने अपना सामान बांध लिया आधी रात में वह राज महल से बाहर आने के लिए निकली बीच में उसे मनोरमा मिली

मनोरमा ने कहा बंसी यह सामान लेकर तुम कहां जा रही हो

तब बंसी ने कहा यह सामान मेरी सहेली का है और मैं उसे उसके गांव भिजवा रही हूं तो एक सैनिक जा रहा है उसे देने जा रही हूं


मनोरमा ने कहा ठीक है जल्दी से वापस आ जाना

बंसी ने कहा कि जी राजकुमारी जी  फिर वह राजमहल के बड़े दरवाजे के पास पहुंची उसने कहा हमें राजकुमारी मनोरमा ने कहा है यह सामान वह सामने कोई सिपाही खड़ा है उसे दे आओ


वह दोनों सैनिकों ने बंसी को राजकुमारी मनोरमा से बातचीत करते हुए देखा इसलिए बंसी को कोई आगे सवाल नहीं किया और उसने देखा राजकुमारी मनोरमा भी वहां है तो कोई सवाल करने का तो प्रश्न ही नहीं है फिर बंसी सिपाही के पास पहुंची और उसने अपना घोड़ा निकाला और दोनों घोड़े पर सवारी करके चले गए


तभी सैनिकों ने चिल्लाना शुरू किया और कुछ सैनिक राजकुमारी मनोरमा राजकुमार सहदेव राजकुमार चैतन्य सब इकट्ठा हो गए और दोनों सैनिक ने बताया बंसी भाग गई


तभी चैतन्य को याद आया कि बंसी और चूड़ी बेचने वाला कुछ बातें कर रहे थे उसने सबको बताया फिर दोनों सिपाहियों को बहुत डांटा और उसके पीछेघोड़े भी लगवाए


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