लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 6

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम

[ साझा उपन्यास ]

कथानक रूपरेखा व संयोजन

नीलम कुलश्रेष्ठ

एपिसोड - 6

माली कुछ दिनों के लिए परिवार सहित अपने गॉंव गया है। । दामिनी लॉन में पाइप से पौधों को पानी दे रही थी। मीशा गार्डन चेयर पर बैठी टैब पर कुछ सर्च कर रही है। किसी ने दामिनी के पीछे से आकर अपने दोनों हाथों से उसकी आँखें बंद कर लीं। दामिनी को बिन्दो की आवाज़ सुनाई दी, ``मैडमवा कौन है ?बूझो तो जाने ?``

दामिनी ने अपने हाथों से आँख बंद करने वाले हाथों को टटोला। पतली सुकुमार उंगलियों के लम्बे नाख़ूनों के स्पर्श से वह समझ गई, `` ये ड्रैक्युला जैसे लम्बे नाखूनों वाले हाथ और किसके हो सकते हैं ?--सावेरी। ``

``ओ-- मम्मा। ``सावेरी दामिनी के सामने आकर इठलाई। उसने सावेरी को ऊपर से नीचे तक देखा। चालीस साल से ऊपर तक की होकर भी वह ऑफ़ शोल्डर मिडी पहने थी। उसी का मैचिंग हेयरबैंड बालों में लगाए हुए थी। गले में सिल्वर कलर की मैटल की लम्बी माला लटक रही थी। दामिनी उससे लिपट गई, ``माई फ़ैशनिस्टा डॉटर। ``

``माई मम्मा। ``

``तू दो दिन कैसे जल्दी आ गई ? चिन्मय क्यों नहीं आया ? ``

``इसलिये आ गई कि मेरी जान मेरी डॉल में पड़ी थी। बहुत दिन से मौसी और उसकी डॉल ने अहमदबाद के रेस्टोरेंट की ख़ाक नहीं छानी। यश को टूर पर जाना पड़ा तो मैं अकेली बोर होती तो जल्दी टपक पड़ी। चिन्मय साहब तो मेडिकल हॉस्टल में मुम्बई में ही रह रहे हैं। उसकी प्रेक्टीकल एग्जाम डेट आ गई तो वह आ नहीं पाया। ``

वह दामिनी को छोड़ कोने में चुप सी खड़ी मीशा से लिपट गई। दामिनी की नज़र उसके खुले कंधों व खुली टांगों पर अटक गई, उसके मन में कुछ झुरझुरी सी होने लगी। वह अपने ज़माने में स्लीवलेस ब्लाउज़ पहनती थी जबकि इक्का दुक्का महिलायें ऐसे ब्लाउज़ पहनतीं थीं। कभी कभी बड़ी उम्र औरतों की नज़रें उसकी बाहों की गोलाइयों पर अटक जातीं थीं। तब वो भी ऐसा ही झुरझुरी जैसा महसूस करतीं होंगी ?

``क्या मुझे छोड़कर रेस्टोरेंट की ख़ाक छानोगी ?``

सावेरी फिर इतराई, ``दिस मस्ती इज़ ओनली फ़ॉर गर्ल्स। ``

सब खुलकर हंस पड़ीं। दामिनी बताने लगी, ``अभी मैं व मीशा अवॉर्ड फ़ंक्शन में गए थे। डोमिनोज़ होकर आये थे। ``

``ओ --हो हमारी ओल्डी मॉम भी डोमिनोज़ जाने लगीं हैं। ``

दामिनी ने आँखें फडफ़ड़ाईं, ``यहां कौन ओल्ड है ?``फिर सब हंस पड़ीं।

फ़्रेश होने के बाद सावेरी ने धीमे से पूछा, ``मॉम ! कुछ पता लगा कि निशि ने क्यों आत्महत्या की थी ?``

``अब तक कुछ नहीं पता लगा। शायद कामिनी कुछ बताये। ``

दोपहर में खाना खाने के बाद तीनों दामिनी के बैडरूम में डबल बैड पर आ लेटीं। मीशा उन दोनों के बीच में थी। दामिनी ने पूछा, ``और सुना मुम्बई में तुम्हारी बिल्डिंग का इंटरनेशनल वूमन`स डे कैसा रहा ?``

``मॉम !तुम्हारी ये बेटी जिस प्रोग्राम में हाथ डालती है, साधारण कैसे हो सकता है ?``

मीशा ने चुटकी ली, ``सब बड़की नानी का असर है। ``

``हाँ, ये बात तो है। ये न ख़ुद चैन से बैठतीं हैं, न बैठने देतीं। ``

``प्रोग्राम के बारे में बताइये। ``

``हम लोगों ने ये चार सौ रूपये पर कूपन में रंगारंग प्रोग्राम विद डिनर ऑर्गनाइज़ किया था। पंद्रह दिन पहले हमने वॉट्स एप पर डांस व सॉंग प्रस्तुत करने वालों के नाम मंगवा लिए। तुम तो जानती हो सत्तर की उम्र की लेडीज़ से लेकर बच्चियां प्रोग्राम देने को तैयार रहतीं हैं। कार्यक्रम का आरम्भ हमने श्रीदेवी को श्रंद्धांजलि देते हुए ग्रुप डाँस से किया था। उन लड़कियों ने समां बाँध दिया `मेरा नाम चिन चिन चूं -- काटे नहीं कटते दिन ये रात --वगैरहा –वगैरहा गानों पर डांस किया । ``न जाने कहाँ से आई है--- `पर तो सबने श्रीदेवी की तरह पारदर्शी रेन कोट पहनकर छाता भी लगा लिया था। ``

``अरे वाह !और भी बढ़िया प्रोग्राम हुए होंगे। ``

`` मीशा ! मुम्बई की नालासोपारा की डांसर टीम को तुमने टी वी पर देखा होगा। उस टीम का ट्रेनर हमारे यहां डांस सिखाने आता था। उसने अपने यहां की टीम का भी ग्रुप डांस करवाया। वहां की एक लेडी दुबई में अरेबियन डांस करती है। उसने अपनी अरेबियन ड्रैस में अपनी कमर थिरका कर सबको अचंभित कर दिया। एक विचित्र बात, वह किसी को न तो अपनी फ़ोटो खींचने देती, न ही अपना डांस करते वीडियो बनाने देती । ``

``वाह और ?``

``हम लोग तो केम्पस की दस बारह प्रेगनेंट लेडीज़ का भी सम्मान करने वाले थे लेकिन -----``

मीशा मंत्रमुग्ध होकर मौसी की बात सुन रही थी, ``लेकिन क्या ?``

``तुम तो जानती हो मैं हर बात मॉम से शेयर करतीं हूँ इसलिए मैंने ये योजना मॉम को बताई। ये एकदम समाज सुधारू टाइप हैं, एकदम से भड़क उठीं। इन्होंने एक लम्बा मेसेज हमारी कमेटी को वॉट्स एप कर दिया। ``

मीशा फिर अधीर हो उठी, `` क्या था उस मेसेज में ?``

उसमें लिखा था, `` गर्भवती होना एक बायोलॉजिकल इंसीडेंट है लेकिन उन स्त्रियों का क्या कुसूर है जो शरीर की किसी प्राकृतिक कमी के कारण गर्भवती नहीं हो पातीं ? समाज उन्हें वैसे भी नीची नज़र से देखता है, ताने मारता है। तो क्या ये उचित होगा कि गर्भवती महिलाओं का सम्मान किया जाये ? वैसी महिलाओं को और शर्मिन्दा किया जाए ?`हम सब सच में शर्म से गढ़ गये। ये सम्मान केंसिल कर दिया। ``

`` मैं जब तुम्हारी उम्र की थी तो वूमन `स डे मतलब कुछ और होता था। स्त्री शक्ति, स्त्री जागरण पर भाषण दिये जाते, कविता व कहानी पाठ किया जाता। एन जी ओज़ नुक्कड़ नाटक करके स्त्री की कमतर स्थितियों को दिखातीं थीं। मैं पत्रिकाओं व अखबारों के महिला दिवस विशेषांक के लिये लेख, कहानी लिखती थी। ``

``मॉम ! जगह जगह होते गैंग रेप या फ़ीमेल टॉर्चर से आपको लगता है कि ज़माना बदला है ?``

``ज़माना धीरे धीरे बदल रहा है। बीसवीं सदी के अंत में से लोग हमारे उठाये प्रश्न स्वीकार करने लगे थे। स्त्रियों ने अपना जीवन जीना सीखा। वो शिकायत करना, अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाना सीख गई है सन दो हज़ार बारह से `ओ बी आर` यानि वन बिलियन राइज़िंग सेलेब्रेट करना आरम्भ हुआ है। तबसे स्त्रियाँ नाच गाकर अपना विरोध प्रगट लगीं हैं। मीशा तुझे तेरी मौसी बाद में बताएगी ये `ओ बी आर `क्या होता है। अभी तू जान मत खाना। ``

``सच कहूँ मॉम ! कुछ होटल्स में, रिज़ॉर्ट में, बिलिडिंग्स में वूमन्स डे एक बिज़नेस हो गया है। हमारी टीम बहुत पैसा कमा लेती है। बिल्डिंग केम्पस का क्लब हाऊस , म्यूज़िक सिस्टम व माइक सस्ते रेंट में बुक हो जाता है। हमारे फ़िक्स केटरर्स हैं। प्रोग्राम देने वाली वाली ख़ुद अपनी कॉस्ट्यूम पहनकर आतीं हैं। हर केम्पस में बहुत सी लेडीज़ कुर्ती, कॉस्ट्यूम ज्वेलरीज़, कुकीज़ और भी रेडीमेड गारमेंट्स का बिज़नेस कर रहीं हैं। उन्हें भी हॉल में किराए पर स्टॉल्स लगाने देते हैं। आजकल लोगों की जेब में पैसा बहुत है तो डिनर के साथ प्रोग्राम के टिकिट्स लेडीज़ धड़ाधड़ ख़रीद लेतीं हैं। बारह कुकीज़ का पैकेट तीन सौ रूपये तक में लोग खरीद लेते हैं। ``

``टिकिट्स कैसे बेचतीं हैं ?``

``हम एक सप्ताह पहले क्लब हाऊस में टिकिट्स बेचने के लिए शाम के छ;बजे से आठ बजे तक बैठते हैं। ``

``नो डाउट। बाज़ारवाद के युग में आज हर बात बाज़ार हो गई है। मीशा !तुम इससे कुछ सीखो। इसके पतिदेव टूर पर रहते हैं। मैंने ही इसे सुझाव दिया कि कुछ निजी काम आरम्भ करे। तो इसकी तीन सहेलियों ने बिल्डिंग में अपना बिज़नेस आरम्भ कर दिया है। ``

``बिज़नेस ?वो भी बिल्डिंग में ?``

``हाँ, उनमें एक कॉलेज की प्रोफ़ेसर भी है। इसका बेटा चिन्मय बड़ा हो गया तो ये मेरी जान खाती थी कि मेरा मन नहीं लग रहा। मुम्बई में लोकल ट्रेन में कौन सफ़र करके नौकरी करे ? ``

``हम बिल्डिंग में हर महीने कोई न कोई प्रोग्राम अरेंज करते हैं। जैसे टेलेंट हंट प्रोग्राम, म्यूज़िकल नाइट, मेहंदी या हेयर स्टाइल कॉम्पीटीशन, क्विज़ कॉंटेस्ट या फिर कोई फ़ेस्टीवल सेलेब्रेशन। होली पर हमने ब्रेक फ़ास्ट, लंच , रेन डाँस विद ऑर्गेनिक कलर्स आयोजित किया था। बिल्डिंग के लोग मुम्बई में ठंडाई पीकर मस्त हो गए थे। ``

मीशा बीच में पूछने लगी, `` आप तो मुंबई के वन ऑफ़ द बेस्ट मॉल्स आर -सिटी मॉल के सामने शानदार बिल्डिंग में रहतीं हैं जहां अपना क्लब हाउस है, जिम है, स्विमिंग पूल है, स्पा है। मैंने सुना है कि वहां छोटा सा फुट स्पा भी है। उसके पानी की धार में पैर डालकर बैठ जाओ थकान उतर जाये। तो आपका मन क्यों नहीं लग रहा था ?``

`` मीशा ! हम जब तक ख़ुश रहतें हैं जब तक हमारा जीवन अर्थपूर्ण रहता है। ये सब तो बाहरी चीज़ें हैं। दिल बहलाने के लिए ठीक हैं, स्वस्थ्य रहने के लिए ठीक हैं लेकिन मन की संतुष्टि का क्या ? मैंने अपनी मॉम जैसी मेहनतकश माँ देखी तो ऐसा लगता था कि मैं जीवन बर्बाद कर रहीं हूँ। ``

`` लेकिन अब भी अधिकतर लेडीज़ हाऊस वाइव्स बनकर मज़े मारना पसंद करतीं हैं। ``

``कभी उनकी बातें सुनीं हैं ?हमेशा चुगली करती रहेंगी या व्रत, भजन में डूबी रहेंगी या डिप्रेशन में जीयेंगी। `` सावेरी के होठों पर मुस्कराहट आ गई क्योंकि मीशा और मॉम को नींद आ गई थी। वह भी करवट बदल कर सो गई

***

मीशा जबसे बाहर घूमने निकलने लगी है तबसे लगता है कि दुनियाँ में बहुत कुछ है प्यार के सिवाय। उसे लगता भी है कि बड़की नानी या मौसी उसे इनडाइरेक्ट भाषण देतीं रहतीं हैं लेकिन क्या ग़लत कर रहीं हैं ? उसे भी उनसे नई नई बातें जानकार बहुत अच्छा लगने लगा है। गुजराती थाली वाले रेस्टोरेंट में उसने बाजरे की रोटी के टुकड़े से काठियावाड़ी बैंगन के भुर्ते को लिया और मौसी से पूछने लगी, ``मौसी !आपके नाम का मीनिंग क्या है ?``

सावेरी हंस पड़ी, ``आज याद आया है ?दक्षिण शास्त्रीय संगीत की एक राग को सावेरी कहतें हैं ?``

``आपकी तो लव मैरिज हुई थी तो आपका शादी के बाद समय फुर्र उड़ जाता होगा ?`

``शादी के बाद हनीमून का समय फुर्र से उड़ जाता है। बाद में समय कैसे काटना है ये सोचना पड़ता है क्योंकि शादी के बाद पता चला कि यश और मेरी हॉबीज़ नहीं मिलती थीं। ``

``आपने पहले ये एक दूसरे से नहीं पूछा था ?``

``उस समय होश ही कहाँ था ? हमारे मिलने के एक महीने बाद ही शादी हो गई थी। तब पता लगा कि इन्हें मूवीज़ देखने का बिल्कुल शौक नहीं है और मुझे दस पंद्रह दिन में एक मूवी तो देखने को चाहिए। ``

``फिर आप मौसाजी से मूवी दिखाने के लिए झगड़ा करतीं होंगी ?``

``नहीं, मैंने झगड़ा नहीं किया। मैंअकेले थिएटर जाने लगी। वहां देखा मेरे जैसी कुछ और लेडीज़ अकेली आतीं हैं तो हमने` मूवी वॉट्स एप ग्रुप` बना लिया जब मन होता है हम एक दूसरे को मेसेज भेजकर साथ में फ़िल्म देखते हैं। आजकल अपने मन के फ़्रस्ट्रेशन को बाहर करने का इलाज है अपना कोई ब्लॉग बना लो या फ़ेस बुक अकाउंट खोल लो। वही मैंने किया। नाऊ आई एम एन्जोयिंग माई लाइफ़। ``

``वाऊ। ``

``फिर भी समय नहीं कटता था तो रेडीमेड गारमेंट्स व कॉस्मेटिक्स ज्वेलरीज़ का ऑनलाइन बुटिक खोल लिया। ``

``ऑनलाइन बुटिक ?``

दामिनी बीच में बोल उठी, ``तुम लोग बातें करो। मैं अंदर जाकर एन जी ओ का मेल चैक करतीं हूँ। कुछ केस पेंडिंग पड़े हैं। सोचतीं हूँ कल वहां काउंसलिंग देने चली ही जाऊं। ``

`` मॉम !श्योर जाइये। मैं हूँ न !``सावेरी ने दोनों हाथ फैलाकर कुर्सी पर टेढ़ी होकर कुछ इस तरह शाहरुख़ ख़ान की आवाज़ निकली कि दामिनी व खिलखिला पड़ीं।

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नीलम कुलश्रेष्ठ

ई-मेल ----kneeli@rediffmail.com

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Sunhera Noorani 2 weeks ago

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Manjula Makvana 2 months ago