विदा रात - 2 in Hindi Social Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | विदा रात - 2

विदा रात - 2

शेखर की  नामर्दी का पता चलने पर उसे अपना सपना बिखरता नज़र आने लगा।हर कुंवारी लड़की की तरह उसने भी सपना देखा था।राजकुमार सा पति,अपना घर और बच्चे यानी छोटा सा सुखी परिवार।उसका घर संसार।
बरखा ने शादी से पहले जिस तरह के पति की कल्पना की थी।पति उसे वैसा ही मिला था।अमीर सम्पन्न पति को पाकर उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा था।लेकिन उसकी खुशी स्थायी नही रह सकी।पति की शारीरिक अक्षमता का पता चलने पर उसे अपने सुखी सपना बिखरता नज़र आने लगा।
  सेक्स मात्र मनोरंजन का साधन ही नही है।शारीरिक ज़रूरत भी है,जो संतान के सृजन में भी कसम आती है।इस शारीरिक जरूरत की पूर्ति होने पर ही औरत मातृत्व ग्रहण करती हैं।शादी के बाद मा बननेकी चाहत हर औरत को होती है।माँ बनकर ही औरत सम्पूर्णता को प्राप्त करती है।शेखर की शारीरिक अक्षमता बरखा को पूर्ण नारी का दर्जा दिलाने में बाधक थी।
पति की शारीरिक अक्षमता पर जब विचार किया,तो बरखा को दो रास्ते नज़र आये।एक रास्ता था,उसकी पत्नी बने रहना।दूसरा उससे रिश्ता तोड़ लेना।
बरखा ने जैसा  चाहा, जैसा सपना देखा शेखर वैसा ही पति था।वह उसका सम्मान करता था।उसका पूरा ख्याल रखता था।उसे चाहता था।प्यार करता था। चाहकर भी अगर पत्नी की शारीरिक ज़रूरत पूरी नही कर पाता, तो इसमें उसका क्या दोष था।यह तो प्राकृतिक देन है।प्रकृति ने उसे पुरसार्थ प्रदान नही किया था।शायद उसके भाग्य में यही लिखा
था।अगर  भाग्य का दोष न होता,तो उसे ऐसा पति क्यो मिलता?
शेखर से संबंध विछेद कर लेने पर न जाने कैसा पति मिले?फिर ऐसी कमी जिसमे उसका कोई दोष नही था कि वजह से तलाक देना उसे जल्दबाज़ी लगी।तलाक से बेहतर पति से सामजस्य बैठाना लगा।उसे यह उचित लगा कि पति की शर्मिन्दगी दूर करने में उसकी मदद करे।संकोच,झिझक त्यागकर पति को सहयोग करे।ऐसा करने पर सेक्स जो पति पत्नी के बीच का मामला है।गुप्त ही बना रहेगा।जो बात पति पत्नी के बीच है,उन्ही के बीच रहेगी।
 शराब कोई काम नही आई।शेखर शराब से शारीरिक अक्षमता दूर नही कर सका।तब वह पत्नी से आंखे चुराने लगा।उससे दूर रहने के लिए कारोबार के बहाने दिल्ली से बाहर जाने लगा।दिल्ली में रहता तो घर पर कम से कम समय रहने का प्रयास करता।देर रात घर लौटता।घर  मे रहता,तो बरखा से बचने के लिए माँ या बहन के पास जा बैठता।
पति की इन हरकतों से बरखा ताड गई कि वह उससे बचने का प्रयास कर रहा है।बरखा नही चाहती थी कि पति ऐसा करे।वह ज्यादा से ज्यादा उसके समीप रहना चाहती थी।इसलिए पति के टूर पर जाने पर वह भी जिद्द करके उसके साथ जाने लगी।शेखर के देर से घर लौटने पर वह नाराज होने लगी।
रात को बैडरूम में वह उसे उकसाती।उसका सहयोग करने का प्रयास करती।परन्तु उससे कोई फायदा नही हुआ।
बरखा जवान और स्वस्थ थी।न उसकी इछाये मरी थी।न ही वह सन्यासिन थी।जो अपनी इच्छाओं का दमन करने में सक्षम हो।वह एक साधारण औरत थी।वह जितना ज्यादा प्रयास पति के करीब जाने का करने लगी।उतनी ज्यादा उसकी भावनाएं उदीप्तत होने लगी।काम इच्छा जागृत होने लगी।
         बरखा के सहयोग के बाद भी शेखर उसकी काम इच्छा की पूर्ति नही कर सका।