पराये स्पर्श का एहसास(भाग 2) in Hindi Women Focused by किशनलाल शर्मा books and stories Free | पराये स्पर्श का एहसास(भाग 2)

पराये स्पर्श का एहसास(भाग 2)

सुमित्रा की भाभी सचिवालय में थी।फिर भी उसे अपनी  ननद की एडहॉक पर नौकरी लगाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े थे।काफी भागदौड़ और सिफरिश के बाद वह अपनी ननद को  सुप्रिण्डेन्ट इंजीनयर ऑफिस में स्टेनो की नौकरी दिला पायी थी।
तीन महीने पहले सुमित्रा इस ऑफिस में आयी थी।मझले कद,सांवले रंग और तीखे  नेंन नक्श की दक्षिण भारतीय युवती के रूखे बाल और उदास निगाहे उड़की सुंदरता में निखार ला रहे थे।आफिस मे कोई ऐसा नही था,जो उसको देख कर प्रभावित न हुआ हो।सबने ऑफिस मे आये रूप के  वासन्दित झोंके को भरपूर ललचाई नज़री से जी भरकर देखा था।ऑफिस की सारी औपचारिकतायें पुरी करके वह अपनी सीट पर आ बैठी थी।
सुमित्रा ऑफिस में उदास,गुमसुम और खोई खोई सी रहती।वह काम पड़ने पर ही किसी मर्द सहकर्मी से बात करती।काम न होने पर चुपचाप अपनी सीट पर बैठी रहती।ऑफिस के लीगो ने सोचा था,समय गुज़रने के साथ हँसने बोलने लगेगी।लेकिन तीन महीने गुज़र जाने पर भी उसमे रत्ती भर अंतर नही आया था।
दो दिन पहले बॉस ने सुमित्रा को अपने चैम्बर में बुलाया था।जैसे ही वह चैम्बर में घुसी बॉस बोले,"आर यू नॉट फीलिंग वेल?"
"यस सर्-----नो। सर् "बॉस के  अप्रत्याशित प्रश्न से उड़की जुबान लड़खड़ा गई,"सर् आई एम कावाईट वेल।मैं अच्छी हूँ।"
"अगर  अच्छी हो तो यह पढ़कर देखो।"बॉस ने सुमित्रा का टाइप किया लेटर उसी की तरफ बढ़ा दिया था।उसने अपना ही टाइप किया लेटर पढ़ा तो अत्यधिक ग्लानि हुई थी।उसने सिक्स को सेक्स और लिव को लव जैसी गलतियां कर दी थी।जिसकी वजह से अर्थ का अनर्थ हो गया था।
"अब तो तुमने देख लिया।"सुमित्रा ने नज़रे उठाई तो बॉस बोले थे।
"सॉरी सर्।"
"तुम यहाँ आयी हो तबसे ऐसे ही काम कर रही हो।"बॉस उसे डांटते हुए बोले,"काम करने का मन नही तो इतनी अप्रोच लगाकर क्यो आयी हो?किसी जरूरतमंद को आने का मौका दो।"
"सर्, सॉरी।इस बार माफ कर दीजिए।"सुमित्रा बॉस के आगे गिड़गिड़ाई थी,"आगे आपको शिकायत का मौका नही दूंगी।"
"ओ के ।उस बार माफ कर रहा हूँ।मन लगाकर काम करो।"
बॉस के चैम्बर से निकलकर अपनी सीट पर बैठते समय सुमित्रा को ऐसा लगा, मानो उसकी चोरी पकड़ी गई हो।छोटे से  लेटर मे इतनी गलतियां?उफ्फ।बॉस ने इसके बारे मे क्या सोचा होगा?आफिस के लोग उसे ही देख रहे थे।सब की नज़रे उस पर ऐसे जमी थी,मानो वे कपडो के पीछे छिपे उसके तन को देखने के लिए लालायित हो।
सुमित्रा उस पत्र को टाइप कर रही थी।तभी रामफल उसके पास आया था।रामफल सबसे पुराना कर्मचारी था।सब उसकी इज़्ज़त करते थे।
"तुम्हारा  एडहॉक अप्पोइंटमेंट है।रेगुलर होने के लिए जरूरी है साहब अच्छी रिपोर्ट भेजे।।"रामफल ,सुमित्रा को समझाते हुए बोला,"साहिब को नाराज़ होने का कोई मौका मत दो।"
आज बॉस ने अफसर घुड़की दी तब उसे रामफल की बात याद आयी थी।उसे नौकरी कु सख्त जरूरत थी।नौकरी पर बने रहने के लिए बॉस को खुश रखना जरूरी था।बॉस को खुश रखने के लिए न चाहते हुए भी वह बॉस के साथ हो ली।
बॉस ने कार में अपने पास सीट पर बैठाया था।कार चलते ही बॉस ने सिगार अपने होठों के नीचे दबा लिया।सुमित्रा एक कोने में सिमटी बैठी सोच रही थी।
 उसने इससे पहले किसी भी ऑफिस में काम नही किया था।इसलिए उसे ऑफिस के माहौल के बारे में किसी तरह का अनुभव नही था।लेकिन उसने सुन काफी रखा था।

क्रमश