Pakshiraj - 4 in Hindi Love Stories by PS Kathariya books and stories PDF | पक्षीराज - अनोखी लव स्टोरी - 4

पक्षीराज - अनोखी लव स्टोरी - 4

अगले दिन अधिराज बिना किसी को बताऐ इंसानी दुनिया में पहुंच जाता है.... उसे तो बस ...आरुषि से मिलने की जल्दी है बस किसी तरह वो आज भी आरुषि से मिल ले
पहले तो कुछ बात नही हो पाई थी लेकिन अब जरुर बात करेगा ...! यही सोचते सोचते वो कालेज की तरफ बढ़ रहा था ...जैसे ही वो कालेज में ऐंटर होता है सब लड़कियो का ध्यान उसकी तरफ जाता है ... आखिर क्यूं न जाए अधिराज था ही इतना हैंडसम ,😘चार्मिंग और तो और कैज्युल लुक ड्रेस अप ,बैक पर गिटार लिए ,होठो पर स्विट स्माइल तो बस सबको उसकी और देखने पर मजबूर कर रही थी ......सब लड़कियां ने उसे घेर लिया और बस गिटार प्ले करने की जिद्द करने लगी पर अधिराज ने साफ इंकार कर दिया ...वो ये गिटार बस किसी खास के लिए प्ले करता है ........आखिर ये खास कौन है ..?.....सबका यही सवाल हो जाता है पर अधिराज कि निगाहें तो बस आरुषि को ही ढुंढ रही थी .....तभी पीछे से एक आवाज आती है .....
" अर्जुन ....."
अधिराज पीछे मुड़ता है और आरुषि को देखकर बहुत खुश हो जाता है आखिर इतनी देर से निगाहें जिसे देखना चाहती थी वो सामने थी
"...एक्सक्यूज मी साइड ही इज माई फ्रेंड ...हाय अर्जुन ...प्लीज जाने दो हमे ( सारी लड़कियां चली जाती है)..
तुम कब आऐ .."
" बस अभी ही आया था इन्होने मुझे रास्ते में ही रोक लिया इसलिए अंदर नहीं आ पाया ..."
" ये तो है ही ऐसी तुम चलो मैं तुम्हे अपने फ्रेंडस से मिलवाती हूं "
" अच्छा हुआ आप मुझे वहां से ले आई पता नहीं मैं कैसे उनसे बच पाता ..."
आरुषि हंस जाती हैं " तुम भी न ..चलो .."
" ये कौन है आरुषि ..?.."
" बताती हूं .... ये है मिस्टर अर्जुन ...मतलब न्यू फ्रेंड है मेरा ...अर्जुन ये पगली मेरी बेस्ट फ्रेंड है रिना ...ये हैं तानिया मिस पढाकू ..और हां गाइज तुम्हे पता है कालेज से जाते टाइम अर्जुन ने मेरी जान बचाई थी ...अगर ये न होता तो पता नही कल क्या .." ..तभी अर्जुन उसे रोकता है
" ये क्या कह रही हो ये तो मेरा फर्ज था आपकी जान बचाना ..."
" एक मिनट अर्जुन प्लीज ये आप आप मत बोलो मुझे अच्छा नहीं लग रहा है ..."
" ठीक है नही बोलूंगा "
" हे ! अर्जुन प्लीज गिटार प्ले करो न .."
" हां हां जरूर .....तुम्हारे लिए ही तो सिखा है ये मैने ( मन में कहा )
अर्जुन आरुषि के कहने पर गिटार बजाने लगता हैं जैसे जैसे गिटार कि धुन सब तरफ फैलती है वैसे वैसे सब लड़कियां इकठ्ठा होने लगती है और बस गौर से अर्जुन को ही देखने लगती है पर अर्जुन तो बस आरुषि को ही देख रहा था ....
गिटार तो एक बहाना था बस उसे आरुषि को ही निहारना था ...तभी अचानक आरुषि निगाहें ऊपर करके देखती है अर्जुन को खुद को देखते देख शर्मा जाती है ......तभी आरुषि कहती .." अच्छा अब हमे चलना चाहिए
....कालेज आफ हो चुका है न .."
" रुक जा आरुषि " रिना ने कहा
" तू यही रह मैं जा रही हूं .."
आरुषि की जाने कि बात सुनकर अर्जुन भी चलने के लिए गिटार पैक कर लेता है ..
"..अब नही बजाओगे .."
" नही मैं भी चलता हूं अब ....आरुषि सुनो .."
" हां ...."
" कल आओगी कालेज "
मुस्कुराते हुए ".. हां आऊंगी ..जरूर "
आज पक्षीराज बहुत खुश है उसने आज अपने प्यार की तरफ पहला कदम बढा़या ..उसे वापस अपने पक्षीलोक जाने की जल्दी नहीं थी बल्कि आरुषि से दोबारा मिलने की हलचल लिए पक्षीराज अपनी दुनिया में वापस लौटता है ....!
.....क्रमशः .......!
अगला भाग जल्दी जारी करुंगी

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