Pakshiraj - 7 in Hindi Love Stories by Pooja Singh books and stories PDF | पक्षीराज - अनोखी लव स्टोरी - 7

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पक्षीराज - अनोखी लव स्टोरी - 7

" आरुषि ...मुझे तुम्हारी यही बातें बहुत पसंद हैं ..मैने तुम्हें अपना लाइफ-पार्टनर चुनकर कोई गलती नहीं करी है ....आइ लव यू आरुषि ....."
" आइ लव यू टू अर्जुन .(गले लग जाती है ).."
" बहुत जल्द आरुषि तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाओगी.. फिर मैं तुम्हें बहुत परेशान करुंगा ..(आरुषि हंस जाती है )"
"...तुम मुझे ऐसे क्यूं देख रहे हो ..."
"..तुम ऐसे ही हंसती रहा करो ....तुम्हारी यही हंसी मुझे सुकून देती है ( दोनों हाथों से आरुषि के गालो को पकड़कर माथे को चूमता है )...."
"..अर्जुन ...गिटार नहीं बजाओगे ..."
"..क्यूं नही ...जो आज्ञा माइ क्वीन ..."
.....अर्जुन गिटार बजाता है और आरुषि अर्जुन के कंधे पर सिर रखकर उसकी धुन में खो जाती हैं ..
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सागरिका गुस्से में सबकुछ तोड़ने लगती है ....
मृगिका : राजकुुुमारी ....ये क्या कर रही हैं....क्या बात हैं ...?आप इतना परेशान क्यूं है ....?
सागरिका : मृगिका ...हम ही अधिराज की पत्नी बनना चाहते है उसकी शक्तियों पर केवल हमारा अधिकार है , वो इंसानी लड़की हमारा अधिकार नहीं लेे सकती.....अधिराज उस इंसानी लड़की को पक्षिलोक की रानी बनाना चाहते है......मृगिका हम ऐसा नहीं होने देंगे ..मार देेंगे उसे ..."
मृगिका : आप ऐसा मत कीजिए राजकुमारी अगर पक्षिराज उस इंसानी लड़की को चाहते हैं तो उस इंसानी लड़की को खत्म करने का मतलब हैं पक्षिराज सेेेे दुश्मनी लेना इसलिए उसे उनसे दूूूर करो ...नफरत भर दो उसके दिल में तभी वो दोनों अलग होंगेेेे ..."
सागरिका मृगिका की बात सुनती है पर कोई खास गौर नहीं करती बस झुठे में हां कर देती है पर अंदर से तो वो आरुषि को मार देना चाहती है ...
🏰पक्षिलोक अधिराज का महल 🏰
अधिराज अपने महल पहुंचता है, जहां राजमाता आंगिकी उसकी ही राह देख रही थी
आंगिकी : आइऐ ....महाराज...!
अधिराज :माां...इस तरह स्वागत क्यूं ...?
आंगिकी : आपका विशेष कार्य हो गया हैं तो हम कुछ पुछ सकते है ...?
अधिराज : माां ...आपको हमसे सवाल पुछने के लिए आज्ञा लेने कि आवश्यकता नहीं है ....आप पुछिए ...!
आंगिकी : इधर आईऐ आप .....ये बताइए क्या पक्षििलोक में लड़कियों की कमी रह गयी थी या कोई आपके लायक नहीं थी ,जो आपने उस इंसानी लड़की को‌ चुना ..."
अधिराज : माां ...आपने पता लगवा ही लिया ....हां .मां पक्षिलोक में हमे कोई नहीं भायी जिसे हम पक्षिलोक की रानी बना सके ....मां आरुषि हमारे विचारो जैसी है ...बहुत अलग हेैं वो और हम जानते है मां वो ही हमारा साथ दे सकती है और कोई नहीं ...हम आरुषि से ही विवाह करेंगे ...!
आंगिकी : ठीक है ...किंतु कालाशौंक ने आपकी कमजोरी समझकर उसे
अधिराज : नहीं मां हम आरुषि को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं , उसे कुछ भी नहीं होने देंगे .....अब बस आरुषि ही यहां की रानी बनेगी ....!
आंगिकी : जैसी आपकी इच्छा किंतुुुु क्या वो भी आप से प्यार करती है ...!
अधिराज : हाां...मां वो भी हमसे उतना ही प्यार करती है, और वो सागरिका जैसी मतलबी नहीं है ...!
आंगिकी : ठीक है ...एक बात और बताओ क्या वो तुुम्हारे
पक्षिरुप से प्यार करती है या इंसानी मतलब उसे पता तुम कौन हो ...!
अधिराज : नहीं मां हमने उसे अपनी सच्चाई नहींं बताई है...!
आंगिकी : तो फिर पहले उसे अपनी सच्चाई बताओ फिर हमे पता चलेेेगाा की वो तुम्हारे लायक है या नहीं ...!
अधिराज : मां ...ये आप क्यूं कह रही हैं ...आरुुुषि हमारे लायक हैं ..!
आंगिकी : ठीक है बेटा हमने तुुुम्हारीी बात मानी अब तुुम उसे अपनी सच्चाई बताओ.....!
अधिराज : ठीक है मां ....कल हम आरुषि को अपनी सच्चाई बताएंगे .....पर क्या तब आरुषि मेरी हो पाऐगी.. (अधिराज ने मन में कहा )
........क्रमशः.......