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हम–तुम

बारिश का मौसम था सोनिया छत पर बारिश की बूंदों के साथ चाय का मजा लेते हुए टहल रही थी। तभी गौरव , जो की सोनिया के पड़ोस में रहता था वो भी हाथ में चाय का कप लिए छत पर आया।

"हाई सोनिया,
" हैलो गौरव,
"देखो, क्या इत्तेफ़ाक है, ये बारिश का मौसम हल्की सी बूंदा बांदी , ये चाय के दो कप और हम–तुम"
सोनिया मुस्कुरा दी। और कहा, "तुम आज बड़े शायराना अंदाज में पेश आ रहे हो बात क्या है?"
गौरव –"शायद मौसम का असर है"
सोनिया–" लगता है तुम्हे बुखार आ गया है।"
और इतना कहते कहते वो जोर जोर से हंसने लगती है ।
गौरव मन ही मन ‘पता नहीं सोनिया तुम कब समझोगी मेरे दिल की बात।’
"कुछ कहा तुमने ?"
"नहीं तो"
इतने में तेज़ बारिश होने लगती है दोनो एक दूसरे को बाय बोलकर नीचे चले जाते है।

सोनिया और गौरव एक साथ ही बड़े हुए आज दोनो ही कॉलेज में है । सोनिया को गौरव बचपन से ही चाहने लगा था लेकिन सोनिया इस बात से अनजान थी । गौरव की कभी उसे साफ साफ कहने की हिम्मत नही हुई।

"अजी सुनते हो,
सोनिया की मम्मी ने उसके पापा को आवाज लगाकर कहा।
"जी श्रीमती जी हम यही बैठे है आप इतना चिल्ला के क्यों बोल रही है?" सोनिया के पापा ने कहा

"मुझे लगा आप कमरे में है इसलिए।"
"कहिए"
"जयपुर वाली शीला काकी है न, उन्होंने सोनिया के लिए एक अच्छा लड़का बताया है , वह डॉक्टर है और उसका खुद का क्लिनिक है । अच्छा कमा लेता है । बच्ची को अच्छा परिवार और अच्छा घर मिल जाए और क्या चाहिए हमें।"
"लेकिन सोनिया अभी कॉलेज कर रही है,रमा जी"
"हां तो में कहा कल ही शादी करने का बोल रही हूं। बात पक्की कर देते है ना । अच्छे रिश्ते जल्दी हाथ से निकल जाते है।"

"ठीक है तो बुलवा लीजिए लड़के वालों को"
"जी मैं अभी शीला काकी को फोन लगाती हूं।" खुश होते हुए रमा जी ने अपनी फोन लिया और किचन में चली गई ।

कुछ देर बाद,

"हो गई बात?"
"जी वो लोग इस रविवार को ही आ रहे है"
"आज क्या वार है?"
"मंगलवार है हम लोगो को तैयारी करनी होगी ।"
"कौन आ रहा है मां?"
सोनिया ने पूछा

"तुझे देखने लड़के वाले आ रहे है ।"
"लेकिन मां,,,,"
वो कुछ कहती उससे पहले उसके पापा ने कहा "बेटा सिर्फ देखने आ रहे है फैसला तेरा ही रहेगा आखिरी , अब आ रहे है तो मना तो नही कर सकते ना।"
सोनिया अपना उतरा हुआ मुंह लेकर बाहर जाने लगी।
"अब कहां जा रही है?"
"गौरव से मिलने"

"लड़की जवान हो गई है पर अब भी उस लड़के से मिलती है क्या कहेंगे लोग?"
"रमा जी वो लोग बचपन के दोस्त है , अब जमाना बदल गया है । आप भी अपनी सोच बदल लीजिए।"
रमा अपना मुंह बनाते हुए घर के काम करने लगी।


गौरव का घर,
"आंटी गौरव है?"
"हां बेटा वो अपने कमरे में है। जाओ में तुम्हारे और उसके लिए नाश्ता लेकर आती हूं।"
"थैंक यू आंटी"

सोनिया गौरव के कमरे में जाति है और बिना कुछ कहे उसके बेड पर बैठ जाती है।
"क्या हुआ मुंह क्यों फूला हुआ है तेरा?"
"यार संडे को मुझे कोई लड़का देखने आ रहा है मुझे नही करनी अभी शादी यार। "
गौरव के तो जैसे पैरो से जमीन खिसक गई
"क्या?"
"हां , यार"
"तुझे क्यों नही करनी शादी ?"
गौरव ने उम्मीद से पूछा
"यार में लव मैरिज करना चाहती हूं।"
गौरव हंसने लगा।
"क्यों हंस रहा है?"
"लव मैरिज के लिए लव करना पड़ता है।तुझे तो अब तक लव भी नही हुआ।"
"तू है ना तुझे तो में बचपन से प्यार करती हूं।"
कहते हुए उसने गौरव के गाल खींच लिए ।
गौरव का दिल जोरो से धड़कने लगा वो गौरव के बहुत करीब थी । गौरव ने उसे देख कर कहा "शादी करेगी मुझसे?"
"क्या?"
सोनिया ने अचानक उसे दूर होते हुए पूछा ।
गौरव उसके रिएक्शन को समझ के हंसने लगा ।
सोनिया ने उसे मारना शुरू किया। दोनो तकिए से लड़ने लगे।
"ओहो तुम लोगो का बचपना अब तक गया नही।"
गौरव की मां चाय–नाश्ता लेकर कमरे में आई।"
"देखो ना आंटी ये मुझे परेशान कर रहा है"
सोनिया ने शिकायती लहजे में कहा
"जब तुम शादी करके चली जाओगी न तब याद आयेगा ये सब।"
सोनिया अचानक मायूस हो गई साथ ही गौरव भी ।
वह चाय पीकर घर चली गई ।

"पापा , शादी करके लड़कियों को ही क्यों जाना पड़ता है घर छोड़ कर? में नही जाऊंगी आप लोगो को छोड़कर।"
सोनिया के पापा हंसते हुए" बेटा , हर लड़की को एक दिन जाना ही होता है ।"
सोनिया अपने कमरे में चली गई ।
आज उसे बारी बारी से अब याद आ रहा था । मां पापा के साथ बिताया समय और गौरव के साथ बिताया बचपन । और गौरव की बात "मुझसे शादी करोगी?"
उसके मन में खयाल आया की क्यों न गौरव से शादी करके यही रह जाऊ मम्मी पापा के पास।

उसने गौरव को मेसेज किया लेकिन उसका कोई रिप्लाई ही नही आया । वह सो गई ।
शाम को वह गौरव के घर गई गौरव नही था । वह उसके कमरे में कोई किताब लेने गई । टेबल पर किताब रखी थी किताब लेकर जब वो पलटी तो उसकी नजर वहां रखी डायरी पर पढ़ी।

उसने डायरी भी अपने साथ ले ली।

घर जाकर उसने डायरी पढ़ने को खोली ।
यार ये गौरव की पर्सनल डायरी है मुझे नही पढ़ना चाहिए ।पर मै तो गौरव की दोस्त हूं पढ़ लेती हुं।
इंसानी फितरत होती है दूसरे लोगो के सीक्रेट जानना बहुत ही उत्सुकता भरा होता है।

उसने वो डायरी को खोला । उसमे सोनिया और उसकी तस्वीर लगी थी। और लिखा था
हम–तुम
एक कविता लिखी थी

"हम–तुम बसाएंगे अपनी दुनिया,
जिसमे बस होगी ढेर सारी खुशियां।

बचपन से देखा है मैने एक सपना ,
हम – तुम ना रहे हो जाए सब अपना।

तुमसे तो मेरी जिंदगी हसीन है,
तुम हो तो मेरी दुनिया रंगीन है।

एक दिन दुल्हन अपनी तुम्हे में बनाऊंगा,
उस दिन दुनिया की सारी खुशियां पा जाऊंगा।

गम को तुम्हे में छूने ना दूंगा ,
इतना प्यार मैं तुमसे करूंगा ।

सोनिया , आई लव यू।"

कविता पढ़ने के बाद सोनिया से आगे की डायरी पढ़ी ही नहीं गई । वो कुछ देर तो शोक में बैठी रही और फिर अचानक गौरव को कॉल किया ।
"कहां है तू?"
"क्यों?"
"तू है कहा?"

"पापा की शॉप पर"
"तू वही रुक में आ रही हूं।"
"पर हुआ क्या?"
"आकर बताती हूं ना"
सोनिया भागी भागी उसके पापा की शॉप पर गई । उसने आसपास देखा और पूछा "अंकल कहां है?"
"वो बाहर गए है।"
सोनिया तेज तेज सांसे ले रही थी।
"तू अकेला है यहां?" उसने कन्फर्म करने पूछा ।
"हां"
सोनिया ने ये सुनते ही उसे गले से लगा लिया ।

गौरव कुछ समझ नही पाया।
"अरे, क्या हुआ अचानक"
"आई लव यू, गौरव"
गौरव का दिल जोरो से धड़क रहा था।
"ये,,,ये तू क्या बोल रही है, तुझे लव मैरिज करनी है और कोई मिल नही रहा तो मुझे ही।"

सोनिया ने उसे चुप करने के लिए उसे किस कर दिया ।
गौरव अब उसके प्यार को महसूस कर पा रहा था ।
"तू सच में मुझसे प्यार करती है?"

"हां, शादी करेगा मुझसे?"
गौरव ने मुस्कुराकर कहा
"हां" और उसे गले से लगा लिया।

सोनिया ने उसे बताया नही कि उसने उसकी डायरी पढ़ी है । ताकि गौरव को ऐसा न लगे की डायरी पढ़ने के बाद उसने ऐसा महसूस किया।

"तू कबसे मुझसे ?"
"आज ही पता चला "
हंसते हुए सोनिया ने कहा


"सोनिया एक तेरे सिवा मेरे घर में सभी को पता है कि मैं तुझे प्यार करता हूं?"
"क्या अंकल आंटी को भी?"
"हां"
"तो क्या कहा उन्होंने"
"तुझे पसंद करते है मेरे यह सब "
सोनिया ने कहा "मेरे भी पापा मान जायेंगे मम्मी का पता नही लेकिन में मना लूंगी"

" सोनिया ‘हम–तुम’ अब अपनी दोस्ती को एक नई दिशा देने जा रहे है ।"
"दोस्ती नही प्यार"
सोनिया ने कहा और उसके गले से लग गई।