Hame tumse pyar kitna... - 7 books and stories free download online pdf in Hindi

हमे तुमसे प्यार कितना... - 7 - विराज और झगड़ा

तभी विराज के रूम का दरवाज़ा फिर खुला। आवाज़ सुनते ही विराज बिना पलटे गुस्से से बोला "नाउ व्हाट!" (अब क्या है!)
कोई जवाब ना आने पर विराज पलटा और सामने खड़े शख्स को देख कर उसका गुस्सा और बढ़ गया।

तू यहां क्या कर रहा है....! विराज ने अपनी एक भाव उचकाते हुए पूछा।

देख विराज.....! गुस्सा छोड़ दे।

अच्छा!

गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।

ओह!

में तेरा दोस्त हूं तू ऐसे मुझ पर गुस्सा नही हो सकता।

एक कुटिल मुस्कुराहट के साथ विराज ने कहा "ये तो तुझे मुझे ताने मारने से पहले सोचना चाहिए था" और अपने कदम उसकी ओर बढ़ाने लगा।

वि...विराज....देख तू

क्या दिखाना है...दिखा

में तुझे बता दे रहा हूं...मेरे नज़दीक मत आना

तो क्या कर लेगा तू...

देख..... तू.... सबके सामने मुझे सुनाने वाला था तू आगे मेरी इंसल्ट और करता इसलिए मैने पहले ही बदला ले लिया।

विराज ने अपनी भवे उचकादी और अपने कदम रोक लिए। फिर अपने कदम बढ़ाते हुए बोला एक तो देर से आता है ऊपर से फोन भी नही उठाता और फिर मुझे ही सुनता है। क्या कह रहा था तू "बच्चा हूं में" "प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ मिक्स करता हूं" विराज ने उसे घूरा।

अहम ने अपनी बतीसी दिखाते हुए कहा सॉरी यार वो तो में ऐसे ही बोल रहा था। तू सीरियसली मत ले।

इतना सब बोलते हुए अहम आगे आगे और विराज उसके पीछे पीछे पूरे कमरे के चक्कर काट रहे थे। विराज उसे पकड़ने की कोशिश कर रहा था और अहम उससे बचने की। अपनी इस फाइट में उन्होंने ये ध्यान भी नही दिया कि इस चक्कर में उन्होंने कितना समान और कितनी फाइल्स नीचे गिरा दी हैं।

अरे यार तू हमेशा मेरी सब स्टाफ के सामने मेरी इंसल्ट करता रहता है तो बस आज भी तू कुछ ऐसा ही करने वाला था इसलिए मैने पहले ही बाज़ी पलट दी हमेशा तेरी मनमानी नहीं चलेगी,,,,,,,,,अहम ने इतराते हुए बोला।

विराज ने पहले रुक कर उसे घूरा फिर कहा तू काम ऐसे करता ही क्यों है की सुनना पड़े।

यार हर वक्त कोई काम कैसे कर सकता है थोड़ा एंजॉयमेंट भी तो होना चाहिए लाइफ में जब तूने फोन किया तो में थोड़ा बिज़ी था,,,,,,,अहम ने अपने आप को बचाने की कोशिश करते हुए कहा क्योंकि विराज उसे टेबल पर आधा लेटा के मुक्के बजा रहा था।

सब समझता हूं तेरा एंजॉयमेंट लेकिन काम के वक्त तो काम कर लिया कर....विराज ने उसका कॉलर पकड़ते हुए कहा।

हां वोही तो कर रहा था,,,,,अहम ने तपाक से बोला।

विराज ने उसे घूरा तो वो चुप हो गया और अपनी एक उंगली मुंह पे रख ली।

अहम ने मुंह पे उंगली रखे हुए ही बड़ी मासूमियत से कहा छोड़ दे यार, माफ करदे, गलती हो गई, लग रही है अब जान लेगा क्या।

विराज उसे छोड़ता उससे पहले ही उसके कमरे का दरवाज़ा फिर खुला। दोनो ने दरवाज़े की तरफ देखा तो महेश जी दरवाज़े के बाहर खड़े हैरानी से कमरे के अंदर का नज़ारा देख रहे थे।

ये सब क्या है? महेश जी ने हैरानी से पूछा।
क्योंकि कमरे की हालत कुछ ठीक नही थी सब सामान इधर उधर बिखरा हुआ था। "छोटे बच्चे हो क्या तुम दोनो"

विराज और अहम दोनो ही अपने कपड़े ठीक करते हुए खड़े हुए।

तुम दोनो कभी नहीं सुधरोगे....महेश जी ने अपना सिर झटकते हुए कहा।

विराज और अहम दोनो के चेहरे पर स्माइल आ गई।

डैड.... ये इंडिया अभी नहीं जायेगा क्योंकि यहां का भी पेंडिंग वर्क है एक बार सब कंप्लीट हो जाए फिर में बुला लूंगा। विराज ने शांत भाव से कहा।

नही....में तुम्हे अकेले वहां नही भेज सकता।

मेरी चिंता मत कीजिए डैड मुझे कुछ नही होगा में सब संभाल लूंगा।

हां अंकल जी तुस्सी फिक्र नॉट और वैसे भी यहां का काम मैं जल्दी निपटा दूंगा फिर शुऊऊं...... इंडिया,,,,बस कुछ दिनों की बात है। अहम ने अपना एक हाथ पैंट की पॉकेट में और दूसरा हाथ हवा में तिरछा ऊपर की ओर उड़ते हुए कहा।

विराज उसकी बात सुन के टेड़ा व्यंग से मुस्कुरा दिया।

ठीक है जैसे तुम दोनो को ठीक लगे। में बस यह कहने आया था की में थोड़ा थक गया हूं इसलिए घर जा रहा हूं तुम भी अपना काम जल्दी खत्म करना और टाइम पे आ जाना कल तुम्हारी फ्लाइट है तो अपना आज का ज्यादा से ज्यादा वक्त अपनी मॉम और दादी के साथ बिताओ वरना तुम्हारे जाने के बाद मुझे दोनो मिल के सुनते रहेंगे की मैने लास्ट मोमेंट तक भी तुमसे काम कराता रहा और वो दोनो जी भर के अपना लाड प्यार नही कर पाए।

विराज ने मुस्कुराते हुए जी डैड कहा और महेश जी वहां से चले गए।

चल ना यार बहुत भूख लगी आज बहुत कसरत हो गई बाहर चलते हैं फिर वहां से सीधा घर,,,,अहम ने लटका हुआ मुंह बना कर कहा।

"सॉरी भाई....ज्यादा तोह नही लगी" विराज ने अहम के गले लगते हुए कहा।

हां यार कुछ ज्यादा ही बॉडी बना ली है तूने बहुत ज़ोर का मुक्का था तेरा। चल कोई ना तू भी क्या याद रखेगा चल बाहर चलते हैं। अहम ने भी अपने प्यारे और इकलौते खास दोस्त के गाल खींचते हुए कहा।

ए.........गाल मत पकड़ा कर मेरा.....विराज उसे चिल्लाते हुए गुस्से से घूरता ही रह गया था क्योंकि अहम उसके गाल खीच के कमरे से बाहर की ओर भाग गया था। फिर उसने अपने सिर झटक कर अपना लैंडलाइन से किसीको फोन किया।

कुछ पल एक लड़की विराज के रूम में आई,,,, "येस सर"!

"मेरे रूम को साफ करवा दो और मेरा सामान और टिकट्स मेरे घर पर पहुंचवा देना" इतना कहते ही विराज तुरंत वहां एस निकल गया बिना उसका जवाब सुने।

________________

ऑफिस कैंटीन में सभी स्टाफ बैठ के लंच कर रहा था। एक टेबल चार लोग बैठे बातें कर रहे थे।
"ये कहां रह गई, अभी तक आई क्यों नही,,,,उन्ही में से एक लड़के ने कहा।
बहुत भूख लगी है में तो खाना शुरू कर रही हूं,,,,एक लड़की ने कहा।
ओ भुकड़ों की सरदारनी थोड़ा और वेट नही कर सकती अपनी दोस्त के लिए,,,,जब देखो खाती हो रहती है। उस लड़की के सर पे टपली मरते हुए, हार्दिक ने कहा।
अभी नई है ना इसलिए ज्यादा जोश है काम करने का मैडम को,,,,,,कुछ टाइम बीतने दो फिर देखना हमसे पहले वो यहां होगी लंच के लिए,,,,,कियाँश बोला।
सब हस पड़े।

अच्छा! मेरा मज़ाक उड़ाया जा रहा है। मायरा ने आते हुए सब सुन लिया था। "और वैसे भी सर ने काम लंच से पहले पूरा करने को कहा था लेकिन में कर नही पाई इसलिए जल्दी जल्दी पूरा करके आईं हूं।"

रिलैक्स जानेमन,,,,,ये सब काम की बात अभी नहीं चूहे कूद रहें हैं पेट में तो पहले पेट पूजा बाद में काम दूजा।
नेहा ने जल्दी से अपना लंच खोल लिया था।
सब ने हसी मज़ाक करते हुए लंच किया और फिर वापिस काम करने लग गए थे अपना अपना।
ये वो पांच लोग थे जो एक साथ कुछ दिनों पहले न्यूली अप्वाइंट हुए थे और अब तक उन सभी में गहरी दोस्ती हो गई थी। मायरा का काम देख के उसके बॉस मिस्टर नीरज चोपड़ा बहुत खुश थे। मिस्टर चोपड़ा के अकॉर्डिंग मायरा एक न्यू टैलेंटेड लड़की थी उसकी सोच उसके स्किल्स मॉडर्नाइज्ड थे इसलिए मिस्टर चोपड़ा मायरा को अपने साथ रखते थे जब भी मिस्टर नीरज चोपड़ा को मीटिंग के लिए जाना होता था तो वो अपनी असिस्टेंट के साथ मायरा को भी ले जाते थे। मिस्टर चोपड़ा एक अठावन साल के बूढ़े पर कामयाब बिज़नेस मैन थे जो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते थे। उन दोनो की कोई संतान नहीं थी इसलिए ऑफिस अवर्स के बाद अपना पूरा समय अपनी पत्नी मिसेज राजेश्वरी चोपड़ा के साथ बिताते थे।

बारह घंटे का लंबा सफर तै करके विराज की फ्लाइट इंडिया पहुंच चुकी थी। विराज बहुत थका हुआ था जैसे ही वो अपना सामान लेके दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकला उसकी नज़र लगातार इधर उधर घूम रही थी तभी उसकी नज़र हाथ में उसके नाम का साइनबोर्ड लिए एक आदमी खड़ा हुआ दिखा। कपड़ो के पहनावे से लग रहा था की वोह कार ड्राइवर है।
विराज ने इशारा किया तो वो तुरंत पास आ गया और सलाम करते हुए विराज से उसका सारा सामान ले लिया। विराज एक हाथ की बाजू में अपना कोर्ट लटकाए, दूसरे हाथ से अपना फोन गोल गोल घुमाते हुए आखों पे सनग्लासेज लगाए ड्राइवर के पीछे चलने लगा। उसके लिए ये जगह नई थी क्योंकि वो पहली बार इंडिया आया था। चलते चलते अचानक उसे धक्का लगा और वो हल्का सा लड़खड़ाया उसके हाथ से फोन छूट के नीचे गिर गया। उसने खुद को संभाला और नज़रे उठाके देखा तो एक लड़की थी जो उसका फोन उठा रही थी।
हे..... एक्सक्यूज़ मी.... दिखाई नही देता क्या?
विराज न उस लड़की की तरफ देखा तो वो लड़की उसे ही देख रही थी।
हेलो...! मैं तुम से ही बात कर रहा हूं। विराज ने अपना एक हाथ उस लड़की के आगे दाएं बाएं हिलाते हुए कहा।
वोह लड़की झेप गई और विराज का फोन उसके हाथ में देते हुए तुरंत सॉरी बोल के वहां से आगे बढ़ गई।
अजीब लड़की है.....कहते हुए विराज ने अपना सर झटका और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गया।








कहानी अभी जारी है......

धन्यवाद🙏