Bigdail Ladki - 8 books and stories free download online pdf in Hindi

बिगड़ैल लड़की - 8

कहानी को समझने के लिए पिछले भाग अवश्य पढ़ें यह कहानी का भाग 8

अब आगे:-

रेणुका को लेकर इस वक्त अनिल और राजू गाड़ी में तेजी से आगे को बढ़ रहे थे,

अनिल जो गाड़ी में पीछे बैठा हुआ था उसने रेणुका के कमर में हाथ डाल कर उसे अपने से चिपका लिया था,

रेणुका की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने आप पर काबू क्यों नहीं रख पा रही हैं, उसकी आंखें इस तरह भारी क्यों हो रही है ,,

अनिल के होंठ अब रेणुका के कानों के पास घूमने लगे थे रेणुका को भी उसका एहसास अब अच्छा लगने लगा था,,,

रेणुका ,अपने मन में ही ,,""यह मैं क्या कर रही मैं अपने आप पर कंट्रोल क्यों नहीं कर पा रही हुं ,यह अनिल मेरे करीब आने की कोशिश कर रहा है और मैं इसके करीब जा रही हूं मुझे अपने आप को रोकना होगा मैं इतनी आसानी से हार नहीं मान सकती ,कुछ ना कुछ तो मेरे साथ गड़बड़ हुई है ,,और यह गड़बड़ इस अनिल ने हीं की है,,"""

राजू अब गाड़ी को रवीना के घर ले आया था बाहर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने गेट खोल दिया था, गाड़ी सीधा ही अंदर चली गई थी,,,,

रेणुका ,,"लगता है कि अनिल मेरा फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था ,वैसे तो दोनों जने मुझे मेरे घर ही लेकर आये है,,""

अब अनिल और राजू दोनों रेणुका को जल्दी से गाड़ी से उतारते हैं और उसके दोनों बाजुओं को अपने कंधों पर रखकर उसके कमर में हाथ डाल लेते हैं,, फिर उसे किसी मरीज की भांति लेकर अंदर की तरफ बढ़ गए थे,,,,

अनिल दरवाजे पर लगी डोरबेल बजाता है कुछ ही सेकंड बाद नौकर आकर दरवाजा खोल देता है,,,

राजू ,,जल्दी से ,""आंटी जी कहां हैं रेणुका की तबीयत खराब है इन्हें इस के कमरे में ले जाना है,,"""

नौकर,," मालकिन तो बाहर है घर पर अभी कोई नहीं हैं"",,,

अनिल यह सुनते ही अपने सूखे होठों पर जीभ घुमाता है, ""कोई बात नहीं हम इसे रवीना के कमरे में सुला देते हैं"",, और फिर दोनों से लेकर तेजी से रवीना के कमरे की तरफ बढ़ गए थे नौकर ने दरवाजा बंद कर लिया था,,,

रेणुका की आंखें अब लगभग बंद हो गई थी पर उसका मन अभी भी उसके वश में था वह अंदर ही अंदर अपने आप से लड़ रही थी,,,,,

अनिल दरवाजा खोल कर अब रवीना के कमरे के अंदर रेणुका को लेकर दाखिल हो जाता है,,,,,

राजू ने दरवाजा पीछे से बंद कर दिया था,,,,

अनिल अब रेणुका को बिस्तर पर गिरा देता है,,,,

राजू और अनिल एक दूसरे से हाथ पर ताली देते हैं,,,

राजू ,,"वाह मजा आ गया हमारा प्लान सफल रहा है अब हम इसके साथ इंजॉय करेंगे,,,,"""

अनिल ,,"यह रवीना भी बड़ी तेज है अपनी ही बहन को हमारे हवाले करवा दीया ताकि उसे भी अपने जैसा बना सके,,""

राजू ,,"अरे यार उस रवीना का बाप हर वक्त इस रेणुका का नाम लेकर उसे जलील करता रहता था अब रवीना इस रेणुका को अपने जैसा बना कर अपने पिताजी को सबक सिखाना चाहती हैं, और उसकी शुरुआत अब ऐसे ही होगी,,,

""अब नशा और जिस्म की भूख इसके जीवन का एक हिस्सा बन जाएगा और इसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी"",,,

रेणुका जो बिस्तर पर लेटी हुई थी उसकी आंखें बंद थी पर उसका दिमाग इन दोनों की बातो को थोड़ा-थोड़ा सुन रहा था पर उसके दिमाग को पूरी बात समझ नहीं आ रही थी ,,,

वह तो बस अपने आप पर कंट्रोल करने की अंदर से कोशिश कर रही थी ,,,फिर उसने अपनी सारी इच्छा शक्ति लगाकर एकदम से करवट ली थी और उठते हुए वॉशरूम की तरफ तेजी से भाग गई थी,,,,,

अनिल और राजू एकदम से हैरान रह गए थे जो कि अपने कपड़े उतार रहे थे ,,जब तक उन्हें कुछ समझ आता रेणुका ने बाथरूम का दरवाजा जैसे तैसे बंद कर दिया था,,,

रेणुका अब फिर से फर्श पर गिर पड़ी थी उसकी आंखें अ सावर की तरफ देख रही थी,,,

दरवाजे पर अब अनिल और राजू आ पहुंचे थे और दरवाजे को पीट कर रेणुका को आवाज देने लगे थे,,,,

अनिल बेहद मीठी आवाज में,,,""" रेणुका क्या हुआ दरवाजा खोलो ,तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है हम तुम्हारी हेल्प कर रहे हैं दरवाजा खोलो रेणुका,,,""""

रेणुका के अंदर अब हिम्मत नहीं थी कि वह दरवाजा खोले, उसके हाथ अब चिकनी दीवारों पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि वह सावर के बटन को दबा सके,,,,,

राजू ,,,""रेणुका दरवाजा खोलो हम तुम्हें डॉक्टर के पास ले जाएंगे तुम्हारा इलाज कराने तुम इस तरह दरवाजा बंद मत करो ,तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है जल्दी से दरवाजा खोलो,,,""

अनिल गुस्से में आ गया था,," इस रेणुका ने तो सारा मूड खराब कर दिया बहुत अच्छा मूड बना हुआ था मेरा ,पता नहीं इतनी ताकत कहां से आ गई इस कमीनी लड़की में ,,

""अगर मुझे पहले पता होता कि इंजेक्शन की इतनी डोज के बाद भी यह इतनी देर तक खड़ी रह सकती है तब तो मैं इसे बिस्तर पर गिरते ही दबोच लेता,,,"",,

राजू ,,"अब क्या करें मुझे नहीं लगता है कि रेणुका अब दरवाजा खोलेगी"", और फिर कान लगाकर अंदर की आहट लेने की कोशिश करता है,,,

""ऐसा लग रहा है जैसे रेणुका अंदर नींद में चली गई है अब तो वह जब होश में आएगी तभी दरवाजा खोल पाएगी,, हमें यहां से निकल चलना चाहिए वरना किसी ने हमें इस तरह बिना कपड़ों के देख लिया तो और आफत आ जाएगी,,,"""

अनिल और राजू अब दोबारा से अपने कपड़े पहनने लगे थे दोनों का ही मुड़ बिल्कुल खराब था,,,,,

रेणुका अब फिर से अपने अंतर्मन की इच्छा शक्ति को जगाती है और उसका बदन एकदम से लहराया था और उसने सावर का बटन दबा दिया था,, ठंडा पानी अब उसके बदन पर आकर गिरने लगा था,,,,,

उसका बदन तेजी से भीगता जा रहा था उसके सिर के ऊपर चढ़ी गर्मी अब उतरने लगी थी, उसकी अधखुली आंखें अब ज्यादा खुलने लगी थी,,,,

उसके होंठ जो अंगारों की तरह लाल हो गए थे ,अब फिर से सामान्य होने लगे थे ,उसका अपने बदन पर अब फिर से काबू होने लगा था और वह वही बैठकर अब ठंडे पानी में भीगती चली गई थी,,,,,,

दूसरी तरफ,,,,,,

राजू और अनिल अब रवीना की कार लेकर वापस मल्टीप्लेक्स में आ पहुंचे थे और कुछ ही मिनट के बाद वे आशीष को सारी बातें बताते चले गए थे,,,,

आशीष ,,,""तुम दोनों बेवकूफ हो से काम ढंग से नहीं होता,,""

रवीना ,,"क्या हुआ तुम दोनों तो रेणुका के साथ गए थे इतनी जल्दी वापस कैसे आ गए "",,,

अनिल ,,"वो दरअसल तुम्हारी बहन रेणुका ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था, इसलिए हमें मजबूरी में वापस आना पड़ा तुम्हारी बहन बहुत तेज है वह इतनी आसानी से हाथ नहीं आने वाली हैं,,'''

रवीना अपना सिर पीट लेती है ,,"तुम दोनों के बस का कुछ नहीं है, अब यहां क्या अपना मुंह लेकर बैठे हो भाग जाओ यहां से,,,"""

आशीष उन दोनों को इशारा करता है ,और वे दोनों वहां से निकल जाते हैं,,,,

क्रमशः

क्या अब करेगी रेणुका अब क्या रवीना फिर से रेणुका को मुश्किल में फंसा देगी जानने के लिए बने रहे कहानी के साथ