Unfinished First Love (5th installment)` in Hindi Moral Stories by किशनलाल शर्मा books and stories PDF | अधूरा पहला प्यार (पांचवी क़िस्त)`

अधूरा पहला प्यार (पांचवी क़िस्त)`

मनोहर के कमरे की तलाशी दे दो
कमरे की तलाशी में घड़ी नही मिली लेकिन कंधोनी बक्शे में रखी सुरेश ने देख ली थी।उसने प्रिंसिपल से जाकर कहा।प्रिंसिपल ने मनोहर से पूछा तो उसे झूंठ बोलना पड़ा।प्रिंसिपल ने मनोहर के पिता के पास खबर भेजी थी।वह बीमार थे इसलिए नही आये उन्होंने मनोहर के ताऊजी को स्कूल भेज दिया था।ताऊजी को मथुरा में म8 मीरा के पिता भी मिल गए थे।दोनो प्रिंसिपल के पास पहुंचे।प्रिंसिपल पूरी बात बताने के बाद बोले,"मनोहर के कमरे में कंधोनी भी रखी है।'
"कंधोनी--इसके बारे में मनोहर के ताऊजी ने भी अनभिज्ञता प्रकट की थी।
मनोहर सच बोल रहा था या झूंठ इसका पता लगाने के लिए मनोहर को लेकर उसके ताऊजी,सुरेश और मीरा के पिता एक पंडित के पास गए थे।पण्डित ने मनोहर के सामने टूटे हुए ठीकरों का ढेर लगा दिया।फिर वह मनोहर से बोला,"आंखे बंद कर लो।"
पण्डित के कहने पर मनोहर ने आंखे बंद कर ली तब पण्डित उस से बोला,"मन ही मन मे किसी फूल का नाम लेकर एक ठीकरी उठा लो।"
मनोहर ने पंडित के कहने पर एक ठीकरी उठा ली।तब पण्डित उस से बोला,"अब इस ठीकरी पर लिखा नाम पढो।"
मनोहर ने ठीकरी उठा कर नाम पढ़ा तो ढंग रह गया।ठीकरी पर मनोहर लिखा था।अपना नाम ठीकरी पर लिखा देखकर वह हक्का बक्का रह गया।पण्डित ने भी उसे चोर सिद्ध कर दिया था।दुखी मन से मनोहर बोला,"पण्डितजी यह तुमने अच्छा नही किया।"
"क्या?"
"तुमने एक गरीब को धोखे से चोर सिद्द करके अच्छा नही किया।तूने एक ब्राह्मण की आत्मा दुखाई है ।तू कभी सुखी नहीं रहेगा।'
"ब्राह्मण ब्राह्मण को गाली दे रहा है।"पण्डित हंसा था।उस दिन के बाद मनोहर को ज्योतिष और पंडितो से नफरत हो गयी।मनोहर ने एक किलो की कंधोनी को मात्र पांच सौ रु में बेच दिया था।मनोहर कंधोनी के पैसे देने के लिए मीरा के घर जा पहुंचा था। पहले की तरह मीरा और मनोहर छत पर एक दूसरे से सट कर सो रहे थे।तभी रात को उसके पििता आ गए थे।
"पिताजी,"मीरा आवाज सुनते ही उठ खड़ी हुई।
मनोहर भी उठ बैठा।
"अब क्या होगा?"पिता के अचानक आ जाने से मीरा घबरा गई थी।
"तू जा नीचे।"
"मैं जीने का ताला लगा जाती हूँ।"मीरा बोली थी।
"यह ठीक रहेगा।मुझे खतरा लगेगा तो मैं छत पर से कूदकर भाग जाऊंगा।"
मीरा जीने का ताला लगाकर नीचे चली गयी।मनोहर अंधेरे में छिप कर छत से नीचे देखने लगा।
"अम्मा तेरे पास कितने गहने है/"मीरा के पिता ने अपनी बूढ़ी माँ से पूछा था।
"बेटा मोये नाय पतो।पर आज तू क्यों पूछ रह्यो है"?
मीरा के पिता ने गहनों की पोटली निकाली और देखने के बाद मीरा से बोला,"तूने जया में से कितने गहने बेचे है/"
"मैने नही तो?"
"अभी रज्जो हलवाई मिला था।तूने उसे तीन सौ रु दिए थे
मीरा पिता के अप्रत्याशित प्रश्न से घबरा गयी।उसने कोई जवाब नही दिया तब पिता ने बार बार पूछा था।तब मीरा ने बताया था कि उसने हलवाई का उधार चुकाने के लिए पायजेब बेच दी थी।बेटी की बात सुनकर पिता बौखला गए और मीरा के दो थप्पड़ जड़ दिए थे।
"तेरा मनोहर से क्या रिश्ता है?मुझे लोगो ने बताया है तू मनोहर से बहुत मिलती है।"पिता ने मीरा से पूछा था।

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