The Author Priyansu Jain Follow Current Read एक बेवकूफ - 3 By Priyansu Jain Hindi Detective stories Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books পরাণ বঁধুয়া - 16 পরাণ বঁধুয়াপর্ব - ১৬--"বুবুন আমাদের সবার সঙ্গে মানিয়ে চলে।... সুপ্ত প্রেমের আগুন - 9 নীলচে কুয়াশা তখনও শহরের মাথার ওপর হালকা চাদরের মতো ঝুলে আছে... মন_তোকে_দিলাম - 8 #পর্ব_৮রবিবার,,,,,,,,,,,,,২৩/০৪/২০১৯,,,,,,,,,,,রাত ১:৩৫আকাশে... অদৃশ্য যুদ্ধ ( সিজন 1 ) (১)আশিবছর আগে স্থা... পরাণ বঁধুয়া - 15 পরাণ বঁধুয়াপর্ব - ১৫জীবনের এই অদ্ভুত সন্ধিক্ষণেও সাহস দেখাল... 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(विक्रम) बेचारे को चैन ही नहीं मिलता और एक फ़ोन आता है जिसके बाद सामने से जो भी कहा गया उसके बाद उसके ललाट पे पसीने की धारें छूट गयी। वो तुरंत अपने कपडे़ ठीक किया, कैप उठायी, रूलर(डंडा) लिया और कमल को चिल्ला के बोला "जल्दी गाडी़ निकालो और दो जने मेरे साथ चलो।" वो फटाफट निकलकर एक बंगले के आगे पहुँचता है जिसे देख कर वो नर्वस फील करता है और थूक सटकते हुए अंदर जाता है। अंदर एक लगभग ७० साल का आदमी शानदार सोफों के बीच बैठा होता है। उसके पास कुछ और भी प्रभावशाली लोग बैठे होते है। वो आदमी भी नेताओं की तरह कुरता पजामा पहना हुआ था।बँगला बाहर से जितना शानदार था उस से भी ज्यादा अंदर से शानदार था। परन्तु एस.आई. की नज़र बंगले की सुंदरता पर नहीं बल्कि उस आदमी के पास बैठे एस.पी. पर थी। उस ने जाते ही अंदर एस.पी. को सेल्यूट मारा और फिर उस आदमी को सेल्यूट मार के बोला कि" आपने कैसे याद किया एम. पी. साहब????" वो आदमी जो एम.पी. था और जिसके आगे अपने एस.पी. साहब भी शांत और परेशान से बैठे थे, बोला " अरे नहीं एस.आई. साहब, हम आपको कैसे याद कर सकते हैं? आप हुए बड़े आदमी हमारी क्या औकात? हम तो आपको आने के लिए विनती ही कर सकते हैं और आप जैसे महापुरुष जब ये विनती स्वीकार कर ले तो खुद को धन्य समझ सकते हैं।"एस.आई. बेचारा समझ ही नहीं पाया कि उसको यूँ सबके सामने भिगो भिगो के जूता क्यों मारा जा रहा है। वो घबराकर बोला " आखिर हुआ क्या है साहब?? आप इतने गुस्से में क्यों है??" इतना सुनना था कि एम.पी. उखड़ गया और चिल्ला के बोला "मेरी भतीजी सुबह कॉलेज से घर नहीं लौटी और तुम पूछ रहे हो कि मैं गुस्से में क्यों हूँ गधे।" एस.आई. की हवा ही निकल गयी ये सुनकर। उसको ज़मीन हिलती सी लगी। वो हकलाते हुए बोला " क्या !!!!" एम.पी." उल्लू के पट्ठे सुनाई नहीं दे रहा जो पूछ रहा है, क्या... मेरी भतीजी कॉलेज से घर नहीं लौटी और उसके छुट्टी हुए ६ घंटे से ऊपर हो गए।" एस.आई.- " पर साहब हो सकता है किसी फ्रेंड के घर हो, लौट आएगी।" एम.पी.- "तो अब तू मुझे बताएगा कि वो कहाँ जायेगी या नहीं जाएगी, या ये कि मैं इतना बड़ा गधा हूँ कि मैं उसके सब दोस्तों को फ़ोन करके पता नहीं कर सकता या मैंने यहाँ पर तुझसे मुज़रा करने के लिए तुझे बुलाया है। एस.आई. ( बुरी तरह भड़कते हुए सोचता है कि "साले, मेरा बस चले तो तुझे ही नंगा करके मुजरा कराऊँ पर मजबूर हूँ तेरे जैसे भ्रष्ट और घटिया आदमी को बर्दाश्त करना पड़ रहा है, परिवार वाला ना होता तो पूरी छह की छह तेरे भेजे में उतार देता" पर ऊपर से कहता है) "मेरा वो मतलब नहीं है सर, आप फिक्र मत करो मैं आपकी भतीजी को जल्दी से जल्दी ढूंढता हूँ।" एम.पी.- "हूँ हह..., जैसे पहले दो लड़कियों को ढूंढा वैसे ही?? ना रे ना, मैं अपनी भतीजी का रिस्क नहीं ले सकता।इसलिए मैंने होम मिनिस्टर से बात करके इंटेलिजेंस ब्यूरो से एक पूर्व जासूस को बुलाया है।जो बहुत तेज़ और खतरनाक है। तुझे बस उसका साथ देना है और उसकी मदद करनी है।" अब ये किसने एम.पी. के परिवार पे हाथ डाल दिया?? किसी को अपनी मौत को खींच के बुलाना है या वो खुद ही एक मौत है? क्या मामला जैसा दिख रहा है उस से भी बड़ा है और तीनों लड़कियों के गायब होने के पीछे कोई एक ही कारण है या ये तीनों केस अलग ही है? एस आई विक्रम को तो पिंजरे में बंद शेर की तरह कर दिया गया है। कौन है वो जासूस और वो क्या कर पायेगा ????? जानने के लिए अगले पार्ट में बने रहिये। So be continue... ‹ Previous Chapterएक बेवकूफ - 2 › Next Chapter एक बेवकूफ - 4 Download Our App