Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 12 books and stories free download online pdf in Hindi

Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 12

अनिका अभी भी लाइब्रेरी में लिस्ट ऑफ़ बुक्स चेक कर रही थी। उसके चारों और टेबल पर पंद्रह सोलह कैटलॉग फैले हुए थे। उसे अपनी गर्दन पर कुछ अजीब सा एहसास हुआ। उसने अपनी आंखे ऊपर की और उसकी नज़रे एक गुस्से भरी नजरों से मिली।

"तुम सुबह से यहां क्यों छुपी हुई हो?" अभय सिंघम ने आदेशात्मक लहज़े से पूछा।

"मु...मुझे पढ़ना पसंद।" इस वक्त काफी रात हो चुकी थी जब अभय घर वापिस आया था।

अभय ने एक बुक अपने हाथ से अनिक के पास वाली कुर्सी पर फेंकी। "तुम्हे ज्यादा से ज्यादा समय बाहर बिताना चाहिए ताकि लोग यह जान पाए की तुम जिंदा हो।"

"मैने कोशिश की थी।" अनिका ने बहुत धीरे से कहा।

"और फिर?"

"उन्होंने कहा.....वोह बात नही.....मेरा मतलब है....वोह.....वोह...." अनिका का थका हुआ दिमाग हिम्मत नही कर पा रहा था बोलने का। कैसे वोह अभय को बताए की उसके लोग उससे नफरत करते हैं, और बात नही करना चाहते, लेकिन इस तरह से की अभय को बुरा भी ना लगे और वो अनिका की बात सुन कर भड़क भी न जाए।

अभय अनिका पर हल्का सा झुक गया और उसे अपनी ठंडी नज़रों से देखने लगा। वोह उसके जवाब का इंतजार कर रहा था। किस्मत से दरवाज़े पर दस्तक हुई और उन दोनो को बीच में रोक दिया।

"अभय!" एक औरत की तनावपूर्ण आवाज़ सुनाई पड़ी और अभय के एक्सप्रेशन बदल गए। वोह चिंता जताते हुए लाइब्रेरी से बाहर निकल गया। क्या वजह थी पता नही लेकिन अनिक भी उसके पीछे पीछे लाइब्रेरी से बाहर निकल गई। अभय जल्दी जल्दी सीढ़ियों से नीचे उतरा। वहां कुछ लोग इकट्ठा हो रखे थे। जैसे जैसे अभय नज़दीक जा रहा था, वोह लोग साइड हटने लगे। अनिका न देखा की वहां जमीन पर एक छोटी सी लड़की लेटी हुई थी जो घरघराहट के साथ उखड़ती सांसे ले रही थी। एक नज़र उस लड़की के धब्बेदार और लाल चेहरे को देख कर अनिक समझ चुकी थी की उसके साथ क्या हुआ है। वोह जानती थी की ज्यादा समय नहीं है, वोह तुरंत वापिस ऊपर चली गई। वोह सीधे अपने सुइट में गई और कबर्ड खोला जहां उसका सूटकेस रखा हुआ था। उसने उसमे से अपना मेडिकल पाउच निकाला और सीधे बाहर निकल गई। उस पाउच को अपने हाथ में कस कर दबाते हुए वोह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी। जितने देर में अनिक ऊपर जा कर पाउच लेकर आई तब तक उस लड़की का चेहरा लाल ने नीला हो गया और वोह बुरी तरह खांसने लगी थी। अनिका ने तुरंत नीचे आ कर अपने पाउच में से एक लिक्विड बॉटल निकाली और बाकी के लोगों को उस लड़की के पास से हटाने लगी जो लोग उस लड़की को बार बार और पानी पिलाने की कोशिश कर रहे थे। उन लोगों में से कुछ लोगों ने नाराजगी जताई तोह अनिका ने उनके हाथ से पानी का ग्लास छीन कर जमीन पर नीचे फेक दिया।

"रुको सब, और पीछे हट जाओ। इस लड़की को किसी चीज़ से एलर्जी हुई है।" बिना किसी के जवाब या प्रतिक्रिया की परवाह किए अनिका ने वोह लिक्विड मेडिकेशन उस लड़की के मुंह में डाल दिया।

"सटक जाओ।" अनिका ने उस लड़की को प्यार भरी आवाज़ में कहा।

उस लड़की ने अनिका को एक नज़र देखा और दवाई को सरकने की कोशिश करने लगी। पर उसके चेहरे के भाव यह बता रहे थे की उसे दवाई को सरकने में मुश्किल हो रही है। फिर एक बार और खांसी उठी और उसने सारी दवाई मुंह से उगल दी।

"यह क्या दे रही हो इसे?" एक औरत की आवाज़ ने ज़ोर से पूछा। "क्या तुम इसे मारना चाहती हो?"

अनिका को वोह आवाज़ सुबह वाली औरत की आवाज़ जैसी लगी। सच में वोही औरत थी जिसने उसे सुबह खरीखोटी सुनाई थी। चारों तरफ फुसफुसाने की आवाज सुनाई देने लगी लेकिन अनिका सभी बातों को इग्नोर कर दिया। अनिका ने फिर से वोह दवाई निकाली और इस बार इन्हेलर में फिल कर दिया और उसके मुंह में रख कर प्रेस करने लगी। जब अनिका ने देखा की वोह लड़की थोड़ी थोड़ी सांस लेने लगी है तोह उसने नज़दीक खड़े लोगों को पीछे हटने के लिए कहा।

"पीछे हटिए। इसे ताज़ी हवा की जरूरत है।"

अनिका को उम्मीद थी की वोह लड़की फिर से आसानी से सांस लेने लगेगी, पर उसके सिम्टम्स और बुरे होते चले गए। उसने उस लड़की की पल्स चेक की, वोह ड्रॉप हो रही थी।

"हमे अभी के अभी एंबुलेंस की जरूरत है!" अनिका ने उन लोगों से कहा। अनिका ने देखा की कुछ दूरी पर अभय खड़ा है और फोन पर बात कर रहा है।

उस लड़की की सांसे और खांसना कुछ कमज़ोर पड़ने लगी, तोह अनिका को अपने पाउच में से एड्रिनैलिन शॉट निकलना पड़ा। अनिक भी बहुत सी एलर्जी के साथ पली बढ़ी हुई थी, उसे पता था की उस लड़की के साथ एक्जाक्टली क्या हुआ है।

"यह हमारी मीना को मार देगी," कोई अनिका के पीछे से चिल्लाया, पर अनिका ने नजरंदाज कर दिया। वोह जानती थी की वोह क्या कर रही है। उसने उस लड़की की बाजू ऊपर की और उसे इंजेक्शन दे दिया।

"सांस लो," अनिका ने उस लड़की से कहा। "तुम थोड़ी देर में ठीक हो जाओगी।"

उसने उसे दूसरा शॉट भी दे दिया इस सोच से की अगर पहला शॉट तुरंत असर नहीं किया तोह दूसरा शॉट जरूर असर करेगा। उसने फिर से इन्हेलर उसके मुंह में रख दिया और दवाई प्रेस करने लगी। वोह उसे ध्यान से देख रही थी, उसकी स्किन फिर से पहले जैसी होने लगी थी।
लोग लड़की के पास फिर से आने लगे।

"प्लीज पीछे हटिए। उसे हवा की जरूरत है।" अनिका ने महसूस किया की अब सब लोग पीछे हटने लगे हैं लेकिन कोई है जो उसके नज़दीक बढ़ रहा है और उसके पास आ कर खड़ा हो गया है।

"मैने कहा ना इसे सांस लेने की जरूरत है, यहां से हट जाइए!" अनिका ने उस शख्स के टांगो पर हाथ से हटाने की कोशिश की और हल्का सा पुश भी किया पर वोह शख्स एक इंच भी हिला नही। अनिका ने ऊपर नज़रे की, उसकी नज़रे अभय सिंघम की नज़रों से जा मिली। उसका हाथ वहीं रुक गया कुछ पल, और फिर उसने वापिस खींच लिया।

"डॉक्टर किसी भी वक्त यहां आते हीं होंगे।" अभय ने शांत लहज़े में कहा।

"ये....यह ठीक हो जाएगी। इसको बस एलर्जिक रिएक्शन हुआ है। शायद किसी खाने से एलर्जी हुई है।"

अभय एक बूढ़ी औरत की तरफ पलटा जो की उस लड़की के पैरों के पास बैठी हुई थी।
"क्या मीना ने आज कोई नई चीज़ खाई है?"

"नही।" उस औरत ने जवाब दिया।

"आज क्या खाया था इसने?" अनिका ने पूछा।

"उसने प्रॉन करी खाया था और उसके कुछ देर बाद ही जोर जोर से खांसने लगी।"

अनिका की भौंहे सिकुड़ गई। "क्या यह यहां फार्म किया हुआ था या समुद्र से पकड़ कर लाए थे?" अनिक ने आगे पूछा।

"फार्म्ड।" अभय ने आराम से जवाब दिया। "मुझे लगता है की मुझे पता है की इसे यह रिएक्शन क्यों हुआ।"

इससे पहले की अनिका अभय से एक्सप्लेनेशन पूछती, एक बूढ़ा आदमी हाथों में बैग लिए जल्दी जल्दी मीना की तरफ आ रहा था।
"कैसी है यह?" उस बूढ़े आदमी ने पूछा।

अनिका ने देखा की उस बूढ़े आदमी ने अपने ब्रीफकेस में से अपना स्थेस्कोप निकाला। मीना के पास बैठी बुद्धि औरत उसे एक्सप्लेन करने लगी की मीना के साथ क्या हुआ था और उसने उन्हे यह भी बताया की अनिका ने उसकी मदद की थी।

डॉक्टर अनिका की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा। "थैंक यू फॉर हेल्पिंग," डॉक्टर ने कहा। "क्या तुमने कहीं पढ़ा है की एलर्जिक रिएक्शन से कैसे डील करते हैं?"

"हां।"

"डेट्स ग्रेट। मुझे तुमसे बहुत मदद मिलेगी यहां। मेरे पास हमेशा ही लोगों की कमी रहती है जो जख्मी लोगों की मरहम पट्टी कर सके, और बीमार मरीजों की मदद कर सके। शायद मैं तुम्हे ट्रेन कर सकता हूं कुछ बेसिक इमरजेंसी टेक्नीक्स अगर तुम इंटरेस्टेड हो तोह।"

"नही। इसकी कोई जरूरत नही है।" अनिका ने जवाब दिया।

"ओह!" डॉक्टर का मुंह उतर गया। "मुझे लगा शायद तुम इंटरेस्टेड होगी। अभय हमेशा हेल्प करता है जब भी जरूरत पड़ती है और मैने सोचा...."

अनिका ने अपना सिर ना में ज़ोर से हिलाया। "नही, मैने कहा की ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है, डॉक्टर राव। मैं पहले से ही क्वालिफाइड हूं।"

"ओह!" डॉक्टर राव की आंखे खुशी से चमक उठी। "क्या तुम बाय चांस एक नर्स हो?"

"नो। आई एम अ..." अनिका बोलते बोलते रुक गई जब उसकी नज़र अभय सिंघम के भावशून्य चेहरे पर चली गई।

अपनी नज़रों के ही ताप से डरने वाले शख्स अभय सिंघम से अपनी नज़रे हटा कर अनिका उस बूढ़े डॉक्टर की उत्सुक नज़रों की ओर देखने लगी। "आई एम अ डॉक्टर। जनरल मेडिसिन।"

एक आश्चर्यचकित सन्नाटा छा गया कमरे में।

तभी डॉक्टर राव एक्साइटमेंट में बोले, "डेट् इस सच अ ग्रेट न्यूज!"

अनिका ने हल्के से मुस्कुरा दिया।

डॉक्टर राव की नज़रे उस मेडिकल बैग पर चली गई जो फर्श पर ही पड़ा हुआ था। "तोह तुमने इस लड़की को सांस लेने में आराम पहुंचाने के लिए वैपर नही दिया?" डॉक्टर ने कन्फ्यूज्ड होते हुए पूछा।

"नही। मैने इसे एड्रिनैलिन शॉट दिया था।" अनिका ने उन्हें डोसेज की डिटेल्स बताई।

"ओह.... पर इस बच्ची को देने के लिए तुम्हारे पास एड्रिनैलिन शॉर्ट्स कहां से आई?"

"मुझे फूड एलर्जी है। और कभी-कभी मुझे इसी तरह के रिएक्शंस होते हैं।"

अनिका ने महसूस किया की अभय सिंघम की नज़रे उसी पर है। जब वोह इमरजेंसी में उस बच्ची का इलाज कर रही थी तोह उसने किसी चीज़ की परवाह नही की थी और ना ही उसका ध्यान गया था। अब वोह रियलिटी में वापिस आ जाए थी और अभय की घूरती नज़रों को अपने ऊपर महसूस कर रही थी।

अनिका का शुक्रगुजार होने के बजाय अभय सिंघम अनिका से नाराज़ नजर आ रहा था।

हैरानी की बात यह थी की अभय ने अपनी नाराज़ नज़रे डॉक्टर राव की तरफ कर ली। "डॉक्टर राव, क्या मीना की हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत है?"

"नो, शी इस फाइन नाउ।" डॉक्टर ने अपना सूटकेस पैक किया और खड़े हो गए थे।

"इट वास माय प्लेजर टू मीट यू, डॉक्टर सिंघम।" डॉक्टर के इस प्यारे से संबोधन ने अनिका की नज़रों को अभय पर टिका दिया। वोह थोड़ा झिझकी।
क्या अब मेरी यह न्यू आइडेंटिटी है?

"मीना को अंदर ले जाओ और मेरे सुइट में डिनर भिजवाओ।" अभय ने किसी को आदेश देते हुए कहा।
उसके बाद अभय ने अनिका की तरफ घूर कर देखा।
"लेट्स गो।"

अनिका ज़मीन से उठी, उसने महसूस किया की अभय की नज़रे और ज्यादा तपिश से उसे घूर रही हैं। अभय ने अनिका की कलाई पकड़ी और अपनी ओर खींच लिया। अभय ने अनिका की कलाई इतनी कस कर नही पकड़ी थी की अनिका को दर्द हो पर उसकी पकड़ से उसके गुस्से का एहसास जरूर हो गया था अनिका को। अभय तुरंत सीढियां चढ़ते हुए उसे अपने मास्टर बेडरूम में ले गया। कमरे में पहुंचते ही उसने दरवाज़ा बंद किया। अनिका को अपना शरीर कमज़ोर लगने लगा जैसे की वोह अभी गिर पड़ेगी, जब उसने अभय के चेहरे का तेज़ देखा। अनिका को लग रहा था की ऐसी क्या गलती हो गई उससे जो अभय अब उसपर बरसेगा।

"तुमने मुझे क्यूं नही बताया की तुम्हे फूड एलर्जी है? मेरे पीछे अगर तुमने ऐसा कुछ खा लिया तोह तुम मर सकती हो।"

अनिक अभय के सवाल पर दंग ही रह गई, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था की अभय उससे ऐसा कुछ पूछेगा। उसका कंपकंपान बंद हो गया।

"मैं.... मैं चेक करती हूं कुछ भी खाने से पहले।"

"कैसे?"

"मुझे सिर्फ फूड कलर से एलर्जी है। और मैंने नोटिस किया है की यहां के खाने में कोई भी आर्टिफिशियल कलर इस्तेमाल नही होता है।"

अभय की घूरती नज़रे अब नर्म पड़ने लगी। वोह आगे और कुछ बोलता या पूछता, तभी दरवाज़े पर हल्की सी खटखट हुई।

"कम इन!" अभय ने जोर से कहा। और फिर अनिका की तरफ देखा।
"डिनर करो और यहीं सोना ना की लाइब्रेरी में।"

अनिका ने धीरे से सिर हिला दिया। अभय ने कुछ पल अनिका को देखा और फिर उस औरत के सामने से गुजरते हुए कमरे से बाहर निकल गया, जो औरत खाने से भरी कार्ट खींचते हुए ला रही थी।

कमरे में ही छोटे से डाइनिंग एरिया में उस औरत ने खाना लगाना शुरू किया। जब उसने खाना सर्व कर दिया तोह कार्ट लेकर वापिस जाने के बजाय वोह वहीं खड़ी रही और अनिका को देख कर मुस्कुराने लगी।

"मेरा नाम लक्ष्मी है। मैं कल आपके लिए आपकी फेवरेट डिश बनाना चाहती हूं।" उस औरत ने मुस्कुराते हुए कहा।

"थैंक यू, लक्ष्मी। मुझे वोह बीटरूट की छूटने बहुत पसंद आई थी जी कुछ दिन पहले बनी थी। मैं कल उसे फिर से खाना चाहूंगी।"
लक्ष्मी फिर से मुस्कुराई और कमरे से चली गई।

अनिक ने खाना खतम किया और शावर लेने चली गई। उसके बाद वोह बैड पर लेटी और सिलिंग की ओर देखने लगी। आज उसने तीन सहयोगी बनाए— देव, डॉक्टर राव, और लक्ष्मी। तीनो ने ही उस से अच्छे से बात की लेकिन उसे यह नहीं पता था की वोह तीनो क्या उसके लिए अभय के खिलाफ जा कर मदद करेंगे।

इसका मतलब सहयोगी दल बनाने के अलावा उसे अपनी फैमिली को बचाने के लिए तेज़ी से काम करना होगा।

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अगली सुबह जब अनिका तैयार हो कर नीचे किचन में आई, उसने दो मुस्कुराते चेहरे देखे। अनिका भी हल्के से मुस्कुरा दी।

"डॉक्टर सिंघम, आप कहां अपना नाश्ता करना पसंद करेंगी?"

अनिका ने उस लड़की को देखा और याद करने लगी की उसने उसे कल शाम को देखा था। वोह लड़की एक और लड़की के साथ खड़ी थी जिस कल शाम एलर्जिक रिएक्शन हुआ था।

"अगर आप लोगों को बुरा ना लगे तोह मैं आप लोगों के साथ ही नाश्ता करूं। वोह भी अगर आप लोगों ने पहले ही नाश्ता नही किया हो तब।"

उस लड़की की मुस्कुराहट बड़ी हो गई।

"जरूर। वैसे मेरा नाम सोनू है। मैं अक्सर अपना नाश्ता आठ बजे गार्डन में करती हूं।"

"यह तोह बहुत अच्छी बात है, सोनू। बताओ मुझे यहां से क्या क्या ले कर जाना है।" अनिका ने देखा की किचन प्लेटफार्म पर कई बड़ी बड़ी बाउल रखे थे डिशेज के। उसे अभी तक चांस नहीं मिला था मैंशन को पूरा देखने के लिए, पर वोह देखना चाहती थी।

"ओह! नो! आपको ले कर जाने की जरूरत नही है। मैं ले आऊंगी। और यहां बहुत सारे हेल्पर्स हैं ना को यह काम कर देंगे।"

"पर फिर भी मैं मदद करना चाहूंगी।" अनिका मुस्कुरा पड़ी सोनू के सरप्राइज्ड चेहरे को देख कर।

अनिका को आश्चर्य हो रहा था की उसके मदद के लिए इनसिस्ट करने पर सोनू इतनी हैरान क्यों थी। इस मैंशन के सभी लोग, उस इंसान को जिससे उसने शादी की थी, उसे नाम से पुकारते थे। यहां पर लोग सभी के फैमिली मेंबर की तरह ही ट्रीट करते थे ना की नौकर की तरह। यहां पर सब प्रजापति मैंशन से एकदम उल्टा था। उसे क्लियर डिफरेंस दिख रहा था जब बात नीलांबरी और सबिता की आती तोह। इन फैक्ट, वोह कभी सोच भी नही सकती थी की नीलमबरी या सबिता कभी अपने हेल्पर या मैड्स से अपना नाम बुलवाएगी।

इसका मतलब यह है की, यह आदमी किस मॉन्स्टर की तरह नही है, जैसा वोह उसके बारे में सोच रही थी?

वोह कैसे बुरा हो सकता है जब उसके ही लोग उसे नाम से पुकारते हैं?

ऐसा सोचते हुए, उसे अपना मन थोड़ा हल्का लगने लगा। एक ट्रे को उठा के, जिसमे कुछ डिशेज रखी हुई थी, अनिका सोनू के पीछे पीछे चलने लगी। वोह दोनो गार्डन के ही एक हिस्से में पहुंचे जहां दूर पहाड़ के नज़ारे और उसके साथ ही कमल के फूलों से सजा एक तालाब दिख रहा था। उस गार्डन में और भी अलग अलग तरह के रंग बिरंगे फूलों के पौधे लगे हुए थे, जिसमे से बहुत अच्छी खुशबू फैली हुई थी। और साथ ही चिड़ियों की चहचहाहट उस नज़रे को और भी खुशनुमा बना रही थी। कितना सुकून मिल रहा था उसे।

एक विचार मन में आते ही अनिका रुक गई। "मुझे लगा था यहां सूखे की मार है। पानी इस तरह से क्यों वेस्ट किया जा रहा है?"

"रिसाइकल्ड वाटर....." सोनू ने एक बाइट लेते हुए कहा। "मैंशन का वेस्ट पानी को इकट्ठा कर फिल्टर्ड किया जाता है।"

"ओह आई सी।"

अनिका को समझ नही आ रहा था की वोह इस जगह के बारे में क्या धारणा बनाए। एक तरफ, यहां के लोग अंधविश्वास और श्राप जैसी चीजों पर यकीन करते हैं, और दूसरी तरफ यह मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं।

वोह लोग अपना नाश्ता कर ही रहे थे की एक बूढ़ी औरत उनके पास आई।
"मुझे कब्ज़ की बहुत दिक्कत है।" उस बूढ़ी औरत ने कहा।

"एक्सक्यूज़ मी।" अनिका ने जवाब दिया।

"मैं इसकी वजह से ज्यादा इधर उधर नही जा पति और ना ही ठीक से काम कर पति हूं। क्या आप मुझे चेक कर सकती है और दवाई दे सकती हैं इसके लिए?"

अनिका ने अपना सिर ना में हिलाया। "सॉरी, मेरे पास चेक करने के लिए इक्विपमेंट नही है और ना ही दवाइयां है इलाज करने के लिए। आप डॉक्टर राव को दिखाइए?" वोह...."

उस बूढ़ी औरत की भौंहे सिकुड़ गई। "नही। डॉक्टर राव हमेशा ही दूसरे पेशेंट्स में बिज़ी रहते हैं जिन्हे कोई गहरी चोट लगी हो या जान का खतरा हो। मैं जानती हूं की आप मेरी जरूर मदद करेंगी। आपने कल रात मीना की भी मदद की थी।"

"हां। पर वोह तोह...."

"प्लीज। मैं बूढ़ी हो चुकी हूं। मैं अपने आप बहुत ही बेबस महसूस करती हूं इस पेट की बीमारी से। मैं ठीक से काम भी नही कर पाती।"

"मैं समझती हूं। पर..."

"प्लीज़।"

अनिका ने गहरी सांस ली। "ओके। शायद मेरी मेडिकल किट में कुछ काम का हो। मैं चेक करके आपको देती हूं।"

"खुश रहो हमेशा!"
उस औरत के आर्शीवाद देने के बाद वोह तुरंत चली गई। अनिका और सोनू ने नाश्ता खतम किया और सभी डिशेज और प्लेट किचन में रख आए।

"थैंक यू मुझे अपने साथ नाश्ता करने देने के लिए, सोनू। क्या तुम्हारे पास समय है मुझे मैंशन पूरा दिखाने के लिए?"

"नो प्रॉब्लम।" सोनू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। "अभी मैं स्कूल जा रहीं हूं। शाम तक वापिस आऊंगी। अगर आप चाहो तो मैं आपको शाम को मैंशन के चारों ओर घुमा दूंगी। शान के समय, सूरज ढलते वक्त यह जगह बहुत ही खूबसूरत लगती है।"

अनिका मुस्कुराई। "डील।"

सोनू को गुड बाय कह कर अनिका अपने सुइट में चली गई। वोह जानती थी की अभय अब तक ऑफिस चला गया होगा। उसने उस बूढ़ी औरत के लिए दवाई ली और नीचे आ गई। वोह औरत किचन के पास ही इंतजार कर रही थी। उसने उस औरत को इंट्रक्शंस के साथ वोह दवाई दे दी। उसके बाद अनिका वापिस अपने सुइट में आ गई। अगले दो घंटे फ्रस्ट्रेशन में लैपटॉप पर पासवर्ड डालने की कोशिश करती रही। तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आया।

वोह लंच टाइम का इंतजार करने लगी ताकी लक्ष्मी उसके कमरे में खाना ले कर आए।

"तुम्हे पता है देव का नंबर क्या है? मुझे उस से कुछ पूछा है।"

लक्ष्मी बिलकुल भी हिचकिचाई नही और देव का नंबर एक कागज़ के टुकड़े पर लिख कर दे दिया।

"मेरे पास फोन नही है। क्या मैं तुम्हारा फोन ले सकती हूं?" अनिका ने फिर पूछा।

लक्ष्मी के चेहरे पर हैरानी वाले भाव आ गए। "हमारे यहां मोबाइल टावर्स नही है, बस कुछ सैटेलाइट फोन्स हैं। मेरे पास नही है।"

अनिका का मुंह लटक गया।

"मालिनी के पास एक है। मैं आपके लिए लेकर आती हूं।" लक्ष्मी ने कहा और कमरे से बाहर निकल गई।

दस मिनट बाद, अनिका घबराई हुई पैर पटकते हुए अपने कमरे में टहलने लगी थी क्योंकि फोन की घंटी बजने लगी थी। कई बार रिंग बजने के बाद देव ने फोन उठाया।

"देव?"

दूसरी तरफ एक दम सन्नाटा छा गया।

"देव, दिस इस अनिका।"

"अनिका, सॉरी! मुझे नही पता था की तुम मुझे कॉल कर रही हो। कैसी हो तुम?"

अनिका ने एक गहरी सांस ली और अपनी फिंगर क्रोसेड कर ली।
"मैं ठीक हूं। मैने तुम्हे फोन किया था यह पूछने के लिए की क्या कोई कंप्यूटर है जिसे मैं यूज कर सकूं। एक है मेरे रूम में लेकिन मैं उसका.....पासवर्ड....अभय....से पूछना भूल गई।" उस आदमी का नाम अपनी जुबान पर उसे कुछ अजीब लग रहा था। एक हल्की सी सिरहन दौड़ गई थी उसके शरीर में।

"कोई बात नही," देव ने जवाब दिया। "पासवर्ड अरुंधती है। A—r—u—n—d—h—a—t—i. अभय से कहो की तुम्हे एक फोन दिला दे......"
देव बोलते बोलते रुक गया क्योंकि वोह दूसरी तरफ बात करने लगा। अनिका फोन पर सुन पा रही थी की देव किसी बात पर काफी परेशान और गुस्सा हो गया है। अनिका बस फोन रखने ही वाली थी की देव शायद भूल गया है वोह फोन कॉल पर है, पर देव वापिस आ गया।
"सॉरी, अनिका। क्या मैं तुम्हे थोड़ी देर बाद फोन करूं?"

"कोई बात नही, देव। मुझे तो बस पासवर्ड चाहिए था। थैंक्स।"


फोन काटने के बाद, अनिका ने मुस्कुराते हुए लक्ष्मी को फोन वापिस कर दिया। जैसे ही लक्ष्मी कमरे से बाहर निकली, अनिका ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और लैपटॉप पर पासवर्ड ट्राय करने लगी।

अनिका खुशी से झूम उठी जब उसने पासवर्ड डाला लैपटॉप पर तो वो अनलॉक हो गया। अपने तेज़ी से धड़कते हुए दिल के साथ अनिका ने लैपटॉप के सामने और दो तीन घंटे बिता दिए। फिर उसके बाद ब्राउजिंग हिस्ट्री से सारा अपना सर्च डिलीट मार दिया, इस उद्देश्य से की अभय को कुछ पता ना चले।

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अगले एक हफ्ते तक वोह एक तरह का पैटर्न ही फॉलो करने लगी थी। रोज सुबह वोह उठ कर फ्रेशअप हो कर नाश्ते के लिए नीचे आ जाती थी। नाश्ते के बाद वोह कंप्यूटर पर काफी समय बिताती थी अपने कॉन्टैक्ट तक पहुँचने के लिए। उसके बाद वोह लाइब्रेरी जाति थी और कैटलॉग से जर्नल तलाशने के लिए।
जब भी वोह नीचे किसी से भी बात करती थी, उनमें से कुछ अपनी छोटी मोटी परेशानी और बीमारी ले कर आ जाते थे अनिका के पास उससे इलाज कराने और दवाइयां लेने। जल्दी ही उसकी अपने साथ लाई हुई दवाइयां कम होने लगी।
एक दिन ऐसे ही कैटलॉग में ढूंढते वक्त उसे एक किताब के बारे में पता चला। उसने उस किताब को निकाला। वोह किताब हर्बल मेडिसिन के इस्तेमाल से घरेलू नुस्खों पर थी।
बढ़ती उम्र के साथ, भले ही उसके मॉम और डैड दोनो ही डॉक्टर थे, उसने देखा था की वोह और उसकी बहन मायरा जब भी बीमार पड़ते थे, उसकी मॉम घरेलू नुस्खे ही अपनाती थी हल्के फुल्के खांसी जुखाम और बुखार के लिए। बल्कि जब वोह खुद डॉक्टर बनी तब भी वोह भी घरेलू नुस्खे अपनाती थी जहां तक पॉसिबल हो। उसने उस किताब को अच्छे से पढ़ा और पाया की उसमे कई तरफ की तकलीफों के लिए अलग अलग नुस्खे लिखे हुए हैं। इन घरेलू नुस्खों की सबसे बढ़िया बात यह थी की इससे कोई भी साइड इफेक्ट्स नही था।
यह सोच कर की यह किताब यहां के यानी सिंघम एस्टेट के लोगों के लिए बड़ी काम की चीज है, अनिका ने वोह किताब को लिया और नीचे आ गई। उसने वोह किताब एक औरत को दिखाई जिसे कब्ज की समस्या थी।

"यह तोह अरुंधती का है!" उस औरत ने किताब को देखते हुए कहा।

"यह अरुंधती कौन है?" अनिका को याद आया की अभय के कंप्यूटर का पासवर्ड भी यही है।

"अभय की मां। उन्हे घरेलू उपचार की महारथी हासिल थी। वोह बहुत सारी बीमारियों का इलाज अपने नुस्खों से कर लेती थी। कभी कभी तोह कुछ लोग पास के गांव से भी आ जाते थे और लाइन लगा कर घर के बाहर खड़े रहते थे उनकी मदद के लिए। अनिका थोड़ी निराश हुई यह जान कर क्योंकि वोह तब से देवसेना को अभय की मां समझ रही थी। हर दिन, घंटो वोह देवसेना के जर्नल को पागलों की तरह ढूंढने के लिए लाइब्रेरी में समय बिताती थी।

"ओह अच्छा! उनके साथ क्या हुआ था?" अनिका ने कैजुअली पूछ दिया, जबकि वोह जानती थी की वोह खतरे में पड़ सकती है अगर अभय सिंघम ने देख लिए उसे पूछताछ करते हुए।

उस बूढ़ी औरत की आंखे आग की तरह जल उठी। "एक झूठे, धोखेबाज कुत्ते ने उनकी हत्या कर दी थी। यही हुआ था उनके साथ!"

अनिका शॉक रह गई। "हत्या! हत्या से आपका क्या मतलब?"

उस औरत के चेहरे के भाव साफ साफ गुस्से और नफरत से भरे दिख रहे थे। "उस गंदे, झूठे, जमीन......"

"सीतम्मा!" अभय की तेज़ गुस्से से गरजती हुई आवाज़ ने उन्हे रोक दिया।
उस औरत का चेहरा डर से पीला पड़ गया। वोह अभय के आगबबूले चेहरे की ओर देखने लगी। अनिका भी उतनी ही डरी हुई महसूस कर रही थी। पिछले एक हफ्ते से, अनिका ने अभय से रेयर ही बात की थी और देखा था। जैसे ही वोह सुबह उठाती थी तोह फ्रेशअप होक वोह तुरंत बाहर भागती थी नीचे नाश्ते और बाकी खाने के लिए, बाकी के लोगों के साथ करने के लिए। और रात के समय, दिन भर की थकान, लाइब्रेरी में और कंप्यूटर पर घंटो बिताने के बाद, लोगों की समस्या दूर करने के बाद वोह बहुत थक जाती थी और जल्दी सो जाती थी। और इस वक्त, वोह फिर डरी हुई थी जैसे पहले डरा करती थी, एस्पीशली इसलिए क्योंकि अभय उसी के नजदीक बढ़ रहा था। अभय अनिक के नजदीक आया और उसका हाथ पकड़ के वहीं के पास के कमरे में ले गया और दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया।

"मैने तुम्हे पहले ही वार्न किया था ना, की फैमिली के बारे में कोई बात मत करना।"

"मैं... मैं बस क्यूरियस थी यहां के और यहां के लोगों के बारे में जानने के लिए। प्लीज, इसमें सीतम्मा की कोई गलती नही है। मैंने ही उनसे पूछा था की अरुंधती कौन है।"

अभय उसे और गुस्से से देखने लगा। "कभी दुबारा यह बात डिस्कस मत करना।"

"क.... क्यूं?" अनिका ने डट कर सामना करने की हिम्मत दिखाते हुए पूछा। वोह अब थक चुकी थी डर डर कर छुपने से। "वोह आपकी मां थी, और इस वजह से वोह मेरी सास हुई। मुझे हक है उनके बारे में सबकुछ जानने का।"

जैसे ही अनिका बोली, अभय की आंखें हैरानी से फैल गई, अब वोह उसे और डरावनी नज़रों से देखने लगा। वोह उसके और करीब बढ़ने लगा, उससे कुछ ही इंच की दूरी पर आ कर रुक गया। "हक?" अभय ने अपनी ठंडी आवाज़ में पूछा।

"ह... हां। मुझे हक है।" अनिका ने अपनी मुट्ठी बंद कर ली क्योंकि डर से उसके हाथ कांप रहे थे।

अभय धीरे से मुस्कुराया। अपने परफेक्ट रूप और एवं एक जैसे दांतो की वजह से वोह बाहरी रूप से काफी हैंडसम नजर आ रहा था। पर अनिका को उसकी आंखों में देख कर सिर्फ डर लग रहा था। उसकी आंखों में देख कर ऐसा लग रहा था की जैसे अभय उसे आंखों से घूर कर खा जायेगा।

"मेरी पत्नी के सारे हक और अधिकार पाने से पहले मैं तुम्हे कुछ समय देना चाहता था ताकी तुम सही से एडजस्ट हो जाओ। पर अगर तुम अपनी अधिकारों के मांग के लिए इतनी इच्छुक और उत्साहित हो तोह, शायद हमें तुम्हारे पत्नी धर्म के कर्तव्यों को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द कुछ करना चाहिए।"

अभय की इस धमकी से अनिका चाहती थी की वोह यहां से भाग जाए, पर उसने अपने आप को रोके रखा। यह वोह समय था जब अनिका उसे याद दिलाना चाहती थी की वोह उसे भ्रम में रखे हुएं हैं। क्योंकि सिंघम एस्टेट के सभी लोग अभय सिंघम को पूजते थे, उसका आदर सम्मान करते थे। तोह वोह इतना बुरा कैसे हो सकता है?

"आप कोई मॉन्स्टर नही हैं। मैं जानती हूं की आप मुझे चोट नही...."
इससे पहले की अनिका अपनी बात पूरी करती अभय ने उसके बाल पीछे से पकड़ कर अपने करीब कर लिया। फिर उसके बालों को कस कर पीछे खींचा ताकी अनिका का चेहरा ऊपर हो जाए।
अनिका डर से हांफने लगी।

"मेरे बारे में कभी कोई धारणा मत बनाना," अभय गुस्से से बोला, उसने उसके बालों पर अपनी पकड़ और कस दी। अनिका का चेहरा बच्चों की तरह रोने सा हो गया।

"आप कभी एक औरत को नुकसान नही पहुंचाएंगे," अनिका ने फिर भी हिम्मत कर कहा।

"मैं अभी इसी वक्त तुम्हे चोट पहुँचा रहा हूं," अभय ने कहा। वोह अनिका के चेहरे को पूरी तरह से घृणा की नज़रों से देख रहा था।

"मैं तुम्हे अपने सपनों में अलग अलग तरीकों से चोट पहुंचाते देखता हूं जो तुम इमेजिन भी नही कर सकती इवन एक मॉन्स्टर भी ऐसा नही कर सकता है। मेरा यकीन करो, मुझे भी यही सही लगेगा, और मेरे बाकी के लोगों को भी सही लगेगा। मैं तुम्हे इतना टॉर्चर करूंगा की तुम्हारी आत्मा को तुम्हारे जिस्म से निकाल फेंकुंगा, रह जायेगा तोह बस एक खाली बेजान शरीर। शायद इससे मेरे नुकसान की भरपाई हो सके।"

अनिका को अपनी गर्दन के इर्द गिर्द अभय के हाथ महसूस हुए जो की उस तरफ दबाव बना रहे थे। वोह डर से चींखी। अगले ही पल अभय ने अनिका का टॉप खींच कर दो टुकड़ों में फाड़ दिया जो की उसकी कमर पर आ कर लटक गया। उसके अप्पर बॉडी पार्ट पर सिर्फ उसका इनर वैर ही दिख रहा था।

अभय ने अनिका को एक छोटी सी गुडिया की तरह यूं बाहों में उठा लिया और पास ही रखे बैड पर पटक दिया। वोह उसके ऊपर आ गया और अनिका उसके नीचे थी।

अनिका का कंठ तोह डर के मारे ही सुख गया जब वोह अभय की चमकती गहरी आंखों में भड़कते हुए अंगारे देख रही थी। अभय काफी देर तक उसे यूहीं गुस्से भरी नजरों से घूरता रहा, जब तक की अनिका के आंखों से आंसू ना बह गए।

काफी देर की चुप्पी के बाद, अभय ने अपनी पकड़ अनिका के बालों पर ढीली कर दी।

"अब तुम्हे यकीन आया की मैं मॉन्स्टर हो सकता हूं की नही?" अभय ने धीरे से पूछा, लेकिन उसकी आवाज़ ही काफी थी अनिका के शरीर में सिहरन पैदा करने के लिए।

अनिका ने एक बार में ही झटका दे कर गर्दन हां में हिला दी।

"ध्यान रहे की तुम मेरे सभी ऑर्डर्स फॉलो करो। कभी किसी से किसी की भी फैमिली के बारे में ना पूछना और ना कुछ डिस्कस करना," अभय ने कहा।

अपनी रुकती हुई सांसों के साथ उसने हां में सिर हिला दिया।

"मुंह से बोलो," अभय ने मांग करते हुए कहा।

"मैं... मैं दुबारा किसी की फैमिली के बारे में कुछ नही पूछूंगी," अनिक ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया।

"गुड।"

अभय रोल होते हुए अनिकंके ऊपर से हटा, बैड से उठा और सीधे कमरे से बाहर निकल गया। छोड़ गया कांपती हुई, डरी हुई अनिका को।

बाकी का पूरा दिन अनिका ने ऐसे ही डरी हुई बिताया। उसका सारा ज्यादा तर समय लाइब्रेरी में बिताती थी, अपनी खोज में।

कुछ घंटो बाद, आखिरकार उसे देवसेना के बाकी के जर्नल मिल गए— जो की उसके लिए यह अंधेरे में रोशनी की एक किरण जैसी थी।









कहानी अभी जारी है...
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