Invaluable in Hindi Short Stories by दिनेश कुमार कीर books and stories PDF | अनमोल

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अनमोल

अमन... ये... ये तो वो लड़की नहीं लग रही जो तुमने पहले हमें मोबाइल फोन पर दिखाई थी अशोक जी ने अपने बेटे अमन से आश्चर्यजनक नजरें लिए पूछा जोकि अभी अजमेर से जयपुर अपने बेटे के बुलावे पर आएं थे अमन ने उन्हें बताया था कि उसने सगाई करने का फैसला कर लिया है माँ - पिताजी आप दोनों यहां आ जाइए...
अशोक जी और रेखा जी दोनों ही कब से उसे कह रहे थे कि तुम अब अच्छी नौकरी पर हो अब अपनी गृहस्थी बसा लो अमन ने बीते कुछ महीने पहले उन्हें बताया था कि उसने अपने ही आफिस की एक लड़की कल्पना को अपने जीवनसाथी के रूप में चुन लिया है दोनों आफिस के कही प्रोजेक्ट एक साथ कर रहे हैं इसलिए दोनों में अच्छी पहचान हो गई है और उसने कल्पना की कुछ फोटो भी भेजी थी जो अशोक जी और रेखा जी, दोनों को बहुत पसंद आई थी फिर वीडियो काल पर भी बात - चीत हुई थी मगर आज जो फोटो अमन दिखा रहा था वो तो किसी दूसरी लड़की की थी जिससे वो सगाई कर रहा है...
अमन, अशोक जी के प्रश्न पर गुस्से से बोला... वो लड़की सही नहीं थी पिताजी... इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया
सही नहीं थी मतलब... रेखा जी ने हैरानी से पूछा
माँ बस छोड़िए इस बात को
नहीं... ऐसे कैसे छोड़ दूं... हमने उससे बात की थी बहुत सभ्य संस्कारी लग रही थी उसकी सादगी मेरे मन में बस गयी थी मुझे तुम पर तुम्हारी पसंद पर गर्व हो रहा था और अब तुम उसे सही नहीं थी... साफ - साफ बताओ आखिर बात क्या है...
माँ - पिताजी... वो मेरे ही आफिस में काम करती थी हमारी बनती भी अच्छी थी मगर पिताजी मैं जब भी उससे अकेले में कहीं बाहर चलने के लिए कहता तो उसका जबाव होता तुम एक बार मेरे पिताजी से मिल लो वो तुम्हे अवश्य पसंद करेंगे क्योंकि वो अपनी बेटी पर पूरी तरह भरोसा करते हैं उनकी इजाज़त मिल जाएगी तो तुम जहां कहोगे वहां चलूंगी
तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है कल्पना
अमन... मुझे खुद पर भरोसा है मगर मेरे पिताजी... उन्होंने मुझे मेरी हर इच्छा को पूरी करने का हक दिया मुझे पढ़ना था उन्होंने मुझे मेरी इच्छा अनुसार पढ़ाया नौकरी करनी थी उन्होंने मना नहीं किया जो पिताजी अपनी बेटी पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं तुम चाहते हो में उनका भरोसा तोड़ दूं नहीं कभी नहीं... और मुझे तुम्हारी माँ जी - पिताजी से मिलने में बात करने में कोई हिचक नहीं है तो तुम क्यों पीछे भाग रहे हो आखिर मिल लो यकीन मानो वो तुम्हे निराश नहीं करेंगे में जानती हूं अपने पिताजी को उन्हें अपनी बेटी के निर्णय पर भरोसा है
तुम पागल हो आज जहां लड़का लड़की लिव इन रिलेशनशिप में अकेले रहने से भी संकोच नहीं करते वहां तुम मुझसे अकेले मिलने के लिए इजाज़त लेना चाहती हो देखो कल्पना शादी से पहले हमें एक - दूसरे को अकेले में साथ रहकर अपनी कम्फर्ट जोन देखना चाहिए कल को कोई परेशानी ना हो मतलब हमें एक दूसरे के साथ अधिक समय बीताना चाहिए और आफिस के कारण हम एक - दूसरे को उतना समय नहीं दे सकते समझने की कोशिश क्यों नहीं करती अपने पिताजी को बहाना बना कर कहो दोस्त की शादी है या कुछ और और फिर हम दोनों बाहर किसी हिल स्टेशन चलते हैं मौजमस्ती करते हैं
पिताजी थप्पड़ मार दिया उसने मुझे... और कहा मैं बहुत ग़लत थी अच्छा हुआ जो मैंने तुम्हें अपने पिताजी से नहीं मिलवाया वरना जिंदगी भर अफसोस रहता शुक्रिया श्रीमान् अमन जी...
मैंने कहा... तुम भूल कर रही हो तुम जैसी हजारों लड़कियां मुझ जैसे लड़के से शादी करने के लिए तैयार बैठी है जो अपने माँ जी - पिताजी का इकलौता है अच्छा खासा जमीन पैसा नौकरी है जिसके पास ...
मगर वो रुकी नहीं... तब मैंने सपना के साथ दोस्ती की पिताजी इसके पिताजी बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं लाखों का टर्नओवर है मेरी किस्मत चमक गई पिताजी इसलिए मैंने सपना से शादी करने का फैसला कर लिया...
लाखों के चक्कर में अनमोल हीरे को गंवा दिया तुमने अमन... कहते हुए अशोक जी धम्म से सोफे पर बैठ गए
अनमोल हीरा... क्या मतलब है आपका पिताजी
अमन... कल्पना अनमोल हीरा है और तुमने उस अनमोल उपहार जो कि ईश्वर ने ना जाने कैसे तुम्हारी झोली में डाल दिया था तुमने उस हीरे का अपमान किया... कल तक हमें तुम पर गर्व महसूस हो रहा था मगर आज तुम पर गुस्सा आ रहा है बेवकूफ कभी सोचा है जो लड़की एक बेटी होकर अपने पिताजी के प्रति पूर्ण रुप से ईमानदार रही वफादार रही वो पत्नी बनकर कितनी ईमानदारी से तेरे साथ जीवन की गाड़ी पार करवाती अबे नालायक वो अनमोल हीरा है
जीवन में ये धन दौलत काम नहीं आती जब तुम अकेले पड़ जाओगे ये दुनिया एक तरफ हो जाएं तब ऐसी पत्नियां ही एक टूटे हुए पुरुष का सहारा बनती है और वो सहारा वो कंधा जिसके पास होता है ना वो कभी भी नहीं हारता जैसे तेरी माँ... बुरे हालात में भी मेरे साथ खड़ी रही आज जो में जिस भी मुकाम को छू पाया वो कामयाबी मेरी अकेले की नहीं बल्कि इसकी है ये कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई थी मेरे साथ तुझे भी एक कामयाब इंसान बनाने में यही जीतोड़ मेहनत करती रही मगर आज तुमने वो किया जिसके कारण हमारा सिर शर्म से झुक गया में पूछता हूं कल तुम भी किसी बेटी के पिता बनोगे क्या तुम चाहोगे की तुम्हारी बेटी वहीं सब करें तुम्हारे भरोसे को तोड़ कर अपने प्यार को तवज्जो दें
कहो... अशोक जी की बातें सुनकर अमन का सिर शर्म से झुक गया वो रोते हुए बोला... मुझसे गलती हो गई पिताजी मुझसे गलती... मैं अब क्या करुं...
अगर तुम्हें सचमुच अपनी ग़लती का एहसास है तो तुरंत कल्पना और उसके पिताजी के पास जाकर क्षमा मांगो
जी पिताजी कहते हुए अमन, कल्पना के घर की और बढ़ गया...