Prem Nibandh - 14 in Hindi Love Stories by Anand Tripathi books and stories PDF | प्रेम निबंध - भाग 14

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प्रेम निबंध - भाग 14

समय यात्रा करते करते कुछ और दिन यू ही बीते जैसे बीती रात बिना किसी चांद के फिर भी वो रात भी बीती। और दिन निकला बादलों की आड़ में। जैसे कुछ कुकर्म किए हो उसने। हम सब जानते है हीर रांझा और पतंग से मांझा तक का संबंध। फिर भी पता नही क्यों हम नही समझ पाते हैं। कुछ और हम बह जाते है। अभी कुछ वक्त हो चला था। कि मैं स्वप्न से जागा और देखा तो सामने थी मेरे अपने इतिहास से परे विश्व इतिहास की एक किताब जो की दुनिया के इतिहास बताती थी। बस मेरा नही।
मैं बाहर निकलता हूं। और कुछ पानी की बूंदों की बारिश से खुद को भिगोता हूं। जिससे बस मैं खुद ही अहसास दिलाता हूं की मैं होश में हूं। तब तक एक आवाज और एक मन फोन पर आ ठहकते हैं। अब मैं सच में होश में आता हूं। जिसका न जाने कितने दिनों से कॉल न आए और अचानक से वही व्यक्ति दरवाजे पर दस्तक दे जाए तो सोचिए आप की ह्रदय गति का क्या हश्र होगा ?
कुछ यू ही मैंने फोन उठाया और जैसे ही कान में लगाया तो उधर से कोई उत्तर नही आवाज नहीं। जैसे कोई सिर्फ सुनना चाहता हो। अन्यथा कुछ नही। मैने एक स्वर में सिमट कर कह हेलो , उधर से स्वर के 10वे हिस्से की आवाज़ जिस्म एक प्यास थी। Hm, इससे अतरिक्त कुछ नही। और फिर पहले की तरह मैंने 12 खड़ी से लेकर और सभी विषय क्रम वार तरीके से स्वयं से उनको पूछा। आज भी वही हाल था। जो पहले जितना मैं पूछता जवाब उससे एक अंक कम ही आता।
मैं धीरे धीरे अपने को संभाल कर वापस लाया जिससे बातों को अब विस्तार न मिले। कुछ कहने पर उन्होंने भी कहा की और क्या हाल है। ? मैंने एक जीवंत उत्तर खोज कर रखा और कहा। सब कुछ बेहतर है। बस कुछ नही।
बाते आगे बढ़ी तो एक ऐसा प्रश्न उन्होंने दिया जिसका जवाब स्तब्ध कर देने वाला था।
शायद वो सवाल ही इस रिश्ते का अंत।
उन्होंने कहा : मेरा रिश्ता हो गया। ?
मैं : ............... शून्य में कुछ फेको तो वह तब तक आवाज नहीं करता जब तक किसी से टकराए न।
लेकिन ये शब्द बाण मुझे चीर गए।
और मैंने एक दबे स्वर में कहा। यह तो बहुत अच्छी बात है ,
Congratulations 🎉
माता पिता की इच्छा से अब तो सब कुछ शांत और खुशनुमा लग रह होगा।
हा तुम मेरे साथ वैसे भी कहा एडजस्ट कर पाती। चलो अच्छा हुआ समय रहते तुमने एक अच्छा पार्टनर ढूंढ लिया।
नही तो मेरे क्या मैं तो तुम्हे धोखा भी दे सकता था। ?
उन्होंने कहा: हा मैं बहुत खुश हूं। जो तुमसे रिश्ता नही हुआ।
अब कोई चिंता नहीं है न तुम्हे। सारा दिन फोन दुनियां दारी,तुम मैं और हम ये सब अब नही होगा।
हमने भी तीखे स्वर में कहा हा
अब तो खैर नहीं। जो होना था वो आपने अपने स्तर पर कर लिया। अब क्या ही होगा खैर
अब सब बताया है तो ये भी बता देती की .........