nai disha in Hindi Motivational Stories by Bhavana Shukla books and stories PDF | नई दिशा

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नई दिशा

नई दिशा

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आज रात ठीक से नींद नहीं आई. मन में कुछ बेचैनी-सी है। सोचने की कोशिश कर रही हूँ आखिर ऐसी क्या बात है जिसके कारण नींद नहीं आई और कुछ याद भी नहीं आ रहा। कभी-कभी ऐसा हो जाता है। चलो अच्छा हुआ आज जल्दी उठ गई आज अपने सामने सूर्य उदित होते हुए देखूंगी कितना सुंदर प्रतीत हो रहा है सूर्य की लालिमा कितनी अद्भुत है।

धीरे-धीरे सूर्य अपने रूप में बढ़ने लगा। तभी मेरे कानों में सिया का स्वर सुनाई दिया... "ज्ञानी मैडम जी आज जल्दी जाग गई क्या?”

हमने कहा..."अरे हाँ-हाँ।"

तब सिया ने कहा..."तो फिर चलो गार्डन के चक्कर लगा ले। तब तक न्यूज़ पेपर भी आ जाएगा।“

हमने कहा..."हाँ चलो चलते हैं"।

सिया ने कहा..."अच्छा ज्ञानी यह तो बता तू तुझे नौकरी करते-करते कई वर्ष हो गए. अच्छा खासा कमा रही हो अब शादी के बारे में क्या ख्याल है।“

हमने कहा..."सिया ख्याल तो ठीक है लेकिन ये काम समय पर ही होगा अभी समय नहीं आया।“

“अच्छा जी अब आपके भी कॉलेज जाने का वक्त हो रहा है कृपया जाइए और तैयार हो जाइए और अब फालतू बातें मत करिए...”

इतने में पेपर फेंकने की आवाज आई...

... जल्दी से जाकर चाय बनाई और मैं चाय की चुस्कियों के साथ तरह-तरह की देश दुनिया की खबर के बाद अब नगर के समाचार पर नजर ठहर गई. समाचार पढ़ते ही दिल दहल गया जल्दी से पूरा समाचार पड़ा... विश्वास नहीं हुआ। अरे! यह क्या हो गया दीपेश सर और आत्महत्या। कल ही तो मिले थे कॉलेज में। अचानक ऐसा क्या हो गया। कितने सीधे और शांत स्वभाव के थे. वे ज़्यादा किसी से बात नहीं करते थे अपने काम से काम मैं मतलब रखते थे, सबकी मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। हे! भगवान क्या बीतेगी दिशा पर। कॉलेज की सबसे अच्छी जोड़ी थी। कहीं हम सबकी नजर तो नहीं लग गई दोनों को।

दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ाते हैं एक दूसरे से ज़्यादा बात नहीं करते मर्यादा में रहते थे बस साथ आते जाते हैं हम सभी इस जोड़ी को सम्मान की नजर से देखते हैं।

मन रो रहा है अखबार की खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है। यह दिन देखना था इससे तो अच्छा था शादी ही नहीं करते। ऐसा लग रहा है जैसे कल ही की बात है जब उनकी शादी हुई थी। एक साल कुछ महीने ही तो हुए हैं शादी को।

आज भी याद है जब दिशा दीपेश शादी का कार्ड लेकर आए थे। कितने खुश थे हम सबको लगा लव मैरिज है एक ही कॉलेज मैं और किसी को पता ही नहीं चला। सबने एक साथ कहा वाह क्या बात है। भाई बड़े छुपे रुस्तम निकले। दोनों ने बड़ा सरप्राइज दिया।

दीपेश ने तुरंत कहा..” नहीं हमारी अरेंज मैरिज है पापा के दोस्त ने यह रिश्ता बताया इत्तेफाकन हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ाते हैं।“

तब दिशा ने कहा.. “मेरे पापा निधन से पहले यह रिश्ता तय कर रहे थे आज यह अवसर आ गया .”हम सब ने खूब बधाई दी दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे।

तभी मिसिस गुजराल जो बहुत मजाकिया किस्म की है वे बोली..."चलो अच्छा हुआ दोनों को एक दूसरे का इंतजार नहीं करना पड़ेगा... साथ आयेंगे साथ जायेंगे. और तो और जब मन चाहा  एक दूसरे का चेहरा देखने का तो देख लेंगे।"

सभी ने जोर से ठहाका लगाया हा...हा...हा...हा।

दिशा ने कहा... "आप भी खूब है गुजराल मिस।"

वह दिन आ गया जब दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए. बहुत ही शांति और शालीनता के साथ यह विवाह कार्य संपन्न हो गया।

शादी के बाद दिशा बहुत खुश थी। जैसा जीवन साथी वह चाहती थी उससे मिला। बहुत शांत स्वभाव का, बहुत प्यार करने वाला, पत्नी की इज्जत करने वाला, सब को सम्मान देने वाला, सभी गुणों से संपन्न पति उसे मिले। लेकिन उसका कहना है—यह है बहुत अच्छे पर बहुत कम बोलते हैं। मैं बहुत ज़्यादा बोलती हूँ। पर मेरा बोलना इन्हें बहुत अच्छा लगता है। कहते हैं तुम्हें सुनना अच्छा लगता है।

घर पर सभी दिशा से खुश थे जैसी बहू उन्हें चाहिए कि उन्हें मिली। घर पर सब का ध्यान रखना सबकी पसंद का ख्याल रखना। कॉलेज से आने पर भी अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना। इस वजह से दिशा ने सबका दिल जीत लिया था।

बहुत दिनों बाद दिशा अपनी माँ से मिलने जा रही है माँ की तबीयत कुछ ठीक नहीं है। सासू माँ ने कहा..."बेटा जल्दी आ जाना अब तुम्हारे बिना दिल नहीं लगता।“

दिशा ने कहा..."जी मम्मी जी जल्दी आ जाऊंगी।“

दिशा के घर पर उसकी माँ और छोटी बहन भी है। दिशा और दीपेश उनका बहुत ध्यान रखते हैं। दिशा ने बताया था कि उसके चाचा ताऊ का घर जमीन को लेकर झगड़ा चल रहा है। उन लोगों ने धोखे से सारी जमीन पर कब्जा कर लिया और इन लोगों को बेघर कर दिया। तब दीपेश ने अपने घर के पास ही एक किराए का मकान ले लिया उनके लिए. यह दोनों एक-दो दिन में चक्कर लगा लेते थे हाल-चाल पूछ लेते थे। क्योंकि माँ भी गले के कैंसर की बीमारी से जूझ रही थी। छोटी बहन बी एस सी. लास्ट ईयर में पढ़ रही थी। उसका ध्यान रखना तथा घर पर सास ससुर की जिम्मेदारी को संभालते हुए अच्छे से दिन गुजर रहे थे कि अचानक एक वज्रपात हुआ। माँ को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया और वहाँ उनका निधन हो गया। दिशा को संभालना मुश्किल हो गया। अब सान्या का क्या होगा वह यही कहे जा रही थी। कैसे रहेगी अकेली वह उसका जीवन बिल्कुल वीरान हो गया।

हम सब उसके घर माँ के उठावने पर गए थे।

वहाँ पर इतनी खामोशी का वातावरण कुछ कहा भी नहीं जा रहा था उसका जीवन एक अनबुझ पहेली बनकर रह गया था दिशा क्या करें क्या न करें। बस चुप बैठी थी आंसू तो जैसे सूख चुके थे। तभी उसके पति दीपेश सर ने कहा 13 दिन बाद हम सान्या को भी लेकर अपने घर जाएंगे। तुम चिंता मत करो सान्या अकेली नहीं है हम सब है उसका सहारा।

कुछ दिनों बाद पता चला सान्या घर आ गई है। हम सबको लगा अब दिशा की समस्या का समाधान हो गया है।

लेकिन क्या समस्या का कभी अंत होता है एक के बाद एक समस्याएँ मुंह बाए खड़ी रहती है।

धीरे धीरे अब सान्या मन लगाने की कोशिश करने लगी। मन में उसके भी सवाल उठता क्या ज़िन्दगी है उसकी? क्या सोचा था क्या हो गया? आज बहन की ससुराल में रहना पड़ रहा है। वह जानती है कि दीदी की सासु माँ को मेरा रहना अच्छा नहीं लगता। हर रोज कुछ न कुछ बात पर झगड़ा करती रहती है।

दोनों सामंजस्य बनाने की कोशिश करते रहते। वे सोचते हमें माँ बाप बन कर जिम्मेदारी को पूरा करना है।

जैसे ही हम लोग घर आते सुबह से ही माताजी किसी न किसी बात पर ताना कसती. यह घर है कोई धर्मशाला नहीं है। दीपेश अपनी माँ को खूब समझाते लेकिन उनका व्यवहार समझ से परे था।

यह हमेशा मानसिक तनाव में रहते चुप-चुप से रहने लगे।

ज्यादा बोलते नहीं पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा है। कैसे उनसे कहें क्या करें क्या न करें जिसमें शांति बनी रहे। माँ को जब पसंद नहीं तो सान्या को हॉस्टल में भेज देते हैं लेकिन वहाँ का खर्चा भी बहुत है सोचते हैं यह साल पूरा हो जाए जब तक पैसे भी एकत्र कर लेंगे।

सान्या भी रोज की किच-किच से तंग आ चुकी थी इसका असर उसकी पढ़ाई पर पड़ रहा था। बस सुन-सुन कर रोती रहती थी। सोच रही थी-दीदी और जीजू को मेरे कारण यह सब सहना पड़ रहा है। काश आज माँ और बाबूजी होते तो यह दिन न देखना पड़ता मेरी भी किस्मत खराब है यह दिन देखना पड़ रहा है।

दिशा ने कहा...”नहीं बेटा ऐसा मत कहो न ही ऐसा सोचो। हम लोग हैं न तुम्हारे लिए कुछ दिन की बात और है फिर हम तुम्हें हॉस्टल में भेज देंगे जिससे तो निश्चिंत का से पढ़ाई पूरी कर सकोगे क्योंकि यहाँ तुम्हारी पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है। इतने में दीपेश आ गए उन्होंने भी सान्या समझाया कहा जब ठीक सब कुछ ठीक हो जाएगा।“

इतने में फोन की बेल बजी ध्यान भंग हुआ अरे! कब से घंटी बज रही है उठा क्यों नहीं रही ज्ञान की आंखों में आंसू बह रहे हैं और बोल क्या बात है... आज का पेपर पढ़ा क्या? हाँ वही पढ़ते-पढ़ते ख्यालों में कल तक क्या था और आज क्या हो गया है... ज्ञान दुखी मत हो मुझे मालूम है दिशा तुम्हारी अच्छी दोस्त है वह सब कुछ तुमसे शेयर करती है।

हम सब आज पहले उसके घर बैठने जा रहे हैं 10: 00 बजे का टाइम है वहाँ पहुंच जाना। मेरी भी किस्मत खराब है यह दिन देखना पड़ रहा है।

जैसे ही हम सब दिशा के घर पहुंचे दिशा जैसे पत्थर की मूरत हो बस बुत बनी बैठी थी हम लोगों ने उसे हिलाया रुलाने की कोशिश की लेकिन बस उसके मुंह से यही निकला शादी मत करना सान्या देखो मुझे क्या मिला।

इतने में सासु माँ बोली..."इसकी माँ ही खा गई मेरे बेटे को पिछले महीने की 11 तारीख को माँ गई और इस महीने की 11 तारीख को मेरा बेटा गया।"

हमने कहा कुछ मत सोचो जो हुआ सब ईश्वर की मर्जी थी यह सब हमारे ही कर्मों का फल है जो हमें भोगना पड़ता है अच्छा समय भी आएगा।

इतने में पिताजी बोले..."आप लोग चिंता ना करें हम लोग हैं न इसके लिए यह हमारी बहू भी है बेटा भी है।“

थोड़ी देर बाद हम सब ने दिशा से विदा ली सान्या को दिलासा दिलाया और भारी मन लिए लौट आए. रास्ते भर तब यही बातें करते रहे ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं। लेकिन दीपेश सर को ऐसा नहीं करना चाहिए हिम्मत से सामना करना था।

वहाँ पता चला सर रोज सुबह टहलने जाते थे और दूध लेकर वापस आते थे। आज काफी देर हो गई वापस नहीं आए और कॉलेज के लिए भी देर हो रही थी। कभी किसी ने आकर सूचना दी दीपेश जी वहाँ गड्ढे में गिरे पड़े हैं। जाकर देखा तो वह उस रास्ते जाते नहीं थी बहुत ऊंचाई से नीचे छलांग लगाई. लेकिन पुलिस केस  बने नहीं, इस कारण कहा गया गड्ढे में पांव फिसल गया। लेकिन दूसरों की ज़िन्दगी के बारे में उन्होंने नहीं सोचा। पता नहीं अब उनके परिवार का क्या होगा।

ज्ञान ने कहा..."जिसने दर्द दिया है वही उसे संभालेगा। यह ज़िन्दगी के रंग बहुत निराले किसी को गम तो किसी को खुशी नसीब होती है।"

धीरे-धीरे समय बीतता गया। कई दिनों के बाद दिशा कॉलेज आई बहुत शांत न किसी से बात करना न किसी से कुछ कहना। सब लोगों ने उसके हालचाल पूछे और कहा किसी भी चीज की ज़रूरत हो तो बता देना।

आज इस बात को कोई करीब 4 महीने बीत गए. घर पर माताजी के व्यवहार में न कोई परिवर्तन आया। यह सब सोचना छोड़ दिया है दिशा ने कहा ... पिताजी तो बहुत ध्यान रखते हैं हम दोनों का।

दिशा ने कहा अब सान्या को होस्टल में भर्ती करने के लिए पैसे जमा कर रहे है कुछ इनका जमा पैसा है जो अगले साल तक मिल जाएगा।

सब लोग कॉलेज में लंच टाइम में मिलते थे दिशा को बहुत हंसाने की कोशिश भी करते हैं लेकिन वह हंसने का नाम ही नहीं लेती। आज वह जल्दी घर जा रही है कुछ मेहमान आने वाले है।

दिशा घर पहुंची मेहमान आ चुके थे उसकी बुआ सास जो अमेरिका में रहती थी वह है और उसका लड़का दोनों से वह पहली बार ही मिली थी उसने उन्हें प्रणाम किया और किचन में काम करने लगी।

उसे सुनाई दे रहा था बुआ जी माँ से कह रही थी तेरी बहू बहुत सुंदर है इसके साथ अच्छा नहीं हुआ। ईश्वर जो खेल न खिलाए वह थोड़े हैं।

तुम लोग कब तक हो यह अकेली इस संसार में जीवन कैसे व्यतीत करेगी अपने जीते जी इसके हाथ पीले कर दो पुण्य मिलेगा। जी-जी अभी साल भी नहीं हुआ है और यह सब सोचना पाप है ऐसी बातें न करो। पिताजी ने कहा सुखी सही कहती है हम लोग अपने सुख की खातिर उसकी ज़िन्दगी तबाह नहीं करेंगे इस विषय पर अवश्य विचार करेंगे।

दिशा से रहा नहीं गया उसने आकर बुआ जी से कहा... "प्लीज ऐसी बातें न करें मैं इस घर में उनकी सेवा करते-करते सारी ज़िन्दगी निकाल दूंगी"।

बेटा अभी नहीं कुछ समय बाद सोचेंगे तुम चिंता मत करो अपना काम करो।

बुआ जी का बेटा देख रहा था उसने देखा दिशा के आंसू जो बोलते-बोलते बहते जा रहे थे। दिशा अपना काम करके अपने कमरे में चली गई और सान्या से गले लग कर खूब रोई.

बुआ जी के बेटे ने कहा..."मामी जी मामा जी आप लोग भी अमेरिका चलिए, यहाँ अब क्या रखा है हम सब लोग साथ रहेंगे माँ को भी आप सबका साथ मिल जाएगा"। मामा जी मुझे ही आप लोग अपना बेटा समझिये।

बेटा यहाँ से जाने को जी नहीं करता फिर भी सोचेंगे इस विषय में...

कुछ दिनों के बाद बुआ जी और उनका बेटा दोनों अमेरिका चले गए और जाते-जाते बुआ जी दिशा को ₹5 लाख का चेक देकर के गए और कहा सान्या का एडमिशन करवा दो और बाकी की एफडी करवा दो। लेकिन दिशा ने लेने से इनकार किया उन्होंने भाई की कसम देकर दिशा को थमा दिया दिशा सोच में पड़ गई परिवार में भी अच्छे लोग हैं जो हितैषी हैं।

रोज उन सब के फोन आते बातें होती कभी-कभी बेटा विजय भी बात करता उसने कहा। अब 4 महीने बाद हम सब पर आएंगे दिशा के मन में कुछ हलचल-सी होने लगी उसे लगा कोई तो हमारा ध्यान रखने वाला है दिशा भी उनके आने का इंतजार करने लगी...

दिशा ने कहा..."ज्ञान हमारे परिवार को वह लोग अमेरिका बुला रहे हैं मैं क्या करूंगी वहाँ जाकर माँ पिताजी को भेज दूंगी"।

ज्ञान ने कहा..."अगर तुझे वहाँ अच्छी नौकरी मिलती है तो वहीँ सान्या को भी ले जा, नई ज़िन्दगी नई तरह से जी यहाँ दीपेश की यादें तुझे जीने नहीं देगी"।

4 माह का अंतराल बीत गया विजय और बुआ जी का फिर आगमन हुआ आते ही उन्होंने एक धमाका किया। हम अब जाएंगे तो तुम सबको साथ लेकर जाएंगे नहीं तो हम नहीं जाएंगे। हम न-न करते रहे एक माह का समय लेकर आए थे। हमारा पासपोर्ट फैमिली वीजा लगवा दिया बिना सोचे बिना समझे अमेरिका जाने का प्रोग्राम बन गया।

पिताजी ने घर किराए पर दे दिया और कहा हर माह का बैंक में चैक डलवा दिया करना...

हम सब ने अपनी तैयारी की कपड़ों के सिवा कुछ भी साथ नहीं ले गए. सिर्फ़ दीपेश की यादें है जो हमेशा साथ रहेंगी। भारत छोड़कर जाना बहुत बुरा लग रहा था।

आज कॉलेज में मेरा आखिरी दिन था सबने भावभीनी विदाई दी और कहा…” खुश रहो हम सब फेसबुक पर तुमसे बात करते रहेंगे।“

अगले ही पल हम सब अमेरिका पहुंच गए. लेकिन अजनबी जगह पर सब कुछ अजनबी-सा लग रहा था। वहाँ पहुंचते ही विजय ने मेरा बायोडाटा यूनिवर्सिटी में दे दिया कुछ दिनों बाद कॉल आ गई और मेरा सिलेक्शन हो गया वहाँ पर भारतीयों को बहुत महत्त्व देते हैं।

कॉलेज हम अक्सर भारतीय पहनावे में जाते हैं कभी सलवार कुर्ते में कभी साड़ी में विजय ही रोज छोड़ने और लेने जाते थे। एक दिन विजय कुछ शॉपिंग करके लाए तो उसमें जींस टॉप भी था मैंने कहा मैं अपनी मर्यादा नहीं छोडूंगी। पिताजी ने कहा बेटा जैसा देश वैसा वेश। तुम ड्रेस की जगह जींस कुर्ता पहन लो कोई फर्क नहीं पड़ता।

वहाँ काम करते-करते 6 माह बीत गए.सान्या का मन भी कॉलेज में लगने लगा। मैं सोच रही थी कहाँ से कहाँ ले आई ज़िन्दगी जो सोचा न था वह हो गया। सच ही कहा था जो बिगाडता है वही पार भी लगाता है।

एक दिन बुआ जी ने कहा..” अब विजय की शादी करनी है लड़की देख रही थी सब लोग शादी डॉट कॉम पर लड़की तलाश रहे थे।“

 लेकिन विजय ने कहा…” मुझे इन सब से शादी नहीं करनी। तो माँ ने कहा किससे करनी है बेटा तो बताओ।“

मामा जी मैं जो कहने जा रहा हूँ वह सही है या नहीं यह मैं नहीं जानता अगर आपको ग़लत लगे तो माफ कर देना।

बोल बेटा बोल-बोल तो सही... “मामा जी मुझे दिशा से शादी करनी है उसे मैं एक नई ज़िन्दगी देना चाहता हूँ। मैंने बहुत सोचा मैं नहीं करूंगा तो कौन दिशा को अपनाएगा। यदि कोई मिल भी गया तो वह सही होगा इसकी क्या गारंटी है।“

दिशा यह सुनकर बहुत चकित रह गई. यह क्या कह रहे हैं आप।

“मैं सच कह रहा हूँ। यदि तुम तैयार नहीं तो मैं भी किसी से शादी नहीं करूंगा। क्योंकि किसी और को घर पर लाकर घर की शांति को भंग नहीं करना।“

सभी ने दिशा से कहा सोच लो दिशा सबने समझाया और तो और सान्या ने भी कहा..   “दीदी सच ही तो कह रहे है विजय जी ।“

दिशा सोच में पड़ गई और सब की बातों पर विचार किया और उसने हाँ की।

तभी विजय ने कहा... “अपने मन से पूछो मैं ग़लत तो नहीं कह रहा। मैंने भी बहुत सोच विचार कर यह बात कही है। जीवन में मैं किसी के काम आ सकूं यह मेरे लिए खुशकिस्मती की बात और क्या हो सकती है।“

मां को थोड़ा झटका लगा अपना बेटा याद आ गया।

लेकिन फिर बहू का भविष्य उसकी ज़िन्दगी यह सोचकर सबने खुशी-खुशी इस रिश्ते को स्वीकार किया। घर की बहू अब घर पर ही रहेगी। हमारी इज्जत हमारे घर की शोभा बनी रहेगी।

रात के 12: 00 बजे नींद नहीं आ रही थी फेसबुक खोला तो फोटो पर नजर पड़ी दिशा की शादी की फोटो विजय के साथ यह देख कर बहुत खुशी हुई और तुरंत बधाई भेज दी। मुंह से बस एक शब्द निकला जो ज़िन्दगी लेना जानता है वह ज़िन्दगी देना भी जानता है। चलो अच्छा हुआ दिशा को एक नई दिशा मिल गई...

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