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पुराना प्रेम पत्र

मिलन स्वभाव से बहुत शर्मिंदा युवक था, अपने मन की बात कहने के लिए भी उसे शब्द ढूंढने से भी नहीं मिलते थे, लेकिन पढ़ाई लिखाई खेल कूद सुंदरता सबसे मेल जोल में वह प्रथम था।

उसके पड़ोस में एक साउथ इंडियन परिवार रहता था, उस परिवार में रमन नाम का एक लड़का था वह मिलन का बहुत अच्छा दोस्त था और मिलन के पापा रमन के पापा मिलन की बहन रमन की बहन के आपस में बहुत अच्छे संबंध थे, लेकिन मिलन की मां और रमन की मां एक दूसरे को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी।

26 जनवरी आने वाली थी, इसलिए दिल्ली 26 जनवरी देखने रमन के मामा मामी अपने बेटे नागार्जुन बेटी पल्लवी के साथ रमन के घर आते हैं।
मिलन के मामा जी को छोड़कर उनके परिवार में किसी को भी हिंदी नहीं आती थी।

रमन के पिताजी अपने साले साहब और उनके परिवार के आने की खुशी में उनके साथ साउथ इंडियन खाने की दावत मिलन के परिवार को भी देते हैं।

रात को जब मिलन का परिवार और रमन का परिवार खाने की टेबल पर साथ बैठते हैं, तो रमन की बहन और ममेरी बहन पल्लवी सबको रसोई में से गरमा गरम साउथ इंडियन खाना लाकर खाने के लिए देती है।

रमन के पापा बताते हैं कि पल्लवी ने सारा साउथ इंडियन खाना बनाया है।

खाना इतना स्वादिष्ट था, कि मिलन की मां जो रमन की मां को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी, वह भी पल्लवी की प्रशंसा करने पर मजबूर हो जाती है।

मिलन के मम्मी पापा पल्लवी को अपने पास बुलाकर साउथ इंडियन खाने की बहुत प्रशंसा करते हैं, लेकिन पल्लवी अपनी भोली भाली सूरत से और अपनी बड़ी-बड़ी अति सुंदर आंखों से चुपचाप उनकी तरफ हल्की सी चेहरे पर मुस्कान बिखेर कर प्यार से खड़े होकर देखती रहती क्योंकि पल्लवी को हिंदी समझ नहीं आती थी।

फिर रमन की मम्मी कहती है, पल्लवी को हिंदी नहीं आती है, यह सुनने के बाद मिलन की बहन अपने बालों में से गुलाब का फूल निकाल कर पल्लवी के लंबे लंबे बालों में लगा देती है।

जब मिलन की बहन पल्लवी के बालों में गुलाब का फूल लगा रही थी, तो उस समय मिलन और पल्लवी की नजरें मिल जाती है जब मिलन पल्लवी की नजरों से नजरें हटाने में असहाय हो जाता है, तो खुद पल्लवी दूसरी तरफ अपनी नजरें कर लेती है।

रात को सोने से पहले भी मिलन के सामने पल्लवी का चेहरा घूमता रहता है, इसलिए मिलन अपने कॉलेज से घर आने के बाद बिना खाए पिए रमन के घर पहुंच जाता है।

और उस समय उसके घर में उसे सिर्फ रमन की बहन और पल्लवी मिलते हैं, बाकी सब परिवार वाले किसी रिश्तेदार के घर गए हुए थे।

रमन की बहन सबके लिए कॉफी बनाने रसोई घर में चली जाती है, मिलन पल्लवी से बात करना तो चाहता था, लेकिन पहले तो वह शर्मिल युवक था, दूसरा पल्लवी को हिंदी नहीं आती थी ।

लेकिन मिलन को यह तो महसूस हो गया था, कि पल्लवी भी उसे पसंद करने लगी है।

और 26 जनवरी का दिन आ जाता है। 26 जनवरी के दिन मिलन सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर रमन के घर पहुंच जाता है, और फिर रमन रमन कि बहन रमन के मामा मामी के साथ 26 जनवरी देखने जाता है और 26 जनवरी देखने के बाद शाम को लाल किला घूमने जाता हैं।

शर्मिला मिलन सिर्फ अपनी नजरो से पल्लवी से अपने प्यार का इजहार करता है, नजरों ही नजरों में पल्लवी भी बिना बोले कह देती है कि ",मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन सब कुछ समझने के बाद ही मिलन की हिम्मत नहीं होती है कि पलवी से उसके दिल की बात पूछ लू।

और एक सप्ताह के बाद रमन के मामा जी वापस अपने परिवार के साथ अपने घर जाने की तैयारी शुरू कर देते हैं, अपने घर जाने से पहले पल्लवी रमन के बड़े से रजिस्टर के खाली पन्ने में कुछ लिखकर जल्दी से रजिस्टर मिलन के हाथ में पकड़ा देती है।

इतने में टैक्सी आ जाती है और रमन के मामा मामी परिवार के साथ टैक्सी में बैठ कर सबको नमस्ते है और बच्चों को प्यार करके एयरपोर्ट चले जाते हैं।

मिलन उस रजिस्टर को रमन की टेबल पर रख देता है, तीन बरस बीत जाते हैं।

मिलन को रमन से पता चलता है कि पल्लवी की शादी होने वाली है, यह सुनकर उसे बहुत दुख होता है और मिलन को अपने शर्मिले स्वभाव पर बहुत गुस्सा आता है। वह अपने मन में सोचता है कि शर्मीले स्वभाव की वजह से मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया‌।

इसलिए वह घर के पास वाले पार्क में जाकर बेंच पर बैठ जाता है, पार्क में कुछ बच्चे खेल रहे थे, उन बच्चों में आठ नौ बरस की दो सहेलियां में से एक लड़की मूंगफली के लिफाफे पर जो लिखा था, उसे पढ़ने की कोशिश कर रही थी, तो उसकी दूसरी सहेली कहती है "इस पर हिंदी में नहीं कनाडा में लिखा है मिलन।"

कन्नड़ में मिलन नाम सुनकर मिलन अपनी बेंच से उठकर उन दोनों लड़कियों के पास जाता है और उसे लड़की से पूछता है जिसने कहा था कि इस पर कन्नड़व मिलन लिखा हुआ "की बेटा आपको कैसे पता इस पर कन्नड़ में मिलन लिखा हुआ है?

तो वह लड़की मिलन को बताती है कि "मैं साउथ इंडियन हूं मेरा नाम मीनाक्षी है, इसलिए मुझे कन्नड़ भाषा।"

"तो बेटा पूरा पढ़ कर सुनाओ इस पर क्या लिखा हुआ है।" मिलन कहता है "मैं भी मिलन तुमसे बहुत प्यार करती हूं और मैंने तुम्हें दिल से अपना जीवन साथी मान लिया है तुम्हारी पल्लवी।" लड़की पढ़कर सुनाती है।

उस लड़की के पढ़ते ही मिलन खुशी से पागल हो जाता है और दोनों लड़कियों को और मुंगफली खाने के लिए पैसे देता है।

और मिलन को याद आ जाता है पल्लवी ने जाने से पहले रमन के रजिस्टर पर कुछ लिखकर रजिस्टर मुझे दिया था और मैंने वह रजिस्टर बिना देखे रमन की टेबल पर रख दिया था।
फिर मिलत सोचने लगता है कि मेरा पुराना प्रेम पत्र पहले काबडी के पास गया, फिर किसी लिफाफे बनाने के वाले के पास, और फिर मूंगफली वाले के पास उसके बाद इन बच्चों के हाथों से मेरे पास आया।

मिलन अपने पुराने प्रेम पत्र को अपनी कमीज की दिल के पास वाली जेब में रखकर सीधा अपने घर जाकर और रमन के घर जाकर अपनी और पल्लवी की प्रेम कहानी बता देता है।

और पुराने प्रेम पत्र की वजह से पल्लवी और मिलन का मिलन हो जाता है।