Musafir Jayega kaha? - 27 in Hindi Thriller by Saroj Verma books and stories PDF | मुसाफ़िर जाएगा कहाँ?--भाग(२७)

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मुसाफ़िर जाएगा कहाँ?--भाग(२७)

अभी तीन चार दिन ही हुए थे किशोर और ओजस्वी को शान्तिनिकेतन में रहते हुए कि तभी ठकुराइन कौशकी जी का ऋषिकेश से तार आया और उसमें लिखा था कि......
उनकी बहुत ज्यादा तबियत खराब है,उन्होंने सबको ऋषिकेश बुलवाया है,उनका सभी को देखने का बहुत मन है और हाँ तेजस्वी को लाना मत भूलना,क्या पता अब मैं यहाँ और कितने दिन की मेहमान हूँ...
ये खबर सुनकर ओजस्वी परेशान हो उठी और किशोर से बोली...
"हम सभी को फौरन ऋषिकेश के लिए रवाना होना होगा",
"हाँ!चलो आज ही हम सभी माँ के पास चलते हैं",किशोर बोला...
"उन्होंने तो तेजस्वी को भी साथ लाने को कहा है,लेकिन तेजस्वी हम लोगों के साथ कभी नहीं आएगी और हम लोगों के साथ तेजस्वी को ना देखकर माँ का तो दिल ही टूट जाएगा,समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ",?,ओजस्वी बोली...
"ओजस्वी!तुम ऐसा करो कि तुम रामस्वरूप जी और नारायन के साथ जीप में बैठकर ऋषिकेश चली जाओ",किशोर बोला...
"और आप नहीं चलेगें क्या मेरे साथ"?,ओजस्वी ने पूछा...
"मैं तेजस्वी के साथ ट्रेन में ऋषिकेश आ जाऊँगा,पहले मैं उसे मनाने हवेली जाऊँगा ,फिर हम दोनों ऊधवगढ़ से ट्रेन पकड़कर हरिद्वार जाऐगें और वहाँ से ऋषिकेश पहुँच जाऐगें",किशोर बोली...
"तो क्या आपके मनाने से तेजस्वी मान जाएगी?",ओजस्वी किशोर से बोली...
"एक बार कोशिश करने में क्या बुराई है,अगर मेरे मनाने से वो मान जाती है तो बहुत अच्छा,नहीं तो मैं अकेले ही ऋषिकेश आ जाऊँगा"किशोर बोला...
"आप कहते हैं तो ठीक है,लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो मानेगी",ओजस्वी बोली...
"कोई बात नहीं,नहीं मानेगी तो उसकी मर्जी,हम दोनों अपने फर्ज से क्यों चूके?",किशोर बोला....
"आप शायद ठीक कह रहे हैं,तो फिर मैं किसी नौकर को हवेली भेजकर नारायन को बुलवा लेती हूँ,वो जीप लेकर यहाँ आ जाएगा",ओजस्वी बोली...
" क्या तेजस्वी नरायन को यहाँ जीप लाने देगी?",किशोर ने पूछा...
"नहीं! लाने देगी तो फिर मैं रामस्वरूप जी के साथ ट्रेन में बैठकर ऋषिकेश चली जाऊँगी,क्योंकि माँ के पास तो जाना जरूरी है ना!",ओजस्वी बोली....
"ठीक है तो मैं अभी किसी नौकर को बोल देता हूँ तो वो साइकिल से जाकर हवेली में ये खबर पहुँचा आएगा",किशोर बोला...
और फिर हवेली में ये खबर देने के लिए किसी बूढ़े नौकर को भेजा गया और वो साइकिल से खबर लेकर हवेली पहुँचा तो तेजस्वी से उस नौकर ने कहा....
"छोटी बिटिया! मालकिन की तबियत बहुत खराब है और बड़ी बिटिया उन्हें देखने ऋषिकेश जाना चाहतीं हैं,इसलिए उन्होंने कहा है कि नारायन फौरन ही जीप लेकर शान्तिनिकेतन पहुँचे",
"तो क्या केवल दीदी ही ऋषिकेश जा रहीं हैं"?,तेजस्वी ने नौकर से पूछा...
"नहीं! रामस्वरूप जी भी उनके साथ जाऐगें",बूढ़ा नौकर बोला...
"और उनके पति किशोर बाबू! क्या वें ऋषिकेश नहीं जाऐगें",तेजस्वी ने पूछा...
"नहीं! उन्होंने कहा कि वें पहले आपको लिवाने हवेली आऐगें तब आपके साथ ऋषिकेश जाऐगें",बूढ़ा नौकर बोला...
"ओह...तो ये बात है",तेजस्वी बोली....
और फिर तेजस्वी के मन में एकाएक एक विचार कौंधा और वो मंद मंद मन ही मन मुस्कुराकर बूढ़े नौकर से बोली...
"ठीक है काका! मैं नारायन को जीप लेकर अभी भेजती हूँ और किशोर बाबू से कहना वें यहाँ जल्दी आएं ,मैं यहाँ उनका इन्तजार कर रही हूँ",
और फिर बूढ़ा नौकर तेजस्वी का संदेशा लेकर शान्तिनिकेतन पहुँचा और ओजस्वी से बोला कि...
"छोटी बिटिया ने कहा है कि वो फौरन ही जीप लेकर नारायन को भेज रहीं हैं और वें खुश थी कि जब मैनें कहा कि किशोर बाबूजी हवेली आने को कह रहे थे",
" ठीक है काका! आप जाइए,मैं ये बात किशोर बाबू से बता देती हूँ",ओजस्वी बोली...
और फिर ओजस्वी किशोर के पास जाकर बोली...
"किशोर बाबू! लगता है तेजस्वी ऋषिकेश जाने को मान जाएगी,आप जल्दी से उसे मनाकर साथ लेकर ट्रेन से ऋषिकेश पहुँच जाइएगा",
"ठीक है ओजस्वी! तुम अपने जाने की तैयारी करो,तुम्हारे यहाँ से निकलते ही मैं हवेली चला जाऊँगा और फिर कल मैं और तेजस्वी भी ऋषिकेश आ जाऐगें",किशोर बोला...
"हाँ! अगर वो आपके साथ ऋषिकेश माँ के पास पहुँच गई तो माँ को बहुत खुशी होगी",ओजस्वी बोली...
"हाँ! सही कहा तुमने",किशोर बोला..
" आपकी माँ से भी मिलने का बहुत मन है मेरा",ओजस्वी बोली...
"मैं भी यही चाहता हूँ और फिर जब हम ऋषिकेश से वापस आ जाऐगें तो फिर मेरे घर चलेगें,मेरी माँ भी तो अपनी बहू से मिल ले और मेरी छोटी बहन कल्याणी भी तुम्हें देखकर बहुत खुश होगी",किशोर बोला...
"मेरी भी बहुत इच्छा है कि मैं कब अपने ससुराल जाकर सबसे मिलूँ,माँजी का आशीर्वाद लूँ और अपनी ननद को देखूँ",ओजस्वी बोली....
"मैं भी चाहता हूँ कि हम दोनों जल्द से जल्द मेरी माँ का आशीर्वाद लेने मेरे घर पहुँचें",किशोर बोला.....
"हाँ! आपकी ये इच्छा भी जल्द पूरी होगी",ओजस्वी बोली...
"अच्छा! अब तुम ज्यादा देर मत करो,जल्दी से तैयार हो जाओ,रामस्वरूप जी आ गए हैं और नारायन भी जीप लेकर थोड़ी देर में यहाँ पहुँचता ही होगा",किशोर बोला...
और फिर कुछ ही देर में ओजस्वी रामस्वरूप और नारायन के साथ जीप में बैठकर ऋषिकेश के लिए निकल गई और उधर तेजस्वी के दिमाग़ मे तो कुछ और ही चल रहा था और उसने मन ही मन सोचा,अब आया ना ऊँट पहाड़ के नीचे और फिर वो ठाकुर वीरभद्र सिंह की तस्वीर के सामने जाकर बोली....
"बाबूजी! अब वक्त आ गया है आपकी मौत का बदला लेने का,वो नमकहराम किशोर यहाँ मुझे लेने आ रहा है और अब देखिएगा कि मैं उसके साथ क्या करती हूँ,मैंने भी उसकी जिन्दगी तबाह ना कर दी तो मैं आपकी बेटी नहीं,उसे ऐसा ऐसा तड़पाऊँगी ना कि दीदी भी उसके दुख से काँप उठेगी,दीदी की करनी का फल अब उसके पति को भुगतना पड़ेगा",
और फिर ओजस्वी के जाने के बाद किशोर ताँगे से हवेली पहुँचा तो तेजस्वी उससे बोली....
"आइए....आइए किशोर बाबू! मुझे आपका ही इन्तज़ार था",
"ये तो बड़े ताज्जुब वाली बात है कि आपको मेरा इन्तज़ार था",किशोर बोला...
"रिश्ते में तो आप मेरे जीजा जी लगते हैं लेकिन मुझे आपको जीजा जी कहना अच्छा नहीं लगता,अगर मैं आपको किशोर बाबू कहूँ तो चलेगा",तेजस्वी ने पूछा...
"जी! जरूर!, आप हमारी साली साहिबा है तो इतना हक़ तो बनता है आपका",किशोर बोला...
"शुक्रिया! किशोर बाबू! तो फिर क्या खिदमत की जाए आपकी",तेजस्वी ने पूछा...
"मेरी खिदमत रहने दीजिए,मैं आपको ऋषिकेश लिवा जाने के लिए आया हूँ",किशोर बोला...
"ऋषिकेश तो हम ट्रेन से जाऐगें ,जो कि कल दोपहर की है तो क्यों ना आज हमें आप अपनी खिदमत करने का मौका दें",तेजस्वी बोली...
"जी! जैसी आपकी इच्छा",किशोर बोला...
"तो फिर आज रात आप यहीं रुक जाइए ना!",तेजस्वी बोली...
"नहीं! तेजस्वी! मैं यहाँ रुककर क्या करूँगा,मैं शान्तिनिकेतन वापस जा रहा हूँ,अब तुमने ऋषिकेश जाने के लिए हाँ कर ही दी है तो फिर तुम कल सुबह सुबह ही शान्तिनिकेतन आ जाना तो हम दोनों वहाँ से ऊधवगढ़ स्टेशन चल चलेगें,मैं सुबह यहाँ ताँगा भेज दूँगा",किशोर बोला...
"अब आप हमें नाराज़ कर रहें हैं किशोर बाबू!",तेजस्वी बोली....
"इसमें नाराज़गी की क्या बात है तेजस्वी! मुझे ओजस्वी शान्तिनिकेतन की जिम्मेदारी सौंपकर गई है और फिर मेरा यहाँ तुम्हारे साथ अकेले रुकना उचित नहीं है,कोई क्या सोचेगा",किशोर बोला....
"कोई कुछ नहीं सोचेगा,मैने कह दिया ना कि आप यहाँ रुक रहे हैं तो बस रुक रहे हैं",तेजस्वी बोली...
और फिर किशोर को तेजस्वी की जिद के आगें झुकना ही पड़ा और वो उस रात हवेली में रुक गया....

क्रमशः....
सरोज वर्मा....