Decode Dil in Hindi Poems by Uday Gaikwad books and stories PDF | Decode Dil

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Decode Dil

 

1. मेरा घर .......

घर जाता हु तो मेरा हि बैग मुझे चीडाता है ,
मेहमान हु अब मन पल पल मुझे सताता है..!

मां केह्ती है सामान बैग मै फोरण डालो ,
हर बार तुमारा कुच ना कुच चुठ जाता है...!

घर पहुचने से पहिले लोटणे का टीकट,
वक्त परिंदे सा उडता जाता है ...!

उंगली यो पर लेकर जाता गिनती के दो दिन ,
पास पडोस जहा बच्चा भी था वाकीफ ,
आज बडे बुजुर्ग बोलते कब आया पुचने ...!

कब तक रहोगे पुच्छ कर अनजाने मै वो और गेहरा कर जाते वो घाव ,
ट्रेन मै मां के हाथो कि बनी रोटीया ,
रोते हुये आखो मै धुंदला कर जाती है ...!

तू एक मेहमान है अब ये पल मुझे बताता है ,
आज भी मेरा घर मुझे बहुत याद आता है ....!

 

2. ओह प्यार हि क्या ......

ओह प्यार हि क्या जो शायर ना बना दे ,
थोडी ही सही छोटी मोटी ऊर्दू ना सिखा दे ,
उसने हा करदी तो अच्चा हे पर ना करदी ,
तोह शर्त लागा लो अगर उसकी ना ,
तुमारा प्यार ओर ना बडा दे ...!

गाणो की लिरिक्स समज आणे लगेगी ,
जब कुच बाते तुमारे दिल पे लगेगी ,
रोने का मन भी बोहोत करेगा ,
जब मोहबत अधुरे प्यार की कहाणी लीखेगी ...!

उखडे उखडे से उतरे उतरे से हमेशा तुमारा रेहना ,
अपनी बाते शेयर करणा चाहोगे ,
पर किसी से केह भी नही पाओगे ...!

ज्यादातर क्या होता हे मन मे दबी बाते जेहर बन जाती हे,
और तुमारे उपर हावी होणे लगती हे ,
अपनी बाते तुम किसीको कैसे कहोगे ये सोच रहे हो तो क्या हुआ ...!

हाथ मे एक बार पेन पकड के तो देखो ,
पेन ओर पेपर के मेल से तो पुरी कहाणी बया की जा सक्ती हे ...!

उसने तुमे मना कर दिया तो क्या हुंआ ,
यही तो मोका हे तुम जिसके लिये मरे जा रहे हो ,
क्या उसने तुमारे बारे मे कभी सोचा हे,

किसीसे दिल की बात केह नही सकते ,
तोह बस शायर बन चुके हो तुम ....!

क्युकी जो भी होता हे ,
अच्चे के लिये होता हे ,
अपने दर्द को अंदर दबा के क्या होगा उसे बाहर निकालो ना ,
दर्द से दोस्ती करके उसे डायरी मे लिख डालो ना ....!


ओह प्यार हि क्या जो शायर ना बना दे ,
अपने काम ,अपनी दुनिया मे माहीर ना बना दे ....!

 

3. जिंदगी.......

आहिस्ता चल जिंदगी,
अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है,

कुछ दर्द मिटाना बाकी है,
कुछ फर्ज निभाना बाकी है,

रफ़्तार मे तेरे चलने से,
कुछ रूठ गए कुछ छूट गए,

रूठो को मानना बाकी है,
रोतो को हंसाना बाकी है,

कुछ रिश्ते बनकर टूट गए,कुछ जुड़ते-जुड़ते छूट गए,
उन टूटे-छूटे रिश्तों के,

ज़ख्मों को मिटाना बाकी है,
कुछ हसरतें अभी अधूरी है,

कुछ काम भी और जरूरी हैं,
जीवन की उलझ पहेली को,

पूरा सुलझाना बाकी है,
जब सांसो को थम जाना हैं,

फिर क्या खोना क्या पाना है,
पर मन के जिद्दी बच्चे को यह बात बताना बाकी है।

आहिस्ता चल जिंदगी
अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है,

कुछ दर्द मिटाना बाकी है,
कुछ फर्ज निभाना बाकी है।