beauty market in Hindi Horror Stories by suhail ansari books and stories PDF | हुस्न का बाजार

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हुस्न का बाजार

          "हुस्न का बाज़ार -

      दिल्ली की चाँदनी चौक की भीड़-भाड़ वाली गलियाँ, पुरानी दिल्ली की एक डरावनी हवेली, और वहाँ से कुछ दूर एक अंधेरे जंगल में बनी एक गुप्त प्रयोगशाला। 

                      **किरदार:** 

 1. **ज़ारा खान** (25 साल, उभरती मॉडल) - एक दिलकश और साहसी लड़की, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती है।  

   2. **आदर्श मलिक** (30 साल, फोटोग्राफर और इन्वेस्टिगेटर) - एक डैशिंग और जुनूनी शख्स, जो हवेली के अंधेरे राज़ खोलने के लिए तैयार है।  

   3. **मदाम शक्ति** (50 साल, हवेली की मालकिन) - एक रहस्यमयी और खतरनाक औरत, जो "हुस्न का बाज़ार" की सरगना है। 

    4. **इंस्पेक्टर रणवीर सिंह** (35 साल,, पुलिस ऑफिसर) -  एक तेज़-तर्रार और न्याी दद, जो हवेली के अपराधों को रोकने के लिए जान की बाजी लगाता है।  

   5. **नूरी** (22 साल,, हवेली की नौकरानी) - एक मासूम और डरी हुई लड़की, जो हवेली की भयानक हकीकत जानती है।।  

   6. **शहज़ाद खान** (28 साल, ज़ारा का भाई) - एक गुस्से से भरा और प्रोटेक्टिव भाई, जो अपनी बहन को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।     7. **डॉ. अरिंदम मित्रा** (45 साल, वैज्ञानिक) - एक भ्रष्ट और पागल वैज्ञानिक, जो हवेली के लिए एक खौफनाक प्रयोग करता है।।  --

  -**कहानी की धमाकेदार शुरुआत** 

    दिल्ली की चाँदनी चौक की तंग गलियों में एक छोटा-सा किराए का कमरा था, जहाँ ज़ारा खान रहती थी। ज़ारा की खूबसूरती ऐसी थी कि लोग उसे देखते ही मंत्रमुग्ध हो जाते थे। वो एक स्ट्रगलिंग मॉडल थी, जो अपने सपनों को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत करती थी।

   एक दिन, उसकी मुलाकात आदर्श मलिक से हुई। आदर्श एक डैशिंग फोटोग्राफर था, जिसकी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी। उसने ज़ारा की तस्वीरें खींचीं और उसे एक बड़े फैशन शो में हिस्सा लेने का मौका दिलवाया।

   फैशन शो की रात, एक रहस्यमयी औरत, मदाम शक्ति, ज़ारा से मिलने आई। उसकी आँखों में एक डरावनी चमक थी, और उसकी आवाज़ ऐसी थी मानो कब्र से निकली हो। उसने ज़ारा को एक ऑफर दिया, "बेटी, तुम्हारी खूबसूरती को मैं दुनिया की सबसे बड़ी नीलामी में पेश करूँगी।

   मेरी हवेली में आओ, मैं तुम्हें रातों-रात अमीर बना दूँगी।" ज़ारा के मन में लालच आ गया, लेकिन आदर्श ने उसे रोकते हुए कहा, "ज़ारा, ये हवेली कोई आम जगह नहीं है। यहाँ लड़कियाँ जाती तो हैं, लेकिन लौटती नहीं। मैंने इसके बारे में सुना है—ये हुस्न का बाज़ार है, जहाँ खूबसूरती की कीमत जान से चुकानी पड़ती है।"ज़ारा ने आदर्श की बात को अनसुना कर दिया और एक रात हवेली पहुँच गई।

   हवेली बाहर से टूटी-फूटी और सुनसान थी, लेकिन अंदर का नज़ारा किसी शाही महल से कम नहीं था। वहाँ चारों तरफ चमचमाते झूमर, सोने की सजावट, और खूबसूरत लड़कियाँ थीं, जो हीरे-जवाहरात से लदी थीं। लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब-सा डर था। मदाम शक्ति ने ज़ारा का स्वागत किया और कहा, "ये हुस्न का बाज़ार है। यहाँ हर चीज़ की कीमत लगती है, और तुम्हारी खूबसूरती की कीमत सबसे ऊँची होगी।"*

   *हवेली का खौफनाक माहौल**  हवेली में ज़ारा को एक कमरे में ठहराया गया, जो बाहर से तो शानदार था, लेकिन उसकी दीवारों पर अजीब-से निशान थे, जैसे किसी ने खून से कुछ लिखा हो। रात को, जब हवेली में एक बड़ा आयोजन हुआ, तो ज़ारा ने देखा कि अमीर लोग—नेता, बिजनेसमैन, और बड़े-बड़े लोग—वहाँ आए थे।

   वे लड़कियों को चुनते और उनके साथ रात बिताते। लेकिन ज़ारा ने एक भयानक चीज़ देखी—जो लड़कियाँ मना करती थीं, उन्हें हवेली के गुंडे जबरदस्ती एक अंधेरे तहखाने में ले जाते थे। वहाँ से चीखें सुनाई देती थीं, जो रात भर गूँजती रहती थीं।नूरी, जो हवेली की नौकरानी थी, ने ज़ारा को चुपके से बताया, "दीदी, यहाँ से भाग जाओ।

   ये हवेली एक नरक है। जो लड़कियाँ बिकने से मना करती हैं, उन्हें मारकर उनके शरीर को एक मशीन में डाल दिया जाता है। वो मशीन उनकी खूबसूरती को एक रसायन में बदल देती है, जिसे मदाम शक्ति अमीर लोगों को बेचती है।"ज़ारा डर गई और भागने की सोचने लगी। उसने चुपके से आदर्श को फोन किया और सारी बात बताई।

   आदर्श ने तुरंत ज़ारा के भाई शहज़ाद को खबर दी। शहज़ाद, जो एक गुस्सैल और प्रोटेक्टिव भाई था, अपनी पिस्तौल लेकर हवेली की ओर निकल पड़ा। उसी वक्त, इंस्पेक्टर रणवीर सिंह को हवेली के बारे में खबर मिली।

   रणवीर कई सालों से गायब हो रही लड़कियों के केस को सॉल्व करने की कोशिश कर रहा था। उसने अपनी पुलिस टीम के साथ हवेली पर छापा मारने की योजना बनाई।*

   *धमाकेदार टकराव और भयानक खुलासा**  

हवेली में उस रात एक बड़ा आयोजन हो रहा था। मदाम शक्ति ने ज़ारा को मुख्य आकर्षण बनाया था। अमीर लोग उसकी बोली लगा रहे थे। लेकिन तभी, शहज़ाद और आदर्श हवेली में घुस गए। शहज़ाद ने अपनी पिस्तौल निकालकर हवा में फायरिंग की और चीखा, "ज़ारा, मैं तुझे लेने आया हूँ!"

   हवेली में हड़कंप मच गया। मदाम शक्ति ने अपने गुंडों को आदेश दिया, "इन सबको मार डालो!"उसी वक्त, रणवीर अपनी पुलिस टीम के साथ हवेली में दाखिल हुआ। उसने अपने रिवॉल्वर से गुंडों को ढेर करना शुरू कर दिया।

   लेकिन मदाम शक्ति के पास एक बड़ा हथियार था—वो एक अजीब-सी मशीन थी, जो जहरीली गैस छोड़ती थी। उस गैस ने कई पुलिसवालों को बेहोश कर दिया। रणवीर ने हिम्मत नहीं हारी और अपने चेहरे पर रूमाल बाँधकर आगे बढ़ा।

   ज़ारा और नूरी ने मिलकर हवेली के तहखाने का रास्ता ढूंढ लिया। वहाँ का मंज़र किसी कब्रिस्तान से कम नहीं था। तहखाने में सैकड़ों लड़कियों की हड्डियाँ बिखरी थीं। वहाँ एक विशाल मशीन थी, जो खून से सनी थी।

   पास में डॉ. अरिंदम मित्रा खड़ा था, जो एक पागल वैज्ञानिक था। उसने बताया, "मैंने ये मशीन बनाई है। ये खूबसूरती को एक रसायन में बदल देती है, जो अमीर लोगों को जवानी देता है। मदाम शक्ति मेरे साथ मिलकर इसे बेचती है।"

   शहज़ाद ने गुस्से में अरिंदम को एक मुक्का मारा और मशीन को तोड़ने की कोशिश की। लेकिन मशीन ने एक तेज़ धमाका किया, जिससे तहखाना हिल गया। उसी वक्त, रणवीर वहाँ पहुँचा और उसने मदाम शक्ति को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन शक्ति ने हँसते हुए कहा, "तुमने मुझे पकड़ लिया, लेकिन हवेली का राज़ अभी बाकी है।"*

   *खौफनाक ट्विस्ट** 

    हवेली के तहखाने में एक पुराना दस्तावेज़ मिला, जिसमें लिखा था कि हवेली किसी ज़माने में एक तांत्रिक की थी। उस तांत्रिक ने एक शैतानी तंत्र किया था, जिसमें खूबसूरती को अमरता में बदला जाता था। मदाम शक्ति उसी तांत्रिक की वंशज थी, और उसने इस तंत्र को ज़िंदा रखा था। लेकिन सबसे डरावना खुलासा तब हुआ,

   जब हवेली की दीवारों से खून बहने लगा। रणवीर की टीम ने देखा कि हवेली की छत से अजीब-सी छायाएँ उतर रही थीं, जो उन लड़कियों की रूहें थीं, जो हुस्न के बाज़ार में मारी गई थीं।

   हवेली में एक तेज़ भूकंप आया, और पूरी हवेली ढह गई। रणवीर, ज़ारा, आदर्श, शहज़ाद, और नूरी किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन मदाम शक्ति और अरिंदम मलबे में दब गए। हवेली के मलबे से एक अजीब-सी रोशनी निकली, जो आसमान में गायब हो गई।

   **निष्कर्ष**  

   हवेली की तबाही ने दिल्ली को हिला कर रख दिया। ज़ारा ने मॉडलिंग छोड़ दी और एक NGO शुरू किया, जो ऐसी लड़कियों को बचाता था, जो हुस्न के बाज़ार में फँस जाती थीं। आदर्श ने ज़ारा का साथ दिया और अपनी फोटोग्राफी से इस मुहिम को दुनिया तक पहुँचाया। शहज़ाद ने अपनी बहन की हिम्मत की तारीफ की और उसका साथ दिया।

   रणवीर को इस केस के लिए सम्मानित किया गया, लेकिन वो जानता था कि हवेली का शैतानी तंत्र अभी खत्म नहीं हुआ था। नूरी ने एक नई ज़िंदगी शुरू की, लेकिन वो रातें उसकी नींद से गायब हो गईं।रात के अंधेरे में, जब हवेली की जगह पर सिर्फ मलबा बचा था, वहाँ से अजीब-सी चीखें सुनाई देती थीं।

   लोग कहते थे कि हुस्न का बाज़ार कभी खत्म नहीं होगा, और उसकी रूहें हमेशा भटकती रहेंगी। क्या ये सिलसिला रुकेगा, या फिर हवेली की छायाएँ फिर से लौटेंगी? ये सवाल हर किसी के मन में था।---

    लेखक। सुहेल अंसारी (सनम)

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